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MP News: मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति ने लागू किया पेसा एक्ट, अब छल-कपट और धर्मांतरण से नहीं हड़पी जा सकेगी आदिवासियों की जमीन

MP News: बिरसा मुंडा जयंती पर शहडोल में जनजातीय गौरव दिवस समारोह के मंच से राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने नियमावली का विमोचन कर पेसा एक्ट लागू किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश में जनजातीय वर्गों के कल्याण के लिये जिन प्रकल्पों को प्रारंभ किया गया है, वे सभी राष्ट्रीय महत्व के हैं। अनुसूचित क्षेत्रों के लिये बनाए गए नए नियम जनजातीय क्षेत्रों के सशक्तिकरण एवं जनजातीय वर्ग को उनके अधिकार दिलाने में प्रभावी होंगे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु की उपस्थिति में प्रदेश में जनजातीय वर्ग के सशक्तिकरण के लिये पेसा एक्ट लागू किया जा रहा है। इसके नियम जनजातीय वर्ग को जल, जंगल और जमीन के अधिकार दिलाएंगे। नए नियमों को सामाजिक समरसता के साथ प्रदेश में लागू किया जायेगा। आज का दिन सामाजिक क्रांति का दिन है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट के नये नियमों के अनुसार हर साल पटवारी को गांव, जमीन का नक्शा, खसरा नकल, गांव में लाकर ग्राम सभा में दिखाने होंगे, जिससे रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी न कर सके। गड़बड़ी होने पर ग्राम सभा को उसे ठीक करने का अधिकार होगा। किसी योजना के लिये जमीन लेने के लिये ग्राम सभा की सहमति आवश्यक होगी। कोई भी व्यक्ति छल-कपट, धर्मांतरण आदि कर गांव वालों की जमीन नहीं हड़प पायेगा। यदि ऐसा होता है, तो ग्राम सभा को उसे वापस करवाने का अधिकार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेत खदान, गिट्टी-पत्थर के ठेके देना है या नहीं यह भी ग्राम सभा तय करेगी। इन्हें पहले जनजातीय समाज सहकारी समिति को दिया जायेगा। ग्राम सभा तालाबों का प्रबंधन, उनमें मत्स्याखेट, सिंघाड़ा उगाने की सहमति ग्राम सभा देगी। सौ एकड़ सिंचाई तालाबों का प्रबंधन, वनोपज का संग्रहण एवं न्यूनतम मूल्य निर्धारण करेगी। जनजातीय भाई वनोपज संग्रहण करेंगे और उन्हें बेचेंगे। तेंदूपत्ता की तुड़ाई और ब्रिकी का कार्य भी जनजातीय वर्ग करेंगे। इस वर्ष 15 दिसंबर तक इस संबंध में प्रस्ताव देना होगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मनरेगा के पैसे से कौन सा कार्य कराया जाए, यह ग्राम सभा ही तय करेगी। कार्य का मस्टर रोल भी ग्राम सभा देखेगी। यदि ग्राम से मजदूरों को बाहर ले जाना हो तो पहले ग्राम सभा को जानकारी देनी होगी। गांव में बाहर से आने वाले व्यक्ति की जानकारी भी ग्राम सभा को देनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सिर्फ लायसेंसधारी साहूकार ही निर्धारित ब्याज दर पर पैसा उधार दे पायेंगे। इसकी जानकारी भी ग्राम सभा को देना होगी। अधिक ब्याज लेने पर कार्यवाही होगी। हितग्राही मूलक योजना में पहले किसे लाभ मिले, यह प्राथमिकता ग्राम सभा तय करेगी। बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई नई शराब की दुकान नहीं खुलेगी। किसी शराब दुकान को हटाने की अनुशंसा ग्राम सभा कर सकेगी। छोटे झगड़े सुलझाने का अधिकार भी ग्राम सभा को होगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में किसी थाने में एफआईआर दर्ज होने पर इसकी सूचना ग्राम सभा को देनी होगी। स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनवाड़ी केन्द्र, आश्रम शालाएं, छात्रावास आदि के निरीक्षण का अधिकार भी ग्राम सभा को होगा। मेला एवं बाजार का प्रबंधन भी ग्राम सभा करेगी। नए नियमों को प्रभावी ठंग से लागू किये जाने के लिये पेसा कोऑर्डिनेटर बनाये जायेंगे। आगामी 20 दिसंबर से विशेष यात्राएं निकाली जायेंगी, जो 4 जनवरी को पातालपानी इंदौर में भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर संपन्न होंगी।
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MP News: अनूपपुर में तीन मंजिला इमारत ढही, 3 की मौत; 24 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

