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UK Election: 14 साल बाद लेबर पार्टी की सत्ता में वापसी, कीर स्टार्मर होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री

UK Election: कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी ने ब्रिटेन के आम चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है। वहीं ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते कंजर्वेटिव पार्टी 14 साल बाद सत्ता से बाहर होने जा रही है। 5 जुलाई (शुक्रवार) को आए नतीजों में लेबर पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। उसे 650 में से अब तक 392 सीटें मिली हैं। जबकि ब्रिटेन में सरकार बनाने के लिए 326 सीटों की जरूरत होती है।
चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद ऋषि सुनक लंदन के लिए रवाना हो गए हैं। वे किंग चार्ल्स को इस्तीफा सौंपेंगे। इसके बाद चार्ल्स देश में सरकार बनाने के लिए स्टार्मर को न्योता देंगे। हार के बाद ऋषि सुनक ने कहा कि ‘मैं माफी मांगता हूं और इस हार की जिम्मेदारी लेता हूं।’ सुनक ने कहा कि ‘लेबर पार्टी ने इस चुनाव में जीत हासिल की है और मैंने कीर स्टार्मर को फोन कर उनकी जीत पर बधाई दी। आज, सत्ता शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित हो जाएगी।
बता दें कि ब्रिटेन की संसद में कुल 650 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 326 सीटों का है। ब्रिटेन चुनाव के मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल्स में भी लेबर पार्टी की प्रचंड जीत का दावा किया गया था। एग्जिट पोल्स में लेबर पार्टी को 410 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बताया गया था। अब चुनाव नतीजों ने एग्जिट पोल्स के दावों को सच साबित कर दिया है।
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ग्रीनलैंड पर ट्रम्प का दावा: WEF में बोले- इसकी सुरक्षा सिर्फ अमेरिका कर सकता है

Donald Trump WEF 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने विवादित रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने सही ठहराया है। बुधवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में दिए भाषण में ट्रम्प ने कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा अमेरिका के अलावा कोई और देश नहीं कर सकता।
हालांकि, पहली बार ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए अमेरिका ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके बावजूद उन्होंने डेनमार्क पर तीखा हमला बोलते हुए उसे “अहसान फरामोश” बताया।
ट्रम्प ने शिकायती लहजे में कहा कि वे “सिर्फ एक बर्फ का टुकड़ा” चाहते हैं, लेकिन यूरोप उसे देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस बात को हमेशा याद रखेगा और यूरोप गलत दिशा में जा रहा है।
अपने भाषण के दौरान ट्रम्प ने फ्रांस, कनाडा और अन्य देशों की भी आलोचना की। साथ ही उन्होंने सोमालिया के लोगों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाराजगी देखी जा रही है।
WEF भाषण के बाद ट्रम्प ने भारतीय मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और उन्हें अपना दोस्त बताया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक अच्छा व्यापार समझौता हो सकता है।
ट्रम्प के भाषण की 7 अहम बातें
1.ग्रीनलैंड पर
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के अलावा कोई भी देश ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ही इसकी सुरक्षा की थी और बाद में इसे डेनमार्क को लौटाना अमेरिका की “बड़ी गलती” थी।
2.डेनमार्क पर
उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में डेनमार्क जर्मनी से जल्दी हार गया था और अमेरिका ने उसकी मदद की। इसके बावजूद डेनमार्क आज ग्रीनलैंड का कंट्रोल छोड़ने को तैयार नहीं है।
3.कनाडा पर
ट्रम्प ने कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत कुछ मुफ्त में मिलता है और वह अमेरिका की वजह से ही टिका हुआ है।
4.वेनेजुएला पर
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कदमों के बाद वेनेजुएला जल्द ही बड़ा आर्थिक लाभ कमाएगा। दोनों देशों के बीच 5 करोड़ बैरल तेल को लेकर समझौते की बात भी कही गई।
5.यूरोप पर
ट्रम्प ने कहा कि यूरोप की इमिग्रेशन और आर्थिक नीतियां नाकाम हो चुकी हैं और उसे अमेरिका जैसा मॉडल अपनाना चाहिए।
6.NATO पर
उन्होंने संदेह जताया कि जरूरत पड़ने पर NATO अमेरिका की मदद करेगा या नहीं, जबकि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहता है।
7.यूक्रेन युद्ध पर
ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध की जिम्मेदारी यूरोप को लेनी चाहिए। अमेरिका यूक्रेन से दूर है और पहले ही अरबों डॉलर की मदद कर चुका है।
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Iran Protest: महंगाई और गिरती करेंसी को लेकर सड़कों पर उतरे लोग, प्रदर्शनों में 39 की मौत

