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Chhattisgarh Cabinet: प्राकृतिक आपदा से जुड़े मामलों में कैबिनेट का अहम निर्णय, मुआवजा राशि में बढ़ोतरी

Chhattisgarh Cabinet: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार प्राकृतिक आपदा के विरूद्ध प्रभावित व्यक्तियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की राशि में बढ़ोतरी की गई है।
केबिनेट की बैठक में अनुमोदित संशोधन प्रस्ताव के अनुसार कृषि भूमि से गाद/मलबा निकालने हेतु वर्तमान में 12,200 रुपए प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। नवीन प्रावधान में इसे बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रति हेक्टेयर किया गया है। भू-स्खलन/नदी से भूमि हानि के लिए वर्तमान प्रावधान 37,500 रुपए प्रति हेक्टेयर को नवीन प्रावधान में बढ़ाकर 47,000 रुपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।
असिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 6,800 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 8,500 रुपए प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 13,500 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 17,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, बारहमासी फसल हानि पर वर्तमान में 18,000 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 22,500 रुपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।
इसी प्रकार रेशम ( ऐरी, मलबरी, टसर) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 4,800 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, रेशम (मूगा) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 6,000 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 7,500 रुपए प्रति हेक्टेयर, टिड्डी नियंत्रण हेतु रसायन स्प्रे पर नवीन प्रावधान राज्य के अंश की सीमा तक प्रावधान किया गया है।
बड़े दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 30,000 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 37,500 रुपए, छोटे दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान में 3,000 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4,000 रुपए, बड़े सूखे पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 25,000 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 32,000 रुपए, छोटे सूखे पशु की हानि पर वर्तमान में 16,000 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 20,000 रुपए, पोल्ट्री के लिए वर्तमान प्रावधान 5,000 रुपए प्रति परिवार, 50 रुपए प्रति पक्षी को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10,000 रुपए प्रति परिवार, 100 रुपए प्रति पक्षी किया गया है।
इसी प्रकार प्रावधान में 80 रुपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 45 रुपए प्रतिदिन प्रति छोटे पशु, पशुगृह क्षति में 1500 रुपए प्रति शेड को बढ़ाकर नवीन र गौशाला में पशु चारा के लिए वर्तमान प्रावधान 70 रुपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 35 रुपए प्रतिदिन प्रति छोटे पशु को बढ़ाकर नवीन प्राप्रावधान में 3000 रुपए प्रति शेड, सामान्य क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 95,100 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,20,000 रुपए, पहाड़ी क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 1,01,900 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,30,000 रुपए, पक्का मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 5200 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6500 रुपए किया गया है।
कच्चा मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 3200 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रुपए, झोपड़ी क्षति वर्तमान प्रावधान 4100 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 8000 रुपए, कपड़ा क्षति वर्तमान प्रावधान 1800 रुपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रुपए प्रति परिवार, बर्तन क्षति वर्तमान प्रावधान 2000 रुपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रुपए प्रति परिवार, जनहानि पर वर्तमान प्रावधान 4,00,000 रुपए को नवीन प्रावधान में यथावत रखा गया है।
इसी प्रकार अंग हानि (40 से 60 प्रतिशत) पर वर्तमान प्रावधान 59,100 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 74,000 रुपए, अंग हानि (60 प्रतिशत से अधिक) पर 2,00,000 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2,50,000 रुपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से कम) वर्तमान प्रावधान 4300 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5400 रुपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से ज्यादा) वर्तमान प्रावधान 12700 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 16000 रुपए, हथकरघा बुनकर को क्षति पर वर्तमान प्रावधान 4100 रुपए प्रति कारीगर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5000 रूपए प्रति कारीगर किया गया है।
मछुआरों के नाव की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 9600 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 15000 रुपए, मछुआरों के नाव की आंशिक क्षति पर 4100 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6000 रुपए, मछुआरों के जाल की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2600 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रुपए, मछुआरों के जाल की आंशिक क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2100 रुपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 3000 रुपए, मछली चारे हेतु इनपुट सब्सिडी पर वर्तमान प्रावधान 8200 रुपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10000 रुपए प्रति हेक्टेयर, पंजीकृत भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर नवीन प्रावधान आपदा की अवधि (30 दिन) तक 2 सदस्य को मनरेगा दर पर आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

