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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का किया शुभारंभ, बोले- 5 विभाग एवं 5 जिलों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

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Chhattisgarh: Chief Minister Sai launched the e-Pragati portal and announced that 5 departments and 5 districts have received the Chief Minister's Excellence Award

Raipur: गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी।

जिला श्रेणी के विजेता नवाचार

दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

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मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।

नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार

इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

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वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया।एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी श्री अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, एससीएस गृह श्री मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक श्री रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।

जिला श्रेणी के विजेता नवाचार

दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

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नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार

इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

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वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

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Chhattisgarh: गौरेला में सड़क पर बर्थडे मनाना पड़ा भारी, BJYM जिलाध्यक्ष समेत 4 पर FIR

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गौरेला BJYM जिलाध्यक्ष FIR, सिद्धार्थ दुबे FIR, गौरेला बर्थडे वायरल वीडियो, अमरकंटक चौक बर्थडे, GPM News, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही खबर, BJYM Siddharth Dubey

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला में सड़क पर जन्मदिन का जश्न मनाना भाजयुमो जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ दुबे उर्फ सिद्धू समेत चार लोगों को भारी पड़ गया। 18 सितंबर की रात अमरकंटक चौक पर मंच लगाकर जन्मदिन मनाया गया था। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गौरेला पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की।

पुलिस के मुताबिक, समारोह के दौरान चौक पर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इससे सार्वजनिक मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी हुई। पुलिस ने सिद्धार्थ दुबे, मौसम ताम्रकार, रितुराज अग्रवाल समेत अन्य के खिलाफ BNS की धारा 285 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में जांच जारी है।

फेसबुक लाइव में दिखा था पूरा जश्न

पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर की रात करीब 11:42 बजे सोशल मीडिया पर जन्मदिन समारोह का वीडियो सामने आया। वीडियो में सिद्धार्थ दुबे फेसबुक लाइव करते दिखाई दे रहे थे। अमरकंटक चौक पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और जन्मदिन मनाने के लिए मंच तैयार किया गया था।

वीडियो में केक काटने और लोगों के बधाई देने के दृश्य दिखाई दिए। ढोल-नगाड़ों के बीच हुए इस आयोजन के कारण सड़क पर भीड़ जमा होने और यातायात प्रभावित होने की बात पुलिस ने कही है।

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वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने दर्ज किया केस

पुलिस ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद मामला दर्ज किया। FIR में सिद्धार्थ दुबे उर्फ सिद्धू, मौसम ताम्रकार और रितुराज अग्रवाल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 285 के तहत सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करने से जुड़ा मामला दर्ज किया है। साथ ही धारा 3(5) भी लगाई गई है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अभी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं

मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस समारोह में शामिल अन्य लोगों और आयोजन से जुड़ी परिस्थितियों की भी जांच कर रही है।

गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष के भतीजे हैं सिद्धार्थ

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सिद्धार्थ दुबे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हैं। वे गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश दुबे के भतीजे भी बताए जाते हैं। इससे पहले सितंबर में बाईपास की मांग को लेकर पदयात्रा की घोषणा से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उन्हें संगठन की ओर से कारण बताओ नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

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Chhattisgarh: स्कूलों में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित, 15 दिन बंद रहेंगे स्कूल

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रायपुर: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित कर दी हैं। तीनों अवसरों पर स्कूलों में 5-5 दिन की छुट्टी रहेगी। इस तरह इन तीनों अवकाशों को मिलाकर पूरे सत्र में कुल 15 दिन स्कूल बंद रहेंगे। यह अवकाश राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में लागू होगा। D.Ed., B.Ed. और M.Ed. से जुड़े संस्थानों को भी इस अवकाश कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

दशहरा: 17 से 21 अक्टूबर तक छुट्टी

दशहरा पर्व पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक 5 दिन का अवकाश मिलेगा। इस दौरान स्कूल बंद रहेंगे।

दीपावली: 6 से 10 नवंबर तक स्कूल बंद

दीपावली के लिए 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक पांच दिन का अवकाश निर्धारित किया गया है।

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दिसंबर में 5 दिन का विंटर ब्रेक

साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। यानी दिसंबर में भी लगातार पांच दिन स्कूल बंद रहेंगे।

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छत्तीसगढ़ में DJ-लाउडस्पीकर पर नए नियम: बिना अनुमति बजाया तो 1 साल तक जेल और ₹1 लाख जुर्माना; 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले DJ, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-2026 का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर DJ या लाउडस्पीकर बजाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा।

