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MP Cabinet: प्रदेश की 20,600 सुदूर बसाहटों को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा, 30,900 किमी सड़क का होगा निर्माण

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में संपन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अंतर्गत प्रदेश के सुदूर बसाहटों मजरा/टोला/धोनी/पुरा इत्यादि को बारहमासी संपर्कता प्रदान करने 21 हजार 630 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार योजना का क्रियान्वयन 2 चरणों में किया जायेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पहले चरण एवं वित्तीय वर्ष 2030-31 से 2034-35 तक दूसरे चरण में कुल अनुमानित 30 हजार 900 कि.मी. मार्ग का निर्माण होगा। योजना का क्रियान्वयन राज्य मद से किया जायेगा। योजना के संबंध में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति को निर्णय लिये जाने के लिए अधिकृत किया गया है।
स्वीकृति अनुसार न्यूनतम 20 आवास और 100 से अधिक जनसंख्या वाले 6 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे क्षेत्र, जिसके 50 मीटर की दूरी में पूर्व से बारहमासी सड़क न हो, को बसाहट के अंतर्गत लिया जायेगा। इसके लिए बसाहट की जनसंख्या के घटते क्रम में विधानसभा क्षेत्रवार प्राथमिकता सूची तैयार की जायेगी। सांसद, क्षेत्रीय विधायक और जिला पंचायत सदस्यों के परामर्श पर ग्रामीणजनों की स्थानीय आवश्यकता जैसे – सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के आधार पर बसाहटों की प्राथमिकता में कलेक्टर द्वारा लिपिबद्ध कारणों से सूची में परिवर्तन किया जा सकेगा। अंतिम प्राथमिकता सूची का राज्य स्तर पर प्रकाशन किया जायेगा। योजना अंतर्गत 20 हजार 600 बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर मार्ग का निर्माण किया जायेगा।
प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय
मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में तुअर दाल उद्योगों की आवश्यकता को देखते हुए प्रदेश में बाहर से आयातित तुअर पर मंडी शुल्क से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया। छूट दिए जाने से प्रदेश में तुअर दाल की पर्याप्त उपलब्धता होगी। साथ ही परिवहन बढेगा और रोजगार में वृद्धि होगी।
झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन
मंत्रि-परिषद द्वारा झाबुआ, सिंगरौली, देवास और नर्मदापुरम में कामकाजी महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से SASCI (स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट) 2024-25 योजना अंतर्गत स्वीकृत 350 सीट्स की क्षमता वाले 4 वर्किंग वूमन हॉस्टल के निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन दिया गया है। योजना पी.पी.पी मोड में संचालित की जायेगी। योजना पर 40 करोड़ 59 लाख रुपए खर्च होंगे।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ”जिला विकास सलाहकार समिति” के गठन की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा जिले के विकास योजना के लिए रोडमेप तैयार करने और जिले की दीर्घकालीन विकास योजनाएं बनाने के लिए सभी जिलों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में “जिला विकास सलाहकार समिति” का गठन किये जाने का अनुमोदन दिया गया। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट भाषण में मध्यप्रदेश के समस्त जिलों में जिला विकास सलाहकार समिति का गठन किये जाने संबंधी निर्देश दिये गये थे।जिला विकास सलाहकार समिति में जिले के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। सांसद, जिले के समस्त विधायक, जिला मुख्यालय के महापौर या नगरपालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिले के सभी जनपद अध्यक्ष के साथ उद्योग, व्यापार, प्रगतिशील किसान, समाज सेवी, चिकित्सा, विधि आदि क्षेत्रों के 20 प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कलेक्टर समिति के सदस्य सचिव होंगे।
समिति के उद्देश्यों में जिले की जनता, जनप्रतिनिधियों व अन्य हितधारकों की जरूरतों और सुझावों के अनुसार जिले के दीर्घकालीन विकास की योजनाएं बनाना है। साथ ही समिति जिले के परंपरागत कौशल को चिन्हित कर प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल” के सिद्धांत के दृष्टिगत उन्हें राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देते हुए जिले की समृद्धि का रोडमैप तैयार करेगी। जिले की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के सुझावों पर समिति विचार करेगी।
जिले में स्थानीय प्रयासों से प्रचलित नवाचारों को एक योजना के रूप में मूर्त रूप देना। जिले में रोजगार सृजन एवं विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्यों के संबंध में सुझाव, उद्योग, व्यापार, जल संरचनाओं के संरक्षण, निर्यात, कृषि, खनिज आदि क्षेत्रों में जिले की कार्ययोजना के लिए सुझाव देना शामिल है।
एमबीबीएस के लिये मेधावी विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में दी जायेगी छात्रवृत्ति
