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MP News: संविदा कर्मचारी-अधिकारियों की सेवा शर्तें जारी, जानें अनुकंपा नियुक्ति, वेतन, अवकाश आदि पर क्या हैं दिशानिर्देश

MP News: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) ने शनिवार को 32 विभागों में कार्यरत 2.50 संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा शर्तें जारी कर दी हैं। इसके मुताबिक संविदा कर्मचारिेयों के सालाना मूल्यांकन और कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर सेवा समाप्ति का अधिकार अभी भी अफसरों के पास ही रहेगा। संविदा कर्मचारियों को नौकरी पर रखने वाले अधिकारी ही वार्षिक मूल्यांकन के आधार पर कर्मचारियों का कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप अपने विभागीय सेटअप के मुताबिक भर्ती नियमों में आवश्यक परिवर्तन के लिए कहा है।
जीएडी द्वारा जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले निगम, मंडल, आयोग, सार्वजनिक उपक्रम, स्थानीय निकाय, विश्वविद्यालय, विकास प्राधिकरण, बोर्ड, परिषद एवं अन्य संस्थाएं अपने संविदा कर्मचारियों पर जारी सेवा शर्तों को लागू करने के लिए निर्णय लेने में अपने स्तर पर सक्षम होंगे।
दिशा निर्देश में संविदा अधिकारियों कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति के अवसर, उनकी सेवा काल में मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति, संविदा पदों की नियमित पदों से समकक्षता का निर्धारण, उनके पारिश्रमिक का पुनरनिर्धारण एवं वार्षिक वृद्धि, अवकाश स्वीकृति, उनके साथ अनुबंध निष्पादन, उनके आश्रितों को उपादान भुगतान, उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ, उनका सेवा मूल्यांकन एवं उनके विरुद्ध कार्यवाहियों से संबंधित प्रावधान, उन्हें स्वास्थ्य बीमा लाभ तथा अन्य महत्वपूर्ण निर्देशों को सम्मिलित किया गया है।
मुख्यमंत्री शिवराज की घोषणा के अनुरूप शासन के सभी विभागों में सीधी भर्ती के नियमित पद के बराबर संविदा पदों पर पांच साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए कुल संख्या के 50 प्रतिशत पद आरक्षित रखे जाएंगे। संविदा कर्मचारी जिस नियमित समकक्ष पद के लिए आवेदन करेगा, उसके बराबर या उच्चतर संविदा पद पर वह जितने वर्ष कार्यरत रहा, उतने वर्ष की छूट उसे निर्धारित अधिकतम आयु में मिलेगी। आयु संबंधी समस्त छूट 55 साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
विस्तृत सेवा शर्तों के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें
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MP News: छात्रा की पिटाई का वायरल वीडियो मामला, 4 सहेलियों पर FIR, परिजन बोले- जिस युवक से माफी मंगवाई, उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

सतना: मध्यप्रदेश के सतना के कोलगवां थाना क्षेत्र में एक छात्रा को सुनसान जगह पर ले जाकर पीटने और उसका वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले में पुलिस ने चार छात्राओं के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर पीड़िता के परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना के पीछे जिस युवक श्रवण सेन की भूमिका होने की बात सामने आ रही है, उसका नाम शिकायत और पीड़िता के बयान में आने के बावजूद पुलिस ने अब तक उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
पुलिस ने चार छात्राओं के खिलाफ BNS की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। परिजनों का सवाल है कि यदि जांच में युवक की भूमिका स्पष्ट है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस किस स्तर के और सबूत का इंतजार कर रही है?
