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India-Taliban Meeting: भारत की अफगान तालिबान से बातचीत, विकास परियोजनाओं में मदद करेगा भारत

India-Taliban Meeting: भारत और अफगानिस्तान के बीच दुबई में बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई है। इस बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्तकी के साथ बातचीत की। बैठक में दोनों पक्षों ने मानवीय सहायता, द्विपक्षीय मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की। भारत और अफगान तालिबान की यह मुलाकात पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच काफी अहम मानी जा रही है।
बैठक में भारत ने अफगान लोगों की मदद जारी रखने का वादा किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता के उद्देश्य सहित व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों में सहयोग के लिए चाबहार बंदरगाह के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।’’ अफगान पक्ष के अनुरोध के जवाब में भारत स्वास्थ्य क्षेत्र और शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए पहले चरण में और अधिक सहायता प्रदान करेगा।
भारत ने की थी अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक की आलोचना
अफगान तालिबान के साथ बुधवार को हुई द्विपक्षीय बैठक से दो दिन पहले भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर की गई एयर स्ट्राइक पर कड़ा विरोध जताया था। भारत ने पाकिस्तान की निंदा करते हुए कहा कि अपनी घरेलू नाकामियों का दोष दूसरों पर मढ़ना इस्लामाबाद की पुरानी आदत है। हम निर्दोष नागरिकों पर किसी भी हमले की साफतौर से निंदा करते हैं। बैठक में अफगानिस्तान ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को वरीयता देने का आश्वासन दिया और दोनों देशों के बीच क्रिकेट के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
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SIR: देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की तैयारी तेज, अप्रैल से 22 राज्यों में शुरू होगी SIR

Election Commission: मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का बड़ा अभियान छेड़ दिया है। चुनाव आयोग के सचिव पवन दीवान ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि SIR से जुड़ी सभी तैयारियां जल्द पूरी की जाएं। आयोग ने साफ किया कि दिल्ली और कर्नाटक समेत शेष राज्यों में अप्रैल से यह प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। आयोग पहले ही 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्देश दे चुका था, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए नागरिकों को मतदाता सूची में जोड़ा जाता है, वहीं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से अन्य स्थान पर चले गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते या अन्य विवरण में त्रुटियों को भी इसी दौरान ठीक किया जाता है। उद्देश्य साफ है- चुनाव से पहले एकदम शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना।
पहले चरण में यह प्रक्रिया बिहार में पूरी की गई, जहां अंतिम सूची में 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए। दूसरे चरण में 28 अक्टूबर 2025 से उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में SIR जारी है। वहीं असम में SIR के बजाय विशेष संशोधन प्रक्रिया 10 फरवरी को पूरी कर ली गई।
चुनाव आयोग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती सही और पारदर्शी मतदाता सूची से ही संभव है। इसी उद्देश्य से अब अप्रैल से देश के 22 राज्यों में यह व्यापक सत्यापन अभियान शुरू होने जा रहा है।
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Factory Blast: दो राज्यों में फैक्ट्री ब्लास्ट, भिवाड़ी में 8 मजदूर जिंदा जले, फरीदाबाद में धमाकों से 42 झुलसे

Factory Blast: राजस्थान के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा कारौली इंडस्ट्रियल एरिया की एक केमिकल फैक्ट्री में सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे जोरदार धमाका हो गया। हादसे में 8 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को दिल्ली AIIMS रेफर किया गया है। धमाका इतना भीषण था कि कई शवों के कंकाल ही बचे। बॉडी पार्ट्स के टुकड़े फैक्ट्री परिसर में बिखरे मिले, जिन्हें रेस्क्यू टीम ने पॉलीथीन में इकट्ठा किया। पुलिस ने फैक्ट्री मैनेजर अभिनंदन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है और यूनिट को सील कर दिया गया है।
Sp मनीष कुमार ने बताया कि मृतकों के परिजनों की शिकायत पर फैक्ट्री मालिक और संचालनकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। मौके से बारूद, पटाखे और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है। हादसे के समय करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे।
मृतकों में बिहार के मोतिहारी और चंपारण जिले के छह मजदूरों की पहचान हो चुकी है, जबकि एक की शिनाख्त नहीं हो पाई। डीएनए जांच और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
फरीदाबाद: शॉर्ट सर्किट से आग, ड्रम फटने से मचा हड़कंप
वहीं हरियाणा पुलिस के अनुसार, यूनिट में मेटल शीट कटिंग का काम होता है। शाम के समय मशीन पर काम के दौरान शॉर्ट सर्किट से आग भड़की और केमिकल ड्रम में विस्फोट हो गया। फायर ब्रिगेड ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। एहतियातन आसपास का इलाका खाली करा लिया गया था।
दोनों हादसों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
लगातार हो रहे औद्योगिक हादसों ने फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
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Kedarnath Dham 2026: केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, सुबह 8 बजे से होंगे दर्शन, 19 अप्रैल को उखीमठ से रवाना होगी पंचमुखी डोली

