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MP Cabinet: खेत से हाईटेंशन लाइन गुजरने पर मिलेगा 200 प्रतिशत मुआवजा, सरकारी आवास खाली न करने पर लगेगी 30% पैनेल्टी

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MP Cabinet: 200% compensation for high-tension lines passing through farmland, 30% penalty for failing to vacate government accommodation

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में संपन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा 132 केवी के टावर और उससे बड़ी लाईन बिछाने के लिए किसानों को दी जाने वाली मुआवजा/क्षतिपूर्ति राशि में वृद्धि करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार टॉवर लगाने पर दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि को 85 प्रतिशत से बढ़ाकर 200 प्रतिशत किया गया है। साथ ही लाइन ट्रान्समिशन लाइन के ROW (Right of way) में आने वाली भूमि की क्षतिपूर्ति राशि को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया गया है। क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल में टॉवर के चार पाए के अलावा सब तरफ 1-1 मीटर की अतिरिक्त वृद्धि की गयी है। भूमि का स्वामित्व किसान का ही रहेगा। टॉवर के बीच में और लाइन के नीचे की फसल किसान ले सकेगा।

केवल तार के नीचे की जमीन 132 K.V. लाईन में 7 मीटर क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल को बढाकर कॉरिडोर अनुसार 28 मीटर किया गया है। उसी तरह 220 K.V. लाईन 14 मीटर में वृद्धि कर कॉरीडोर अनुसार 35 मीटर किया गया है। इसके अतिरिक्त 400 K.V. लाईन के नीचे की जमीन का क्षतिपूर्ति क्षेत्रफल 52 मीटर निर्धारित किया गया है।

शासकीय आवास समय पर खाली न करने वालों को लगेगी 30% पैनेलटी

कैबिनेट द्वारा भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के नियम 17 एवं नियम 37 में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने की स्थिति में अधिकतम 6 माह तक की अवधि के लिए शासकीय सेवक सामान्य दर पर आवास धारित कर सकेगा। सेवानिवृत्त होने की स्थिति में शासकीय सेवक 6 माह तक आवास धारण कर सकेगा। सेवानिवृत्त शासकीय सेवक प्रथम 3 माह की अवधि के लिए आवंटित आवास सामान्य दर पर धारण कर सकेगा। उक्त अवधि के अवसान उपरांत पुनः आगामी 3 माह की अवधि के लिए किराया सामान्य दर से 10 गुना दर पर आवास धारण कर सकेगा। इसके उपरांत दाण्डिक दर से किराया वसूल किया जाएगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी। पहले केवल 3 माह तक ही शासकीय आवास धारण करने की अनुमति थी।

इसी तरह त्यागपत्र देने, सेवा से पृथक होने अथवा अन्य किन्ही कारणों से आवास रखने के लिए अनधिकृत होने पर 3 माह तक की अवधि के लिए शासकीय सेवक द्वारा सामान्य दर पर आवास धारित किया जा सकेगा। 3 माह की अवधि के अवसान पर नियमानुसार दाण्डिक किराया वसूल किया जाएगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी।

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अनधिकृत आधिपत्य के लिये नियम 37 के तहत वेतनमान के आधार पर आवास की पात्रता और लायसेंस शुल्क की दरों का निर्धारण भी संशोधित किया गया है। दाण्डिक मासिक किराया 10 गुना से बढ़कर 30 गुना किया गया है। प्रति माह 10 प्रतिशत की उत्तरोत्तर वृद्धि की जायेगी।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

1.प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) अंतर्गत अतिरिक्त 18 हजार 338 अविद्‌युतीकृत PVTG घरों के विद्युतीकरण के लिए विद्‌युत अधोसंरचना विस्तार के लिए लगभग 78 करोड़ 94 लाख रुपये की ‌द्वितीय चरण की कार्ययोजना की स्वीकृति प्रदान की गई है।  इस के लिए 60 प्रतिशत राशि 47 करोड़ 36 लाख रूपये केन्द्र शासन से अनुदान प्राप्त होगा व शेष 40 प्रतिशत राशि 31 करोड़ 58 लाख रुपये राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।

2.बक्स्वाहा जिला छतरपुर में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड स्तर के लिए कुल 7 पदों की स्वीकृति दी गई। इसमें व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड स्तर का एक नवीन पद व उनके अमले अंतर्गत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 पद, इस प्रकार कुल 7 नवीन पदों का सृजन के लिए 52 लाख 46 हजार रूपए प्रति वर्ष की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

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MP Cabinet: मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी, कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को दी मंजूरी

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MP Cabinet: मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सोमवार से हो रही है।

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को सदन में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है और इसी भावना के अनुरूप सरकार यह कदम उठा रही है।

उत्तराखंड के बाद MP भी बढ़ा आगे

देश में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। वहीं गुजरात और असम अपनी-अपनी विधानसभाओं से यूसीसी विधेयक पारित कर चुके हैं। अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भोपाल के इतिहास का भी किया जिक्र

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कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास राजा भोज, परमार राजवंश और गोंड शासकों से जुड़ा रहा है। उन्होंने रानी कमलापति, राजा निजाम शाह और दोस्त मोहम्मद खान के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का संगम रहा है।

देश में UCC की स्थिति

  • उत्तराखंड: जनवरी 2025 से UCC लागू।
  • गुजरात: मार्च 2026 में UCC विधेयक पारित।
  • असम: मई 2026 में UCC विधेयक विधानसभा से पास
  • गोवा: पुर्तगाली सिविल कोड के तहत पहले से समान नागरिक कानून लागू।

क्या है UCC?