सुनसान जगह ले जाकर छात्रा को पीटा, वीडियो भी बनाया
पीड़िता के मुताबिक उसकी सहेलियां उसे नगर वन के पास एक सुनसान जगह पर लेकर गई थीं। वहां चार छात्राओं ने उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि घटना का वीडियो भी बनाया गया। बताया जा रहा कि आरोपियों ने बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना के करीब 38 दिन बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और इसके बाद कोलगवां थाना पुलिस ने FIR दर्ज की। पुलिस ने वायरल वीडियो की भी जांच शुरू की है।
परिजनों का आरोप- विवाद की जड़ में श्रवण सेन
पीड़िता के परिजनों का कहना है कि पूरे विवाद में श्रवण सेन नाम के युवक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका दावा है कि पीड़िता के बयान और उसके मोबाइल में मौजूद चैट से भी इस युवक से जुड़े तथ्य सामने आते हैं। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि आरोपी छात्राओं में से एक उससे झाली निवासी श्रवण सेन से बात करने के लिए कह रही थी। पीड़िता के इनकार करने के बाद उसके साथ मारपीट शुरू कर दी गई।
वीडियो कॉल पर युवक से माफी मांगने का आरोप
पीड़िता के मुताबिक मारपीट के दौरान श्रवण सेन को वीडियो कॉल से जोड़ा गया। आरोप है कि उससे श्रवण से माफी मांगने के लिए कहा गया। पीड़िता का दावा है कि जब तक उसने माफी नहीं मांगी, तब तक उसे छोड़ा नहीं गया। उसे यह धमकी भी दी गई कि यदि उसने युवक से बात नहीं की या घटना के बारे में किसी को बताया तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। बाद में वीडियो के वायरल होने की बात सामने आई।
पुलिस की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल
मामले में पुलिस ने चार छात्राओं के खिलाफ धाराएं लगाकर FIR तो दर्ज कर ली, लेकिन परिजन सवाल उठा रहे हैं कि वीडियो कॉल में जिस युवक को कथित तौर पर जोड़े जाने और माफी मंगवाने की बात सामने आई है, उसके खिलाफ FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? परिजनों का कहना है कि जब शिकायत में युवक का नाम और उससे जुड़ी कथित चैट का जिक्र है, तो पुलिस ने अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
पुलिस बोली- जांच के आधार पर होगी कार्रवाई
कोलगवां थाना पुलिस के मुताबिकप गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप में चार छात्राओं के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने वायरल वीडियो का परीक्षण भी कराया है और मामले की जांच जारी है।पुलिस का कहना है कि युवक की भूमिका जांच में सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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MP पुलिस में बड़ा फेरबदल: 10 IPS समेत 136 अफसरों के तबादले; भोपाल-इंदौर में भी बदली जिम्मेदारी

भोपाल: मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में रविवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। गृह विभाग ने 10 IPS और 126 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों समेत कुल 136 पुलिस अफसरों के तबादले किए हैं। नई पदस्थापनाएं तत्काल प्रभाव से लागू मानी गई हैं। तबादला सूची में SDOP, नगर पुलिस अधीक्षक, सहायक पुलिस आयुक्त और सहायक सेनानी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से मैदानी पदों पर भेजा गया है, जबकि कई मैदानी अधिकारियों की नई जगह पदस्थापना की गई है।
आलोक कुमार वर्मा को रीवा CSP की जिम्मेदारी
तबादला सूची के मुताबिक आलोक कुमार वर्मा को देवास से नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) रीवा बनाया गया है। इसी तरह मनीष भारद्वाज को साइबर पुलिस मुख्यालय से ACP कोतवाली, नगरीय इंदौर की जिम्मेदारी दी गई है। मनोज कुमार को ACP MP नगर, नगरीय भोपाल पदस्थ किया गया है।
पुलिस विभाग के इस फेरबदल में कई SDOP की भी नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वैभव प्रिया को रतलाम से SDOP नेपानगर, शुभम सिंह ठाकुर को जबलपुर से SDOP गाडरवारा, अमित कुमार को खंडवा से SDOP सिंगरौली भेजा गया है। इसके अलावा सूची में सहायक पुलिस आयुक्त और सहायक सेनानी स्तर के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
मैदानी पुलिसिंग पर फोकस
तबादला आदेश में पुलिस मुख्यालय और अन्य इकाइयों में पदस्थ अधिकारियों को मैदानी जिम्मेदारियां दिए जाने के साथ कई SDOP और नगर पुलिस अधीक्षकों को भी दूसरी जगह भेजा गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक इस सूची में 10 IPS और 126 DSP स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इससे जिलों और नगरीय पुलिस इकाइयों में स्थानीय स्तर की कमान में बदलाव हुआ है।
गणेश चतुर्थी से पहले पुलिस महकमे में बड़ा बदलाव
यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब प्रदेश में गणेश चतुर्थी समेत आगामी पर्वों को लेकर पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी है। नई पदस्थापना के बाद अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कानून व्यवस्था, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
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चित्रकूट: बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आया रामानंद मिशन, 1000 परिवारों और साधु-संतों तक पहुंचाई जाएगी राहत सामग्री; राशन, कपड़े और जरूरी सामान शामिल

