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Jharkhand: चंपई सोरेन ने हासिल किया बहुमत, पक्ष में पड़े 47 वोट, विपक्ष में 29 मत

Ranchi: झारखंड में चल रही सियासी उथल पुथल अब कुछ शांत होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सोरेन ने सोमवार 5 फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। विधानसभा के विशेष सत्र में सीएम चंपई सोरेन की ओर से पेश किए गए विश्वास मत प्रस्ताव के पक्ष में 47 वोट प्राप्त हुए, जबकि विरोध में 29 मत मिले। सदन में पेश किया गया। 82 सदस्यीय विधानसभा में गांडेय विधानसभा सीट जेएमएम विधायक सरफराज अहमद के त्यागपत्र के कारण खाली है। जबकि जेएमएम रामदास सोरेन और बीजेपी के इंद्रजीत महतो विधानसभा नहीं पहुंच गए। घाटशिला के जेएमएम विधायक रामदास सोरेन किडनी की समस्या के कारण दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं बीजेपी विधायक इंद्रजीत महतो लंबे समय से हैदराबाद के एक अस्पताल में इलाजरत हैं।
मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने लगाया केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम चंपई सोरेन ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर हेमंत सोरेन को फंसाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ईडी ने हेमंत सोरेन को उस मामले में गिरफ्तार किया है, जिसका कोई खाता-बही नहीं हैं। वहीं पूर्व CM हेमंत सोरेन ने भी चर्चा के दौरान बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 31 जनवरी की रात को काली रात बताते हुए कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला अध्याय बन गया। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी की रात को देश में पहली बार किसी सीएम या पूर्व सीएम या किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी राजभवन में हुई। हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी में राजभवन भी शामिल रहा है।
आरोप साबित हुए, तो राजनीति से संन्यास लूंगा-हेमंत सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईडी के सभी आरोप को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यदि उनके नाम की 8.5 एकड़ जमीन के कागजात को सामने रख दिया जाए, तो वे राजनीति से सन्याय ले लेंगे। इतना ही नहीं वे झारखंड छोड़ कर चले जाएंगे। हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि मैं आंसू नहीं बहाऊंगा, वक्त के लिए बचा कर रखूंगा। उन्होंने कहा कि राजभवन में पहली बार किसी की गिरफ्तारी हुई है। अब यह देखना कि राष्ट्रपति भवन, लोकसभा अध्यक्ष के आवास से गिरफ्तारी की शुरुआत कब होगी।
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तमिलनाडु पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: 18 की मौत, कई मजदूर मलबे में दबे; CM स्टालिन ने जताया दुख

Tamil Nadu Factory Blast: तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका हो गया। पुलिस के मुताबिक इस हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के समय फैक्ट्री में करीब 30 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं करीब 60% तक झुलस गई हैं। कई मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
रेस्क्यू में दिक्कत, धमाके के बाद भी फूटते रहे पटाखे
दमकल और रेस्क्यू टीमें कई घंटों से आग बुझाने और मलबा हटाने में जुटी हैं। धमाके के बाद भी लगातार पटाखे फूटते रहे, जिससे राहत कार्य में काफी मुश्किलें आईं।
कच्चे माल वाले हिस्से में हुआ विस्फोट
शुरुआती जांच में सामने आया है कि विस्फोट फैक्ट्री के उस हिस्से में हुआ, जहां मजदूर कच्चे पटाखा सामग्री के साथ काम कर रहे थे। इससे नुकसान और ज्यादा बढ़ गया।
CM स्टालिन ने जताया दुख
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने X पर लिखा कि मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना है और मंत्रियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन को हर संभव सहायता देने को कहा गया है।
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DA Hike 2026: केंद्रीय कर्मचारियों को राहत, DA-DR में 2% बढ़ोतरी, अब 60% हुआ महंगाई भत्ता

DA Hike 2026: केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। अब DA-DR 58% से बढ़कर 60% हो गया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। यह फैसला नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस बढ़ोतरी से करीब 50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को सीधा फायदा मिलेगा।
सरकार के इस फैसले से सालाना करीब 6,791 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। इससे पहले अक्टूबर 2025 में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जो 1 जुलाई 2025 से प्रभावी था।
साल में दो बार होता है रिविजन
केंद्र सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की समीक्षा करती है। इस बढ़ोतरी से कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होगा।
क्या होता है DA?
महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला कॉस्ट-ऑफ-लिविंग एडजस्टमेंट है। यह बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में तय होता है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय पर असर कम पड़े।
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Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा आज से शुरू, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन; जानिए 5 बड़े नियम

