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Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिकी नीति 2024-30 लांच, रोजगार प्रशिक्षण के लिए हर माह प्रति व्यक्ति के हिसाब से मिलेगा 15 हजार रुपए का अनुदान

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवा रायपुर के मेफेयर रिसार्ट में छत्तीसगढ़ राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को लांच किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने इस नई नीति को रोजगार परक और विजन-2047 के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का लक्ष्य तय किया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यदि कोई उद्योग एक हजार से अधिक युवाओं को रोजगार देता है तो हम उसे बी-स्पोक पॉलिसी के तहत और अधिक रियायतें देंगे। युवाओं को रोजगार मूलक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर हमने इस नीति में प्रति व्यक्ति 15 हजार रूपये प्रतिमाह तक का अनुदान देने का प्रावधान भी किया है।
हमने पहली बार इस नीति के माध्यम से राज्य में पर्यटन एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में निवेश को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। हमारा राज्य देश के मध्य में स्थित है, आने वाले वर्षों में हम अपनी भौगोलिक स्थिति, आवागमन के आधुनिक साधनों और आप सबकी भागीदारी से प्रदेश को देश का ‘‘हेल्थ हब’’ बनाने में सफल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर के नजदीक हम लगभग 118 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण प्रारंभ करने जा रहे हैं। पूर्व के ‘‘न्यूनतम 20 एकड़ भूमि’’ के स्थान पर अब हमने ‘‘15 एकड़ भूमि’’ पर निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क की स्थापना की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ संभवतः देश में पहला राज्य है, जिसने युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भी कटिबद्ध हैं। इसके लिए हम इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दे रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि उद्योग स्थापना एवं संचालन में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो एवं यथासंभव सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा ऑनलाइन माध्यम से हो ताकि आपके उद्योग हेतु आपको सरकार के पास आने की आवश्यकता ना हो।
इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अरूण साव, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और मुख्य सचिव अमिताभ जैन, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन अमर परवानी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और उद्योगपति मौजूद रहे। नई औद्योगिक नीति के लांचिंग अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने नवीन औद्योगिक विकास नीति का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान
छत्तीसगढ़ की औद्यौगिक विकास नीति 2024-30 को राज्य में 01 नवबंर 2024 से लागू किया गया है। यह नीति उद्योगों को निवेश करने, नये रोजगार सृजन करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिये एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सूजन करते हुये अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्र के रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति मैं स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुये 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एम.एस.एम.ई. के अनुरुप किया गया है। इसी के अनुसार ही इन उद्यमों को प्राप्त होने वाले प्रोत्साहनों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।
राज्य सरकार द्वारा देश में सेवा गतिविधियों के बढ़ते हुये। रुझान को दृष्टिगत रखते हुये इस नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग सर्विसेस, रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य सेक्टर, पर्यटन एवं मनोरंजन सेक्टर आदि से संबंधित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।
इसके साथ ही थ्रस्ट सेक्टर के ऐसे उद्योग जहां राज्य का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है और जहां भविष्य के रोजगार आ रहे हैं, उन क्षेत्रों के लिये अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है।
नीति में प्रोत्साहनों की दृष्टि से राज्य के विकासखण्डों को 03 समूहों में रखा गया है। समूह-1 में 10. समूह 2 में 61 एवं समूह 3 में 75 विकासखण्डों को वर्गीकृत किया गया है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विनिर्माण के लिए स्थाई पूंजी निवेश का 100 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र के लिए स्थाई पूंजी निवेश का 150 प्रतिशत तक का समग्र प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति के माध्यम से एक ओर जहां राज्य के युवाओं को अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर आत्मनिर्भर बनाने के लिये उद्यम कांति योजना का प्रावधान किया गया है, वहीं दूसरी ओर देश में बन रहे बड़े इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के अनुरुप ही राज्य में भी NICDC के माध्यम से इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर औद्योगिक नगरी कोरबा-बिलासपुर-रायपुर की परिकल्पना की गई है। जो कि राज्य के औद्योगिक विकास में एक महत्तवपूर्ण कदम है।
इस नीति में प्रथम बार उद्यमों में राज्य के निवासियों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिये स्थानीय रोजगार सृजन को लक्ष्य में रखकर 1000 अथवा इससे अधिक रोजगार सृजन के आधार पर विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान साथ ही उद्योगों में नियोजित राज्य के निवासी के प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति रूपये 15,000 रूपए की प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति एवं कर्मचारियों पर होने वाले ई.पी.एफ. व्यय की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
पहली बार ग्रीन उद्यम की परिकल्पना को साकार करने के लिये पर्यावरण संरक्षण उपायों को अपनाने के लिये औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन इनवायरमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान), जल एवं उर्जा दक्षता (एनर्जी ऑडिट) व्यय प्रतिपूर्ति, गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं ग्रीन हाइड्रोजन/कम्प्रेस्ड बॉयोगैस सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
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रायपुर साहित्य उत्सव 2026: साहित्य प्रेमियों के लिए बड़ी सुविधा, तीन दिनों तक निःशुल्क बस सेवा

