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Makar Sankranti: प्रदेश में चीनी मांझा प्रतिबंधित, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई, सीएम साय ने पतंग उत्सव सुरक्षित और पारंपरिक रूप से मनाने की अपील की

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों से पतंगों के इस उल्लासपूर्ण पर्व को सुरक्षित, जिम्मेदार और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि त्योहार के आसपास चीनी मांझा से होने वाली दुर्घटनाओं की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं, इसलिए इसका प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है और इसका उपयोग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, पक्षियों और राहगीरों के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देशित किया है कि चीनी मांझा के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिकों को इसके खतरों और कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी मिल सके। सीएम साय ने कहा कि मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर परंपरा, आनंद और सुरक्षा—तीनों का संतुलन बनाए रखें। उन्होंने सभी को मिलकर इस पर्व को हर्ष, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ मनाने की अपील की।
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छत्तीसगढ़ में DJ-लाउडस्पीकर पर नए नियम: बिना अनुमति बजाया तो 1 साल तक जेल और ₹1 लाख जुर्माना; 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन

रायपुर: छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले DJ, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-2026 का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर DJ या लाउडस्पीकर बजाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा।
बिना अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्र चलाने पर जेल, जुर्माना और उपकरण जब्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट है और कानून लागू नहीं हुआ है। गृह एवं पुलिस विभाग ने आम नागरिकों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां मांगी हैं।
अस्पताल-स्कूल के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन
प्रस्तावित अधिनियम में अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, न्यायालय और केंद्र-राज्य सरकार व स्थानीय निकायों के कार्यालयों की 100 मीटर की परिधि को शांत क्षेत्र घोषित करने का प्रावधान है। जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त जरूरत के अनुसार किसी अन्य क्षेत्र को भी शांत क्षेत्र घोषित कर सकेंगे। ड्राफ्ट में समय को भी दो हिस्सों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक दिन का समय और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रात का समय माना गया है।
पहली बार उल्लंघन पर ₹50 हजार से जुर्माना
प्रस्तावित नियमों के अनुसार पहली बार नियम तोड़ने पर कारावास, कम से कम ₹50 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि उल्लंघन शांत क्षेत्र में होता है तो एक साल तक की जेल और कम से कम ₹75 हजार जुर्माना लगाया जा सकता है।
दोबारा गलती की तो 2 साल तक जेल
बार-बार नियम तोड़ने पर सजा और कड़ी होगी। सामान्य क्षेत्र में दोबारा दोष सिद्ध होने पर 3 महीने से 1 साल तक की जेल और कम से कम ₹1 लाख जुर्माना प्रस्तावित है। वहीं शांत क्षेत्र में दोबारा उल्लंघन करने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और कम से कम ₹1.50 लाख जुर्माना हो सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले को उपकरण उपलब्ध कराने वाले विक्रेता का पंजीयन भी स्थायी रूप से रद्द करने का प्रावधान है।
DJ-साउंड सिस्टम किराए पर देने वालों के लिए भी नियम
प्रस्तावित कानून में साउंड सिस्टम और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के विक्रेताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें स्थानीय पुलिस से सत्यापन कराने के बाद निर्धारित कार्यालय में पंजीयन कराना होगा। बिना वैध अनुमति वाले आयोजक को साउंड सिस्टम किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने वाले विक्रेता के पास साउंड मीटर होना भी जरूरी किया गया है।
रैली और आयोजनों में 6 घंटे की अनुमति
विशेष रैली, जुलूस, सार्वजनिक कार्यक्रम या उत्सव के लिए सक्षम अधिकारी दिन में अधिकतम 6 घंटे तक ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल की अनुमति दे सकेंगे। कुछ विशेष अवसरों पर पूरे कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों तक रात 12 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि, शांत क्षेत्र में किसी भी समय इस तरह की छूट नहीं होगी।
अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्तावित कानून
सरकार ने प्रारूप पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों पर विचार और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कानून का अंतिम स्वरूप तय होगा। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित ₹1 लाख जुर्माना, जेल और उपकरण जब्ती जैसे प्रावधानों को लागू कानून नहीं माना जा सकता। मौजूदा नियमों के तहत ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई जारी रहेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि नए विधेयक की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान मौजूदा कानूनों के पालन में ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
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Raipur: PWD में 1 अक्टूबर से नया टेंडर सिस्टम, नई निविदाएं अब GePNIC पर होंगी; ठेकेदारों को कराना होगा ऑनलाइन नामांकन

