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Cyclone Arnab: आंध्र तट से टकराया चक्रवात अर्नब, 9 राज्यों में बारिश का अलर्ट; ट्रेनें और फ्लाइट्स रद्द

नई दिल्ली/विशाखापट्टनम: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। तूफान के दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कई इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई थी। चक्रवात के असर से आंध्र प्रदेश में रेल और हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। वहीं, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द, हवाई सेवाएं भी प्रभावित
चक्रवात के मद्देनजर रेलवे ने एहतियात के तौर पर कई ट्रेनों को रद्द, पुनर्निर्धारित या उनके मार्ग में बदलाव किया है। 28 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तूफान के कारण 95 ट्रेनें रद्द की गईं और कई अन्य ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया गया। यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर 27 अक्टूबर की दोपहर से उड़ान संचालन निलंबित कर दिया गया था। विजयवाड़ा और राजमुंदरी में भी 27 अक्टूबर की शाम से उड़ानें रोक दी गईं। कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द की हैं। यात्रियों को एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर फ्लाइट स्टेटस जांचने की सलाह दी गई है।
विशाखापट्टनम में 200 मिमी से ज्यादा बारिश
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश दर्ज की गई। विशाखापट्टनम समेत कई क्षेत्रों में जलभराव और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।रिपोर्टों के मुताबिक, विशाखापट्टनम और आसपास के क्षेत्रों में 27 अक्टूबर की सुबह से 28 अक्टूबर की सुबह तक कई स्थानों पर 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। अनकापल्ली जिले के कन्नूरिपालेम में 261.5 मिमी बारिश दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राहत-बचाव की तैयारी
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में संवेदनशील इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव दलों को तैयार रखने के कदम उठाए गए। अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
चक्रवात के साथ तेज हवाओं, भारी बारिश और जलभराव से सड़क यातायात, बिजली आपूर्ति तथा संचार सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
MP, UP, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट
चक्रवात का असर आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा: कई इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा।
तेलंगाना और छत्तीसगढ़: 28 और 29 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र: पूर्वी मध्य प्रदेश तथा विदर्भ में बारिश की संभावना; कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
झारखंड और बिहार: 28 से 30 अक्टूबर के बीच कई स्थानों पर बारिश की संभावना। बिहार में 29 और 30 अक्टूबर को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है।
उत्तर प्रदेश: पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को भारी से बेहद भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
चक्रवात प्रभावित इलाकों में लोगों को प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने, समुद्र तटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा बिजली और परिवहन सेवाओं से जुड़े ताजा अपडेट देखते रहने की जरूरत है। ट्रेन या विमान से यात्रा करने वाले यात्रियों को रवाना होने से पहले संबंधित सेवा की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
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Cyclone Arnab: कमजोर पड़ा तूफान, ओडिशा के 300 गांवों में बाढ़; कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान अर्नब कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया है, लेकिन इसके असर से पूर्वी भारत के कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तूफान से जान-माल का नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकारियों ने छह मौतों की सूचना दी है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग बताई गई है।
ओडिशा के गंजाम जिले में लगातार बारिश से कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बनने की खबर है। वहीं, आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बारिश से बिजली व्यवस्था, सड़क यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। तूफान के पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
ओडिशा में बाढ़ जैसे हालात, राहत-बचाव अभियान जारी
ओडिशा के दक्षिणी जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। गंजाम सहित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने की तैयारी की गई है। राज्य में पहले से ही आपदा प्रबंधन दलों और प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।
तूफान के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने की खबरें हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बहाली का काम जारी है।
आंध्र प्रदेश में रेल और बिजली व्यवस्था प्रभावित
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। कई जगह पेड़ गिरने और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति प्रभावित हुई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तूफान के दौरान कम से कम 15 हजार बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली थी। कुछ रेल मार्गों पर भी परिचालन प्रभावित हुआ। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले संबंधित रेलवे की आधिकारिक सूचना और ट्रेन की स्थिति जांच लें।
डीप डिप्रेशन में बदला अर्नब, आगे और कमजोर होने का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर की रात कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया। 29 अक्टूबर की सुबह जारी पूर्वानुमान में इसके दिन के दौरान डिप्रेशन और शाम तक अच्छी तरह चिह्नित कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई। हालांकि, तूफान कमजोर होने के बावजूद इससे जुड़ी बारिश का असर तत्काल खत्म होना जरूरी नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
कई राज्यों में बारिश की संभावना, स्थानीय अलर्ट पर नजर रखें
चक्रवात के कमजोर होने के बाद भी इसके प्रभाव से मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्रभावित जिलों में प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। स्कूल बंद होने, सड़क मार्ग बाधित होने या स्थानीय चेतावनी से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित जिला प्रशासन की ताजा सूचना देखना जरूरी है।
मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने, तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और बिजली के खंभों या गिरे हुए तारों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।
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कैंसर की 543 दवाओं के दाम बदले, कुछ की कीमत 90% से ज्यादा घटी; 9 नवंबर से नई दरें लागू

नई दिल्ली: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 दवा ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में संशोधन किया गया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की ओर से जारी सूची के अनुसार, इनमें से 397 ब्रांड-पैक की कीमतें घटाई गई हैं, जबकि 146 की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
सरकार के इस कदम से कैंसर के इलाज का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कीमतों में कटौती सभी दवाओं पर समान रूप से लागू नहीं हुई है। कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि कई महंगी दवाओं के दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं।
पैलबोप्रो की कीमत ₹40,421 से घटकर ₹2,720
नई सूची में कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है। प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
पैलबोप्रो: 125 mg की 21 कैप्सूल वाली पैकिंग की कीमत ₹40,421.33 से घटाकर ₹2,720 कर दी गई है। यह लगभग 93.3 प्रतिशत की कमी है।
सैमटेपा इंजेक्शन: 100 mg की शीशी की कीमत ₹80,071.86 से घटाकर ₹7,150.33 कर दी गई है। इसमें लगभग 91 प्रतिशत की कटौती हुई है।
पैलबोप्रो का इस्तेमाल कुछ प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में किया जाता है, जबकि सैमटेपा एक कीमोथेरेपी दवा है। वास्तविक बचत मरीज की निर्धारित दवा, पैकिंग और इलाज की जरूरत पर निर्भर करेगी।
397 ब्रांड-पैक सस्ते, 146 की कीमतें यथावत
NPPA की 28 अक्टूबर को जारी सूची में कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक उपलब्ध कराई गई कीमतों की जानकारी शामिल है। कुल 543 ब्रांड-पैक में से 397 की संशोधित MRP कम हुई है। इनमें 217 की कीमतें आधी या उससे कम रह गई हैं। कुछ ब्रांडों में 80 से 90 प्रतिशत से अधिक की कटौती भी दर्ज की गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि कंपनियों से नई कीमतों की जानकारी मिलने पर सूची को आगे भी अपडेट किया जाएगा।
कीट्रूडा और कुछ महंगी दवाओं के दाम नहीं बदले
कीमतों में व्यापक बदलाव के बावजूद कुछ महंगी कैंसर दवाओं की MRP में कोई कमी नहीं हुई है। इनमें इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा और टैग्रिसो जैसी दवाएं शामिल हैं। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों के लिए जरूरी है कि वे अपनी दवा के ब्रांड, डोज और पैक साइज के अनुसार नई कीमत की जांच करें। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों में भी अंतर हो सकता है।
सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगाई सीमा
कीमतों में संशोधन से पहले NPPA ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवा वितरण और खुदरा बिक्री के दौरान अत्यधिक मार्जिन पर नियंत्रण लगाना तथा कैंसर मरीजों के लिए दवाओं को अधिक किफायती बनाना है। नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। मरीज संशोधित दरों की जानकारी NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ ऐप के माध्यम से भी जांच सकते हैं।
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Guwahati Hotel Firing: गुवाहाटी के होटल में अंधाधुंध फायरिंग, 5 लोगों की मौत; लीज विवाद में आरोपी ने की फायरिंग

गुवाहाटी: असम के गुवाहाटी में सोमवार रात एक होटल में हुई गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। घटना बोरा सर्विस इलाके में स्थित होटल बिलास इन में रात करीब 9 बजे हुई। मृतकों में होटल मालिक के परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी घनकांत गोगोई को गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल की गई .32 बोर की लाइसेंसी पिस्तौल जब्त कर ली है।
होटल के लीज समझौते को लेकर चल रहा था विवाद
गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर पार्थ सारथी महंत के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में गोलीबारी की वजह होटल के लीज समझौते से जुड़ा संपत्ति विवाद सामने आया है। आरोपी ने पिछले साल होटल को लीज पर लिया था। इसके बाद से होटल मालिक पक्ष और आरोपी के बीच समझौते को लेकर विवाद चल रहा था।
पुलिस के अनुसार, सोमवार रात भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से छह लोगों पर गोली चला दी। इनमें से पांच की मौत हो गई, जबकि एक घायल व्यक्ति का अस्पताल में इलाज जारी है।
एक घंटे के भीतर आरोपी गिरफ्तार
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को करीब एक घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से गोलीबारी में इस्तेमाल की गई .32 बोर की लाइसेंसी पिस्तौल भी बरामद की गई है।
पुलिस मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का कहना है कि घटना के पीछे की परिस्थितियों और विवाद के पूरे घटनाक्रम का पता लगाया जा रहा है। फिलहाल लीज विवाद को गोलीबारी की संभावित वजह माना जा रहा है।
मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य
पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी में जान गंवाने वाले पांच लोगों में से चार होटल मालिक के परिवार से थे। पांचवां मृतक और घायल व्यक्ति भी उसी गांव से जुड़े बताए गए हैं। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर आगे की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और विवाद की वजहों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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Cyclone Arnab: चक्रवात अर्नब का खतरा बढ़ा, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका; कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात ‘अर्नब’ के तेज होने के साथ ही पूर्वी तट पर खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यनम के तट के बीच बापटला तथा विशाखापत्तनम के आसपास टकराने की आशंका है। इसे देखते हुए तटीय इलाकों में बचाव और राहत की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
आंध्र प्रदेश के 16 जिलों में अलर्ट