मंत्रि-परिषद ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये मध्यप्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में निर्धारित अधिकतम शुल्क की राशि के समरूप राशि को मेधावी विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में छात्रवृत्ति दिए जाने की स्वीकृति दी है। यह अतिरिक्त शुल्क की पूर्ण प्रतिपूर्ति के लिये आवश्यक शेष धनराशि योजनातर्गत विद्यार्थियों को ब्याज रहित ऋण के रूप में शासन द्वारा दी जाएगी। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजनांतर्गत एमबीबीएस पाठ्यक्रम में लाभ के लिये NEET परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक डेढ़ लाख (1.5 लाख) के अंतर्गत प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही पात्र होंगे। मध्यप्रदेश के मूल निवासी विद्यार्थियों को NEET परीक्षा के माध्यम से मध्यप्रदेश के शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों और केंद्र सरकार के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने पर यह लाभ दिया जा सकेगा। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रवेशित विद्यार्थियों पर प्रभावशील होगी।
उल्लेखनीय है कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद आगामी 5 वर्षों के लिये राज्य शासन द्वारा निर्धारित ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने पर सेवाकाल के अनुपात में ऋण की अतिशेष राशि को कम माना जा सकेगा। निर्णयानुसार ढाई वर्ष कार्य करने पर 50 प्रतिशत ऋण भुगतान किया हुआ माना जाएगा। पांच वर्ष की सेवा के बाद अतिदेय राशि को शून्य मान्य किया जा सकेगा। पांच वर्ष की ग्रामीण क्षेत्र की कार्य करने की सेवा संबंधी शर्त पूरी नहीं करने की स्थिति में अनुपातिक रूप से शेष ऋण की राशि शासन को वापस किया जाना आवश्यक होगा।
योजना के क्रियान्वयन में सही एवं पात्र हितग्राहियों को लाभ प्राप्त हो सके, इसके लिये योजना के पोर्टल अन्य समान योजनाओं के पोर्टल से समन्वित किए जाएंगे। इसके हितग्राही मध्यप्रदेश में ही 5 वर्ष के लिए कार्य करें, यह सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। स्व-प्रमाणीकरण से आय के प्रमाणन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग एवं वित्त विभाग के साथ समन्वय कर तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे।
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MP Rajya Sabha: भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, चुनाव आयोग ने दिए प्रमाणपत्र

Bhopal: मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। गुरुवार को निर्वाचन आयोग ने भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंप दिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से भी इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया। इसके बाद तीनों सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
नामांकन रद्द होने से बदला पूरा समीकरण
दरअसल, राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर कांग्रेस इस सीट पर मुकाबले की स्थिति में थी, लेकिन 9 जून को उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। इसके विरोध में कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि आयोग की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस ने परिणाम रोकने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की तत्काल सुनवाई की जाए, क्योंकि नाम वापसी की अंतिम तिथि उसी दिन दोपहर 3 बजे तक थी। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए जवाब देने के लिए समय चाहिए। इस पर कांग्रेस ने मांग की कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक चुनाव परिणाम घोषित नहीं किए जाएं।
हालांकि अदालत ने मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद भी कांग्रेस ने परिणामों पर रोक लगाने की मांग दोहराई, लेकिन चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।
कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने को बताया गैरकानूनी
कांग्रेस ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन गैरकानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से खारिज किया। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से नामांकन निरस्त करने के फैसले को रद्द करने की मांग की है।
उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो इस मामले में पहले ही निर्णय ले सकता था। भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग ने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया है, लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि आयोग को निष्पक्षता के साथ काम करना चाहिए और मामले में जल्द निर्णय होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है, लेकिन सवाल यह है कि न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
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MP Weather: एमपी में आंधी-बारिश का दौर जारी, 34 जिलों में अलर्ट, 60 किमी रफ्तार से चल सकती है हवा; कई जिलों में ओलावृष्टि की संभावना