रायपुर: लोक निर्माण विभाग (PWD) में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से बदलने जा रही है। इस तारीख से विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन और प्रकाशन GePNIC (Government e-Procurement-NIC) पोर्टल पर होगा। टेंडर जारी करने से लेकर बिड प्राप्ति, तकनीकी- वित्तीय मूल्यांकन और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी इसी पोर्टल पर पूरी की जाएंगी। विभाग ने नई व्यवस्था शुरू होने से पहले ठेकेदारों और अधिकारियों को जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
ठेकेदारों को पहले कराना होगा Enrollment
नई निविदाओं में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पोर्टल पर Enrollment यानी नामांकन कराना जरूरी होगा। विभाग ने ठेकेदारों से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, ताकि 1 अक्टूबर से टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वीके भतपहरी ने विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार संघ के पदाधिकारियों को भी पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी ठेकेदारों तक पहुंचाने और उन्हें समय पर नामांकन कराने के लिए कहा है।
टेंडर की पूरी प्रक्रिया नए पोर्टल पर
नई व्यवस्था में केवल टेंडर का प्रकाशन ही नहीं होगा, बल्कि पूरी निविदा प्रक्रिया GePNIC पर संचालित होगी। इसमें निविदा का सृजन और प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय मूल्यांकन, संबंधित ऑनलाइन स्वीकृति और अन्य कार्यवाही शामिल हैं।
पुराने पोर्टल के टेंडर 31 मार्च तक निपटेंगे
30 सितंबर 2026 तक पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रकाशित निविदाओं की बिड प्राप्ति, मूल्यांकन, स्वीकृति और अन्य लंबित ऑनलाइन कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक उसी पुराने पोर्टल पर पूरी की जाएगी। इसके बाद पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर निविदाओं से संबंधित कोई नई कार्रवाई नहीं होगी।
अधिकारियों की भी बनेगी नई डिजिटल व्यवस्था
नई व्यवस्था के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निविदा आमंत्रण अधिकारियों, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों और संबंधित कर्मचारियों को यूजर आईडी, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की प्रक्रिया तत्काल पूरी करनी होगी। विभाग का जोर है कि 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था बिना तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के सुचारू रूप से शुरू हो।
ठेकेदारों के लिए बदल जाएगा टेंडर प्लेटफॉर्म
1 अक्टूबर से PWD की नई निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों को पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के बजाय GePNIC को नए टेंडर प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करना होगा। विभाग ने अधिकारियों और ठेकेदारों से निर्धारित समय-सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने को कहा है।
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छत्तीसगढ़ में कैंसर अब नोटिफाइड डिजीज: हर केस की जानकारी सरकार को देना जरूरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कैंसर के मामलों की निगरानी और समय पर इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ यानी अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। अब सरकारी और निजी अस्पतालों समेत पैथोलॉजी लैब, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर देखभाल से जुड़े संस्थानों को कैंसर के मामलों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत कैंसर की पुष्टि होने के बाद संबंधित संस्थान को तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। इससे राज्य में कैंसर के मामलों का केंद्रीकृत और ज्यादा सटीक डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।
संदिग्ध मरीजों की भी होगी जांच
अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए रेफर करना होगा। जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा। इस रिपोर्ट को भी बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध कराना होगा।
अभी कैंसर रजिस्ट्री में रिपोर्टिंग स्वैच्छिक
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक राज्य में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री के जरिए स्वैच्छिक रूप से दर्ज की जाती रही है। इससे कई मामलों के रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना रहती है।
नई व्यवस्था के बाद कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे बीमारी के पैटर्न, मरीजों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के प्रसार की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
डेटा के आधार पर बनेगी रोकथाम की रणनीति
सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ी नीतियां बनाने में करेगी। इसके अलावा उपचार सुविधाओं के विस्तार, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। नियमित डेटा से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि अलग-अलग प्रकार के कैंसर के मामलों और उनसे होने वाली मौतों में समय के साथ क्या बदलाव हो रहा है।
26 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर
प्रदेश में फिलहाल 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 5 और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी से निजी संस्थानों तक लागू होगी व्यवस्था
नोटिफिकेशन के दायरे में राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों के साथ निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्वास्थ्य संस्थान आएंगे। इसके अलावा पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर की देखभाल से जुड़े संस्थानों और एनजीओ को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी देनी होगी। कैंसर की जांच और इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि सामने आने वाले मामलों की रिपोर्ट तय समयसीमा में उपलब्ध कराई जाए।
ढाई साल में 17,611 कैंसर केस दर्ज
राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों का अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में कुल 17,611 कैंसर केस दर्ज किए गए। इनमें 4,465 मुख कैंसर, 210 गले के कैंसर, 252 जीभ के कैंसर, 1,038 फेफड़ों के कैंसर, 2,633 स्तन कैंसर, 2,200 गर्भाशय कैंसर, 2,560 पेट के कैंसर, 4,253 अन्य प्रकार के कैंसर के मामले शामिल हैं। नई नोटिफिकेशन व्यवस्था से सरकार के पास कैंसर के मामलों का ज्यादा व्यापक डेटाबेस उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे स्क्रीनिंग, इलाज और कैंसर नियंत्रण की योजनाओं को जरूरत के मुताबिक तैयार करने में मदद मिल सकती है।FEA
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श्रमिक महासम्मेलन: CM साय की 3 बड़ी घोषणाएं, ई-बाइक योजना शुरू होगी; ई-रिक्शा के लिए सहायता ₹1 लाख हुई

