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RBI Repo Rate: आपके लोन की EMI में नहीं होगा बदलाव, RBI ने रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा

RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक में रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि आपके लोन की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं होगा। आरबीआई की बुधवार को शुरू हुई तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि केंद्रीय बैंक की एमपीसी ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। बैंकों के बैलेंस शीट में मजबूती दिखी है।
बता दें कि पिछली चार मौद्रिक नीति समिति(MPC)की बैठक में रैपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है। रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति भारत की प्रमुख मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के स्तर पर रखने के लिए प्रतिबद्ध है। दास ने कहा कि मुद्रास्फीति विकसित अर्थव्यवस्थाओं सहित कई देशों के लिए चिंता का विषय रही है, लेकिन भारत काफी हद तक अपने मुद्रास्फीति प्रक्षेपवक्र को काफी अच्छी तरह से चलाने में कामयाब रहा है।
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Budget 2026 Impact: कैंसर की दवाएं, EV बैटरी और विदेश यात्रा सस्ती, शराब और शेयर ट्रेडिंग महंगी

Budget 2026 Impact: बजट में आम आदमी के लिए सीधे दाम घटाने-बढ़ाने के बड़े ऐलान कम ही होते हैं, क्योंकि रोजमर्रा की ज्यादातर चीजों के रेट GST काउंसिल तय करती है। लेकिन सरकार जब इम्पोर्ट ड्यूटी, TCS और STT में बदलाव करती है, तो उसका असर बाजार और जेब पर साफ दिखता है।
आइए जानते हैं Budget 2026 से क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा।
सस्ता क्या हुआ?
1. कैंसर की दवाएं सस्ती
सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 लाइफ सेविंग दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है।
इसके साथ ही 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए इम्पोर्ट की जाने वाली दवाओं और स्पेशल फूड पर भी अब टैक्स नहीं लगेगा। इससे महंगे इलाज पर निर्भर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
2. माइक्रोवेव ओवन सस्ते हो सकते हैं
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए माइक्रोवेव ओवन के कुछ खास पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। आने वाले समय में माइक्रोवेव की कीमतों में कमी आ सकती है।
3. EV बैटरी और सोलर पैनल होंगे सस्ते
ग्रीन एनर्जी पर फोकस बढ़ाते हुए लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर ड्यूटी खत्म हुई। सोलर ग्लास में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई। इससे EV और सोलर सेक्टर की लागत घटेगी।
4. जूते और कपड़े सस्ते हो सकते हैं
एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए लेदर, टेक्सटाइल और सी-फूड सेक्टर को राहत दी गई है। सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट लिमिट 1% से बढ़ाकर 3% किया गया। लेदर, सिंथेटिक जूतों और शू अपर्स के एक्सपोर्ट पर टैक्स छूट दी गई। कच्चा माल सस्ता होने से जूते और कपड़ों के दाम घट सकते हैं या स्थिर रहेंगे।
5. विदेश घूमना हुआ सस्ता
विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला TCS अब सिर्फ 2% कर दिया गया है। पहले 10 लाख से ज्यादा खर्च पर 20% तक टैक्स लगता था। अब रकम की कोई लिमिट नहीं होगी।
6. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सस्ता
एयरक्राफ्ट के पुर्जों और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म। डिफेंस सेक्टर में MRO के लिए मंगवाए जाने वाले कच्चे माल पर भी टैक्स नहीं। इससे विमान निर्माण और मरम्मत की लागत घटेगी।
7. विदेश से निजी सामान मंगाना सस्ता
पर्सनल यूज के लिए विदेश से मंगाए जाने वाले सामान पर टैक्स 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है।
क्या हुआ महंगा?
1. शराब महंगी हो सकती है
शराब पर लगने वाला TCS 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। दुकानदारों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर कीमतों पर पड़ सकता है।
2. शेयर बाजार में ट्रेडिंग महंगी
फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया। ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT 0.15% हुआ। हर खरीद-बिक्री पर निवेशकों को ज्यादा टैक्स देना होगा।
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Economic Survey: FY27 में GDP ग्रोथ 6.8–7.2% का अनुमान, महंगाई 4% के दायरे में रहेगी

Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी को लोकसभा में देश का सालाना ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश किया। सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। सर्वे में महंगाई, रोजगार, खेती-किसानी, सरकारी कर्ज, विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट से जुड़ी अहम तस्वीर पेश की गई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बताई गई है।
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की 7 बड़ी बातें
1.महंगाई
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार RBI और IMF का अनुमान है कि आने वाले समय में महंगाई दर 4% (±2%) के तय दायरे में बनी रहेगी।
खरीफ की अच्छी पैदावार और रबी की बेहतर बुआई को देखते हुए RBI ने दिसंबर 2025 में FY26 के लिए महंगाई अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था। FY27 की पहली और दूसरी तिमाही में महंगाई क्रमशः 3.9% और 4% रहने का अनुमान है।
2. GDP ग्रोथ
सर्वे के मुताबिक FY27 में GDP ग्रोथ 6.8%–7.2% रह सकती है। वर्तमान वित्त वर्ष FY26 में विकास दर 7.4% रहने का अनुमान है, जो RBI के 7.3% अनुमान से भी अधिक है।
3. रोजगार
भारत की वर्कफोर्स 56 करोड़ से अधिक है। टैक्स सुधार, नियमों के सरलीकरण और श्रम सुधारों के चलते इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर में रोजगार बढ़ा है। FY24 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार 6% बढ़ा, जिससे एक साल में 10 लाख से अधिक नई नौकरियां जुड़ीं।
सर्वे में स्किल गैप कम करने के लिए स्कूल स्तर पर वोकेशनल ट्रेनिंग पर जोर दिया गया है।
4.खेती-किसानी
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार FY26 में कृषि विकास दर 3.1% रहने की उम्मीद है।
2024-25 में अनाज उत्पादन 3,320 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिससे महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिली।
सरकार का फोकस अब उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय सुरक्षा और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर है।
5.सरकारी कर्ज
केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटा कम करने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है।
FY25 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.8% रहा, जबकि FY26 के लिए लक्ष्य 4.4% तय किया गया है।
घाटा कम होने का मतलब है मजबूत अर्थव्यवस्था और महंगाई पर नियंत्रण।
विदेशी मुद्रा भंडार
वैश्विक मंदी की आशंका के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार FY24 में 668 अरब डॉलर से बढ़कर FY25 में 701 अरब डॉलर पहुंच गया है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से रुपये को स्थिरता मिलती है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एक्सपोर्ट
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत का कुल एक्सपोर्ट FY25 में 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने के बावजूद वस्तु निर्यात 2.4% और सर्विस एक्सपोर्ट 6.5% बढ़ा।
भारत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने के लिए EU, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ ट्रेड डील की है।
इकोनॉमिक सर्वे क्या है?
इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का सालाना दस्तावेज होता है, जो बीते एक साल की आर्थिक स्थिति और भविष्य की दिशा को दर्शाता है। इसे वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक डिवीजन द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में तैयार किया जाता है। देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया और तब से इसे बजट से एक दिन पहले संसद में रखा जाता है।
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Chhattisgarh: DPIIT की BRAP रैंकिंग में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, निवेशकों के लिए भरोसे का केंद्र बना राज्य

Raipur: छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उद्योग संगम’ में राज्य को बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की चारों प्रमुख श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। यह उपलब्धि उस परिवर्तन यात्रा की गवाही है जो छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में तय की है। कभी BRAP रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाला यह राज्य आज गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा है। सुशासन, पारदर्शिता और उद्योग-अनुकूल नीतियों के बल पर छत्तीसगढ़ ने खुद को सुधार और विकास का नया मॉडल बना दिया है।
राज्य ने BRAP के तहत अब तक 434 सुधार लागू किए हैं — जो इज ऑफ डूइंग बिज़नेस और इज ऑफ लिविंग को सशक्त बनाने की दिशा में उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इन सुधारों में सबसे बड़ी पहल रही ‘जन विश्वास अधिनियम’, जिसके तहत छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बना जिसने छोटे कारोबारी अपराधों को डीक्रिमिनलाइज कर दिया। इस कदम ने सरकार और उद्योग जगत के बीच भरोसे और सहयोग का नया पुल बनाया है। अब कारोबार में अनावश्यक डर या जटिलता की जगह पारदर्शिता और सहजता ने ले ली है।
इसी कड़ी में राज्य ने भूमि अभिलेखों के स्वचालित म्यूटेशन की ऐतिहासिक शुरुआत की — यह कदम छत्तीसगढ़ को देश का पहला राज्य बनाता है जहाँ जमीन पंजीयन के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण स्वतः हो जाता है। इससे न केवल प्रक्रियाएं सरल हुई हैं बल्कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिली है।
राज्य सरकार ने कई और सुधारों को धरातल पर उतारें हैं — जैसे दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति, फ्लैटेड इंडस्ट्री के लिए FAR में वृद्धि, भूमि उपयोगिता बढ़ाने हेतु सेटबैक में कमी, और फैक्ट्री लाइसेंस की वैधता 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने के साथ ऑटो-रिन्यूअल सुविधा। इन सभी कदमों ने मिलकर राज्य में उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद, स्थिर और पारदर्शी वातावरण तैयार किया है।
इन उल्लेखनीय सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और निवेश आयुक्त ऋतु सेन (IAS) को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने सम्मानित किया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ अब भारत के आर्थिक परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन सुधारों का असर निवेश माहौल पर साफ दिख रहा है। बीते दस महीनों में ₹7.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि निवेशक छत्तीसगढ़ की नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और तेज़ निर्णय प्रणाली पर पूरा भरोसा करते हैं।
यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए नए युग की शुरुआत है — ऐसा छत्तीसगढ़ जो विकास की दिशा तय कर रहा है, अवसरों को गढ़ रहा है और सबके लिए प्रगतिशील भविष्य की नींव रख रहा है।
“छत्तीसगढ़ का ‘टॉप अचीवर’ बनना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उद्योग, सुशासन और पारदर्शिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ ने निचले पायदान से उठकर देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की पंक्ति में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि सरकार की प्रतिबद्धता, प्रशासन की मेहनत और निवेशकों के भरोसे का परिणाम है। छत्तीसगढ़ अब इज ऑफ डूइंग बिज़नेस से आगे बढ़कर इज ऑफ लिविंग का भी प्रतीक बन चुका है – जहाँ सुधार, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।” – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
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Chhattisgarh: क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई से जीएसटी भुगतान की सुविधा छत्तीसगढ़ में लागू