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश में प्रशासन सतर्क है। विशाखापत्तनम सहित तटीय क्षेत्रों में मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है। श्रीकाकुलम, विजयनगरम और अनकापल्ली जैसे जिलों में तेज हवाओं और बारिश की आशंका है। अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के तट पर पहुंचने के दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है।
ओडिशा में बारिश से जलभराव, नावों का संचालन बंद
ओडिशा के पुरी में भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। खुर्दा में भी बारिश दर्ज की गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ क्षेत्रों में नावों का संचालन रोकने और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए हैं। लोगों से प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश की चेतावनी
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के अलावा तेलंगाना, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी मौसम को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में खासकर दक्षिण और मध्य हिस्सों में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
मछुआरों और तटीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह
चक्रवात को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। मौसम की स्थिति बदलने पर चेतावनी भी अपडेट हो सकती है।
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Defence News: सेना के लिए ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी, 82% खरीद भारत से होगी

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रस्तावों के तहत होने वाली कुल खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से लिया जाएगा।
इस फैसले से स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता, निगरानी, मारक क्षमता और हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावों में आधुनिक तोप प्रणाली, हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, निगरानी उपकरण और नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
सेना को मिलेंगे आधुनिक गन सिस्टम, ड्रोन और एयर डिफेंस उपकरण
भारतीय थल सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इनमें हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम, गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम (GSRS), लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (LMRH) और वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) शामिल हैं।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS), लंबी दूरी के अनमैन्ड एरियल सिस्टम, सर्विलांस UAVs, इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम और लॉन्ग-रेंज कामिकेज ड्रोन सिस्टम की खरीद के प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है।
दुर्गम इलाकों में सेना की आवाजाही होगी बेहतर
हाई मोबिलिटी व्हीकल्स से कठिन और दुर्गम इलाकों में सेना की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और अन्य परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम मैकेनाइज्ड सैन्य टुकड़ियों को बेहतर गतिशीलता और मारक क्षमता प्रदान करेगा।
गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम सैनिकों को गोलीबारी से जुड़ी स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इससे युद्धक्षेत्र में खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
हेलीकॉप्टर और ड्रोन से बढ़ेगी निगरानी क्षमता
लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टोही, निगरानी, युद्धक गतिविधियों, खोज एवं बचाव तथा आपदा राहत जैसे कार्यों में किया जाएगा। इनका उपयोग भारतीय सेना और वायुसेना दोनों की जरूरतों के लिए प्रस्तावित है।
VSHORADS से नई पीढ़ी के छोटे हवाई खतरों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। वहीं, काउंटर-ड्रोन सिस्टम आधुनिक युद्धक्षेत्र में टैंकों की सुरक्षा और उनकी परिचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किया गया है।
लंबी दूरी के ड्रोन, निगरानी UAVs और इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, लक्ष्यों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई करने की क्षमता मजबूत होगी।
नौसेना को मिलेगा एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम
भारतीय नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS) और अन्य प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
AODS नौसेना के जहाजों की मिसाइल-रोधी सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा। खासकर आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से पैदा होने वाले खतरे के खिलाफ यह प्रणाली उपयोगी होगी।
नौसेना के लिए प्रस्तावित अन्य प्लेटफॉर्म स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किए जाएंगे। इनसे नौसेना की युद्धक क्षमता और आधुनिक समुद्री अभियानों के लिए तैयारी को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, हथियार और मौसम रडार
भारतीय वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है।
स्पेशल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर वायुसेना की महत्वपूर्ण हवाई परिवहन जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। वहीं, नए एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों से वायु रक्षा तथा युद्धक क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य है।
मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय मौसम की उच्च-रिजॉल्यूशन निगरानी उपलब्ध कराएगा। इससे परिचालन क्षेत्रों में मौसम संबंधी स्थितियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
रक्षा खरीद का 82% हिस्सा भारतीय उद्योग से
इस फैसले की अहम विशेषता घरेलू रक्षा उद्योग को प्राथमिकता देना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वीकृत प्रस्तावों के तहत होने वाली खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योग से प्राप्त किया जाएगा। इससे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, तकनीकी विकास और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, तीनों सेनाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस करने और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयारियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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