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भोजशाला विवाद: बसंत पंचमी पर पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई

Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का अधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन की ओर से दायर की गई है, जो इससे पहले अयोध्या राम जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी–श्रृंगारगौरी मामलों में भी याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर चुके हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में केवल एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष पर्व है, जबकि जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में करीब 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय उस दिन अन्य मस्जिदों में नमाज अदा कर सकता है।
हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसे देखते हुए धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और शहर में करीब 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी हवाला दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
याचिका में 2013 और 2016 के उदाहरण भी पेश किए गए हैं, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना वहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के विपरीत है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
भोजशाला विवाद को करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (वर्तमान धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के दौरान हुआ था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर लंबे समय से अधिकार की मांग करते आ रहे हैं।
धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का एकाधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। यह अर्जी एडवोकेट विष्णुशंकर जैन की ओर से दाखिल की गई है, जो अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद व काशी ज्ञानवापी-श्रृंगारगौरी केस में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर चुके हैं।
बता दें कि हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसको लेकर धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च निकाल रही है। धार शहर में 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात कर दिए गए हैं।
तर्क- नमाज के लिए साल में 50 शुक्रवार, 25 मस्जिदें, पूजा के लिए साल में 1 दिन, 1 स्थल
अर्जी में कहा गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष दिन है। जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष में लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। इसी आधार पर मांग की गई है कि बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के सदस्य अन्य मस्जिदों में नमाज़ अदा कर सकते हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
अर्जी में 2013 और 2016 के उदाहरण भी दिए गए हैं। वर्ष 2013 में 15 फरवरी और 2016 में 12 फरवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी थी। याचिका के अनुसार, उन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना यहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के खिलाफ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
700 साल पुराना विवाद : भोजशाला विवाद करीब 700 साल पुराना है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (अब धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत काल में हुआ। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर अधिकार की मांग करते रहे हैं।
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Monsoon 2026: 9 दिन की देरी के बाद मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री, 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

Madhya Pradesh Rain Alert: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बुधवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश में दस्तक दे दी। मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री की घोषणा कर दी है। इस बार मानसून सामान्य तिथि से 9 दिन की देरी से पहुंचा है। प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले तीन से चार दिनों में मानसून प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा, जिससे बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी।
33 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट
मानसून की एंट्री के साथ मौसम विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले कुछ घंटों में हरदा, बैतूल, खंडवा (ओंकारेश्वर), छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बुरहानपुर में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, शाजापुर, अशोकनगर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, सिवनी, रीवा, मऊगंज और सिंगरौली सहित कई जिलों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा।
24 घंटे में 39 जिलों में बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 39 जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, मुरैना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, सागर, सतना और अनूपपुर समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। बालाघाट जिले में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे मौसम अचानक ठंडा हो गया।
जबलपुर समेत 4 जिलों में लू का अलर्ट
मानसून की एंट्री के बावजूद प्रदेश के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, भोपाल, बैतूल, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर और झाबुआ सहित 26 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।
गर्मी और बारिश दोनों का दौर
मौसम विभाग के अनुसार नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, छतरपुर, पन्ना, रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में अभी भी गर्मी का असर बना रह सकता है। हालांकि अगले कुछ दिनों में मानसून के सक्रिय होने के साथ तापमान में गिरावट और व्यापक वर्षा की संभावना है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
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Ujjain: महाकाल मंदिर को रिकॉर्ड 78 करोड़ का दान, कुल आय पहुंची 142 करोड़; महाकाल लोक के बाद तीन गुना बढ़े श्रद्धालु

Mahakal Mandir Donation: महाकाल लोक के निर्माण के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है। इसमें केवल दान मद से 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 27 करोड़ रुपए अधिक है। मंदिर समिति के अनुसार, श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और महाकाल लोक के आकर्षण के चलते मंदिर की आय में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
दान पेटियों से आए 62 करोड़ रुपए
मंदिर समिति के आंकड़ों के अनुसार दान से प्राप्त 78 करोड़ रुपए में सबसे बड़ा योगदान दान पेटियों का रहा।
- दान पेटियों से – 62 करोड़ रुपए
- नगद काउंटर से – 5.50 करोड़ रुपए
- ऑनलाइन दान – 3.60 करोड़ रुपए
- अन्नक्षेत्र से – 3.38 करोड़ रुपए
- गुप्त दान – 4.65 करोड़ रुपए
- मनी ऑर्डर से -1.23 लाख रुपए
इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी बाबा महाकाल को अर्पित किए।
लड्डू प्रसादी से 65 करोड़ की आय
मंदिर समिति को लड्डू प्रसादी की बिक्री से भी बड़ी आय प्राप्त हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65 करोड़ रुपए की आय केवल लड्डू प्रसादी की बिक्री से हुई।
महाकाल लोक के बाद तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ लाख से दो लाख श्रद्धालु प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सीधा असर मंदिर की आय पर भी दिखाई दे रहा है।
दान की गणना में कड़े सुरक्षा इंतजाम
राम मंदिर दान विवाद के बीच महाकाल मंदिर प्रशासन ने दान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी जानकारी दी है।मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं। इन पेटियों को हर सप्ताह सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष में पहुंचाया जाता है। दान पेटियां अधिकारियों की मौजूदगी में खोली जाती हैं और पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी कराई जाती है। गणना कार्य सीसीटीवी निगरानी में संपन्न होता है।
विशेष बात यह है कि दान की गणना करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले या सिली हुई जेब वाले कपड़े पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
बढ़ी आय के साथ बढ़ा खर्च भी
महाकाल लोक विस्तार के बाद मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर से बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। मंदिर समिति के 306 कर्मचारी वर्तमान में विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, अन्नक्षेत्र, धर्मशाला, गोशाला, वैदिक शोध संस्थान और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी बड़ी राशि खर्च की जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए सुविधाओं और व्यवस्थाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है।
मंदिर समिति के अनुसार, महाकाल लोक के विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण मंदिर का मासिक खर्च भी दोगुना हो गया है। पहले जहां मंदिर का मासिक व्यय करीब 2.5 करोड़ रुपए था, वहीं अब यह बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह पहुंच गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए सुविधाओं और व्यवस्थाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
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Ujjain: महाकाल भस्म आरती के नियम बदले, अब 3 महीने में एक बार ही मोबाइल नंबर से मिलेगी अनुमति