समान नागरिक संहिता (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।

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MP News: 4 लाख पेंशनर्स को बड़ी राहत, अब DR बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ की मंजूरी का इंतजार नहीं, समय पर मिलेगा महंगाई राहत का लाभ

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Bhopal: मध्यप्रदेश के करीब 4 लाख पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। अब केंद्र सरकार जैसे ही महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) में बढ़ोतरी करेगी, मध्यप्रदेश सरकार उसे लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति का इंतजार नहीं करेगी। नई व्यवस्था लागू होने से वर्षों से चली आ रही देरी खत्म होगी और पेंशनर्स को समय पर बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ मिल सकेगा।

यह फैसला मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों की आपसी सहमति से लागू किया गया है। अब दोनों राज्य केंद्र सरकार के फैसले के बाद अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से डीआर घोषित कर उसका भुगतान कर सकेंगे।

25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म

साल 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद दोनों राज्यों के पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के लिए दोनों सरकारों की सहमति अनिवार्य कर दी गई थी। इस प्रक्रिया के कारण कई बार डीआर बढ़ने के बावजूद पेंशनर्स को 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद यह बाध्यता समाप्त हो गई है।

कार्यकारी आदेश से लागू होगा फैसला

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मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब महंगाई राहत लागू करने के लिए किसी विधायी संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों राज्य कार्यकारी आदेश जारी कर स्वतंत्र रूप से डीआर लागू कर सकेंगे।

हालांकि, दोनों राज्यों के बीच वित्तीय भार से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी, लेकिन महंगाई राहत लागू करने के लिए एक-दूसरे की मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।

केंद्र से अधिक DR नहीं दे सकेंगे

नई व्यवस्था के तहत दोनों राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की दर से अधिक डीआर नहीं दे सकेंगे। यानी डीआर की अधिकतम सीमा केंद्र सरकार की घोषणा के अनुरूप ही रहेगी।

वित्त मंत्री बोले- समय पर मिलेगा लाभ

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उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्णय से पेंशनर्स को समय पर महंगाई राहत मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अनावश्यक देरी समाप्त होगी और प्रदेश के करीब 4 लाख पेंशनर्स तथा उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

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MP Weather: मध्य प्रदेश में बारिश की रफ्तार थमी, 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा, पूर्वी हिस्से में सूखे जैसे हालात

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Bhopal: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार पिछले एक सप्ताह से धीमी पड़ गई है। लगातार सात दिन से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। स्थिति यह है कि जबलपुर समेत 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है, जबकि पश्चिमी जिले फिलहाल बेहतर स्थिति में हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

पूर्वी MP में सबसे ज्यादा कमी

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभागों में सामान्य से करीब 2 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

19 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम

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मौसम विभाग का अनुमान है कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं।

जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश की उम्मीद

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल पूरे प्रदेश में मानसून की स्थिति पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि बनने वाली मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर

मौसम विभाग के अनुसार, जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया, लेकिन पिछले सात दिनों से बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण लगातार तीन दिन से प्रदेश का वर्षा प्रतिशत फिर सामान्य से नीचे चला गया है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे अहम महीना होता है और इसी दौरान प्रदेश में पूरे सीजन की करीब 40 प्रतिशत बारिश होती है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश खेती और जलाशयों दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।

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MP के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं, CAG रिपोर्ट के हवाले से हाईकोर्ट में PIL, सरकार से मांगा जवाब

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जबलपुर: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दायर जनहित याचिका (PIL) में दावा किया गया है कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। मामले को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। CAG की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग का बजट 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक होने के बावजूद हजारों स्कूल बिना शिक्षकों के संचालित हो रहे हैं। इससे लाखों विद्यार्थियों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से शिक्षक नियुक्तियों, बजट के उपयोग और CAG रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत जवाब मांगा है।

परीक्षा परिणामों में भी दिखा असर

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याचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों की कमी का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, सत्र 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74% था, जो 2021-22 में घटकर 38.53% रह गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव का यह सीधा परिणाम है।

शिक्षक भर्ती और बजट खर्च पर देनी होगी जानकारी

हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा बजट के उपयोग और व्यवस्था में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

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Bhojshala: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार से नमाज के लिए वैकल्पिक जगह देने को कहा, ASI को बदलाव पर रोक

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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए वैकल्पिक जगह देने को कहा, ASI को बदलाव से रोका

Bhojshala: धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय की नमाज के लिए परिसर से सटे किसी खुले स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था और परिसर में नमाज पर रोक लगाई गई थी।

ASI को दिया स्पष्ट निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली विस्तृत सुनवाई दो से तीन सप्ताह के भीतर होने की संभावना है।

अंतरिम राहत देने से इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई। हालांकि, नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश देकर अदालत ने अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित की है।

मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले से वर्षों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था बदल गई है। उनका कहना था कि पहले शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता था और मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। उन्होंने पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।

केंद्र ने कहा- कानून व्यवस्था सामान्य

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं आई।

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क्या था हाईकोर्ट का फैसला?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना था। अदालत ने ASI की सर्वे रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हिंदू पक्ष को नियमित पूजा का अधिकार दिया था तथा परिसर में नमाज पर रोक लगा दी थी। अब इस विवाद पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा, जहां सभी पक्षों की दलीलों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और ASI की रिपोर्ट पर विस्तृत सुनवाई होगी।

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