Bhopal: मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने गुरुवार को ग्वालियर, जबलपुर समेत 34 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, इन जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। बुधवार को भी प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में मौसम का मिजाज बदला रहा और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई।
शुक्रवार को ओलावृष्टि की भी आशंका
मौसम विभाग ने शुक्रवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों का असर बना रहेगा।
आंधी-बारिश के बीच बरकरार है गर्मी का असर
मौसम में बदलाव के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
13 जून के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय रहने के कारण प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। इसी को देखते हुए 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
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MP News: मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज, MP की तीनों सीटों पर BJP प्रत्याशी निर्विरोध तय

Bhopal: भोपाल। मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को खारिज कर दिया गया। भाजपा द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति पर सुनवाई के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अर्पित शर्मा ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।
भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी। इस संबंध में रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर शाम 5:30 बजे तक जवाब देने का समय दिया था। अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस प्रत्याशी के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
कांग्रेस ने फैसले को बताया गलत
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसले पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उन्हें केवल अदालत से नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसे आपराधिक प्रकरण नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देगी। वहीं दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और धरना भी दिया।
बेंगलुरु रवाना होने से पहले बदला घटनाक्रम
राज्यसभा चुनाव में संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों की बाड़ाबंदी का फैसला लिया था। इसके तहत 38 विधायकों समेत 75 लोगों को लेकर एक चार्टर्ड विमान भोपाल से बेंगलुरु रवाना होने वाला था।
हालांकि उड़ान से पहले विमान को अनुमति मिलने में करीब दो घंटे की देरी हुई। कांग्रेस नेताओं ने इसे सरकार का दबाव बताया। बाद में विमान को उड़ान की मंजूरी मिल गई और शाम करीब 6:30 बजे विमान ने उड़ान भरी।
इसी दौरान मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की सूचना मिलने पर विमान को रनवे से वापस लौटना पड़ा और पूरा घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
तीसरी सीट पर मुकाबला था रोचक
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था। भाजपा ने तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। नामांकन खारिज होने के बाद अब भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
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MP Cabinet: भोपाल मेट्रो के लिए ₹13,565 करोड़ मंजूर, कपास पर मंडी फीस आधी की गई

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बुनियादी ढांचे, कृषि, डिजिटल विकास और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने लगभग 13,800 करोड़ रुपए के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए 13,565.84 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित लागत, किसानों के लिए नई मंडी शुल्क व्यवस्था और IT सेक्टर के लिए 235.63 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है।
भोपाल मेट्रो के लिए 13,565 करोड़ रुपए मंजूर
कैबिनेट ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। परियोजना की मूल लागत 6,941.40 करोड़ रुपए थी, जिसमें 3,092.22 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत जोड़ी गई है। इसके साथ ही अतिरिक्त वित्तपोषण को मिलाकर कुल स्वीकृत राशि 13,565.84 करोड़ रुपए हो गई है। सरकार का कहना है कि इससे भोपाल के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और भविष्य की यातायात जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कपास पर मंडी फीस आधी
प्रदेश की 158 जिनिंग मिलों को राहत देते हुए कैबिनेट ने कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5% कर दी है।सरकार का मानना है कि इससे कपास उद्योग की लागत कम होगी, प्रदेश की जिनिंग मिलें प्रतिस्पर्धी बनेंगी और दूसरे राज्यों में उद्योगों के पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही रोजगार और GST संग्रह में भी वृद्धि होगी।
किसानों के लिए मंडी शुल्क बढ़ा
कैबिनेट ने सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर 1.50 रुपए प्रति सौ रुपए कर दिया है। इससे सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। इस राशि का उपयोग किसान सड़क निधि, कृषि अनुसंधान, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक हब और कृषि अधोसंरचना विकास पर किया जाएगा।
