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Chhattisgarh: भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन, छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान- CM साय

Bhoramdeo Corridor: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहां की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियां खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहां आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है।
कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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Holi Special Train 2026: होली के लिए भारतीय रेल की तैयारी, 1410+ स्पेशल ट्रेनें, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से 15 ट्रेनें

Holi Special Train 2026: होली त्योहार के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेल ने इस बार देशभर में 1410 से ज्यादा होली स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है। इनमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 15 स्पेशल ट्रेनें भी शामिल हैं। रेलवे के अनुसार, होली के समय तिरुपति और रक्सौल रूट पर भारी भीड़ रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए इस मार्ग पर 3 जोड़ी (अप-डाउन) होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।
तिरुपति–रक्सौल होली स्पेशल
- ट्रेन नंबर 07051 (तिरुपति से): 21 और 28 फरवरी, 7 मार्च 2026
- ट्रेन नंबर 07052 (रक्सौल से): 24 फरवरी, 3 और 10 मार्च 2026
यह ट्रेन तिरुपति से चलकर गोंदिया, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और झारसुगुड़ा होते हुए रक्सौल पहुंचेगी। इससे छत्तीसगढ़ के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
22 कोच, हर वर्ग के लिए सुविधा
स्पेशल ट्रेनों में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- एसी टू टियर
- एसी थ्री टियर
- स्लीपर
- जनरल
- एसएलआर
इससे अलग-अलग श्रेणी के यात्रियों को सुविधा के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।
पटना–चर्लपल्ली के बीच 7 स्पेशल ट्रेनें
होली के दौरान पटना–चर्लपल्ली रूट पर भी 7 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।
ट्रेन नंबर 03253 (पटना से): 9 से 30 मार्च 2026 तक हर सोमवार और बुधवार
ट्रेन नंबर 03254 और 03255 (चर्लपल्ली से): अलग-अलग निर्धारित तिथियों पर
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पटना–चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेन पूरी तरह आरक्षित रहेगी। केवल कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही यात्रा की अनुमति होगी। इन ट्रेनों में भी 22 कोच रहेंगे।
भीड़ से मिलेगी राहत
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि होली के समय ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ रहती है। स्पेशल ट्रेनें चलाने से टिकट की उपलब्धता बढ़ेगी और यात्रियों को सुरक्षित व सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
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Chhattisgarh: ‘ऑल द बेस्ट, प्यारे बच्चों’- मुख्यमंत्री साय ने परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को दिया आत्मविश्वास और सफलता का संदेश

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को परीक्षाओं के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए उन्हें आत्मविश्वास और हौसले के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों के नाम अपने आत्मीय संदेश में कहा कि परीक्षाओं का समय जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसमें उत्साह के साथ थोड़ा तनाव भी स्वाभाविक है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि परीक्षाओं का समय आ गया है। मैं जानता हूं कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी। लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए- आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है। यह स्वाभाविक है। यदि आपको डर लग रहा है तो इसका अर्थ है कि आप अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य को गंभीरता से लेते हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह समझ लीजिए- डर कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है। लेकिन इस डर को अपने आत्मविश्वास पर हावी न होने दें। आपने पूरे वर्ष मेहनत की है। हर दिन का प्रयास, हर अभ्यास, हर दोहराव- सब आपकी ताकत बनकर आपके साथ खड़े हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी नियमित पढ़ाई करें, कठिन विषयों को दोहराएँ, समय का संतुलन बनाए रखें। पर्याप्त नींद लें, पौष्टिक भोजन करें और कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के सभी विद्यार्थी इस बार भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।
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Chhattisgarh: राजिम कुंभ कल्प 2026 में आस्था का सागर, अरुण गोविल की ‘सुनो श्री राम कहानी’ से भाव-विभोर हुआ जनसमूह