बिना अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्र चलाने पर जेल, जुर्माना और उपकरण जब्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट है और कानून लागू नहीं हुआ है। गृह एवं पुलिस विभाग ने आम नागरिकों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां मांगी हैं।

अस्पताल-स्कूल के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन

प्रस्तावित अधिनियम में अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, न्यायालय और केंद्र-राज्य सरकार व स्थानीय निकायों के कार्यालयों की 100 मीटर की परिधि को शांत क्षेत्र घोषित करने का प्रावधान है। जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त जरूरत के अनुसार किसी अन्य क्षेत्र को भी शांत क्षेत्र घोषित कर सकेंगे। ड्राफ्ट में समय को भी दो हिस्सों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक दिन का समय और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रात का समय माना गया है।

पहली बार उल्लंघन पर ₹50 हजार से जुर्माना

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प्रस्तावित नियमों के अनुसार पहली बार नियम तोड़ने पर कारावास, कम से कम ₹50 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि उल्लंघन शांत क्षेत्र में होता है तो एक साल तक की जेल और कम से कम ₹75 हजार जुर्माना लगाया जा सकता है।

दोबारा गलती की तो 2 साल तक जेल

बार-बार नियम तोड़ने पर सजा और कड़ी होगी। सामान्य क्षेत्र में दोबारा दोष सिद्ध होने पर 3 महीने से 1 साल तक की जेल और कम से कम ₹1 लाख जुर्माना प्रस्तावित है। वहीं शांत क्षेत्र में दोबारा उल्लंघन करने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और कम से कम ₹1.50 लाख जुर्माना हो सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले को उपकरण उपलब्ध कराने वाले विक्रेता का पंजीयन भी स्थायी रूप से रद्द करने का प्रावधान है।

DJ-साउंड सिस्टम किराए पर देने वालों के लिए भी नियम

प्रस्तावित कानून में साउंड सिस्टम और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के विक्रेताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें स्थानीय पुलिस से सत्यापन कराने के बाद निर्धारित कार्यालय में पंजीयन कराना होगा। बिना वैध अनुमति वाले आयोजक को साउंड सिस्टम किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने वाले विक्रेता के पास साउंड मीटर होना भी जरूरी किया गया है।

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रैली और आयोजनों में 6 घंटे की अनुमति

विशेष रैली, जुलूस, सार्वजनिक कार्यक्रम या उत्सव के लिए सक्षम अधिकारी दिन में अधिकतम 6 घंटे तक ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल की अनुमति दे सकेंगे। कुछ विशेष अवसरों पर पूरे कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों तक रात 12 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि, शांत क्षेत्र में किसी भी समय इस तरह की छूट नहीं होगी।

अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्तावित कानून

सरकार ने प्रारूप पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों पर विचार और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कानून का अंतिम स्वरूप तय होगा। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित ₹1 लाख जुर्माना, जेल और उपकरण जब्ती जैसे प्रावधानों को लागू कानून नहीं माना जा सकता। मौजूदा नियमों के तहत ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई जारी रहेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि नए विधेयक की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान मौजूदा कानूनों के पालन में ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

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Raipur: PWD में 1 अक्टूबर से नया टेंडर सिस्टम, नई निविदाएं अब GePNIC पर होंगी; ठेकेदारों को कराना होगा ऑनलाइन नामांकन

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रायपुर: लोक निर्माण विभाग (PWD) में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से बदलने जा रही है। इस तारीख से विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन और प्रकाशन GePNIC (Government e-Procurement-NIC) पोर्टल पर होगा। टेंडर जारी करने से लेकर बिड प्राप्ति, तकनीकी- वित्तीय मूल्यांकन और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी इसी पोर्टल पर पूरी की जाएंगी। विभाग ने नई व्यवस्था शुरू होने से पहले ठेकेदारों और अधिकारियों को जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

ठेकेदारों को पहले कराना होगा Enrollment

नई निविदाओं में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पोर्टल पर Enrollment यानी नामांकन कराना जरूरी होगा। विभाग ने ठेकेदारों से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, ताकि 1 अक्टूबर से टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वीके भतपहरी ने विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार संघ के पदाधिकारियों को भी पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी ठेकेदारों तक पहुंचाने और उन्हें समय पर नामांकन कराने के लिए कहा है।

