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UP News: भाजपा ने उपचुनाव के लिए जारी की 7 उम्मीदवारों की सूची, करहल सीट से अखिलेश यादव के बहनोई को मौका

Lucknow: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तरप्रदेश में आगामी विधानसभा उप चुनावों के लिए 7 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। फिलहाल भाजपा ने कानपुर की सीसमऊ और मिर्जापुर सीट पर उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है। आज जारी सूची में भाजपाा ने करहल से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बहनोई अनुजेश यादव को टिकट देकर मुकाबला रोचक बना दिया है। अनुजेश यादव यूपी की आजमगढ़ सीट से सांसद धर्मेंद्र यादव के सगे बहनोई हैं। अनुजेश की शादी धर्मेंद्र यादव की सगी और अखिलेश यादव की चचेरी बहन संध्या से हुई है। संध्या उर्फ बेबी यादव 2015 से 2020 तक मैनुपरी से जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं अनुजेश भी फिरोजाबाद से इसी कार्यकाल में जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। करहल सीट से सपा ने तेज प्रताप को उतारा है, जो लालू यादव के दामाद हैं और अखिलेश यादव के भतीजे हैं।
देखें किस सीट से भाजपा ने किसे दिया मौका
- कुंदरकी से रामवीर सिंह ठाकुर
- गाजियाबाद से संजीव शर्मा
- खैर (अजा) से सुरेंद्र दिलेर
- करहल से अनुजेश यादव
- फूलपुर से दीपक पटेल
- कटेहरी से धर्मराज निषाद
- मझवां से सुचिस्मिता मौर्या
बता दें कि उत्तरप्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। इन सीटों के नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। यूपी की 10 सीटों पर उपचुनाव होने थे, लेकिन अयोध्या की मिल्कीपुर सीट को लेकर मामला कोर्ट में पेंडिंग होने की वजह से चुनाव आयोग ने यहां के लिए उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में अब नौ सीटों पर ही चुनाव होंगे।
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Ayodhya: मुख्यमंत्री योगी ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच के लिए SIT बनाई, कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपए मिले

Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितता और करोड़ों रुपए की चोरी के दावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की थी। इसके कुछ ही घंटों बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन कर दिया।
इसी बीच मामले में नया मोड़ तब आया जब मंदिर से जुड़े कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि कुछ रकम गोबर में दबाकर छिपाई गई थी, जबकि कुछ नकदी बक्से में रखी हुई मिली।
रकम किसकी है, अभी नहीं हुआ स्पष्ट
फिलहाल बरामद राशि का स्रोत स्पष्ट नहीं हो सका है। लवकुश मिश्रा के पिता ने भी घर से नकदी मिलने की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार लवकुश मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने का कार्य करता था। जानकारी के मुताबिक उसकी नियुक्ति उसके ससुर की सिफारिश पर हुई थी। उसका साला अनुकल्प मिश्रा पहले से मंदिर में कार्यरत था। सूत्रों का दावा है कि लवकुश और अनुकल्प दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं।
तीन सदस्यीय SIT करेगी जांच
सरकार द्वारा गठित SIT में प्रशासन, पुलिस और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
1.विजय विश्वास पंत- लखनऊ मंडलायुक्त और वरिष्ठ IAS अधिकारी। IIT कानपुर से बीटेक कर चुके विजय विश्वास पंत SIT के अध्यक्ष बनाए गए हैं। वे मंदिर की दान और चढ़ावा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे तथा सुधार संबंधी सुझाव देंगे।
2.किरन एस.- वरिष्ठ IPS अधिकारी और वर्तमान में आईजी रेंज। वे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में डीआईजी के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उन्हें आपराधिक जांच और तथ्यों की पड़ताल की जिम्मेदारी दी गई है।
3. नीलरतन- वित्त विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे मंदिर के वित्तीय लेन-देन, ऑडिट रिकॉर्ड और दान प्रबंधन व्यवस्था की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
दान प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की होगी समीक्षा
SIT केवल कथित चोरी के आरोपों की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन की पूरी व्यवस्था का भी अध्ययन करेगी। टीम यह भी देखेगी कि भविष्य में ऐसी आशंकाओं को रोकने के लिए कौन-से सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। मामले को लेकर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रशासन दो नों सतर्क हैं। अब सभी की नजर SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
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Bihar: सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले बवाल, पटना रेलवे स्टेशन पर छात्रों का प्रदर्शन, ट्रेनों में तोड़फोड़