Raipur: रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दौरान आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शहर में निःशुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवहन की किसी भी असुविधा के कारण कोई भी व्यक्ति इस महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजन में शामिल होने से वंचित न रह जाए।
यह निःशुल्क बस सेवा 23, 24 और 25 जनवरी 2026—तीन दिनों तक लगातार संचालित की जाएगी। इन दिनों बसों में यात्रा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी, जिससे शहरवासी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के रायपुर साहित्य उत्सव में सहभागिता कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सुविधा के अंतर्गत लगभग 15 बसें चलाई जाएंगी। ये बसें उत्सव स्थल तक आने-जाने—दोनों दिशाओं में संचालित होंगी, ताकि कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। भीड़ को देखते हुए बसों की संख्या इस तरह निर्धारित की गई है कि आवागमन सुचारु बना रहे।
शहर के अधिकतम क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ने के लिए कुल 6 प्रमुख रूट तय किए गए हैं। इन रूट्स के माध्यम से रायपुर के विभिन्न हिस्सों से लोग सीधे उत्सव स्थल तक पहुंच सकेंगे। सभी बसें पुराने रायपुर क्षेत्र से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर स्थित रायपुर साहित्य उत्सव स्थल तक संचालित की जाएंगी।
निःशुल्क बस सेवा में शामिल सभी बसों पर रायपुर साहित्य उत्सव की विशेष ब्रांडिंग की जाएगी। इससे न केवल शहर में साहित्य उत्सव का उत्साहपूर्ण माहौल बनेगा, बल्कि नागरिकों के बीच आयोजन को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी और पूरे रायपुर में उत्सव की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।
बसों की विस्तृत समय-सारणी शीघ्र जारी की जाएगी, जिसे विभिन्न माध्यमों से सार्वजनिक किया जाएगा ताकि नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा की योजना बना सकें। प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बस सेवा समयबद्ध, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संचालित हो।
उल्लेखनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। निःशुल्क बस सेवा की यह व्यवस्था अधिकाधिक नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि समाज के हर वर्ग को इस साहित्यिक उत्सव से जुड़ने का अवसर मिल सके।
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मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 का भव्य समापन, मुख्यमंत्री साय ने की विकास से जुड़ी अहम घोषणाएं

Raipur:राजा मोरध्वज की त्याग, धर्म और सत्यनिष्ठा की गौरवशाली परंपरा को समर्पित मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का भव्य समापन ऐतिहासिक गरिमा और उत्साहपूर्ण वातावरण के साथ सम्पन्न हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राजा मोरध्वज का जीवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का अमर प्रतीक है, जो आज भी समाज को सत्य, कर्तव्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आरंग की पुण्यभूमि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम के चरण-स्पर्श से और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से अनुप्राणित रही है। उन्होंने बागेश्वर बाबा में विधिवत जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर विकास की कामना की।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने समोदा उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने तथा वहां पूर्णकालिक तहसीलदार की पदस्थापना की घोषणा की। इसके साथ ही मोरध्वज महोत्सव के लिए शासकीय अनुदान ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किए जाने की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में प्रस्तावित खेल परिसर सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार की विकास नीति का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील शासन, त्वरित निर्णय और जनता से सीधा संवाद ही सरकार की कार्यशैली की पहचान है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट हेमचंद साहू को रेत से भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम और भगवान बागेश्वरनाथ की दिव्य आकृतियां उकेरने के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कलाकार की सृजनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कला न केवल हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करती है, बल्कि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान भी दिलाती है।
समापन समारोह में जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों, मातृशक्ति, युवाओं और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों की सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति को सफल एवं भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को मोरध्वज आरंग महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, गुरु बालकदास साहेब, सांसद विजय बघेल, बृजमोहन अग्रवाल, विधायक इंद्रकुमार साहू, मोतीलाल साहू, रोहित साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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धान खरीदी में अनियमितता पर सख्त रुख: 53 हजार क्विंटल धान की कमी पर कार्रवाई, प्रभारी निलंबित