Raipur: छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक हीरा खनन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए बड़े व्यास (लार्ज डायमीटर) की ड्रिलिंग शुरू करने का फैसला किया है। यह ड्रिलिंग क्षेत्र में मौजूद हीरा भंडार का वैज्ञानिक आकलन करेगी और इसके आधार पर व्यावसायिक खनन का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित एनसीएल बोर्ड की बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार की गुणवत्ता और मात्रा का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (फीजिबिलिटी रिपोर्ट) तैयार होगी।
पांच प्राकृतिक हीरे मिल चुके हैं
एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में कराया गया, जिसमें कुल 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले। इससे बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।
देश के बड़े हीरा उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है छत्तीसगढ़
विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी प्रारंभिक चरण में इसी तरह की खोज के बाद बड़े व्यावसायिक हीरा भंडार विकसित हुए थे। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में माना जा रहा है।
लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा
बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे आगे बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है।
पर्यावरण संरक्षण रहेगा प्राथमिकता
बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
सौरभ सिंह ने क्या कहा
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर सकती है।
बैठक में एनसीएल के निदेशक मंडल के सदस्य श्री अमिताभ मुखर्जी, श्री आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद, सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल, श्री उपेंद्र कुमार और श्री विनय कुमार उपस्थित रहे।
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Chhattisgarh: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 24 घंटे में पूरे प्रदेश को कवर करेगा, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

CG Weather Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने छत्तीसगढ़ में रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों तक पहुंच चुका है, जबकि उत्तर और उत्तर-पश्चिम के शेष जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर इसकी एंट्री होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों के दौरान दंतेवाड़ा और रायगढ़ में भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि कई अन्य जिलों में भी अच्छी वर्षा हुई।
बारिश के बावजूद बुधवार को बिलासपुर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं राजनांदगांव में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इन जिलों में अगले 24 घंटे में पहुंचेगा मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर मानसून पहुंच सकता है। इन जिलों में फिलहाल प्री-मानसून बारिश हो रही है, लेकिन आधिकारिक रूप से मानसून की घोषणा अभी नहीं की गई है।
7 दिन की देरी, अब तक 65% कम बारिश
इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि से करीब सात दिन की देरी से छत्तीसगढ़ पहुंचा है। इसका असर वर्षा के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। 1 जून से अब तक प्रदेश में सामान्यतः 127.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 44.8 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। यानी अब तक करीब 65 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
बस्तर में सबसे ज्यादा बारिश, फिर भी सामान्य से कम
मानसून की पहली दस्तक का सबसे अधिक असर बस्तर संभाग में देखा गया है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।
- बस्तर: 142.7 मिमी सामान्य के मुकाबले 74.8 मिमी (48% कम)
- दंतेवाड़ा: 107.7 मिमी के मुकाबले 49.9 मिमी (54% कम)
- सुकमा: 60.3 मिमी वर्षा, सामान्य से 54% कम
- कोंडागांव: 51.9 मिमी
- बीजापुर: 28 मिमी वर्षा दर्ज
खरीफ की बुवाई के लिए अगले 10 दिन अहम
बारिश की कमी के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में खेतों में बुवाई लायक नमी अभी तक नहीं बन पाई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि जून के शेष दिनों में व्यापक और तेज बारिश होती है, तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी।
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Chhattisgarh: प्रदेश में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के स्थापना का प्रस्ताव, अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री साय

New Delhi: छत्तीसगढ़ को आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक औषधीय संपदा और पारंपरिक जनजातीय ज्ञान से समृद्ध राज्य है, ऐसे में यहां AIIA की स्थापना पूरे मध्य भारत के लिए लाभकारी साबित होगी।
नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अमित शाह को बताया कि नई दिल्ली और पणजी में संचालित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय का सफल मॉडल बन चुके हैं। ऐसे ही संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में होने से प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वन क्षेत्रों में अनेक दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं। वहीं जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत मौजूद है। इन संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग और शोध AIIA के माध्यम से बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि संस्थान की स्थापना से प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। इससे छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान बना सकेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट 2026 में घोषित तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों का उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि इनमें से एक संस्थान छत्तीसगढ़ को आवंटित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत के लोगों को बेहतर आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर सहित राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, अधोसंरचना विस्तार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार के विकास कार्यों की सराहना करते हुए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
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CG Cabinet Decision: 125 दिन रोजगार गारंटी, अटल आजीविका समृद्धि हाट और नई बायोगैस नीति को मंजूरी

