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UCC: समान नागरिक संहिता बिल पास करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड, धार्मिक मान्यताएं, रीति-रिवाजों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा

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UCC: Uttarakhand becomes the first state to pass Uniform Civil Code Bill, there will be no difference on religious beliefs, customs

UCC: उत्तराखंड विधानसभा में आज चर्चा के बाद समान नागरिक संहिता बिल पास हो गया। यूसीसी बिल पर दिनभर विधानसभा में चर्चा चली और शाम को ध्वनिमत से बिल पास हो गया। इसके साथ ही उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अब इस बिल को राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेसवार्ता में कहा कि ये कानून समानता का है। इसे हम किसी के खिलाफ नहीं लाए हैं, बल्कि इससे उन माताओं-बहनों का आत्मबल बढ़ेगा, जो किसी प्रथा, कुरीति की वजह से प्रताड़ित होती थीं।

https://twitter.com/ANI/status/1755231885830078730

बिल को चुनावी नजरिए से न देखा जाए 

सीएम धामी ने कहा कि इस बिल को आगामी चुनाव के नजरिये से न देखा जाए। हमारी पार्टी ने इसको लेकर संकल्प लिया था, जो आज पूरा हुआ। देश के अन्य राज्यों से भी हमारी अपेक्षा रहेगी कि वह इस दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विधेयक में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों को ही शामिल किया गया है। विवाह प्रक्रिया को लेकर जो प्राविधान बनाए गए हैं उनमें जाति, धर्म अथवा पंथ की परंपराओं और रीति रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। वैवाहिक प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। धार्मिक रीति-रिवाज जस के तस रहेंगे। खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बिल के कानून बनने के बाद उत्तराखंड में क्या बदल जाएगा

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शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य

– हर दंपती के लिए तलाक व शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने पर अधिकतम 25 हजार रुपs का अर्थदंड का प्रावधान। पंजीकरण नहीं कराने वाले सरकारी सुविधाओं के लाभ से भी वंचित रहेंगे।

– ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, महानगर पालिका स्तर पर पंजीकरण का प्रावधान।

– विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की की 18 वर्ष तय की गई है।

– हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं को समाप्त किया गया है। महिला का दोबारा विवाह करने की किसी भी तरह की शर्तों पर रोक होगी।

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– एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।

– महिलाएं भी पुरुषों के समान कारणों और अधिकारों को तलाक का आधार बना सकती हैं।

– कोई बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का अधिकार होगा।

– पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास रहेगी।

– समान नागरिक संहिता में गोद लेने के लिए कोई कानून नहीं बनाया गया है।

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लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य

– लिव इन में रहने वाले कपल के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।

– पंजीकरण रसीद से ही कपल किराए पर घर, हॉस्टल या पीजी ले सकेंगे।

-लिव इन में रहने वालों के लिए संबंध विच्छेद का भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

– लिव इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और जैविक संतान के सभी अधिकार मिलेंगे।

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– अनिवार्य पंजीकरण न कराने पर छह माह के कारावास या 25 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान होंगे।

संपत्ति में बराबरी का अधिकार

– संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार होंगे।

– जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं होगा।

– नाजायज बच्चों को भी उस दंपती की जैविक संतान माना जाएगा।

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– गोद लिए, सरगोसी के द्वारा असिस्टेड री प्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे बच्चे जैविक संतान होंगे।

– किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार संरक्षित रहेंगे।

– कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को वसीयत से अपनी संपत्ति दे सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने घटाई जज बनने के लिए वकालत की अनिवार्य अवधि, 3 साल की जगह अब 1 साल प्रैक्टिस; चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग भी जरूरी

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नई दिल्ली: न्यायिक सेवा में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने जज बनने के लिए वकालत की प्रैक्टिस को अनिवार्य रखने का फैसला बरकरार रखा, लेकिन जरूरी प्रैक्टिस की अवधि 3 साल से घटाकर 1 साल कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी तय किया कि न्यायिक सेवा परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद 2 साल की अनिवार्य ट्रेनिंग और क्लर्कशिप से गुजरना होगा।

