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Ali Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए, मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात

Ali Khamenei Death: तेहरान पर शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है। 36 वर्षों से सत्ता में रहे खामेनेई के निधन के बाद देश में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और उत्तराधिकार संकट गहरा गया है।
हमले में खामेनेई की मौत की पुष्टि
ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी तसनीम के अनुसार, सर्वोच्च नेता Ali Khamenei शनिवार 28 फरवरी की सुबह तेहरान पर हुए संयुक्त हमले में मारे गए। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। वे इस्लामी गणराज्य की सभी प्रमुख संस्थाओं- सरकार, सेना और न्यायपालिका पर सर्वोच्च अधिकार रखते थे।
अमेरिका-इजरायल का संयुक्त ऑपरेशन
तेहरान पर अटैक के ऑपरेशन को इजरायली सेना ने ‘Roaring Lion’ और अमेरिकी पेंटागन ने ‘Operation Epic Fury’ नाम दिया।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि खामेनेई “अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाए” और ऑपरेशन जारी रहने की चेतावनी दी। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह अभियान “ईरान से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरे को खत्म करने” के लिए था।
4 प्रांतों में हमले, भारी तबाही
हमले तेहरान, इस्फहान, कोम, कराज और करमानशाह सहित 24 प्रांतों में किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 700 से ज्यादा घायल हुए हैं। कई स्कूलों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि “इतिहास का सबसे भीषण जवाबी हमला” किया जाएगा। ईरानी सेना ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के कई देशों में हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइल में एक हमले में 9 लोगों की मौत हो गई है। तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो गई है। हमलों के बाद पूरे इजरायल में सायरन बजने लगे और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।
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US Navy Action: होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी शुरू, ट्रम्प की सख्त चेतावनी, ईरानी जहाज दिखे तो कार्रवाई

US Navy Action: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हो गया। ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी ईरान का जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई उसी तरीके से की जाएगी, जैसे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाजों को रोका जाता है- तेजी और सख्ती के साथ।
हर जहाज की होगी जांच
इस फैसले के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर जहाज को रोका जाएगा और उसकी जांच की जाएगी। खासतौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जाएगी, जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। ट्रम्प पहले ही साफ कर चुके हैं कि जो जहाज ईरान को “गैरकानूनी टोल” देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। इसे ईरान की आर्थिक ताकत कमजोर करने की रणनीति माना जा रहा है।
भारत को फिलहाल राहत
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा है कि अब तक होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में सहयोग करता रहेगा।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से तेल कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
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Iran conflict: ट्रम्प की चीन को कड़ी चेतावनी: ईरान की मदद की तो 50% टैरिफ, होर्मुज पर भी सख्ती

Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईरान को सैन्य मदद करता हुआ पाया गया, तो अमेरिका उस पर 50% तक भारी टैरिफ लगाएगा। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की मदद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि स्थिति बिगड़ने पर अमेरिका सख्त आर्थिक और सैन्य कदम उठा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ेगी सैन्य मौजूदगी
ट्रम्प ने बताया कि ब्रिटेन समेत कुछ अन्य देश होर्मुज स्ट्रेट में माइन हटाने वाले नौसैनिक जहाज भेजेंगे। यह कदम क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना जरूरत पड़ने पर स्ट्रेट में नाकाबंदी कर सकती है और उन जहाजों को रोक सकती है जो ईरान को टोल देते हैं।
“अमेरिका पूरी तरह तैयार”
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका “Locked and Loaded” है, यानी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दोहराया कि सही समय आने पर अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
- चीन को धमकी: ईरान की मदद पर 50% तक टैरिफ लगाने की चेतावनी
- होर्मुज पर सख्ती: अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी कर सकती है
- मस्जिद विवाद: इजराइली मंत्री के अल अक्सा दौरे पर जॉर्डन का विरोध
- ईरान का दावा: स्ट्रेट पर कंट्रोल, जहाजों से टोल वसूली की बात
- गिरफ्तारी: ईरान में जासूसी के आरोप में 50 लोग पकड़े गए
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Iran ceasefire: ईरान ने पाकिस्तान में सीजफायर वार्ता से किया इनकार, लेबनान में शांति के बाद ही बातचीत