Iran Protest: ईरान में महंगाई और गिरती करेंसी को लेकर दो हफ्ते से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। गुरुवार 8 जनवरी की रात प्रदर्शन और उग्र हो गए, जब ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की। पहलवी की अपील के बाद बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। इसी बीच ईरानी सरकार ने सड़कें खाली कराने के लिए सुरक्षाबलों को उतार दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान के 50 से अधिक शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर निकलकर ईरानी शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
रेजा पहलवी के समर्थन में प्रदर्शनकारी
सबसे खास बात ये है कि प्रदर्शनों के दौरान रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि अब तक यहां शाह के समर्थन में नारेबाजी करने पर मौत की सजा मिलती रही है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में 39 लोगों की जानें गई हैं, जबकि 2,260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
रेजा पहलवी ने क्या कहा
निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरकर इस्लामिक रिपब्लिक का विरोध करने की अपील की। पहलवी ने एक बयान में कहा कि ईरान पर दुनिया की नजरें हैं। सड़कों पर उतरें और एक होकर अपनी मांगों को जोर से उठाएं। मैं इस्लामिक रिपब्लिक, उसके नेता और रिवॉल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी देता हूं कि दुनिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आप पर करीब से नजर रख रहे हैं। लोगों पर जुल्म का जवाब जरूर दिया जाएगा।
इंटरनेट सेवा बंद
ईरानी शासन ने हालात बेकाबू होते देख इंटरनेट सेवा बंद कर दी है और टेलीफोन लाइनें भी काट दी हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेट ब्लॉक्स ने कहा कि लाइव डेटा से पता चला है कि कई सर्विस प्रोवाइडर्स में कनेक्टिविटी ठप हो गई है, जिससे देश में कई इलाके ऑफलाइन हो गए हैं।
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Venezuela: यूएस कोर्ट में मादुरो ने सभी आरोपों से किया इनकार, बोले- मैं अभी भी वेनेजुएला का राष्ट्रपति

Nicolás Maduro: वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क के मैनहैटन स्थित फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। मादुरो को हथकड़ियों में अदालत लाया गया। मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया, कि वे अब भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं।
वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के वकील ने कोर्ट में उनकी गिरफ्तारी को “मिलिट्री एबडक्शन” यानी “सैन्य अपहरण” करार दिया और कहा कि इस मामले लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई चलेगी। फिलहाल मादुरो की तरफ से रिहाई की मांग नहीं की गईहै, लेकिन भविष्य में अधिकार सुरक्षित रखा है। वहीं मादुरो की पत्नी ने गंभीर चोटों का हवाला देते हुए मेडिकल जांच की मांग की है।
सुनवाई के दौरान मादुरो के पैरों में बेड़ियां लगी हुई थीं। वह और उनकी पत्नी एक ही मेज पर बैठे और दोनों ने हेडफोन लगाए हुए थे, ताकि अदालत में कही जा रही बातों को वो अपनी भाषा में समझ सकें। जज ने अदालत में दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया।इससे पहले मादुरो को लेकर एक हेलिकॉप्टर से अदालत के पास बने हेलिपैड पर लाया गया। हेलिकॉप्टर से उतरते ही उन्हें तुरंत एक वैन में बैठाया गया और कड़े सुरक्षा घेरे में वहां से सीधे अदालत ले जाया गया।
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Venezuela: अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा, पत्नी समेत अमेरिका लाया गया