सतना: तीर्थक्षेत्र चित्रकूट में हाल में आई भीषण बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों की मदद के लिए श्री तुलसीपीठ सेवा न्यास और रामानंद मिशन ने राहत अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत बाढ़ प्रभावित करीब 1,000 जरूरतमंद परिवारों और आश्रमों में रहने वाले साधु-संतों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
रामानंद मिशन के कार्यकर्ताओं और धर्मयोद्धाओं की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत सामग्री वितरित कर रही हैं। संस्था के मुताबिक, बाढ़ के कारण जिन परिवारों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जा रही है।
राहत किट में रोजमर्रा की जरूरत का सामान
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तैयार की गई राहत किट में दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनमें गद्दा, रजाई, मच्छरदानी, चादर, दरी और चटाई, बाथरूम एवं स्वच्छता किट, थाली, गिलास और राशन सामग्री के अलावा पहनने योग्य आवश्यक कपड़े समेत अन्य सामग्री शामिल हैं।
साधु-संतों के लिए भी विशेष सहायता
राहत अभियान के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास की पहाड़ी और जंगली इलाकों में निवास करने वाले साधु-संतों तक भी सहायता पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। संस्था के अनुसार, बाढ़ के कारण साधना में आ रही परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से साधु-संतों को भी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। यह सामग्री श्री तुलसीपीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने श्रद्धापूर्वक सौंपी।
‘सेवा ही साधना है, सेवा ही समर्पण’
आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों की दैनिक आवश्यकताएं प्रभावित हुई हैं, उनके जीवन में दोबारा आशा, सम्मान और सहारा पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने आमजन से भी राहत एवं सेवा कार्यों में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि “सेवा ही साधना है, सेवा ही समर्पण है।” रामानंद मिशन के मुताबिक, राहत अभियान के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ उन्हें इस कठिन परिस्थिति में सामाजिक और मानवीय सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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सागर शराब कांड: 20 हजार के इनामी रवि लखेरा का शॉर्ट एनकाउंटर, पैर में लगी गोली; मौतों का आंकड़ा 31 तक पहुंचने का दावा

सागर: मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल रवि लखेरा का शुक्रवार सुबह पुलिस से एनकाउंटर हो गया। बरायठा के जंगल में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रवि लखेरा के पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसे घायल हालत में बंडा अस्पताल में भर्ती कराया है। रवि पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित था।
सागर में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों में अब तक 31 लोगों की मौत बताई गई है, हालांकि प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में इससे कम मौतों की पुष्टि की गई है। 10 सितंबर तक प्रशासन ने 16 मौतों की पुष्टि की थी।
बरायठा के जंगल में हुई मुठभेड़
पुलिस के मुताबिक रवि लखेरा की तलाश लगातार की जा रही थी। शुक्रवार सुबह बरायठा के जंगल में पुलिस टीम का सामना उससे हो गया। मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए बंडा अस्पताल लेकर पहुंची। इलाज के बाद उससे पूछताछ की जाएगी और शराब के कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। रवि लखेरा को पुलिस इस मामले में अहम आरोपी मान रही है। उसके खिलाफ पहले से भी शराब से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
33 आरोपी बनाए गए, 18 गिरफ्तार
पुलिस की अब तक की कार्रवाई में 33 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें रवि लखेरा भी शामिल है। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक रवि की गिरफ्तारी से पहले 18 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे। पुलिस के अनुसार एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी अस्पताल में भर्ती है। अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इससे पहले पुलिस ने फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया था। रवि लखेरा और मनीष लोधी पर 20-20 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।
3 आरोपियों के 5 मकानों पर चला बुलडोजर
इससे पहले गुरुवार को प्रशासन ने शराब कांड से जुड़े तीन आरोपियों के पांच मकानों के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर कार्रवाई की थी। कार्रवाई में आरोपी मनीष लोधी, करणी सेना के संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राजपूत और आशीष साहू के निर्माण शामिल थे। प्रशासन ने अवैध निर्माण को चिह्नित कर कार्रवाई की। मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दे चुके हैं।
नकली शराब बनाने और सप्लाई नेटवर्क की जांच