Rajim Kumbh Kalp 2026: छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का विराट उत्सव बनकर उभरा है। त्रिवेणी संगम के पावन तट पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कलाकार और भगवान श्रीराम की भूमिका से घर-घर में पहचान बनाने वाले अरुण गोविल ने “सुनो श्री राम कहानी” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी वाणी और प्रस्तुति ने पूरे परिसर को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। श्रद्धालु देर तक मंत्रमुग्ध होकर रामकथा का श्रवण करते रहे।
मुख्यमंत्री से आत्मीय भेंट, आयोजन की सराहना
कार्यक्रम के दौरान अरुण गोविल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आत्मीय मुलाकात की और राजिम कुंभ कल्प के भव्य आयोजन एवं सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अरुण गोविल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, जनआस्था और लोगों का आत्मीय स्नेह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।
“राजिम कुंभ हमारी सांस्कृतिक चेतना का उत्सव”- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आस्था, संस्कृति और पर्यटन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
जनप्रतिनिधियों और संत-महात्माओं की उपस्थिति
कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
धार्मिक पर्यटन को मिल रही नई दिशा
उल्लेखनीय है कि राजिम कुंभ कल्प 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मंच मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित यह महोत्सव आस्था और पर्यटन संवर्धन का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
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Chhattisgarh: ‘राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता’, CM विष्णु देव साय बोले- बनेगी 50 लाख की सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला

Rajim Kumbh Kalp 2026: राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ केवल धार्मिक मेला नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता और पहचान का प्रतीक पर्व है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण हेतु 50 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही राजिम बैराज कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने और लंबित विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
भगवान राजीव लोचन मंदिर एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में की पूजा अर्चना
मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच पर राजीव लोचन मंदिर में भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत भगवान श्री राजीव लोचन, कुलेश्वर महादेव, राजिम दाई, छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयघोष के साथ की। उन्होंने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम की यह पावन भूमि सदियों से तप और साधना की साक्षी रही है। “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहे जाने वाले राजिम की आध्यात्मिक गरिमा विशेष है।
‘भगवान शिव त्याग, संयम और सेवा के प्रतीक’
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव त्याग, संयम और सेवा के प्रतीक हैं। राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, प्रकाश और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित की थी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में राजिम कुंभ मेला-स्थल को और अधिक सुव्यवस्थित व भव्य बनाया जाएगा और इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आध्यात्मिक आयोजन के रूप में विकसित किया जाएगा।
मंत्रियों ने भी रखा पक्ष
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का विराट उत्सव है। इस वर्ष पंचकोसी धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंग की थीम ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार इसे राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू, अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू सहित संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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Chhattisgarh: महाशिवरात्रि पर बाबा धाम में मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना, 1.20 करोड़ के विकास कार्यों का किया शिलान्यास

Raigarh: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ रायगढ़ प्रवास के दौरान ग्राम कोसमनारा स्थित श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम पहुंचे। उन्होंने भगवान भोलेनाथ और श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
1.20 करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास
मुख्यमंत्री ने जिला खनिज न्यास (DMF) मद से 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों का शिलान्यास किया, प्रस्तावित कार्यों में मुख्य भवन के सामने ग्रेनाइट फर्श व शेड निर्माण, श्रद्धालुओं के विश्राम और भोजन के लिए शेड, शौचालय परिसर का निर्माण, पार्किंग क्षेत्र के लिए सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धाम की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी।
‘आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को देती है सकारात्मक दिशा’
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोसमनारा स्थित यह धाम श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा समाज को सकारात्मक दिशा और आत्मबल प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गुरुजनों के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है।
1998 से तपस्या में लीन हैं बाबा
रायगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 7 किमी दूर स्थित यह धाम वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा वर्ष 1998 से कठोर तपस्या में लीन हैं। वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि मिली, जिसके बाद धाम की ख्याति और बढ़ी। बताया जाता है कि बाबा ने पत्थरों को एकत्र कर शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसे अपनी तपोभूमि बनाया। वर्षा, ग्रीष्म और शीत, तीनों मौसमों में खुले स्थान पर साधना करना उनकी तपस्या की विशेष पहचान है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।













