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CG News: जनता के मुद्दों को टेलीस्कोप की तरह और सरकार के काम पर माइक्रोस्कोप की तरह हो विपक्ष की नजर- उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

Raipur: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के विधायकों में लगातार संपर्क और सामंजस्य होना चाहिए, तभी लोकतंत्र फलेगा-फूलेगा और सकारात्मक परिणाम देगा। आप सदन में प्रतिद्वंदी नहीं हैं, वहां सौहार्द्रपूर्ण वातावरण होना चाहिए। आप लोग सामंजस्य बनाकर जनहित में बेहतर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया निरंतर चलते रहती है। सदन में नये विधायकों को पुराने विधायकों से भी काफी कुछ सीखने मिलेगा।
प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मौलिक अधिकार बहुत अहम- उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने संविधान सभा के गठन और भारत के संविधान के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विधायिका के सदस्यों को संविधान को जानना जरूरी है। जनआकांक्षाओं के अनुरूप कानूनों में बदलाव विधायिका का प्रमुख कार्य है। प्रचलित कानूनों में बदलाव भारत में ही नहीं दुनिया के सभी देशों में होता है। उन्होंने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मौलिक अधिकार बहुत अहम हैं। इसके बिना प्रजातंत्र नहीं चल सकता है।
‘प्रतिपक्ष की सबसे बड़ी ताकत सदन को चलने देने में’
उपराष्ट्रपति ने विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोई भी अधिकार बिना जिम्मेदारी के नहीं आता। आप सदन में अपने बोले हुए हर शब्द के लिए जवाबदेह हैं। आप सब लोग इतिहास का हिस्सा रहेंगे। आपके योगदान का आगे मूल्यांकन होगा। नये विधान के निर्माण में आपकी चिंता, चिंतन और मंथन दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष की सबसे बड़ी ताकत सदन को चलने देने में है। अनावश्यक व्यवधान को जनता पसंद नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सदन नियमों से चलता है। सभी सदस्यों को इन नियमों को मानना होता है। जनता चाहती है कि सदन में उनके मुद्दों पर चर्चा-परिचर्चा हो और जनप्रतिनिधियों द्वारा जनकल्याणकारी निर्णय लिए जाएं।
टेलीस्कोप और माइक्रोस्कोप की तरह हो विपक्ष की नजर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विपक्ष द्वारा सरकार की आलोचना रचनात्मक और समाधानपूर्ण होना चाहिए। विपक्ष को जनता के मुद्दों को टेलीस्कोप की तरह देखना चाहिए और सरकार के काम पर माइक्रोस्कोप की तरह नजर रखना चाहिए। राज्य के धन का सदुपयोग हो, यह बजट चर्चा के दौरान आप लोगों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय अनुकंपा छत्तीसगढ़ पर बहुत है। यह विकास की सारी संभावनाएं समेटे हुए हैं। उन्होंने सभी विधायकों से अपील की कि छत्तीसगढ़ को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।
सदन संविधान का मंदिर अतएव गरिमापूर्ण आचरण बेहद जरूरी- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जो विधायक विधानसभा में जितना ज्यादा बैठता है। वो विधानसभा में अपने विचार उतने ही बेहतर तरीके से रख पाता है और इस तरह से अपने क्षेत्र का बेहतर प्रतिनिधित्व कर पाता है। बिरला ने इस मौके पर कहा कि सदन संविधान का मंदिर है, अतएव सदन के भीतर गरिमापूर्ण आचरण बहुत जरूरी है। विधानसभा के नियमों और संसदीय परंपराओं की जितनी गहराई से जानकारी होगी, अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने में आपको उतना ही लाभ होगा। केवल अपने क्षेत्र की समस्याएं न रखें, अपितु राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए पूरे प्रदेश से जुड़े मुद्दे विधानसभा में रखें।
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छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी पीठ पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्रा और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने केंद्र को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि स्थायी पीठ की स्थापना के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है। याचिका में कहा गया है कि स्थायी व्यवस्था नहीं होने से राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अन्य पक्षकारों को प्रशासनिक मामलों में परेशानी उठानी पड़ रही है।
साल में 5 बार आती है सर्किट बेंच
याचिका के मुताबिक, बिलासपुर में CAT की सर्किट बेंच सीमित अवधि के लिए संचालित होती है। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित मुख्य पीठ की सर्किट बेंच साल में केवल पांच बार बिलासपुर आती है। हर बार इसका संचालन करीब एक सप्ताह तक होता है।
सीमित कार्यदिवसों के कारण कई मामलों की सुनवाई पूरी नहीं हो पाती। इसके बाद ऑनलाइन सुनवाई का सहारा लेना पड़ता है। नए आवेदन जमा करने, दस्तावेजों में लिपिकीय गलतियां सुधारने और दूसरी शुरुआती प्रक्रियाओं के लिए पक्षकारों को जबलपुर जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों का अतिरिक्त खर्च होता है।
जमीन आवंटित, फिर भी छोटे कमरे में चल रही बेंच
जनहित याचिका में CAT के बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, बिलासपुर में CAT भवन बनाने के लिए जमीन आवंटित की जा चुकी है, लेकिन फिलहाल सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम की पहली मंजिल पर स्थित एक छोटे कमरे से संचालित हो रही है।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि स्थायी पीठ बनने से सरकारी कर्मचारियों और उनके वकीलों को बार-बार जबलपुर जाने की जरूरत कम होगी। इससे प्रशासनिक मामलों की सुनवाई अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित हो सकेगी।
केंद्र ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संस्था की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, विकास बाजपेयी, अरविंद सिन्हा और पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा और अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी पेश हुए।
केंद्र के प्रतिनिधियों ने स्थायी पीठ की स्थापना के लिए अब तक उठाए गए कदमों और मौजूदा स्थिति का विवरण देने के लिए सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने हेतु समय मांगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
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Chhattisgarh: जशपुर में ₹11.83 करोड़ से बनेगा हाईटेक बस स्टैंड, एक साथ खड़ी होंगी 40 बसें

जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर में 11.83 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक बस स्टैंड बनाया जाएगा। करीब 3 एकड़ में विकसित होने वाले इस आधुनिक बस टर्मिनल में एक साथ 35 से 40 बसों के ठहराव की व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर परियोजना को मंजूरी मिल गई है। फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है।
नए बस स्टैंड से प्रतिदिन 5 हजार से अधिक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। यहां वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर, लिफ्ट, आधुनिक शौचालय और डिजिटल सूचना स्क्रीन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पुराने मवेशी बाजार परिसर में होगा निर्माण
जशपुरनगर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित पुराने मवेशी बाजार परिसर में बस टर्मिनल बनाया जाना प्रस्तावित है। इसकी स्वीकृत लागत 11 करोड़ 83 लाख 62 हजार रुपये है। जिला मुख्यालय के मौजूदा बस स्टैंड पर प्रतिदिन 100 से अधिक बसों का आवागमन होता है। यहां से जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अलावा झारखंड, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित दूसरे राज्यों के लिए भी बसें चलती हैं। रोजाना 5 हजार से अधिक यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए आधुनिक बस टर्मिनल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
डिजिटल स्क्रीन, लिफ्ट और 40 दुकानों की सुविधा
प्रस्तावित बस स्टैंड में यात्रियों के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, लिफ्ट और शौचालय बनाए जाएंगे। बसों के आगमन और प्रस्थान की जानकारी देने के लिए डिजिटल सूचना स्क्रीन लगाने की योजना है। परिसर में 40 दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इससे यात्रियों को जरूरी सामान और सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। आधुनिक सुविधाओं से महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को भी सहूलियत होगी।
कुनकुरी और पत्थलगांव में भी बनेंगे आधुनिक बस स्टैंड
जशपुरनगर के अलावा कुनकुरी और पत्थलगांव में भी आधुनिक बस स्टैंड निर्माण को स्वीकृति दी गई है। वहीं, बंदरचुआ और दुलदुला में एक-एक करोड़ रुपये की लागत से बस स्टैंड का निर्माण कार्य जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा। बसों के व्यवस्थित ठहराव और संचालन से यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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Chhattisgarh: सहायक शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी मिलेगा आवेदन का मौका

