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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की, मुस्तैदी से कार्य करने के दिए निर्देश

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए।
इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई।
बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।
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स्नेह की डोर: CM साय की कलाई पर शहीद की पत्नी ने बांधी राखी, बोले-नक्सलवाद का अंत बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार

रायपुर: रक्षाबंधन से पहले सोमवार को ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में भाई-बहन के स्नेह और राष्ट्ररक्षा के संकल्प का भावुक संगम देखने को मिला। बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने करीब 800 सुरक्षा जवानों की कलाइयों पर राखी बांधी।
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब 2017 में नक्सली मुठभेड़ में शहीद उपनिरीक्षक युगल किशोर वर्मा की पत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान मुख्यमंत्री भावुक हो गए।
CM साय ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीदों के परिवार उनके अपने परिवार हैं। सरकार उनके सम्मान, स्वाभिमान और हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़ी है।
CM साय बोले- नक्सलवाद का अंत बहनों के लिए सबसे बड़ा उपहार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस दिखाया और अनेक जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा, नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। अब वह समय आ रहा है जब नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग नहीं उजड़ेगा और किसी मां को अपना बेटा नहीं खोना पड़ेगा।
CM ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता से बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और विकास के नए दौर का रास्ता खुला है। अब बस्तर की पहचान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन से होगी।
जवानों ने भी लिया बहनों की रक्षा का संकल्प
‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में CISF, BSF, ITBP, CRPF, सेना और पुलिस के करीब 800 जवान शामिल हुए। स्कूली छात्राओं, दिव्यांग बेटियों, स्वच्छता दीदियों, ड्रोन दीदियों, लखपति दीदियों और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों ने जवानों को राखी बांधी।
जवानों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए घर से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवान सिर्फ सुरक्षा प्रहरी नहीं, बल्कि प्रदेश की बहनों के भाई भी हैं।
रक्षाबंधन से पहले 68 लाख बहनों को मिलेंगे ₹631 करोड़
मुख्यमंत्री ने बताया कि महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त रक्षाबंधन के पहले करीब 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके तहत लगभग ₹631 करोड़ की राशि दी जाएगी। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता मिलती है। CM ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें और त्योहारों को पूरे सम्मान और उत्साह के साथ मना सकें।
प्रदेश की 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 2.42 लाख से ज्यादा महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति दीदी अभियान के तहत प्रदेश की 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ गांव और समाज के विकास में भी नेतृत्व कर रही हैं।
रायपुर को मिले 5 नए प्रोजेक्ट
कार्यक्रम में CM साय ने रायपुर जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के 5 अभिनव प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ भी किया।
- हरित पोषणम् – आंगनबाड़ियों और महिला समूहों को फलदार पौधे और सब्जियों के उन्नत बीज देकर पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा।
- प्रोजेक्ट निरामय- 215 स्कूलों के 65,920 विद्यार्थियों की स्वास्थ्य और रक्त जांच।
- तिरंगा शक्ति फेस्ट- सामाजिक समरसता, संस्कृति, सुशासन, युवा नेतृत्व और राष्ट्रभावना से जुड़े आयोजन।
- रायपुर अनफिल्टर्ड- छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित हस्तियों और कलाकारों के अनुभवों पर पॉडकास्ट।
- प्रोजेक्ट अहिगुण्डिक- सौंरा (सपेरा) समुदाय के परिवारों को सरकारी योजनाओं और जरूरी दस्तावेजों से जोड़ना।
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Chhattisgarh: अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघिन का हमला, मशरूम लेने गए 25 साल के युवक की मौत

मुंगेली: छत्तीसगढ़ के मुंगेली स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में बाघिन के हमले में 25 साल के युवक की मौत हो गई। युवक अपने दोस्तों के साथ जंगल में करील-पुटू (मशरूम) लेने गया था। इसी दौरान घने जंगल में झाड़ियों के बीच से निकलकर बाघिन ने उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि युवक और उसके साथी टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्र में चले गए थे। घटना की पुष्टि अचानकमार टाइगर रिजर्व के एसडीओ समीर जोनाथन ने की है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम बांधा निवासी धरमजीत घृतलहरे (25) सोमवार को भानु प्रताप, शिवशंकर ध्रुव, दशरथ धृतलहरे और रामफल धृतलहरे के साथ जंगल में मशरूम लेने गया था। जंगल के घने हिस्से में पहुंचते ही बाघिन ने अचानक धरमजीत पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाघिन ने युवक की गर्दन को अपने जबड़ों में दबोच लिया।
गंभीर चोट और ज्यादा खून बहने के कारण युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बाघिन के आक्रामक रवैये के चलते उसके साथी उसे बचाने की हिम्मत नहीं कर सके।
वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची
घटना के बाद साथियों ने तत्काल वन विभाग और परिजनों को सूचना दी। जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
शावकों की वजह से आक्रामक थी बाघिन
अचानकमार टाइगर रिजर्व के एसडीओ समीर जोनाथन के मुताबिक, इलाके में 2 से 3 बाघ सक्रिय हैं। इनमें एक बाघिन ने हाल ही में शावकों को जन्म दिया है। शावकों की मौजूदगी के कारण बाघिन अपने इलाके में काफी आक्रामक थी। इसी दौरान जंगल में पहुंचे लोगों पर उसने हमला कर दिया।
ग्रामीणों को जंगल में नहीं जाने की हिदायत
घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल के अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में नहीं जाने की सख्त हिदायत दी है। विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त भी बढ़ा दी है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें और वन्यजीवों की गतिविधियों वाले इलाकों से दूर रहें।
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Chhattisgarh: IGKV पेपर लीक मामले में 6 गिरफ्तार, प्राचार्य और मास्टरमाइंड बर्खास्त