रायपुर: विश्वकर्मा जयंती पर रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रमिक हित में तीन बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के परिश्रम से ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव मजबूत हो रही है। सरकार का लक्ष्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर देना है।
शहरों में बनेंगे आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र
CM साय ने शहरों में काम की तलाश में आने वाले श्रमिकों के लिए आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र बनाने की घोषणा की। यहां बैठने की व्यवस्था के साथ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पंजीकृत श्रमिकों के लिए ई-बाइक सहायता योजना भी शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य काम के लिए रोज लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों का आवागमन आसान बनाना है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की घोषणा की गई।
1.43 लाख श्रमिकों के खातों में पहुंची ₹51.32 करोड़ की सहायता
महासम्मेलन में विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में ₹51.32 करोड़ से ज्यादा की राशि DBT के जरिए ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। पिछले ढाई साल में इन योजनाओं के जरिए ₹1,000 करोड़ से अधिक की सहायता श्रमिकों तक पहुंचाई गई है।
100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी
‘दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना’ के तहत 100 श्रमिक महिलाओं को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी गई। मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर ई-रिक्शा रवाना किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने श्रमिक बहनों के साथ बैठकर भोजन भी किया और उनके परिवार, रोजगार तथा बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली।
हजारों श्रमिकों के साथ जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में हजारों श्रमिकों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि श्रमिकों के साथ उनके परिवारों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलें और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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झीरम घाटी केस में 10 दोषियों को फांसी, 13 साल बाद NIA कोर्ट का फैसला, हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद ही सजा लागू होगी

जगदलपुर: 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बुधवार को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इनमें 2 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और सजा की घोषणा के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की थी।
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने हमला किया था। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और 10 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।
13 साल चली सुनवाई, 101 गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई करीब 13 साल चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और बड़ी संख्या में दस्तावेज व अन्य साक्ष्य पेश किए। इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA की जांच में कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए थे, जो फरार बताए गए हैं। एजेंसी ने 2014 में इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई।
फांसी की सजा अभी अंतिम नहीं
अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी दोषियों को तुरंत फांसी नहीं दी जाएगी। मौत की सजा के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। दोषियों को फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील का अधिकार भी है। बचाव पक्ष पहले ही फैसले को चुनौती देने की बात कह चुका है।
अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई।
ऐसे हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से लौट रही थी। काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमले की शुरुआत काफिले पर विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमले से हुई। इसके बाद माओवादियों ने गोलीबारी की और हथियार भी लूटे। इस हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत सुरक्षाकर्मियों की जान गई।
महेंद्र कर्मा समेत कई बड़े नेता मारे गए थे
हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई लोग मारे गए थे। महेंद्र कर्मा नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस हमले में 27 लोगों की मौत दर्ज है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 29 तक बताई गई है।
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