Char Dham Yatra 2026: उत्तरा खंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा शनिवार से औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऋषिकेश से 10 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे, जो श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम लेकर जाएंगी। ये सभी यात्री 19 अप्रैल को दोनों धामों के कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे। इस साल यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 18.25 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 23 लाख तक पहुंचा था।
यात्रियों की सुविधा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर भी शुरू कर दिए गए हैं। सबसे पहले मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से आए 100 श्रद्धालुओं ने पंजीयन कराया।
चारधाम यात्रा से जुड़े 5 बड़े नियम
गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक- बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर में केवल हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के श्रद्धालुओं को ही प्रवेश मिलेगा।
केदारनाथ में चढ़ावा प्रतिबंध-केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में गंगाजल और फूल चढ़ाने पर रोक रहेगी। विशेष पूजा का समय भी बदला गया है, अब यह रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच होगी।
वाहनों के लिए समय सीमा-यात्रा मार्ग पर वाहन सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक ही चल सकेंगे। इसके बाद चेकपोस्ट पर रोक दी जाएगी।
स्वास्थ्य जांच अनिवार्य- केदारनाथ की पैदल यात्रा से पहले बुजुर्ग और बीपी मरीजों को गौरीकुंड में स्वास्थ्य जांच करानी होगी।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन- यात्रा मार्ग को 16 सुपर जोन में बांटा गया है। 48 हॉल्टिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां आपदा की स्थिति में 1.18 लाख लोग ठहर सकते हैं। भूस्खलन के 80 संवेदनशील पॉइंट चिन्हित कर इमरजेंसी टीमें तैनात की गई हैं।
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Lok Sabha: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, दो-तिहाई बहुमत न मिलने से पास नहीं हुआ बिल

Lok Sabha: लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने वाला संविधान का 131वां संशोधन बिल पास नहीं हो सका। करीब 21 घंटे की लंबी बहस के बाद हुई वोटिंग में सरकार को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया।कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट दिया। बिल पास कराने के लिए 352 वोट जरूरी थे, लेकिन सरकार 54 वोट से पीछे रह गई। यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका है जब NDA सरकार सदन में कोई महत्वपूर्ण बिल पास नहीं करा पाई। NDA के पास 293 सांसद हैं और वह केवल 5 अतिरिक्त सांसदों का ही समर्थन जुटा सकी।
दो अन्य बिलों पर नहीं हुई वोटिंग
सरकार ने इस मुद्दे से जुड़े दो अन्य बिल- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026- को वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि ये बिल पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से वोटिंग की जरूरत नहीं है।
महिला आरक्षण पर असर
इस बिल के फेल होने का सीधा असर महिला आरक्षण कानून, यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर पड़ेगा। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं, लेकिन इसके लिए परिसीमन जरूरी है।
परिसीमन यानी जनसंख्या के आधार पर सीटों की संख्या और सीमाओं का पुनर्निर्धारण। अब यह प्रक्रिया नई जनगणना के बाद ही संभव होगी, जिससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी तय मानी जा रही है। ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका लाभ मिलना मुश्किल दिख रहा है।
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Rahul Gandhi: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने के दिए आदेश, ब्रिटिश नागरिकता के आरोपों पर फैसला, कोर्ट ने कहा- CBI करे जांच

Lucknow: राहुल गांधी के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले को CBI को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।यह आदेश कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर आया है, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता लेने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को आरोपों की सत्यता पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं थी।
सुनवाई के दौरान जज सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय से जुड़े अहम दस्तावेज भी तलब किए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि उनके पास ऐसे साक्ष्य हैं, जो राहुल गांधी के यूके में मतदाता होने की ओर इशारा करते हैं। याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, Official Secrets Act 1923, Passport Act 1967 और Foreigners Act 1946 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
हालांकि, इससे पहले साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट इस तरह की एक याचिका को खारिज कर चुका है और कहा था कि किसी कंपनी के दस्तावेज में नाम दर्ज होने मात्र से नागरिकता साबित नहीं होती। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई FIR दर्ज होने और CBI जांच के बाद तय होगी।

