IT और AI विकास पर 235 करोड़ खर्च
राज्य में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देने के लिए 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए 235.63 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसमें 180.20 करोड़ रुपए IT संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना के लिए 55.43 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। मंजूर की गई कुल राशि का उपयोग AI, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने में किया जाएगा।
गेहूं-धान खरीदी के लिए 8,600 करोड़ की गारंटी
रबी और खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी को सुचारू बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रुपए की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति (गारंटी) देने की मंजूरी दी है। इसके अलावा एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन को 29,500 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त सरकारी गारंटी भी स्वीकृत की गई है।
कैबिनेट के प्रमुख फैसले
- भोपाल मेट्रो के लिए ₹13,565.84 करोड़ मंजूर
- कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5%
- मंडी शुल्क ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50
- IT और ई-गवर्नेंस के लिए ₹235.63 करोड़
- MPSCSC और मार्कफेड को ₹8,600 करोड़ की गारंटी
- किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस नेटवर्क को बढ़ावा
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MP News: भाजपा ने खेला OBC कार्ड, महेश केवट को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया, MP की तीसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प

Bhopal: मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नेता महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। बुंदेलखंड के निवाड़ी जिले से आने वाले महेश केवट सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके मैदान में उतरने से राज्यसभा चुनाव का मुकाबला और रोचक हो गया है।
महेश केवट केवट समाज से आते हैं और लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से जुड़े माने जाते हैं। हाल ही में 24 अप्रैल को राज्य सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
निष्कासन से राज्यसभा तक का सफर
महेश केवट का नाम पहले भी राजनीतिक कारणों से चर्चा में रहा है। नगरीय निकाय चुनाव के दौरान उन पर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करने के आरोप लगे थे। पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया था।
हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने संगठन के साथ सक्रिय रूप से काम किया और पार्टी नेतृत्व का विश्वास दोबारा हासिल किया। अब राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को उनके राजनीतिक पुनर्वास और बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए महेश केवट पर दांव लगाया है। केवट समाज में उनकी मजबूत पकड़ और बुंदेलखंड क्षेत्र में सक्रियता को उम्मीदवार चयन का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार तीसरे उम्मीदवार के चयन को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच कई दौर की चर्चा हुई। एसटी, एससी और अति पिछड़े वर्ग से उम्मीदवार उतारने के विकल्पों पर भी विचार किया गया। अंततः महेश केवट के नाम पर सहमति बनी।
मीनाक्षी नटराजन से होगा मुकाबला
राज्यसभा चुनाव में महेश केवट का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन से होगा। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है।
भाजपा पहले ही दो सीटों पर रजनीश अग्रवाल और तरुण चुग को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। तीसरी सीट के लिए अंतिम समय में महेश केवट के नाम की घोषणा ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
क्या कहता है चुनावी गणित?
मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में 228 विधायक मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है।
- भाजपा के विधायक: 164
- कांग्रेस के विधायक: 63
- एक सीट जीतने के लिए जरूरी वोट: 58
गणित के अनुसार भाजपा अपनी दो सीटें आसानी से जीत सकती है। इसके बाद उसके पास करीब 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे लगभग 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि इस सीट पर क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं और दोनों दलों की रणनीतियों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी है।
18 जून को होगा मतदान
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते की हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है, जबकि मतदान 18 जून को होगा। तीसरी सीट पर मुकाबला अब राज्य की राजनीति का सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबला बनता नजर आ रहा है।
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