1 साल प्रैक्टिस के बाद 2 साल की ट्रेनिंग

सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के अनुसार, न्यायिक सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को पहले 1 साल राज्य न्यायिक अकादमी में गहन प्रशिक्षण लेना होगा। इसके बाद उन्हें 6 महीने जिला न्यायाधीश या उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारी के साथ क्लर्कशिप और 6 महीने मौजूदा हाईकोर्ट जज के साथ क्लर्कशिप करनी होगी। यानी जज बनने के लिए अब 1 साल की वकालत के साथ चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग और क्लर्कशिप का मॉडल लागू होगा।

31 मार्च 2027 तक संक्रमण अवधि में बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने नई व्यवस्था लागू करने के लिए संक्रमण अवधि भी तय की है, जो 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। कोर्ट ने कहा कि पहले के फैसले के बाद एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। ऐसे में इस अवधि के दौरान सभी कानून स्नातकों को आवेदन करने की पात्रता दी जाएगी। इस संक्रमण अवधि में उम्मीदवारों को 1 साल की सक्रिय प्रैक्टिस का अलग से प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं होगी।

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पहले 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य की गई थी

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा के लिए वकील के रूप में कम से कम 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य करने का फैसला दिया था। कोर्ट का मानना था कि ट्रायल कोर्ट के जजों में क्षमता और परिपक्वता सुनिश्चित करने के लिए अदालत में पहले का अनुभव जरूरी है। इस फैसले के खिलाफ कई समीक्षा याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अब प्रैक्टिस की अनिवार्यता को खत्म नहीं किया, बल्कि उसकी अवधि 3 साल से घटाकर 1 साल कर दी है।

CJI ने कहा था- 3 साल की शर्त से युवा प्रतिभाएं छूट सकती हैं

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए एक तरह की खाली अवधि पैदा कर सकती है। अदालत ने माना कि इससे प्रतिभाशाली कानून स्नातक पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद न्यायिक सेवा को करियर के रूप में चुनने से हतोत्साहित हो सकते हैं। CJI ने महिला उम्मीदवारों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि परिवार, शादी और स्थान परिवर्तन जैसी सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई महिला उम्मीदवारों के लिए लगातार कई साल की प्रैक्टिस पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

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Delhi: दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर चला, बैरिकेड और फेंसिंग समेत अवैध ढांचे हटाए; इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के बाहर भी हुई थी कार्रवाई

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नई दिल्ली: देश की राजधानी के चाणक्यपुरी इलाके में बुधवार देर रात पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर चला। कार्रवाई में बैरिकेड, लोहे की फेंसिंग और वीजा सेक्शन के पास कतार लगाने के लिए बनाए गए ढांचे हटा दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, ये निर्माण हाई कमीशन की तय सीमा के बाहर किए गए थे।

मौके पर JCB से कार्रवाई के बाद टूटी रेलिंग, लोहे के फ्रेम, छत की चादरें और कंक्रीट के टुकड़े बिखरे दिखाई दिए। हालांकि, पाकिस्तान हाई कमीशन की मुख्य इमारत, मेन गेट और परिसर की दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब दो दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड और पार्किंग पोल हटाए गए थे।

कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से भी बढ़ा तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर पर दिए बयान को लेकर भी पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। 19 अगस्त को श्रीनगर दौरे के दौरान गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। इसके बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