Ujjain: भगवान महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नए नियमों का पालन करना होगा। महाकाल मंदिर प्रबंधन ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में केवल एक बार ही अनुमति देने का नियम प्रभावी कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह की अवधि के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति प्राप्त करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। यह नियम प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं पर भी लागू होगा।
शिकायतों के बाद फिर लागू हुई व्यवस्था
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप थे कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर और पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर रहे हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं को अवसर नहीं मिल पा रहा था।
इसी को देखते हुए वर्ष 2024 में तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था लागू रही, लेकिन बाद में इसका प्रभाव कम हो गया। अब मंदिर समिति ने एक बार फिर इस नियम को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
पहले 15 दिन पहले होती थी ऑनलाइन बुकिंग
करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती के लिए 15 दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग करा सकते थे। उस समय मोबाइल नंबर या आधार कार्ड के उपयोग को लेकर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं था। बढ़ती भीड़ और अनुमति प्रक्रिया को लेकर शिकायतों के बाद मंदिर प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से नियमों में बदलाव किए।
प्रोटोकॉल से आने वालों पर भी लागू होगा नियम
नई व्यवस्था के तहत अब वे श्रद्धालु भी प्रभावित होंगे जो प्रोटोकॉल या विशेष अनुशंसा के आधार पर हर माह भस्म आरती में शामिल होते थे। ऐसे लोगों को भी अब एक बार अनुमति मिलने के बाद अगले तीन माह तक इंतजार करना होगा।
मंदिर प्रशासक ने क्या कहा
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू थी, जिसे अब और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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Bhopal: MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज, मानसून सत्र में आएगा प्रस्ताव, CM मोहन यादव बोले- महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में होगा पारित

Bhopal: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में सरकार UCC का प्रस्ताव विधानसभा में पेश करेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल की कृपा रही तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है।
CM मोहन यादव का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में UCC प्रस्ताव लाने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराने में भी सफलता मिलेगी। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष दीपावली तक प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करना बताया जा रहा है।
UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनी हाई-लेवल कमेटी
मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को UCC की व्यवहारिकता और मसौदा तैयार करने के लिए छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, विधि विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
प्रदेशभर से लिए गए सुझाव
समिति ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर अलग-अलग वर्गों से संवाद किया। आम नागरिकों से सुझाव लेने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया था। UCC को लेकर सुझाव और प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया 15 मई से 15 जून तक चली। सरकार के अनुसार मिले सुझावों के आधार पर मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपना है।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।फिलहाल देश में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
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Morena Train Accident: मोबाइल ब्लास्ट की अफवाह के बाद ट्रैक पर उतरे यात्री, दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत 4 की मौत

Morena Train Accident: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रविवार तड़के एक दर्दनाक रेल हादसे में मां-बेटे समेत चार लोगों की मौत हो गई। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अफवाह फैलने के बाद कई यात्री घबराकर ट्रेन से नीचे उतर गए। इसी दौरान चार यात्री दूसरी लाइन पर आ गई तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल अंतर्गत हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच सुबह करीब 4:15 बजे हुआ।
मृतकों में मां-बेटे समेत चार लोग शामिल
हादसे में राजस्थान के बीकानेर निवासी बिरमा देवी (60), उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी शकुंतला सिंह (60), आगरा की आफरीन (35) और उनका चार वर्षीय बेटा असद की मौत हो गई। आफरीन और असद मां-बेटे थे।
चेन पुलिंग के बाद रुकी ट्रेन, फैली अफवाह
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में किसी यात्री ने अलार्म चेन पुलिंग (ACP) कर दी थी, जिससे ट्रेन बीच सेक्शन में रुक गई।
इसी दौरान एक कोच में मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अफवाह फैल गई। इससे यात्रियों में दहशत मच गई और कई लोग बिना स्थिति समझे ट्रेन से उतरकर ट्रैक की ओर भागने लगे।
दूसरी ट्रेन की चपेट में आए यात्री
घबराहट में ट्रेन से उतरे कुछ यात्री पास की अप लाइन पर पहुंच गए। उसी समय गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस वहां से गुजर रही थी। ट्रैक पर मौजूद चार यात्री उसकी चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
बागेश्वर धाम से लौट रहे थे यात्री
हादसे के समय ट्रेन में सवार यात्री पूजा ने बताया कि मोबाइल ब्लास्ट की सूचना फैलते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई। ट्रेन रुकते ही कई लोग जान बचाने के लिए नीचे उतर गए।
वहीं बीकानेर निवासी हंसराज ने बताया कि वे बागेश्वर धाम से लौट रहे थे। उनके साथ उनकी मौसी बिरमा देवी और अन्य परिजन भी यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान आग लगने की अफवाह फैली और कुछ ही देर बाद यह दर्दनाक हादसा हो गया।
जांच में जुटा रेलवे प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। रेलवे प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह अफवाह के बाद यात्रियों में फैली भगदड़ और ट्रैक पर उतरना माना जा रहा है।
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