Iran ceasefire: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित सीजफायर वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, वह किसी भी बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है। रिपोर्ट में मोहम्मद बाकर गालिबाफ और अब्बास अराघची के शामिल होने की बात कही गई थी। हालांकि, फार्स न्यूज एजेंसी ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया।
7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी थी। दोनों देशों के नेताओं की बैठक इस्लामाबाद में प्रस्तावित थी, जिसमें अमेरिकी डेलिगेशन के पहुंचने की खबर है।
किन मुद्दों पर होनी थी बातचीत
1. न्यूक्लियर प्रोग्राम
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करे।
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर मतभेद है।
- ईरान: नियंत्रण और टोल की मांग
- अमेरिका: बिना रुकावट फ्री नेविगेशन
3. बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम
अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक चाहता है।
4. सैंक्शंस हटाना
ईरान की मांग है कि सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और फंसी संपत्तियां वापस दी जाएं।
क्या संकेत मिलते हैं
ईरान के इस फैसले से साफ है कि क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर उसकी प्राथमिकता अभी लेबनान है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता पर असर पड़ सकता है और मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
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US-Iran Ceasefire: 40 दिन की जंग के बाद 2 हफ्ते का सीजफायर, पाकिस्तान-चीन की मध्यस्थता से बनी सहमति

US-Iran Ceasefire: करीब 40 दिनों से जारी जंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते में चीन की अहम भूमिका रही। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया।
तनाव के बीच बनी डील
सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, तो अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा। अब समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे, जबकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई बंद करेगा। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
लेबनान समेत कई इलाकों पर लागू
यह सीजफायर लेबनान समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर भी लागू होगा। दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत 10 अप्रैल से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी।
ईरान ने हमले रोकने के दिए आदेश
सीजफायर के ऐलान के करीब 2 घंटे बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने सभी सैन्य इकाइयों को फायरिंग रोकने के आदेश दिए। सरकारी चैनल IRIB पर जारी बयान में कहा गया कि सभी सैन्य शाखाएं तुरंत आदेश का पालन करें। हालांकि, इसे स्थायी शांति नहीं बल्कि अस्थायी कदम बताया गया है।
अमेरिका ने ऑफेंसिव ऑपरेशन रोके
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सभी ऑफेंसिव मिलिट्री ऑपरेशन रोक दिए हैं। हालांकि, डिफेंसिव ऑपरेशन और सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे।
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Middle East tension: ट्रंप की धमकी, आज रात ‘पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है’, ईरान का पलटवार- मिडिल ईस्ट से बाहर भी करेंगे हमला

Trump Iran warning: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।” ट्रम्प ने कहा कि वह ऐसा नहीं चाहते, लेकिन हालात उस दिशा में जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता में बदलाव हो चुका है और अब वहां ज्यादा समझदार व कम कट्टर सोच वाले लोग हैं। उन्होंने दावा किया कि दुनिया एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है और 47 सालों से जारी “ज्यादती, भ्रष्टाचार और मौत का सिलसिला” खत्म हो सकता है। ट्रम्प ने अंत में कहा, “ईश्वर ईरान के लोगों की रक्षा करे।”
ईरान की कड़ी चेतावनी
ट्रम्प के बयान के बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अब उनका जवाब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। गार्ड्स ने अपने बयान में कहा कि वे अमेरिकी और सहयोगी देशों के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं, जिससे उन्हें तेल और गैस संसाधनों से दूर किया जा सके।
‘संयम खत्म’, बाहर भी हो सकते हैं हमले
ईरान ने कहा कि अब तक उसने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को देखते हुए संयम बरता था, लेकिन अब वह खत्म हो चुका है। गार्ड्स ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कोई बड़ा कदम उठाया, तो इसका जवाब मिडिल ईस्ट के बाहर भी दिया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।

