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NEET: सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार-NEET परीक्षा सिस्टम सुरक्षित, SC ने कहा- UPSC जैसा मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि NEET परीक्षा की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं है। सरकार के मुताबिक प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तक कई स्तरों पर गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था लागू है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को UPSC की तर्ज पर और मजबूत परीक्षा व्यवस्था विकसित करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि सिस्टम में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अनुभवी अधिकारियों के तबादले के बाद भी परीक्षा कराने का संस्थागत अनुभव बना रहे।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिकाओं में NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा- UPSC जैसा सिस्टम बनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन महीने बाद एक बार फिर NTA की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि NTA को UPSC की तरह ऐसा सिस्टम विकसित करना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बावजूद संस्था के पास बना रहे।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि कागज पर कोई प्रक्रिया कितनी भी मजबूत दिखाई दे, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा खत्म होने के बाद अगली परीक्षा में वही कमजोरियां दोबारा सामने न आएं।

केंद्र ने बताया- NEET पेपर की सुरक्षा के 10 स्तर

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र पर छात्रों तक पहुंचने तक कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।

1. कई विशेषज्ञ तैयार करते हैं प्रश्न बैंक

विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ प्रश्न बैंक तैयार करते हैं। इसके बाद 100-100 सवालों के आधार पर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। इनमें से दो प्रश्नपत्र NTA के महानिदेशक चुनते हैं। अंतिम प्रश्नपत्र कौन-सा होगा, इसकी जानकारी पहले से किसी को नहीं होती।

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2. 13 भाषाओं में तैयार होता है प्रश्न बैंक

करीब 500 सवालों का प्रश्न बैंक 13 भाषाओं में तैयार किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ ट्रांसलेटर की मदद ली जाती है।

3. दो प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं पेपर

प्रश्नपत्र सीलबंद कवर में दो निर्धारित प्रिंटिंग प्रेस भेजे जाते हैं। यहां CCTV और CISF की निगरानी रहती है। प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को भी यह जानकारी नहीं होती कि प्रश्नपत्र किस परीक्षा के लिए है।

4. डिजिटल चाबी और कोड से खुलता है बॉक्स

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प्रश्नपत्र ले जाने वाले व्यक्ति के पास डिजिटल चाबी होती है, लेकिन बॉक्स खोलने का कोड उसके पास नहीं होता। यह कोड NTA महानिदेशक की अनुमति के बाद जारी किया जाता है।

5. लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं पेपर

प्रश्नपत्र ऐसे लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं, जिन्हें बंद करने के बाद लॉक तोड़े बिना खोला नहीं जा सकता।

6. हर पैकेट में अलग क्रम के प्रश्नपत्र

24 प्रश्नपत्रों वाले पैकेट में सवालों का क्रम अलग-अलग रखा जाता है। प्रत्येक पैकेट पर वॉटरमार्क नंबर, शहर, परीक्षा केंद्र और पैकेट नंबर दर्ज होता है।

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7. स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं पेपर

प्रश्नपत्रों के दो सेट अलग-अलग बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और संबंधित अधिकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं।

8. GPS से ट्रैक होती है गाड़ी

बैंक से परीक्षा केंद्र तक प्रश्नपत्र पहुंचाने वाली गाड़ी में GPS लगा होता है। गाड़ी की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है और पुलिस सुरक्षा के बीच प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचते हैं।

9. परीक्षा से कुछ घंटे पहले खुलता है बॉक्स

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परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले दो छात्रों की मौजूदगी में प्रश्नपत्र का बॉक्स खोला जाता है। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाती है।

10. 24 छात्रों के लिए अलग पैकेट

हर कक्षा में 24 छात्रों के लिए अलग प्रश्नपत्र पैकेट होता है। कक्षा समन्वयक यह पैकेट छात्रों को देते हैं और छात्र स्वयं पैकेट खोलते हैं।

टेक्नोलॉजी समझने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने NTA को परीक्षा व्यवस्था में नई तकनीक की समझ रखने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह दी। कोर्ट का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर रहा, जिसमें परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें लगातार दूर किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि सिर्फ कागज पर मजबूत प्रक्रिया काफी नहीं है। परीक्षा प्रणाली को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिसमें सुरक्षा, तकनीक और संस्थागत अनुभव लगातार मजबूत होते रहें।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं

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नई दिल्ली/लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करा सकते हैं, अगर उनके भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान के लिए ऐसा करना जरूरी हो।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बच्चों या अन्य परिजनों को संपत्ति खाली करने का आदेश देने का अधिकार है।

कोर्ट ने कहा कि किसी सभ्य समाज की पहचान इस बात से भी होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, सुरक्षा और गरिमा देता है।

लखनऊ के मकान से जुड़ा था मामला

मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता से जुड़ा है। उन्होंने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से बेदखल करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दिया था। जिस मकान को लेकर विवाद था, वह गुप्ता की स्वयं अर्जित संपत्ति थी। परिवार में विवाद इतना बढ़ गया था कि गुप्ता की 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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मामले की सुनवाई के बाद एसडीएम ने 15 नवंबर 2022 को बेटे को मकान से बेदखल करने का आदेश दिया था। बाद में जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इस आदेश को बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था बेदखली का आदेश

बेटे और बहू ने एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट ने दखल देकर गलती की

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को भरण-पोषण दिलाना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना भी है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और गरिमा के लिए जरूरी हो, तो ट्रिब्यूनल बच्चों को संपत्ति खाली करने का आदेश दे सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट की धारा 7 और 8 का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के मामलों की सुनवाई के लिए बने ट्रिब्यूनल को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी गई हैं। ऐसे में कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी आदेश देने का अधिकार भी ट्रिब्यूनल के पास है।

सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसलों का भी दिया हवाला

कोर्ट ने 2021 के एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर मामले का भी उल्लेख किया। इस फैसले में कहा गया था कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाद के मामलों में भी इसी सिद्धांत को दोहराया गया। इनमें समटोला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2025) और कमलकांत मिश्रा बनाम एडिशनल कलेक्टर (2025) के मामले शामिल हैं। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यदि बच्चों या परिजनों की वजह से किसी बुजुर्ग की सुरक्षा, सम्मान या शांतिपूर्ण जीवन प्रभावित हो रहा है, तो वह संबंधित ट्रिब्यूनल के माध्यम से अपनी संपत्ति खाली कराने की मांग कर सकता है।

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Kolkata Hotel Fire: होटल में भीषण आग, 4 साल के बच्चे समेत 9 की मौत, 80 लोगों को बचाया

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कोलकाता: कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित पांच मंजिला बिल्डिंग में मंगलवार देर रात भीषण आग लग गई। हादसे में 4 साल के बच्चे समेत 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हैं। दमकल और पुलिस की टीम ने अब तक करीब 80 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। आग रात करीब 1:45 बजे लगी। बिल्डिंग में कई होटल संचालित हो रहे थे और घटना के समय ज्यादातर लोग सो रहे थे। आग के बाद पूरी इमारत में तेजी से धुआं भर गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने में मुश्किल हुई। दम घुटने के कारण कई लोग बेहोश हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल की 5 गाड़ियां, पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें मौके पर पहुंचीं। घने धुएं की वजह से दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन इमारत में कूलिंग का काम जारी है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, फॉरेंसिक जांच से होगी पुष्टि

पश्चिम बंगाल के फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग के राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने घटनास्थल का दौरा किया। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी। मंत्री ने इमारत के अंदर की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग में बुनियादी सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन में गंभीर खामियां सामने आई हैं।

मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल

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पुलिस मृतकों की पहचान कर रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों में बांग्लादेशी नागरिकों के शामिल होने की बात सामने आई है। 4 साल के एक बच्चे की भी मौत हुई है।

बिल्डिंग मालिक की तलाश, केस दर्ज करने की तैयारी

पुलिस के मुताबिक, इमारत के मालिक की तलाश की जा रही है। आग लगने की असली वजह के साथ ही होटल संचालन और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन की भी जांच की जाएगी। यह घटना पश्चिम बंगाल में कुछ दिन पहले बीरभूम के तारापीठ इलाके में होटल में लगी आग के बाद हुई है। उस हादसे में भी कई लोगों की मौत हुई थी।

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