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अर्थ जगत

Jobs: ग्रेजुएट इंजीनियर के लिए मौका, रिलायंस में इस कार्यक्रम के तहत होगी भर्ती

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Jobs: Opportunity for graduate engineer, recruitment will be done under this program in Reliance

Reliance: बेरोजगार इंजीनियर्स के लिए एक सुनहरा मौका है। भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) युवा इंजीनियरों की भर्ती के लिए एक कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, रिलायंस ने पूरे भारत से ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (जीईटी) 2024 कार्यक्रम के तहत युवा इंजीनियरों के लिए अपना भर्ती अभियान शुरू किया है। इसका मकसद व्यावसायिक क्षेत्रों में युवा, उच्च क्षमता वाली इंजीनियरिंग प्रतिभा को अवसर देना है। कार्यक्रम के लिए पंजीकरण 11 जनवरी से शुरू हुआ। पंजीकरण कराने की आखिरी तारीख 19 जनवरी है।

ऑनलाइन होगी आवेदन प्रक्रिया 

ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी(GET) कार्यक्रम के तहत रिलायंस एआईसीटीई-अनुमोदित संस्थानों से कैमिकल, इलेक्ट्रिक, मैकेनिकल जैसे विभिन्न विषयों के 2024 बैच के बी.टेक और बी.ई. स्नातकों के ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित कर रही है। चयनित छात्रों को पांच से आठ फरवरी के बीच ऑनलाइन मूल्यांकन (संज्ञानात्मक परीक्षण तथा विषय वस्तु) से गुजरना होगा। इसमें सफल रहने वाले छात्रों का 23 फरवरी से एक मार्च के बीच इंटरव्यू लिया जाएगा। चयन प्रक्रिया मार्च के अंत में पूरी होगी। इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया पहली बार ऑनलाइन की गई है।

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Paytm: आरबीआई का बड़ा एक्शन, Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द, 24 अप्रैल से बैंकिंग सेवाएं बंद

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Paytm: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बड़ा फैसला लेते हुए Paytm Payments Bank (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही 24 अप्रैल यानी आज से ही बैंक का कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया गया है। RBI ने साफ कहा कि बैंक के संचालन में गंभीर खामियां थीं और ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। हालांकि, Paytm का UPI ऐप पहले की तरह काम करता रहेगा।

ग्राहकों के लिए राहत, पैसा सुरक्षित

RBI के मुताबिक, बैंक के पास इतनी नकदी है कि वह अपने सभी ग्राहकों की जमा राशि वापस कर सकता है। यानी जमाकर्ताओं का पैसा डूबने का खतरा नहीं है।

आपके लिए क्या बदलेगा ?

अगर आप Paytm UPI को State Bank of India या HDFC Bank जैसे अन्य बैंकों से लिंक करके इस्तेमाल कर रहे हैं, तो कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर आपका अकाउंट सिर्फ Paytm Payments Bank में है, तो आपको इसे किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट करना होगा। बैंक में जमा पैसा निकाला जा सकता है।

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RBI ने बताईं लाइसेंस रद्द करने की 4 वजह

ग्राहकों का जोखिम: बैंक के कामकाज से ग्राहकों का पैसा सुरक्षित नहीं था।

मैनेजमेंट की लापरवाही: अधिकारियों के फैसले खाताधारकों के हित में नहीं थे।

जारी रखना नुकसानदायक: RBI को लगा कि बैंक जारी रखने से जोखिम बढ़ेगा।

नियमों का उल्लंघन: KYC और अन्य शर्तों का लगातार उल्लंघन किया गया।

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शेयर बाजार में असर

इस फैसले के बाद One97 Communications के शेयर में गिरावट देखी गई। शुक्रवार को शेयर 0.5% गिरकर 1,153 रुपए पर बंद हुआ। बता दें कि Paytm Payments Bank पर RBI की सख्ती नई नहीं है। मार्च 2022 में नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लगाई गई थी। साथ ही जनवरी 2024 में नए डिपॉजिट लेने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद बैंक सीमित सेवाओं तक ही सिमट गया था।