Patna: बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के पहले दिन शनिवार को पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर जमकर हंगामा हुआ। ट्रेनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने रेलवे ट्रैक पर उतरकर प्रदर्शन किया, कई ट्रेनों को रोक दिया और एक परीक्षा स्पेशल ट्रेन में तोड़फोड़ भी की। हंगामे के दौरान कुछ स्थानों पर पथराव की भी सूचना है। स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाकर ट्रेन परिचालन बहाल कराया। पुलिस ने मामले में 6 छात्रों को गिरफ्तार किया है।
DM बोले- कुछ लोगों ने बार-बार खींची चेन
पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन ने बताया कि आधी रात के आसपास हंगामे की सूचना मिली थी। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोगों ने बार-बार ट्रेन की इमरजेंसी चेन खींची और विभिन्न मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए पहले से दो स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं, इसके बावजूद कुछ लोगों ने रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया और उन छात्रों को भी रोकने का प्रयास किया जो परीक्षा देने जाना चाहते थे।जिलाधिकारी के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। फिलहाल हालात सामान्य हैं और ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से जारी है।
चश्मदीद ने बताया- दुकान में की तोड़फोड़
घटना के प्रत्यक्षदर्शी संजय कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पहले ट्रेनों को रोका गया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने के बावजूद भीड़ नहीं हटी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान उनकी दुकान में तोड़फोड़ की गई और अंदर पत्थर फेंके गए। उन्होंने कहा कि जान बचाने के लिए उन्हें मौके से भागना पड़ा।
500 केंद्रों पर हो रही भर्ती परीक्षा
बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के लिए राज्यभर में 500 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। कुल 4,128 पदों के लिए 16 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। परीक्षा 17 जून तक विभिन्न चरणों में आयोजित की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया के तहत कक्षपाल के 2,417 पद, मद्य निषेध सिपाही के 1,603 पद और चलंत दस्ता सिपाही के 108 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
परीक्षा के लिए प्रत्येक शिफ्ट में अलग-अलग प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट तैयार की गई हैं। प्रश्नपत्र प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में निर्धारित समय पर खोले जाएंगे। प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को वैध फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य किया गया है। बिना पहचान पत्र के किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रशासन ने उम्मीदवारों से समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की अपील की है।
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Ayodhya: राम मंदिर दान विवाद PMO तक पहुंचा, नृपेंद्र मिश्र की अयोध्या में गोपनीय बैठक, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग और अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र का अयोध्या दौरा चर्चा का विषय बन गया है। सोमवार को वे अचानक अयोध्या पहुंचे और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों तथा मंदिर प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की। बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया और इसकी कार्यसूची को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।
नृपेंद्र मिश्र की बैठक के बाद बढ़ी चर्चाएं
सूत्रों के मुताबिक, नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं और हालिया घटनाक्रम को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद वह मंगलवार सुबह दिल्ली लौट गए। दान राशि को लेकर उठे विवाद के बीच उनके इस दौरे को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि मंदिर प्रशासन और हालिया विवाद से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शीर्ष स्तर तक भेजी जा सकती है।
PM को पत्र लिखकर जांच की मांग
भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान, चढ़ावे और मंदिर प्रशासन से जुड़े किसी भी आरोप की पारदर्शी जांच आवश्यक है। उन्होंने पत्र में लिखा कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोपरि बताते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
महंत कमल नयन दास बोले- जांच करने वालों पर भी उठ रहे सवाल
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद पर महंत कमल नयन दास ने कहा कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जांच एजेंसियों और जांच करने वालों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। ऐसे माहौल में निष्पक्ष जांच बड़ी चुनौती बन गई है।
बालयोगी रामदास ने भी की पारदर्शी जांच की मांग
सरयू तट स्थित करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ी खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के मन में पैदा हुआ भ्रम दूर हो सके। फिलहाल, दान राशि को लेकर उठे विवाद और जांच की मांग के बीच सभी की नजरें मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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Patna: खान सर को राहत, गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक, 20 जून को होगी अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई

Patna: फायरिंग मामले में चर्चित शिक्षाविद और खान ग्लोबल स्टडीज के डायरेक्टर खान सर को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को पटना सिविल कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने पुलिस को मामले की केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट कहा है कि अगली सुनवाई या अगले आदेश तक खान सर के खिलाफ कोई कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाएगी।
20 जून को होगी अगली सुनवाई
खान सर की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने दलील दी कि गोली आत्मरक्षा में चलाई गई थी और इसका उद्देश्य किसी प्रकार का भय या आतंक फैलाना नहीं था। वकील के अनुसार, अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जून को करेगी, जहां अग्रिम जमानत याचिका पर विस्तृत बहस होगी।
सोमवार को दायर की थी अग्रिम जमानत याचिका
खान सर ने सोमवार को पटना जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया था। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और हथियारों के कथित अवैध उपयोग से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
FIR में क्या आरोप?
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, खान सर के सुरक्षा गार्डों के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में आरोप है कि खान सर ने गार्ड्स से कहा था, “तुम गोली चलाओ, बाकी मैं देख लूंगा।” इसी आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज
इधर, खान सर की कोचिंग पर हमले के मामले में गिरफ्तार ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद को अदालत से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च
रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर सोमवार को पटना में छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों ने रौशन आनंद के समर्थन में नारे लगाए और खान सर की गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शन में शामिल छात्र पोस्टर लेकर पहुंचे थे, जिन पर लिखा था- “झूठे केस में हमारा जीवन मत बर्बाद करो” और “मैं निर्दोष हूं”।
मामले की प्रमुख बातें
- खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक
- पुलिस से केस डायरी तलब
- 20 जून को होगी अगली सुनवाई
- हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज
- रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज
- पटना में छात्रों का कैंडल मार्च
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Varanasi: वाराणसी में आधी रात बुलडोजर एक्शन, अजगैब शहीद मस्जिद ढहाई गई

Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मंगलवार देर रात प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भदऊ चुंगी स्थित अजगैब शहीद मस्जिद को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के मुताबिक मस्जिद रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बनी थी। करीब 42 फीट ऊंची इस संरचना को 5 बुलडोजरों की मदद से महज 22 मिनट में गिरा दिया गया।
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रशासन करीब 1000 पुलिसकर्मियों के साथ रात 12 बजे मौके पर पहुंचा। डीसीपी काशी गौरव बंसवाल और एडीसीपी वैभव बांगर की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग की गई और लोगों की आवाजाही रोक दी गई।
रातों-रात हटाया गया मलबा
मस्जिद ढहाने के बाद प्रशासन ने मलबा भी तुरंत ट्रकों में भरकर हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई रात में इसलिए की गई ताकि ट्रैफिक और जनजीवन प्रभावित न हो।
रेलवे की जमीन पर कब्जे का दावा
प्रशासन के अनुसार किला कोहना क्षेत्र स्थित यह जमीन रेलवे की है। आरोप है कि पहले यहां मजार बनाई गई और बाद में मस्जिद एवं कब्रिस्तान का निर्माण किया गया। वर्ष 2024 में काशी मॉडल रेलवे स्टेशन विस्तार परियोजना के लिए कराए गए सर्वे में जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी।
कोर्ट में हारने के बाद हुई कार्रवाई
मुस्लिम पक्ष का दावा है कि मस्जिद करीब 200 साल पुरानी थी। मस्जिद के मुतवल्ली शमीम उस्ताद थे, जिनका दो महीने पहले निधन हो चुका है। रेलवे द्वारा जमीन खाली कराने को लेकर मामला अदालत पहुंचा था, जहां फैसला रेलवे के पक्ष में आया। इसके बाद रेलवे ने तीन बार नोटिस जारी किए, लेकिन जमीन खाली नहीं की गई।
अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश और नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। वहीं, काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार कार्य के लिए इस जमीन को आवश्यक बताया गया है।
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