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाली “वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़”, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना और छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) नीति-2026 को मंजूरी दी।
हर ग्रामीण परिवार को मिलेगा 125 दिन रोजगार
कैबिनेट ने “विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)” यानी वीबी-जी राम जी योजना के प्रारूप को मंजूरी दी। योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।
योजना में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका आधारित परिसंपत्तियों के विकास पर विशेष जोर रहेगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में खर्च वहन करेंगी। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 4,000 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है।
गांवों में बनेंगे ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’
कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से अटल आजीविका समृद्धि हाट योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।
इसके तहत गांवों में हथकरघा, सिलाई-बुनाई और हस्तशिल्प से जुड़े सृजन केंद्र, दलहन-तिलहन प्रसंस्करण इकाइयां, राइस मिल, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत केंद्र, अटल डिजिटल केंद्र, विपणन और आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में बनेगी कम्प्रेस्ड बायोगैस
मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 को भी मंजूरी दी। इसके तहत कृषि अवशेष, गोबर, नगरीय ठोस कचरा और अन्य जैविक अपशिष्टों से स्वच्छ ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इससे अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और जैविक उर्वरकों का उत्पादन बढ़ेगा।
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
डिजिटल निगरानी और सुशासन पर जोर
कैबिनेट ने योजनाओं के क्रियान्वयन में डिजिटल तकनीक, विभागीय अभिसरण और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से समन्वय को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है। इससे विकास कार्यों की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।
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Chhattisgarh: राजनांदगांव को 510 करोड़ की सौगात, 333 विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन; किसानों को मिलेंगे ₹15 हजार प्रति एकड़

Rajnandgaon: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को राजनांदगांव जिले को 510 करोड़ 89 लाख रुपए से अधिक लागत के 333 विकास कार्यों की सौगात दी। स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, गांवों के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश में विकास और सुशासन के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं।
खरीफ 2026 से फसल बदलने वाले किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन या अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपए की आदान सहायता राशि दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। राजनांदगांव जिले ने फसल चक्र परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
जिले में होंगे कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य
मुख्यमंत्री ने शिवनाथ नदी के मोहारा मेला स्थल से ऑक्सीजन जोन तक सस्पेंशन ब्रिज, ईरा एनीकट निर्माण एवं संरक्षण कार्य, कुमरदा-गेंदाटोला-कल्लूबंजारी सड़क निर्माण तथा घुमरिया व्यपवर्तन जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की भी घोषणा की। इन परियोजनाओं से जिले में पर्यटन, सिंचाई और आवागमन सुविधाओं को नई मजबूती मिलेगी।
सीएम हेल्पलाइन और ई-डिस्ट्रिक्ट से बढ़ रही सुशासन की पहुंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई है। इसके माध्यम से लोग अपनी शिकायत दर्ज कर निर्धारित समयसीमा में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के जरिए आय, जाति, निवास सहित विभिन्न विभागों की 400 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बिजली बिल समाधान और सोलर योजना का लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोगों को रूफटॉप सोलर लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे बिजली खर्च में दीर्घकालिक राहत मिलेगी।
किसानों के लिए सोयाबीन खरीदी का एमओयू
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन और एबीस एक्सपोर्ट के बीच किसानों के सोयाबीन उत्पाद की खरीदी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, कृषि सखी दीदियों, सरपंचों और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का सम्मान भी किया गया। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मिनी किट भी वितरित किए गए।
रमन सिंह बोले- फसल चक्र परिवर्तन से बदल रही खेती की तस्वीर
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव में फसल चक्र परिवर्तन और जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया। पद्मश्री फूलबासन बाई यादव और महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से किसानों में नई जागरूकता आई है, जिससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है।


