Anuppur Building Collapse: अनूपपुर जिले के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जहां अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अन्य घायल हैं। मृतकों में हनुमान दीन यादव (55), राम कृपाल यादव (40) और राधा कोल शामिल हैं। राधा कोल का शव रविवार सुबह करीब 11 बजे मलबे से निकाला गया, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई।
हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, जो करीब 24 घंटे तक चला। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों सहित 100 से अधिक लोग मलबा हटाने में जुटे रहे। सर्च ऑपरेशन के लिए भिलाई और बनारस से भी विशेष टीमें बुलाई गई थीं। रविवार शाम 5 बजे के बाद जाकर मलबा पूरी तरह साफ किया जा सका।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत पास में खोदे गए गहरे गड्ढे की ओर झुककर गिरी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्माण कार्य के लिए करीब 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें पानी भरने से इमारत की नींव कमजोर हो गई थी। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भूमि स्वामी राजीव गर्ग और लॉज मालिक लल्लू लाल अग्रवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 290 और 106 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान ने इसकी पुष्टि की है।
इमारत निर्माण की अनुमति को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पालिका ने कहा है कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।इस बीच कलेक्टर हर्षल पंचोली ने मृतकों के परिजनों को 9-9 लाख रुपये और घायलों को 2.5-2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
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Bhopal: एमपी बोर्ड रिजल्ट का इंतजार खत्म, 10वीं-12वीं के नतीजे 7 से 12 अप्रैल के बीच संभव

Bhopal: मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल इस साल 15 अप्रैल से पहले रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है। संभावित तौर पर परिणाम 7 से 12 अप्रैल के बीच घोषित किए जा सकते हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, रिजल्ट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और इसे पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग की प्राथमिकता है कि समय पर परिणाम जारी कर छात्रों की आगे की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए पूरे प्रदेश में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने से पहले कॉपी जांच, क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए।
उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, जिससे छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। संभावना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
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MP News: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दूसरे राज्य का OBC सर्टिफिकेट मान्य नहीं, शादी से नहीं मिलेगा आरक्षण

Gwalior:मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि दूसरे राज्य से जारी OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रमाण पत्र के आधार पर मध्य प्रदेश में आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के आधार पर किसी महिला को पति की जाति का आरक्षण लाभ नहीं मिलेगा। यह मामला अर्चना दांगी से जुड़ा है, जो मूल रूप से यूपी के जालौन की निवासी हैं। उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा-2018 पास की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनका चयन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उनका OBC प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश का था।
याचिकाकर्ता का तर्क खारिज
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि दांगी जाति दोनों राज्यों में OBC सूची में शामिल है और विवाह के बाद वे मध्य प्रदेश की निवासी बन चुकी हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है, न कि विवाह या निवास बदलने से। दूसरे राज्य का जाति प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश में मान्य नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
कोर्ट ने Supreme Court of India के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति दूसरे राज्य में जाकर अपनी जाति का आरक्षण लाभ नहीं ले सकता, भले ही वह जाति दोनों राज्यों में सूचीबद्ध क्यों न हो।
शादी से सामाजिक पहचान बदल सकती है, आरक्षण नहीं
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद महिला सामाजिक रूप से पति की जाति का हिस्सा बन सकती है, लेकिन आरक्षण का लाभ नहीं ले सकती, क्योंकि यह सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होता है। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए संबंधित अधिकारियों के निर्णय को सही और विधिसम्मत बताया।
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MP News: एमपी में TET अनिवार्यता पर संग्राम, 12 संगठनों का संयुक्त मोर्चा, 8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन

MP TET Controversy: मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्यता को लेकर विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदेश के 12 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर “अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा” का गठन किया है और सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष का ऐलान किया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि सेवा सुरक्षा, अधिकार और भविष्य से जुड़ा मामला है। मोर्चा के अनुसार, सरकार द्वारा जारी आदेश ने करीब 1.5 लाख शिक्षकों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।
8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन का ऐलान
संयुक्त मोर्चा ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है-
- 8 अप्रैल: जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन
- 11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर धरना और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन
- 18 अप्रैल: Bhopal में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा”
रिव्यू पिटीशन और आदेश निरस्त करने की मांग
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करे। साथ ही लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए।
आदेश में अस्पष्टता से बढ़ी चिंता
शिक्षकों का आरोप है कि DPI के आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि किन शिक्षकों को TET देना अनिवार्य होगा और किन्हें छूट मिलेगी। इसी कारण शिक्षकों में असुरक्षा और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। संयुक्त मोर्चा ने TET के अलावा सेवा अवधि की गणना और वरिष्ठता को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।FEA
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MP News: मध्य प्रदेश में बिजली महंगी, 4.80% टैरिफ बढ़ा, अब 7.05 रु/यूनिट, दूसरे राज्यों को सस्ती सप्लाई पर विवाद

Bhopal: मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को झटका लगा है। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी करते हुए औसतन 4.80% की बढ़ोतरी कर दी है। इससे राज्य के करीब 1.90 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ेंगे।नए टैरिफ के मुताबिक, आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर लगभग 7.05 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। वहीं, राज्य से बाहर सप्लाई की जाने वाली बिजली की दर 3.81 रुपये प्रति यूनिट रखी गई है। यानी प्रदेश के उपभोक्ताओं को करीब 3 रुपये प्रति यूनिट ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
सरप्लस बिजली सस्ते में बाहर सप्लाई
टैरिफ आदेश के अनुसार राज्य में करीब 10,198 मिलियन यूनिट बिजली सरप्लस है। इस अतिरिक्त बिजली को दूसरे राज्यों को कम दर पर भेजा जा रहा है। 255 पेज के आदेश में यह अंतर स्पष्ट तौर पर दिखाया गया है।
निजी कंपनियों से समझौते बने वजह
मध्यप्रदेश नागरिक उपभोक्ता मंच के सदस्य मनीष शर्मा का कहना है कि सरकार निजी कंपनियों और अन्य राज्यों से बिजली खरीदने के लिए दीर्घकालिक समझौते (MoU) करती है। गर्मी में जब मांग बढ़ती है, तब इनका उपयोग होता है। लेकिन यदि खरीदी गई पूरी बिजली खपत नहीं होती, तब भी उसका भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली को कम दर पर बाहर बेचना पड़ता है, जबकि राज्य के भीतर दरें बढ़ाकर लागत की भरपाई की जाती है।
कुछ श्रेणियों को मिली राहत
नए टैरिफ में मेट्रो और उच्च दाब (HT) वाले कुछ उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। इन श्रेणियों में दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई। गुड़ और शक्कर उद्योग से जुड़े उपभोक्ताओं को भी फायदा मिला है।
सरकार के पास बदलाव का अधिकार
Electricity Act 2003 की धारा 108 के तहत राज्य सरकार नियामक आयोग को निर्देश देकर इन दरों की दोबारा समीक्षा करवा सकती है। ऐसे में आने वाले समय में टैरिफ में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।
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