Kedarnath Dham 2026: चारधाम यात्रा की सबसे अहम कड़ी केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। तिथि की गणना और घोषणा महाशिवरात्रि पर ओंकारेश्वर मंदिर (उखीमठ) में की गई। तारीख तय होते ही शासन-प्रशासन ने केदारनाथ पैदल मार्ग से बर्फ हटाने और यात्रा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। मंदिर समिति ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम के निर्देश दिए हैं।
ऐसे होगी कपाट खुलने की प्रक्रिया
18 अप्रैल: भगवान भैरवनाथ की विशेष पूजा-अर्चना
19 अप्रैल: केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ से धाम के लिए प्रस्थान, विभिन्न पड़ावों से होते हुए डोली धाम पहुंचेगी
22 अप्रैल 2026, सुबह 8 बजे: शुभ मुहूर्त में कपाट खुलेंगे, स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन शुरू
55 किमी पैदल सफर कर उखीमठ पहुंची थी डोली
इससे पहले 23 अक्टूबर 2025 को भाई दूज पर कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। इसके बाद बाबा की डोली 55 किमी पैदल यात्रा कर 25 अक्टूबर को उखीमठ पहुंची थी, जहां शीतकालीन गद्दी में विराजमान हुए। 2025 में कपाट 2 मई को खुले थे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुताबिक, पिछले वर्ष 17 लाख 68 हजार 795 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। 2013 की आपदा के बाद यह दूसरी बार था जब इतनी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे।
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PM Modi Assam: असम के हाईवे पर एयरफोर्स विमान से उतरे PM मोदी, कहा- कांग्रेस देश विरोधी सोच वालों को देती है मंच

PM Modi Assam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को असम दौरे पर अनोखे अंदाज में पहुंचे। वे वायुसेना के C-130 विमान से डिब्रूगढ़ के मोरन बाइपास स्थित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरे। इस हाईवे एयरस्ट्रिप पर उतरने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने।यह एयरस्ट्रिप सामरिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है और चीन सीमा से करीब 300 किलोमीटर दूर है। पीएम की मौजूदगी में हाईवे पर राफेल और सुखोई समेत 16 लड़ाकू विमानों ने एरियल शो किया। करीब 30 मिनट तक चले इस प्रदर्शन में विमानों ने हाईवे से टेकऑफ और लैंडिंग कर ऑपरेशनल क्षमता दिखाई।
कांग्रेस पर सीधा हमला
गुवाहाटी में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सेना के लिए हथियार खरीद में घोटाले होते थे। मोदी ने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस उन लोगों और विचारों के साथ खड़ी है जो देश का बुरा सोचते हैं। उनके मुताबिक, देश तोड़ने वाले नारे लगाने वालों को कांग्रेस सम्मान देती है और कंधे पर बैठाती है।
विकास और कनेक्टिविटी का जिक्र
पीएम ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 10 वर्षों में असम और नॉर्थ ईस्ट में अभूतपूर्व विकास किया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के समय असम को टैक्स हिस्सेदारी में केवल 10 हजार करोड़ रुपए मिलते थे, जबकि अब यह राशि पांच गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने ब्रह्मपुत्र पर बने Kumar Bhaskar Varma Setu का उद्घाटन किया और Indian Institute of Management Guwahati के अस्थायी परिसर का लोकार्पण भी किया। यह पिछले तीन महीनों में उनका तीसरा असम दौरा है। राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। 2016 से यहां NDA की सरकार है, जबकि उससे पहले 15 साल तक कांग्रेस सत्ता में रही।
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Vande Mataram: जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम, सभी 6 अंतरे अनिवार्य, स्कूलों में राष्ट्रगीत से होगी पढ़ाई की शुरुआत; राष्ट्रपति कार्यक्रमों में भी बजे

Vande Mataram: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और बजाने को लेकर पहली बार विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को 10 पेज का आदेश जारी किया, जिसकी जानकारी 11 फरवरी को सामने आई। नए निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाना और सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
किन मौकों पर अनिवार्य होगा राष्ट्रगीत
नई गाइडलाइन के अनुसार निम्न प्रमुख अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा-
- तिरंगा फहराने के कार्यक्रम
- राष्ट्रपति के आगमन पर
- राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में
- राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में
- पद्म पुरस्कार जैसे सिविलियन अवॉर्ड समारोह
- ऐसे कार्यक्रम जिनमें राष्ट्रपति मौजूद हों
इसके अलावा, मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण आयोजनों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते उसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार दिया जाए।
पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन
PTI के मुताबिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों गाए या बजाए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा। इस दौरान सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।
स्कूलों में 6 अंतरे अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से होगी। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब केवल पहले दो नहीं, बल्कि ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड तय की गई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब से राष्ट्रगीत का केवल आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नियम
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नए नियम सिनेमा हॉल पर लागू नहीं होंगे। फिल्मों से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।
150 साल पूरे होने पर विशेष पहल
केंद्र सरकार इस समय ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। ऐसे में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर यह विस्तृत प्रोटोकॉल प्रतीकात्मक और औपचारिक दोनों रूप से अहम माना जा रहा है।
इतिहास: 1875 में रचना, 1896 में पहली बार सार्वजनिक गायन
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को ‘वंदे मातरम’ लिखा। 1882 में यह उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सार्वजनिक मंच से गाया। ‘वंदे मातरम’ का अर्थ है— हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत आजादी के आंदोलन का नारा बन गया था।

