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती-2026 के विस्तृत विज्ञापन में संशोधन किया गया है। उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में लोक शिक्षण संचालनालय ने शुद्धि पत्र जारी किया है। इसके तहत दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित और सेरेब्रल पाल्सी श्रेणी के दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर मिलेगा।
भर्ती में ई-संवर्ग के 795 और टी-संवर्ग के 1,497 पद शामिल हैं। इस तरह कुल 2,292 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। संबंधित दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तारीख छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अलग से घोषित करेगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद संशोधन
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती का विस्तृत विज्ञापन 24 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। विज्ञापन में संशोधन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर याचिका क्रमांक WPS 6783/2026 (मीनाक्षी मंगलकर एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) में 9 अक्टूबर 2026 को पारित निर्णय के पालन में किया गया है।
तीन श्रेणियों को किया गया शामिल
समाज कल्याण विभाग की 11 सितंबर 2026 की संशोधित अधिसूचना के अनुरूप सहायक शिक्षक पद के लिए उपयुक्त दिव्यांगता श्रेणियों में दृष्टिबाधित (Blind), श्रवणबाधित (Deaf) और सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) को शामिल किया गया है। विस्तृत विज्ञापन की कंडिका 5 के उपखंड (iv) को भी विलोपित किया गया है।
शुद्धि पत्र में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का समूहवार और श्रेणीवार विवरण भी स्पष्ट किया गया है। इसमें दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित, अस्थिबाधित और बहुदिव्यांगता से संबंधित समूह शामिल हैं।
ई-संवर्ग में 795, टी-संवर्ग में 1,497 पद
भर्ती के संशोधित विवरण के अनुसार, ई-संवर्ग में 795 और टी-संवर्ग में 1,497 पद हैं। ई-संवर्ग में रायपुर, दुर्ग, महासमुंद, बलौदाबाजार-भाटापारा, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़ और बिलासपुर जिले शामिल हैं। वहीं, टी-संवर्ग में बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, जशपुर, कोरबा, रायगढ़, गरियाबंद और बालोद जिले शामिल हैं।
आवेदन की तारीख अलग से होगी जारी
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित और सेरेब्रल पाल्सी श्रेणी के अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन की तारीख कर्मचारी चयन मंडल अलग से जारी करेगा। 24 जुलाई को जारी मूल विज्ञापन की बाकी शर्तें और प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।
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छत्तीसगढ़ कैबिनेट: पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदला

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को पुलिस भर्ती में अवसर देने की दिशा में एक और कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में रविवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई कैबिनेट बैठक में गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक के 36 पदों पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती को मंजूरी दी गई। इन पदों पर रिक्तियों के अनुसार भर्ती की जाएगी। राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों को आरक्षक भर्ती में श्रेणीवार 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कर चुकी है।
आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलेगा
कैबिनेट ने आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के कार्य आवंटन नियमों में संशोधन किया जाएगा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री के कार्यकाल और केंद्र सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया।
सीएम साय बोले- नक्सलवाद का खात्मा छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ को सबसे बड़ा फायदा नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के रूप में हुआ है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक प्रदेश के विकास में बड़ी बाधा बना रहा। बस्तर के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर भी चिंता बनी रहती थी। साय के मुताबिक, केंद्र सरकार के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है और छत्तीसगढ़ अब इससे मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
गुजरात मॉडल और अर्थव्यवस्था का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 साल तक काम किया। इस दौरान गुजरात में विकास का एक मॉडल तैयार हुआ, जिसे गुजरात मॉडल के नाम से पहचान मिली। उन्होंने कच्छ में आए भीषण भूकंप के बाद पुनर्निर्माण और वाइब्रेंट गुजरात जैसे आयोजनों का भी उल्लेख किया। साय ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक क्षेत्र में प्रगति की है। उन्होंने भारत के दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आगे बढ़ने का श्रेय प्रधानमंत्री की मेहनत और दूरदृष्टि को दिया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना और अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। साय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र करते हुए एयर स्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है।
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नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पुलेला गोपीचंद, CM बोले- बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी

नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू की जाएगी। पद्म भूषण सम्मानित बैडमिंटन खिलाड़ी और प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद इस अकादमी की शुरुआत करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने क्लब के संस्थापकों और टीम को शुभकामनाएं दीं।
खेल सुविधाओं के लिए बजट में ₹100 करोड़
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष खेलों के समग्र विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, तराशने और बेहतर अवसर देने की है। सरकार चाहती है कि शहरों के साथ दूरस्थ वनांचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी संसाधनों के अभाव में पीछे न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा, खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं। इनसे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है। खेलों में निवेश युवाओं और प्रदेश के भविष्य में निवेश है।
गोपीचंद बोले- खेल और स्वास्थ्य को मिले प्राथमिकता
पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में स्वागत के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने नवा रायपुर के विकास की सराहना करते हुए कहा कि इलेशियम क्लब्स की पहल खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गोपीचंद ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की जीत और तिरंगे का ऊंचा होना पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ाता है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के साथ शारीरिक विकास पर भी समान ध्यान देने की जरूरत बताई। बच्चों को दौड़ने, कूदने, चढ़ने और अलग-अलग खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
2047 तक विकसित भारत के लिए स्वस्थ युवा जरूरी
गोपीचंद ने कहा कि खेलों में निवेश सिर्फ खिलाड़ी तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज का निर्माण भी होता है। उन्होंने खेल सुविधाओं, उत्कृष्टता और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उनके मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी जरूरी है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो।
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