रायपुर: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में पुलिस ने दुर्ग के भारती कॉलेज के असिस्टेंट लेक्चरर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ रायपुर के तेलीबांधा थाने में FIR दर्ज की गई है।मामले में भारती कॉलेज प्रबंधन ने भी कार्रवाई की है। लापरवाही के आरोप में प्राचार्य डॉ. एके दुबे को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं, पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया को भी कॉलेज से निकाल दिया गया है।
दो परीक्षाएं रद्द, सितंबर में दोबारा होंगी
पेपर लीक सामने आने के बाद 7 अगस्त को हुई BSc कृषि प्रथम वर्ष की प्लांट पैथोलॉजी परीक्षा भी रद्द कर दी गई है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों ने यह प्रश्नपत्र भी लीक किया था। इससे पहले 20 अगस्त को BSc कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) परीक्षा रद्द की गई थी। अब दोनों परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएंगी।
छात्रों का दावा- परीक्षा से एक दिन पहले मिल जाता था पेपर
मामले में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद कुछ छात्रों ने पेपर लीक को लेकर गंभीर दावे किए हैं। छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच जाता था। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ एग्रीकल्चर छात्रों ने दावा किया कि पेपर सुबह करीब 11 बजे तक उनके पास पहुंच जाता था।छात्रों के मुताबिक, मामला सिर्फ एंटोमोलॉजी के पेपर तक सीमित नहीं था। सेमेस्टर के कई विषयों के प्रश्नपत्र PDF के रूप में छात्रों के बीच शेयर किए जा रहे थे। एक पेपर की कीमत करीब ₹5 हजार तक होने का दावा किया गया है।हालांकि, छात्रों के इन दावों की पुलिस जांच में अभी पुष्टि नहीं हुई है।
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Raipur: CM साय ने किया भगवान शिव का रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा में हुए शामिल

रायपुर: पवित्र श्रावण मास में राजधानी रायपुर भगवान शिव की भक्ति में सराबोर नजर आई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को गुढ़ियारी स्थित मारुति मंगलम परिसर में आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों का उत्साह बढ़ाया और सभी को श्रावण मास की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान हजारों कांवड़िए पवित्र जल लेकर महादेव घाट स्थित भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव के जलाभिषेक के लिए रवाना हुए।
जयघोष से गूंजा रायपुर, हजारों कांवड़िए हुए रवाना
कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति का विशेष अवसर है। कांवड़ यात्रा आस्था, भक्ति और समर्पण की अनुपम अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि कठिन यात्रा के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह और श्रद्धा सनातन संस्कृति में आस्था की शक्ति को दिखाती है।
CM बोले- कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव भी है। ऐसे आयोजनों में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ जुड़ते हैं, जिससे आपसी सद्भाव और सामाजिक समरसता मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर का बताया धार्मिक महत्व
मुख्यमंत्री साय ने महादेव घाट स्थित भगवान हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की प्राचीन शिव आराधना परंपरा का प्रमुख केंद्र है। श्रावण मास में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
धार्मिक स्थलों के विकास पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान प्राकृतिक सुंदरता और लोक-संस्कृति के साथ-साथ उसकी आध्यात्मिक परंपराओं से भी है। प्रदेश के प्राचीन शिवधाम और शक्तिपीठ इसकी समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
CM ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना
मुख्यमंत्री साय ने कांवड़ यात्रा में शामिल सभी शिवभक्तों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत, रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी, रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में 10% आरक्षण, पुलिस, वन और जेल विभाग की तृतीय श्रेणी भर्ती में मिलेगा लाभ

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता आसान करने वाला बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में तृतीय श्रेणी के पदों की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 10% आरक्षण मिलेगा। सरकार ने इसके लिए ‘अग्निवीर सैनिक आरक्षण नियम-2026’ का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। चार साल की अग्निवीर सेवा पूरी कर चुके युवा इस आरक्षण के दायरे में आएंगे।
पुलिस, वन और जेल विभाग में मिलेगा फायदा
इस आरक्षण का लाभ खास तौर पर पुलिस, वन और जेल विभाग में होने वाली तृतीय श्रेणी की सीधी भर्ती में मिलेगा। इन पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 10% सीटें आरक्षित रहेंगी। सरकार के इस फैसले से चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सेना से बाहर आने वाले अग्निवीरों के लिए राज्य की सरकारी नौकरियों में अवसर बढ़ेंगे।
सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव को ध्यान में रखकर फैसला
सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने के पीछे उनकी सैन्य सेवा के दौरान हासिल प्रशिक्षण, अनुशासन और अनुभव को प्रमुख आधार माना है। चार साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों को शारीरिक प्रशिक्षण, अनुशासन और सुरक्षा से जुड़ा अनुभव मिलता है। सरकार का मानना है कि यह अनुभव पुलिस, वन और जेल जैसे विभागों की नौकरियों में उपयोगी साबित हो सकता है।
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