Raipur: मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर राज्य जीएसटी विभाग और कोष लेखा (ट्रेज़री) विभाग द्वारा व्यवसायियों के हित में जीएसटी रिटर्न के भुगतान हेतु क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई (UPI) सुविधा पूरे राज्य में लागू कर दी गई है। इस सुविधा की मांग जीएसटी लागू होने के प्रारंभिक काल से ही व्यापारी वर्ग, चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा निरंतर की जा रही थी।
उल्लेखनीय है कि व्यापारिक वर्ग का कहना था कि यदि आधुनिक डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई और कार्ड भुगतान को जीएसटी पोर्टल से जोड़ा जाए, तो राज्य में कर भुगतान और अधिक सुगम व पारदर्शी हो सकेगा। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए, करदाताओं की सुविधा और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से दोनों विभागों को संयुक्त रूप से कार्य कर इसे शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह सुविधा अब प्रभावी हो गई है।
अब तक करदाताओं के लिए केवल नेट बैंकिंग और ओटीसी (Over the Counter) भुगतान के विकल्प ही उपलब्ध थे। इससे कई बार छोटे व्यापारियों और नए करदाताओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बैंकों के जीएसटी पोर्टल से जुड़े न होने के कारण भुगतान करना संभव नहीं होता था, जबकि तकनीकी कारणों से भुगतान असफल होना, बैंक सर्वर का डाउन रहना या अंतिम तिथि पर पेमेंट फेल होना जैसी समस्याएं भी आम थीं। ऐसे में अनेक करदाताओं को भुगतान के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की हानि होती थी।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि “राज्य सरकार करदाताओं को अधिकतम सुविधा देने के लिए निरंतर काम कर रही है। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई के माध्यम से जीएसटी भुगतान की यह नई सुविधा करदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक सरल, तेज़ और पारदर्शी बनेगी, साथ ही छोटे व्यापारियों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल राज्य सरकार की इज ऑफ डूइंग बिज़नेस और डिजिटल गवर्नेंस को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
यह सुविधा अब जीएसटी पोर्टल (www.gst.gov.in) पर उपलब्ध है। करदाता पोर्टल में लॉगिन कर क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई ऐप से सीधे टैक्स का भुगतान कर सकते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और जीएसटी भुगतान को और अधिक सहज तथा उपयोगकर्ता अनुकूल बनाएगी। इस नई पहल को राज्य में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और पारदर्शी कर प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और कर संग्रह दोनों में दक्षता बढ़ेगी तथा छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी डिजिटल टैक्स प्रशासन वाले राज्यों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।
“छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक और व्यापारी के लिए शासन की प्रक्रियाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाना है। करदाताओं के हित में जीएसटी भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई जैसी डिजिटल सुविधाओं का राज्यभर में विस्तार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल माध्यम से भुगतान की यह व्यवस्था व्यापारियों को न केवल सुविधा और गति प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को भी सुदृढ़ करेगी। हम चाहते हैं कि करदाताओं को किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी कठिनाई का सामना न करना पड़े, और वे बिना किसी बाधा के अपने कर दायित्वों का पालन कर सकें। यह पहल छत्तीसगढ़ को डिजिटल भारत और ईज ऑफ डूइंग बिजिनेस के मानकों पर अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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8th Pay Commission: केंद्र ने आठवें वेतन आयोग के गठन को दी मंजूरी, जस्टिस रंजना देसाई करेंगी अध्यक्षता

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने आखिरकार आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के वेतन और भत्तों में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने जनवरी में मिली सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक तौर पर गठन कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि आयोग अपनी सिफारिशें 18 महीनों में देगा। इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन और भत्तों की समीक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी अध्यक्षता
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को 8वें वेतन आयोग का अध्यक्ष बनाया है। 8वां केंद्रीय वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय होगा, जिसमें एक अध्यक्ष, एक पार्ट टाइम सदस्य एक सदस्य-सचिव होंगे। यह आयोग अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें पेश करेगा। इन सिफारिशों के आधार पर 8th Pay Commission देश में लागू किया जाएगा। पुलक घोष और पंकज जैन को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है।
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