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India Pakistan War: पाकिस्तान ने तीन घंटे में ही तोड़ा सीजफायर, कश्मीर-राजस्थान और पंजाब में किए ड्रोन अटैक

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India Pakistan Ceasefire: Pakistan broke the ceasefire in just three hours, carried out drone attacks in Kashmir-Rajasthan and Punjab

India Pakistan War: भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार शाम 5 बजे सीजफायर के ऐलान के 3 घंटे बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन कर दिया। उसकी तरफ से जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में ड्रोन से हमला किया गया। जवाब में भारत ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। पाकिस्तान के पेशावर सहित कई शहरों में धमाके शुरू हो चुके हैं।

पाकिस्तान की जियो न्यूज ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत के ड्रोन पेशावर हवाई अड्डे के पास पहुंच गए और उन पर गोलीबारी की जा रही है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के भिम्बर में भी जोरदार धमाके सुने गए हैं। पीओके में दो धमाके सुने गए हैं। पाकिस्तान के कई शहरों में धमाके की खबर आ रही है।

सरकार की तरफ से भारतीय सेनाओं और बीएसएफ को मुंहतोड़ जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस क्रॉफ्रेंस में कहा कि “भारतीय सेना इस सीमा अतिक्रमण से निपट रही है, यह अतिक्रमण अत्यंत निंदनीय है। पाकिस्तान इस कायराना हरकत का जिम्मेदार है और उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।”

मिस्री ने आगे कहा, ‘हमारा मानना है कि पाकिस्तान इस स्थिति को ठीक से समझे और इस अतिक्रमण को रोकने के लिए तुरंत उचित कार्रवाई करे। सेना इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और उसे किसी भी अतिक्रमण से निपटने के लिए ठोस और सख्त कदम उठाने के लिए आदेश दे दिए गए हैं।”

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TMC के दोनों गुटों को मिले नए नाम-चिह्न: ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, दूसरे गुट को ‘लिफाफा’; उपचुनाव में इन्हीं से उतरेंगे

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है। यह फैसला 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले आया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।

मूल नाम और ‘फूल-घास’ चिह्न पर रोक

इससे एक दिन पहले आयोग ने दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले मूल चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग ने कहा था कि दोनों पक्ष पार्टी के मूल नाम और आरक्षित चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में उपचुनाव से पहले विवाद का अंतिम निपटारा संभव नहीं होने के कारण दोनों को अलग-अलग नाम और चिह्न दिए जा रहे हैं।

उपचुनाव में नए नाम से होंगे उम्मीदवार

आयोग के ताजा आदेश के बाद दोनों गुट अब पश्चिम बंगाल के संबंधित उपचुनाव में अपने आवंटित नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करेंगे। ममता गुट के लिए चुनावी पहचान ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और फुटबॉल खिलाड़ी होगी, जबकि दूसरे गुट की पहचान ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा होगी।

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अंतिम फैसला बाद में होगा

चुनाव आयोग का यह फैसला स्थायी रूप से यह तय नहीं करता कि मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल-घास’ चिह्न पर अधिकार किस गुट का होगा। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों को देखते हुए की गई है। मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर आयोग की अंतिम प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।

6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 को रिजल्ट

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। चुनाव परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। उपचुनाव से ठीक पहले पार्टी के नाम और चिह्न में हुए इस बदलाव के कारण उम्मीदवारों को नए चुनावी नाम और प्रतीक के साथ मैदान में उतरना होगा।

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निठारी कांड: आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत, 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में हुआ था बरी

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हरिद्वार: निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उसने उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में आत्महत्या की। पुलिस मामले की जांच कर रही है। कोली करीब 19 साल जेल में रहा। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े उसके आखिरी मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि समान साक्ष्यों के आधार पर जुड़े दूसरे मामलों में बरी होने के बाद उसकी एक दोषसिद्धि कायम रखना उचित नहीं होगा।

2006 में सामने आया था निठारी कांड

नोएडा के निठारी में 2005-06 के दौरान बच्चों और युवतियों के लापता होने के मामले सामने आए थे। 29 दिसंबर 2006 को कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला देशभर में चर्चा में आया। इसके बाद जांच CBI को सौंपी गई और कोली के खिलाफ कई मुकदमे चले।

13 मामलों में मिली थी सजा

कोली के खिलाफ निठारी से जुड़े कुल 13 मामलों में दोषसिद्धियां हुई थीं। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति बरकरार रखी। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी और रिहाई का आदेश दिया। कोली नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसके खिलाफ निठारी कांड से संबंधित कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं रहा था।