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Middle East Tension: मिडिल-ईस्ट तनाव का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 92.05 पर पहुंचा, 2026 में 2% से ज्यादा टूटा

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Middle East Tension: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। 4 मार्च को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में यह 91.98 के स्तर तक फिसला था। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक रुपए पर दबाव बना रह सकता है। इस साल अब तक रुपया 2% से अधिक टूट चुका है और 2026 में उभरते बाजारों की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।

तेल की कीमत और डॉलर की मांग बढ़ी

मिडिल-ईस्ट में Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी है। डॉलर की मांग बढ़ने और वैश्विक बाजार में उसकी मजबूती से रुपया दबाव में आ गया है।

सेफ हेवन की ओर झुकाव

तनावपूर्ण माहौल में विदेशी निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इससे डॉलर और मजबूत हुआ है। मजबूत डॉलर का मतलब है कि अन्य मुद्राएं, खासकर उभरते बाजारों की करेंसी, कमजोर होती हैं।

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महंगाई का खतरा

तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। महंगे आयात से चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं। यही वजह है कि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

पिछले महीने की राहत अल्पकालिक

हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड समझौते के बाद रुपए में हल्की मजबूती देखी गई थी, लेकिन मिडिल-ईस्ट में हालात बिगड़ने से वह राहत ज्यादा दिन टिक नहीं सकी। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को फिर से नकारात्मक बना दिया।

आम आदमी पर असर

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रुपए की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है। विदेश में पढ़ाई, यात्रा या डॉलर में भुगतान वाले खर्च महंगे हो जाएंगे। मोबाइल, लैपटॉप और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। यदि कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

आगे क्या?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि रुपए की दिशा काफी हद तक इजराइल-ईरान संघर्ष और वैश्विक तेल बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बाजार में हस्तक्षेप कर रुपए को अत्यधिक गिरावट से बचाने की कोशिश कर सकता है।

करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

किसी भी मुद्रा की कीमत मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आता है तो रुपया कमजोर होता है। वहीं, विदेशी निवेश और डॉलर भंडार में बढ़ोतरी से रुपया मजबूत हो सकता है। इसे ही मुद्रा अवमूल्यन (Currency Depreciation) कहा जाता है।

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Budget 2026 Impact: कैंसर की दवाएं, EV बैटरी और विदेश यात्रा सस्ती, शराब और शेयर ट्रेडिंग महंगी

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Budget 2026 Impact: Cancer drugs, EV batteries and foreign travel cheaper, alcohol and share trading costlier

Budget 2026 Impact: बजट में आम आदमी के लिए सीधे दाम घटाने-बढ़ाने के बड़े ऐलान कम ही होते हैं, क्योंकि रोजमर्रा की ज्यादातर चीजों के रेट GST काउंसिल तय करती है। लेकिन सरकार जब इम्पोर्ट ड्यूटी, TCS और STT में बदलाव करती है, तो उसका असर बाजार और जेब पर साफ दिखता है।

आइए जानते हैं Budget 2026 से क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा।

सस्ता क्या हुआ?

1. कैंसर की दवाएं सस्ती

सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 लाइफ सेविंग दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है।
इसके साथ ही 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए इम्पोर्ट की जाने वाली दवाओं और स्पेशल फूड पर भी अब टैक्स नहीं लगेगा। इससे महंगे इलाज पर निर्भर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

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2. माइक्रोवेव ओवन सस्ते हो सकते हैं

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए माइक्रोवेव ओवन के कुछ खास पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। आने वाले समय में माइक्रोवेव की कीमतों में कमी आ सकती है।

3. EV बैटरी और सोलर पैनल होंगे सस्ते

ग्रीन एनर्जी पर फोकस बढ़ाते हुए लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर ड्यूटी खत्म हुई। सोलर ग्लास में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई। इससे EV और सोलर सेक्टर की लागत घटेगी।

4. जूते और कपड़े सस्ते हो सकते हैं

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एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए लेदर, टेक्सटाइल और सी-फूड सेक्टर को राहत दी गई है। सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट लिमिट 1% से बढ़ाकर 3% किया गया। लेदर, सिंथेटिक जूतों और शू अपर्स के एक्सपोर्ट पर टैक्स छूट दी गई। कच्चा माल सस्ता होने से जूते और कपड़ों के दाम घट सकते हैं या स्थिर रहेंगे।