Operation Absolute Resolve: अमेरिकी सेना ने 2-3 जनवरी की दरमियानी रात वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया। ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नामक यह मिशन 2-3 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया, जिसमें अमेरिका के 150 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल थे। शनिवार तड़के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ‘पकड़ लिया है।’ इसके साथ ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर निकोलस मादुरो की एक तस्वीर शेयर की है। साथ ही फ़्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि वेनेज़ुएला में अब अमेरिका की क्या भूमिका होगी।
ट्रंप ने शनिवार रात (भारतीय समयानुसार) ट्रुथ सोशल पर एक नई तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि “निकोलस मादुरो यूएसएस इवो जीमा (एक युद्धपोत) पर।” इससे पहले फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वेनेज़ुएला के नेता को इस युद्धपोत से अमेरिका लाया जा रहा है। इस तस्वीर में मादुरो की आंखों पर आई मास्क लगा है और वे ग्रे ट्रेकसूट पहने हुए हैं और कानों पर हेडफ़ोन है। इसके तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्लोरिडा में अपने आवास मार-आ-लागो में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया है कि अमेरिका वेनेज़ुएला को “तब तक चलाएगा” तब तक कि सत्ता का “सुरक्षित, सही और समझदारी भरा परिवर्तन नहीं हो जाता।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सेना की “ज़बरदस्त स्पीड, पावर, सटीकता और काबिलियत” की तारीफ की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि “तैयार स्थिति” में होने के बावजूद, वेनेज़ुएला की सेना “पूरी तरह से घबरा गई और बहुत जल्दी नाकाम हो गई। “उन्होंने आगे कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान कोई भी अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया, और न ही उनके हथियार या सामान को कोई नुक़सान पहुंचा। वहीं अमेरिका की अटॉर्नी जनरल ने बताया है कि न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में मादुरो और उनकी पत्नी के ख़िलाफ़ कानूनी मामला चलेगा।
इधर वेनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश के राष्ट्रपति के जीवित होने का सबूत मांगा है। उन्होंने कहा है कि मादुरो और उनकी पत्नी के बारे में कुछ भी अता-पता नहीं है। वहीं, रूस, चीन और कोलंबिया ने अमेरिका के हमलों की निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि “अमेरिका ने वेनेज़ुएला के खिलाफ सशस्त्र हमला किया है, जो गहरी चिंता की बात है और जिसकी निंदा की जानी चाहिए।”
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर आरोप लगाते रहे हैं कि वो अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी और अपराध फैलाने में शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी सेना की डेल्टा फ़ोर्स ने पकड़ा है। डेल्टा फोर्स अमेरिकी सेना की आतंकवाद विरोधी सबसे बड़ी यूनिट है। ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ में F-22, F-35, F-18 फाइटर जेट्स, B-1 बॉम्बर एयरक्राफ्ट और ड्रोन समेत 150 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल थे। ईस्टर्न टाइम के अनुसार ये मिशन 10 बजकर 46 मिनट पर शुरू किया और 2 बजकर 1 मिनट पर अमेरिकी सेना मादुरो के कंपाउंट में खड़ी थी।
अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के नाम से जाना जाने वाला यह मिशन 2 जनवरी की सबसे अंधेरी रातों के दौरान अंजाम दिया गया था और यह महीनों की योजना, पूर्वाभ्यास और अंतर-एजेंसी समन्वय का परिणाम था। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मार-ए-लागो से दिए बयान में कहा कि अमेरिकी सेना इतनी तेजी के साथ आगे बढ़ी कि मादुरो को बचने का मौका ही नहीं मिला। अमेरिकी सेना ने सिर्फ 30 मिनट के अंदर काराकास में सात बड़े विस्फोट करके निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया।
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Switzerland Ski Resort Fire: नए साल के जश्न के दौरान विस्फोट, 40 की मौत, वजह फिलहाल साफ नहीं

Switzerland Ski Resort Fire: स्विट्जरलैंड में नए साल 2026 का जश्न कुछ ही मिनटों में भयावह त्रासदी में बदल गया। यहां एक लक्जरी स्की रिसॉर्ट में न्यू ईयर पार्टी के दौरान बार में भीषण आग लग गई। आग और धुएं के बीच फंसे लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियां तोड़ दीं। स्विस प्रशासन के अनुसार इस हादसे में दर्जनों लोगों की मौत की आशंका है, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, स्विट्जरलैंड के क्रांस-मोंटाना में हुए इस भीषण अग्निकांड की शुरुआत शैंपेन की बोतलों पर लगाए गए स्पार्कलर्स से हुई। दो गवाहों ने एक फ्रांसीसी चैनल को बताया कि न्यू ईयर पार्टी के दौरान वेट्रेस शैंपेन की बोतलें लेकर चल रही थीं, जिन पर स्पार्कलर्स जल रहे थे। ये बोतलें जब छत के बेहद करीब लाई गईं, तो आग लग गई। कुछ ही सेकंड में लपटें फैल गईं और पूरा हॉल धुएं से भर गया। पार्टी का माहौल पलभर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार में बदल गया।
किस समय हुआ?
पुलिस ने बताया स्थानीय समयानुसार यह आग 31 दिसंबर और 1 जनवरी की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे लगी। यह हादसा लक्जरी अल्पाइन स्की रिसॉर्ट शहर के बीचों-बीच स्थित ले कॉन्स्टेलेशन बार में हुआ। पुलिस ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल और आपातकालीन सेवाओं को मौके पर भेजा गया। हालांकि, जब तक राहत दल पहुंचे, तब तक आग काफी फैल चुकी थी। बार के अंदर मौजूद लोग धुएं और लपटों में फंस गए। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण दुर्घटना माना जा रहा है और किसी तरह के हमले की आशंका से इनकार किया गया है।
जांच जारी, हमले से इनकार
स्विस प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया है और बचाव व पहचान का काम जारी है। कैंटन के अभियोजक ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और फिलहाल किसी हमले की आशंका नहीं है। प्रशासन का कहना है कि यह एक आग की घटना है और इसके हर पहलू की गहन जांच की जाएगी।
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