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तमिलनाडु में हिंदी को लेकर SC की सख्त टिप्पणी: कहा- सोच बदलने की जरूरत, ऐसा नहीं हो सकता कि राज्य की धरती पर हिंदी न पढ़ाई जाए

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नई दिल्ली: तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य की हिंदी को लेकर आपत्ति पर टिप्पणी की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को हिंदी पढ़ाए जाने के मुद्दे पर अपनी सोच बदलने की जरूरत है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी।

कोर्ट ने चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग-थलग रखने की सोच पर भी सवाल उठाया। बेंच ने कहा कि चेन्नई में बैठे लोगों को दिल्ली में बैठे लोगों से अलग नहीं होना चाहिए और दिल्ली को भी चेन्नई से अलग नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की सलाह दी।

हर जिले में नवोदय स्कूल के लिए जमीन चिन्हित करने का निर्देश

मामला तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) खोलने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपने 15 दिसंबर 2025 के आदेश का पालन करने और हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जमीन की पहचान करने को कहा। कोर्ट ने इस संबंध में अपने पहले के निर्देश को वापस लेने से इनकार किया।

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसके तहत राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया था। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी दो-भाषा नीति और नवोदय विद्यालयों की तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई है।

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हिंदी को लेकर क्या है विवाद?

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से दो-भाषा नीति का पालन करती है, जिसमें तमिल और अंग्रेजी को प्रमुखता दी जाती है। दूसरी ओर, जवाहर नवोदय विद्यालयों में तीन-भाषा व्यवस्था लागू है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। राज्य का तर्क है कि नवोदय विद्यालयों की यह व्यवस्था उसकी मौजूदा भाषा नीति और राज्य के कानूनी ढांचे के अनुरूप नहीं है।

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा है कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद राज्य में किसी केंद्रीय योजना को लागू करते समय राज्य के कानून, नीति और प्रशासनिक तथा वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

क्या हैं जवाहर नवोदय विद्यालय?

जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित आवासीय स्कूल हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। विद्यालयों में लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं और विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था भी होती है।

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तमिलनाडु में इन स्कूलों की स्थापना का मुद्दा लंबे समय से राज्य और केंद्र के बीच मतभेद का विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए इस मतभेद का समाधान निकालने पर जोर दिया है।

राज्य सरकार की आपत्ति के बावजूद जमीन चिन्हित करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार की सुनवाई में स्पष्ट किया कि 15 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत तमिलनाडु को हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। वहीं भाषा नीति को लेकर केंद्र और राज्य के बीच मतभेदों को बातचीत से सुलझाने की बात कही गई है।

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अरब सागर में भारत-पाक नौसेना के जहाज टकराए, दिल्ली में पाक राजनयिक तलब

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नई दिल्ली: उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की नौसेना के जहाजों के बीच टक्कर हो गई। घटना 15 सितंबर की शाम अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई, जब नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत के करीब पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज तेज रफ्तार से पहुंचा। भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी जहाज के व्यवहार को ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर’ बताते हुए 16 सितंबर को पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के मुताबिक घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। भारत ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई का आचरण 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे उल्लंघन में था। इस अनुच्छेद का उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के दौरान जहाजों और इकाइयों के बीच सुरक्षा व पूर्व-सूचना से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

तेज रफ्तार में भारतीय युद्धपोत के करीब आया पाकिस्तानी जहाज

भारतीय सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और असुरक्षित तरीके से दिशा बदली। इसके बाद दोनों जहाजों की टक्कर हो गई।

विदेश मंत्रालय ने घटना के विस्तृत नौवहन विवरण या भारतीय युद्धपोत का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज की पहचान PNS Hunain के रूप में की गई है। इसे यारमूक-क्लास का समुद्री गश्ती पोत बताया गया है, जिसका इस्तेमाल निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियानों में होता है।

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भारत ने पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया

घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और पाकिस्तान से अपने सैन्य बलों को समुद्र में पर्याप्त सावधानी बरतने तथा दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। भारत के इस्लामाबाद स्थित चार्ज डी’अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी मामले में विरोध दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