टेंडर की पूरी प्रक्रिया नए पोर्टल पर

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नई व्यवस्था में केवल टेंडर का प्रकाशन ही नहीं होगा, बल्कि पूरी निविदा प्रक्रिया GePNIC पर संचालित होगी। इसमें निविदा का सृजन और प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय मूल्यांकन, संबंधित ऑनलाइन स्वीकृति और अन्य कार्यवाही शामिल हैं।

पुराने पोर्टल के टेंडर 31 मार्च तक निपटेंगे

30 सितंबर 2026 तक पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रकाशित निविदाओं की बिड प्राप्ति, मूल्यांकन, स्वीकृति और अन्य लंबित ऑनलाइन कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक उसी पुराने पोर्टल पर पूरी की जाएगी। इसके बाद पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर निविदाओं से संबंधित कोई नई कार्रवाई नहीं होगी।

अधिकारियों की भी बनेगी नई डिजिटल व्यवस्था

नई व्यवस्था के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निविदा आमंत्रण अधिकारियों, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों और संबंधित कर्मचारियों को यूजर आईडी, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की प्रक्रिया तत्काल पूरी करनी होगी। विभाग का जोर है कि 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था बिना तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के सुचारू रूप से शुरू हो।

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ठेकेदारों के लिए बदल जाएगा टेंडर प्लेटफॉर्म

1 अक्टूबर से PWD की नई निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों को पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के बजाय GePNIC को नए टेंडर प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करना होगा। विभाग ने अधिकारियों और ठेकेदारों से निर्धारित समय-सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने को कहा है।

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छत्तीसगढ़ में कैंसर अब नोटिफाइड डिजीज: हर केस की जानकारी सरकार को देना जरूरी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में कैंसर के मामलों की निगरानी और समय पर इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ यानी अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। अब सरकारी और निजी अस्पतालों समेत पैथोलॉजी लैब, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर देखभाल से जुड़े संस्थानों को कैंसर के मामलों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के तहत कैंसर की पुष्टि होने के बाद संबंधित संस्थान को तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। इससे राज्य में कैंसर के मामलों का केंद्रीकृत और ज्यादा सटीक डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।

संदिग्ध मरीजों की भी होगी जांच

अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए रेफर करना होगा। जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा। इस रिपोर्ट को भी बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध कराना होगा।

अभी कैंसर रजिस्ट्री में रिपोर्टिंग स्वैच्छिक

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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक राज्य में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री के जरिए स्वैच्छिक रूप से दर्ज की जाती रही है। इससे कई मामलों के रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना रहती है।

नई व्यवस्था के बाद कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे बीमारी के पैटर्न, मरीजों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के प्रसार की बेहतर निगरानी हो सकेगी।

डेटा के आधार पर बनेगी रोकथाम की रणनीति

सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ी नीतियां बनाने में करेगी। इसके अलावा उपचार सुविधाओं के विस्तार, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। नियमित डेटा से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि अलग-अलग प्रकार के कैंसर के मामलों और उनसे होने वाली मौतों में समय के साथ क्या बदलाव हो रहा है।

26 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर

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प्रदेश में फिलहाल 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 5 और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकारी से निजी संस्थानों तक लागू होगी व्यवस्था

नोटिफिकेशन के दायरे में राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों के साथ निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्वास्थ्य संस्थान आएंगे। इसके अलावा पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर की देखभाल से जुड़े संस्थानों और एनजीओ को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी देनी होगी। कैंसर की जांच और इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि सामने आने वाले मामलों की रिपोर्ट तय समयसीमा में उपलब्ध कराई जाए।

ढाई साल में 17,611 कैंसर केस दर्ज

राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों का अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में कुल 17,611 कैंसर केस दर्ज किए गए। इनमें 4,465 मुख कैंसर, 210 गले के कैंसर, 252 जीभ के कैंसर, 1,038 फेफड़ों के कैंसर, 2,633 स्तन कैंसर, 2,200 गर्भाशय कैंसर, 2,560 पेट के कैंसर, 4,253 अन्य प्रकार के कैंसर के मामले शामिल हैं। नई नोटिफिकेशन व्यवस्था से सरकार के पास कैंसर के मामलों का ज्यादा व्यापक डेटाबेस उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे स्क्रीनिंग, इलाज और कैंसर नियंत्रण की योजनाओं को जरूरत के मुताबिक तैयार करने में मदद मिल सकती है।FEA

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