5. विदेश घूमना हुआ सस्ता

विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला TCS अब सिर्फ 2% कर दिया गया है। पहले 10 लाख से ज्यादा खर्च पर 20% तक टैक्स लगता था। अब रकम की कोई लिमिट नहीं होगी।

6. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सस्ता

एयरक्राफ्ट के पुर्जों और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म। डिफेंस सेक्टर में MRO के लिए मंगवाए जाने वाले कच्चे माल पर भी टैक्स नहीं। इससे विमान निर्माण और मरम्मत की लागत घटेगी।

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7. विदेश से निजी सामान मंगाना सस्ता

पर्सनल यूज के लिए विदेश से मंगाए जाने वाले सामान पर टैक्स 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है।

क्या हुआ महंगा?

1. शराब महंगी हो सकती है

शराब पर लगने वाला TCS 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। दुकानदारों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर कीमतों पर पड़ सकता है।

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2. शेयर बाजार में ट्रेडिंग महंगी

फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया। ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT 0.15% हुआ। हर खरीद-बिक्री पर निवेशकों को ज्यादा टैक्स देना होगा।

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Economic Survey: FY27 में GDP ग्रोथ 6.8–7.2% का अनुमान, महंगाई 4% के दायरे में रहेगी

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Economic Survey: GDP growth estimated at 6.8–7.2% in FY27, inflation to remain within 4%

Economic Survey:  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी को लोकसभा में देश का सालाना ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश किया। सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। सर्वे में महंगाई, रोजगार, खेती-किसानी, सरकारी कर्ज, विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट से जुड़ी अहम तस्वीर पेश की गई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बताई गई है।

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की 7 बड़ी बातें

1.महंगाई

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार RBI और IMF का अनुमान है कि आने वाले समय में महंगाई दर 4% (±2%) के तय दायरे में बनी रहेगी।
खरीफ की अच्छी पैदावार और रबी की बेहतर बुआई को देखते हुए RBI ने दिसंबर 2025 में FY26 के लिए महंगाई अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था। FY27 की पहली और दूसरी तिमाही में महंगाई क्रमशः 3.9% और 4% रहने का अनुमान है।

2. GDP ग्रोथ

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सर्वे के मुताबिक FY27 में GDP ग्रोथ 6.8%–7.2% रह सकती है। वर्तमान वित्त वर्ष FY26 में विकास दर 7.4% रहने का अनुमान है, जो RBI के 7.3% अनुमान से भी अधिक है।

3. रोजगार

भारत की वर्कफोर्स 56 करोड़ से अधिक है। टैक्स सुधार, नियमों के सरलीकरण और श्रम सुधारों के चलते इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर में रोजगार बढ़ा है। FY24 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार 6% बढ़ा, जिससे एक साल में 10 लाख से अधिक नई नौकरियां जुड़ीं।
सर्वे में स्किल गैप कम करने के लिए स्कूल स्तर पर वोकेशनल ट्रेनिंग पर जोर दिया गया है।

4.खेती-किसानी

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार FY26 में कृषि विकास दर 3.1% रहने की उम्मीद है।
2024-25 में अनाज उत्पादन 3,320 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिससे महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिली।
सरकार का फोकस अब उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय सुरक्षा और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर है।

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5.सरकारी कर्ज

केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटा कम करने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है।
FY25 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.8% रहा, जबकि FY26 के लिए लक्ष्य 4.4% तय किया गया है।
घाटा कम होने का मतलब है मजबूत अर्थव्यवस्था और महंगाई पर नियंत्रण।

विदेशी मुद्रा भंडार

वैश्विक मंदी की आशंका के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार FY24 में 668 अरब डॉलर से बढ़कर FY25 में 701 अरब डॉलर पहुंच गया है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से रुपये को स्थिरता मिलती है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एक्सपोर्ट

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वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत का कुल एक्सपोर्ट FY25 में 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने के बावजूद वस्तु निर्यात 2.4% और सर्विस एक्सपोर्ट 6.5% बढ़ा।
भारत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने के लिए EU, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ ट्रेड डील की है।

इकोनॉमिक सर्वे क्या है?

इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का सालाना दस्तावेज होता है, जो बीते एक साल की आर्थिक स्थिति और भविष्य की दिशा को दर्शाता है। इसे वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक डिवीजन द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में तैयार किया जाता है।  देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया और तब से इसे बजट से एक दिन पहले संसद में रखा जाता है।

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Chhattisgarh: DPIIT की BRAP रैंकिंग में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, निवेशकों के लिए भरोसे का केंद्र बना राज्य

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Chhattisgarh emerged as the 'Top Achiever' in the DPIIT's BRAP rankings, becoming a hub of trust for investors

Raipur: छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उद्योग संगम’ में राज्य को बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की चारों प्रमुख श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। यह उपलब्धि उस परिवर्तन यात्रा की गवाही है जो छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में तय की है। कभी BRAP रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाला यह राज्य आज गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा है। सुशासन, पारदर्शिता और उद्योग-अनुकूल नीतियों के बल पर छत्तीसगढ़ ने खुद को सुधार और विकास का नया मॉडल बना दिया है।

राज्य ने BRAP के तहत अब तक 434 सुधार लागू किए हैं — जो इज ऑफ डूइंग बिज़नेस और इज ऑफ लिविंग को सशक्त बनाने की दिशा में उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इन सुधारों में सबसे बड़ी पहल रही ‘जन विश्वास अधिनियम’, जिसके तहत छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बना जिसने छोटे कारोबारी अपराधों को डीक्रिमिनलाइज कर दिया। इस कदम ने सरकार और उद्योग जगत के बीच भरोसे और सहयोग का नया पुल बनाया है। अब कारोबार में अनावश्यक डर या जटिलता की जगह पारदर्शिता और सहजता ने ले ली है।

इसी कड़ी में राज्य ने भूमि अभिलेखों के स्वचालित म्यूटेशन की ऐतिहासिक शुरुआत की — यह कदम छत्तीसगढ़ को देश का पहला राज्य बनाता है जहाँ जमीन पंजीयन के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण स्वतः हो जाता है। इससे न केवल प्रक्रियाएं सरल हुई हैं बल्कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिली है।

राज्य सरकार ने कई और सुधारों को धरातल पर उतारें हैं — जैसे दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति, फ्लैटेड इंडस्ट्री के लिए FAR में वृद्धि, भूमि उपयोगिता बढ़ाने हेतु सेटबैक में कमी, और फैक्ट्री लाइसेंस की वैधता 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने के साथ ऑटो-रिन्यूअल सुविधा। इन सभी कदमों ने मिलकर राज्य में उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद, स्थिर और पारदर्शी वातावरण तैयार किया है।

इन उल्लेखनीय सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और निवेश आयुक्त ऋतु सेन (IAS) को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने सम्मानित किया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ अब भारत के आर्थिक परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन सुधारों का असर निवेश माहौल पर साफ दिख रहा है। बीते दस महीनों में ₹7.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि निवेशक छत्तीसगढ़ की नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और तेज़ निर्णय प्रणाली पर पूरा भरोसा करते हैं।

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यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए नए युग की शुरुआत है — ऐसा छत्तीसगढ़ जो विकास की दिशा तय कर रहा है, अवसरों को गढ़ रहा है और सबके लिए प्रगतिशील भविष्य की नींव रख रहा है।

“छत्तीसगढ़ का ‘टॉप अचीवर’ बनना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उद्योग, सुशासन और पारदर्शिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ ने निचले पायदान से उठकर देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की पंक्ति में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि सरकार की प्रतिबद्धता, प्रशासन की मेहनत और निवेशकों के भरोसे का परिणाम है। छत्तीसगढ़ अब इज ऑफ डूइंग बिज़नेस से आगे बढ़कर इज ऑफ लिविंग का भी प्रतीक बन चुका है – जहाँ सुधार, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।” – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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