भारतीय जहाज को बड़ा नुकसान नहीं

MEA ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों में भारतीय युद्धपोत पर किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान या नौसैनिकों के घायल होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, पाकिस्तानी जहाज को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं और उसके अपने बंदरगाह की ओर लौटने की बात भी रिपोर्ट की गई है। इस संबंध में आधिकारिक विस्तृत आकलन अभी सामने नहीं आया है।

1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का मामला

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भारत ने इस घटना को 1991 के Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements के अनुच्छेद 10 के संदर्भ में उठाया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण इस प्रावधान के सीधे विपरीत था। भारत ने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में उसके सैन्य जहाज ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतें।

2011 में भी INS Godavari और PNS Babur आमने-सामने आए थे

भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। 16 जून 2011 को अदन की खाड़ी में भारतीय युद्धपोत INS Godavari और पाकिस्तानी जहाज PNS Babur एक-दूसरे से टकरा गए थे। उस समय दोनों जहाज सोमाली समुद्री डकैती से मुक्त किए गए MV Suez के मामले में इलाके में सक्रिय थे।

भारत ने तब आरोप लगाया था कि PNS Babur ने पीछे से तेज गति से आकर असुरक्षित तरीके से manoeuvre किया और INS Godavari को छुआ। इस घटना में INS Godavari के हेलिकॉप्टर डेक का सुरक्षा जाल क्षतिग्रस्त हुआ था। भारत ने पाकिस्तान के सामने औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया था।

पाकिस्तान ने उस समय अलग पक्ष रखते हुए INS Godavari पर उसके मानवीय अभियान में बाधा डालने और खतरनाक manoeuvre करने का आरोप लगाया था। यानी 2011 की घटना को लेकर दोनों देशों के दावे अलग थे।

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Mumbai: दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली के नाम

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मुंबई: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर ली। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद हुई है। कोर्ट ने CBI को दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक CBI की FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती और सूरज पंचोली समेत कई नाम शामिल हैं। हालांकि, FIR में नाम दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए।

6 साल बाद CBI के हाथ में जांच

दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। पुलिस ने शुरुआत में इसे Accidental Death Report (ADR) के रूप में दर्ज किया था। बाद की जांच में मुंबई पुलिस ने मौत को आत्महत्या बताया था। 6 दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे। दिशा और सुशांत की मौत के बीच समय का अंतर होने के कारण दोनों मामलों को लेकर लंबे समय से कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं।

हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच पर उठाए थे सवाल

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को CBI जांच का आदेश देते हुए कहा था कि करीब छह साल तक चली पुलिस जांच ज्यादा सवाल खड़े करती है और जवाब कम देती है। अदालत ने CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में जांच करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच में यदि कोई अपराध सामने नहीं आता है तो CBI उचित समरी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।

पिता ने लगाए थे हत्या और गैंगरेप के आरोप

दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर संदेह जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई तथा प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की गई।

CBI के सामने बयान दर्ज कराते समय उन्होंने आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया था। हालांकि ये आरोप जांच का विषय हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

वकील ने कई लोगों के नाम शिकायत में दिए थे

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सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने पहले कहा था कि शिकायत में कई लोगों के नाम दिए गए हैं। इनमें आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, कुछ पुलिस अधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं। वकील का कहना था कि जांच में जिसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अगर CBI की रिपोर्ट में अपराध नहीं बनता है तो परिवार को उस रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।

पुलिस का पुराना दावा- मौत आत्महत्या थी

मुंबई पुलिस ने अपनी जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या बताया था। पुलिस का कहना था कि उपलब्ध गवाहों और फोरेंसिक सामग्री में हत्या या यौन हमले के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। यही वजह है कि CBI जांच में अब मौत की परिस्थितियों, पोस्टमॉर्टम, फोरेंसिक सामग्री, डिजिटल साक्ष्यों और पहले की पुलिस जांच के सभी पहलुओं की दोबारा पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

पोस्टमॉर्टम और जांच को लेकर भी उठे थे सवाल

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान दिशा की मौत से जुड़ी मेडिकल और जांच सामग्री को लेकर भी सवाल उठे थे। अदालत ने उपलब्ध तस्वीरों और दस्तावेजों पर सवाल किए थे और यह पूछा था कि इतनी ऊंचाई से गिरने के मामले में चोटों से जुड़ी जानकारी और जांच रिकॉर्ड में स्पष्टता क्यों नहीं है। अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही होंगे कि दिशा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या इसमें किसी आपराधिक साजिश के सबूत हैं और पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गया था या नहीं। फिलहाल CBI की जांच शुरुआती चरण में है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।

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