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन के साथ धान खरीदी एवं भंडारण प्रणाली को संचालित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान जिला बेमेतरा के धान संग्रहण केंद्र सरदा-लेंजवारा में कुल 12,72,389.56 क्विंटल धान का भंडारण किया गया था। कलेक्टर बेमेतरा के निर्देश पर इस धान के भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता परीक्षण के लिए राजस्व, खाद्य, मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम, सहकारिता, कृषि उपज मंडी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग सहित संबंधित विभागों की संयुक्त जांच टीम गठित की गई।
संयुक्त जांच दल द्वारा 31 दिसंबर 2025 को किए गए भौतिक सत्यापन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान पाया गया कि धान के स्टैक पूर्ण स्थिति में नहीं थे, बोरे अस्त-व्यस्त पड़े थे और ऑनलाइन स्टॉक एवं मौके पर उपलब्ध धान में बड़ा अंतर पाया गया।
जांच में धान मोटा 4,209.19 क्विंटल और धान सरना 49,430.03 क्विंटल, कुल 53,639.22 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई। इस संबंध में तैयार जांच प्रतिवेदन शासन को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजा गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला विपणन अधिकारी, बेमेतरा द्वारा संग्रहण केंद्र सरदा-लेंजवारा के प्रभारी नितीश पाठक (क्षेत्र सहायक) को दिनांक 14 जनवरी 2026 से समस्त दायित्वों से मुक्त करते हुए निलंबन एवं विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए हेमंत कुमार देवांगन, क्षेत्र सहायक को आगामी आदेश तक धान संग्रहण केंद्र लेंजवारा (सरदा) एवं भंडारण केंद्र बेमेतरा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
भौतिक सत्यापन के दौरान सरदा एवं लेंजवारा संग्रहण केंद्रों में कुल 11,648.62 क्विंटल धान उपलब्ध पाया गया, जिसमें से 3,000 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है। शेष धान का उठाव नियमानुसार सतत जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि संग्रहण केंद्रों में प्लास्टिक बोरों में धान का भंडारण किया गया था, जो निर्धारित मानकों के विरुद्ध है। इस अनियमितता को भी विभागीय जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि “धान का हर दाना खरीदा जाएगा, किसानों को समय पर पूरा भुगतान मिलेगा, लेकिन अनियमितता करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई तय है।” सरकार धान खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनाने के लिए सख़्ती और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।
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वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ: छत्तीसगढ़ में 19 से 26 जनवरी तक द्वितीय चरण के राज्यव्यापी कार्यक्रम

Raipur: राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राज्यभर में विशेष आयोजनों की श्रृंखला संचालित की जा रही है। इसी क्रम में द्वितीय चरण के कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक हस्तियां और बड़ी संख्या में नागरिक सहभागिता करेंगे।
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया जाएगा।
द्वितीय चरण के अंतर्गत 19 से 26 जनवरी तक राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की भागीदारी से संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला और प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों की विशेष प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।
जनभागीदारी को और व्यापक बनाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी सहयोग से प्रदेशभर में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी आवाज में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
गौरतलब है कि इस अभियान का प्रथम चरण 7 से 14 नवंबर 2025 के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है।
वहीं तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ तथा चतुर्थ चरण 1 से 7 नवंबर 2026 के दौरान आयोजित किया जाएगा।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक जनभागीदारी के साथ संपन्न किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को और सशक्त करना है।
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Chhattisgarh: समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अनियमितता, 31 निलंबित, 3 पर FIR, एक बर्खास्त

Raipur: राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में सामने आई अनियमितताओं पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के बाद समिति प्रबंधकों सहित धान खरीदी से जुड़े 38 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 31 कर्मचारियों को निलंबित, तीन के खिलाफ एफआईआर, एक की सेवा समाप्त, दो को सेवा से पृथक और एक को कार्य से पृथक किया गया है। यह कार्रवाई प्रदेश के 12 जिलों—दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार-भाटापारा में की गई है। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि धान खरीदी में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
किन कारणों से हुई कार्रवाई
- स्कंध में कमी के 5 मामले
- अधिक स्कंध व अव्यवस्थित स्टेकिंग के 3 मामले
- नीति व निर्देशों के उल्लंघन के 4 मामले
- अमानक धान खरीदी के 5 मामले
- धान खरीदी में अनियमितता के 11 मामले
- अवकाश के दिन खरीदी के 3 मामले
- फर्जी खरीदी, टोकन अनियमितता, बिना आवक पर्ची, अवैध वसूली व अव्यवस्था के मामले
- बारदाना वितरण में अनियमितता के 2 मामले सामने आए हैं।
प्रमुख जिलों में कार्रवाई की झलक
दुर्ग: स्कंध गड़बड़ी व नीति उल्लंघन पर 8 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित
बेमेतरा: अमानक व फर्जी धान खरीदी पर निलंबन, एक पर एफआईआर
कबीरधाम: स्कंध कमी व बारदाना अनियमितता पर निलंबन, एक पर एफआईआर
बिलासपुर: खराब धान खरीदी पर निलंबन, 920 बोरे कम मिलने पर एफआईआर
जांजगीर-चांपा: छुट्टी के दिन खरीदी व टोकन गड़बड़ी पर निलंबन
रायगढ़: धान खरीदी अनियमितता पर चार सहायक प्रबंधक निलंबित
सक्ती: बिना आवक पर्ची खरीदी पर एक प्रभारी सेवा से पृथक
जगदलपुर: दो समिति प्रबंधक निलंबित
रायपुर: किसानों से अवैध वसूली पर लिपिक-ऑपरेटर की सेवा समाप्त
गरियाबंद: लापरवाही व अनियमितता पर निलंबन व कार्य से पृथक
महासमुंद: अनियमितता पर दो प्रभारी पर एफआईआर, एक निलंबित
बलौदाबाजार-भाटापारा: नीति उल्लंघन व स्कंध कमी पर निलंबन, एक सेवा से पृथक













