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Chhattisgarh: भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन, छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान- CM साय

Bhoramdeo Corridor: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहां की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियां खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहां आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है।
कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री निवास में 8 जनवरी गुरुवार को होगा जनदर्शन, समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण

Raipur: मुख्यमंत्री निवास कार्यालय रायपुर में 8 जनवरी गुरुवार को जनदर्शन का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस अवसर पर प्रदेशवासियों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का त्वरित और संवेदनशील निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को समयबद्ध समाधान मिल सके।
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Chhattisgarh: परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, पालक सहभागिता में देश में प्रथम

Raipur: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है। बलोदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।
इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियां महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।
परीक्षा पे चर्चा से जुड़े प्रेरक अनुभव भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में शामिल हुई कु. युक्तामुखी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस वर्ष अधिक से अधिक विद्यार्थियों से पंजीयन कर अपने प्रश्न पूछने की अपील की है। उनका प्रेरक संदेश विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सक्रिय सहभागिता की भावना जागृत कर रहा है।
इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में शीतकालीन अवकाश के दौरान आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” में सभी विद्यालयों, समुदाय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और इस आयोजन के परिणामस्वरूप एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए। इस सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी परीक्षा पे चर्चा मेलों का आयोजन किया जा रहा है और लोग उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में परीक्षा पे चर्चा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पंजीयन प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई और वहीं पर पंजीयन कराने में सहयोग दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन किया गया।
पंजीयन प्रक्रिया 11 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी और इस बात की पूरी संभावना है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि “परीक्षा पे चर्चा” माननीय प्रधानमंत्री मोदी का वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसमें वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों से सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद में परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाता है तथा पालकों को यह संदेश भी दिया जाता है कि वे अधिक अंक लाने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाएं। यह पहल अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है और परीक्षा को तनाव का विषय न मानकर उत्सव के रूप में मनाने की व्यापक सामाजिक चेतना विकसित कर रही है।
“परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ द्वारा प्राप्त की गई यह उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा परीक्षा को तनाव नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का जो संदेश दिया गया है, उसे छत्तीसगढ़ ने दिल से अपनाया है। कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान और पालक सहभागिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे यहां अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इसी उत्साह के साथ हम 30 लाख से अधिक पंजीयन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के इस अभियान को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहेंगे।”- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति मुर्मु से की सौजन्य मुलाकात, ‘बस्तर पंडुम 2026’ में किया आमंत्रित

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं एवं लोक जीवन से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर पंडुम राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, वेशभूषा सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
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Naxal Encounter: सुकमा और बीजापुर में कुल 14 नक्सली ढेर, सभी के शव और हथियार बरामद

Sukma/Bijapur: छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने कुल 14 माओवादियों को ढेर किया है। इसमें सुकमा जिले में 12 और बीजापुर जिले में 2 नक्सली मारे गए हैं। मारे गए माओवादियों में कुख्यात माओवादी कोंटा एरिया कमेटी प्रभारी वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का और कोंटा एरिया कमेटी सचिव माड़वी हितेश उर्फ हुंगा शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक डीआरजी ने शुक्रवार देर शाम खूफिया इनपुट के बाद सुकमा के किस्टाराम इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों की आहट पाकर नक्सलियों ने शनिवार सुबह करीब 8 बजे गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गए। सभी के शव और हथियार बरामद कर लिए हैं।
इधर, बीजापुर में भी माओवादियों ने नक्सल विरोधी ऑपरेशन पर निकली डीआरजी की टीम पर शनिवार सुबह करीब 5 बजे से फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मारा गए एक नक्सली की पहचान एरिया कमेटी मेंबर के रूप में हुई है, जिस पर पर 5 लाख का नाम इनाम था, जबकि दूसरा मारा गया नक्सली 8 लाख का इनामी था।
सुरक्षाबलों की इस बड़ी सफलता पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहां अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है। सीएम साय ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।
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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री साय ने बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का किया विमोचन, कहा- बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है

Dantewada: बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज मां दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहां बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहां की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा। उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।
इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।
प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।
इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
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