पुलिस की जांच में कथित तौर पर अवैध शराब तैयार करने, उसकी पैकिंग और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किए जाने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने मनीष लोधी और रवि लखेरा के बीच संपर्क होने का भी दावा किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि नकली शराब को ब्रांडेड शराब जैसा दिखाने के लिए पैकिंग और लेबल का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि मामले की पूरी आपूर्ति श्रृंखला और मौतों के कारणों की जांच अभी जारी है।
मौतों के आंकड़े पर सरकारी और स्थानीय रिपोर्टों में अंतर
सागर शराब कांड में मौतों का आंकड़ा सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 31 तक पहुंचने की बात कही गई है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इससे कम संख्या की पुष्टि की गई है। 10 सितंबर की रिपोर्टों में प्रशासन ने 16 मौतों की पुष्टि की थी और 32 मरीजों के अस्पतालों में भर्ती होने की जानकारी दी थी। इसलिए 31 मौतों का आंकड़ा फिलहाल रिपोर्टेड आंकड़ा है, आधिकारिक रूप से पुष्ट आंकड़ा नहीं।
न्यायिक जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रिटायर्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में जांच की जानकारी सामने आई है। जांच में शराब के निर्माण, पैकिंग, सप्लाई नेटवर्क के साथ-साथ प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जाएगी।
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MP News: सिंधिया संपत्ति विवाद में नया मोड़, केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बड़ी बुआ का दावा भी सुनवाई में शामिल

ग्वालियर: सिंधिया राजपरिवार की करीब ₹40 हजार करोड़ की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी के दावे को मामले की सुनवाई में शामिल कर लिया गया है। कोर्ट ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें अपने दावे और उसके आधार पर पक्ष रखने का अवसर दिया है।
हालांकि, आवेदन स्वीकार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने प्रतिमा देवी को संपत्ति में हिस्सा देने का फैसला कर दिया है। उनके अधिकार और हिस्सेदारी पर आगे होने वाली सुनवाई और कानूनी बहस के बाद ही निर्णय होगा।
दामाद ने कोर्ट में रखा प्रतिमा देवी का पक्ष
गुरुवार को प्रतिमा देवी की ओर से उनके दामाद प्रतीक कारकी कोर्ट में उपस्थित हुए और उनका पक्ष रखा। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्माराजे सिंधिया, सिंधिया राजपरिवार की बेटी थीं। इसी उत्तराधिकार के आधार पर उन्होंने संपत्ति में अपने हिस्से का दावा किया है। उनकी आपत्ति के बाद अब बंटवारे से जुड़े मामले में उनके दावे और अधिकार पर भी कानूनी बहस होगी।
वसीयत और दस्तावेज नहीं मिलने की आपत्ति
प्रतिमा देवी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि उन्हें संपत्ति विवाद से जुड़े जरूरी दस्तावेज और वसीयत की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इस आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले के नोटिस भेजे जाने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वह काठमांडू में रहती हैं, जबकि कुछ नोटिस नेपालगंज के पते पर भेजे गए। उनका दावा है कि गलत पते पर नोटिस जाने के कारण उन्हें मामले की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।
दूसरे पक्ष ने कहा- समझौते पर सहमति और हस्ताक्षर थे
प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर दूसरे पक्ष की ओर से जवाब भी कोर्ट में पेश किया जा चुका है। इसमें दावा किया गया है कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़े समझौते की प्रक्रिया में प्रतिमा देवी की सहमति थी और संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। यानी अब कोर्ट के सामने दो अहम सवाल हैं- प्रतिमा देवी को संपत्ति में कानूनी अधिकार कितना है और पहले तैयार किए गए समझौते में उनकी सहमति की स्थिति क्या थी।
पहले से चल रहा है संपत्ति बंटवारे का विवाद
सिंधिया परिवार की पैतृक और अन्य संपत्तियों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। 2026 में परिवार के कई सदस्यों के बीच समझौते के जरिए विवाद खत्म करने की कोशिश भी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक समझौते का मसौदा कोर्ट के सामने पेश किया गया था, लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद मामला फिर कानूनी पेंच में फंस गया। विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, उषा राजे और परिवार के अन्य सदस्य भी पक्षकार हैं।
7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
गुरुवार की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में 7 अक्टूबर को अगली तारीख तय की है। इस दिन संपत्ति के बंटवारे, प्रतिमा देवी के दावे और पहले हुए समझौते से जुड़े कानूनी मुद्दों पर आगे सुनवाई होने की संभावना है। फिलहाल प्रतिमा देवी का दावा सिर्फ सुनवाई के दायरे में आया है। संपत्ति में उनका वास्तविक अधिकार और हिस्सा कितना होगा, इस पर कोर्ट का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
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