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Gwalior: IIITM के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति, 7 विद्यार्थियों को दिए गोल्ड मेडल

Gwalior(IIITM): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान ग्वालियर (ABV-IIITM) के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शिरकत की। समारोह में प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह भी मौजूद रहे।
अपने को बेहतर बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहे-राष्ट्रपति
दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विद्यार्थी आत्म-विश्वास के साथ दुनिया में कदम रखें और आगे बढ़ते जाएं। लक्ष्य से निगाह न हटने दें, कोई भी बाधा और चुनौती आपको अपना लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक पाएगी। सफल होकर आप सब दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें। साथ ही शिक्षा का उपयोग कर देश को आगे ले जाएं और अपनी सोच व कार्यों से देश व दुनिया की समस्याओं का समाधान ढूंढने में योगदान दें। जीवन में स्वयं से सवाल कर अपने को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर जारी रहे।
7 विद्यार्थियों को मिले गोल्ड मेडल
समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने 7 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए। इसमें पीयूष चेटवानी एमबीए, रितिका तोमर एमटेक, सौम्या पाठक एमबीए, यश अग्रवाल एमटेक (सीएन), अश्विनी कुमार पादी एमटेक (आईएस), मुशीर उल हक एमटेक (वीएलएसआई) और देबादित्य पाल बीटेक शामिल हैं। पीयूष चेटवानी और रितिका तोमर को डबल गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। वर्ष 2023 में पास आउट 283 विद्यार्थियों को बीटेक, एमटेक एवं मेनेजमेंट की उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चेयरमेन पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने ट्रिपल आईटीएम में 500 बेड के छात्रावास की आधारशिला भी रखी। साथ ही मलिन बस्तियों के बच्चों से मुलाकात कर उन्हें पुस्तकें भेंट की।
सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सामाजिक न्याय के साधन के रूप में हो – राज्यपाल पटेल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कल्याणकारी राज्य में वही प्रौद्योगिकी सफल है, जिसका उपयोग सामाजिक न्याय के एक साधन के रूप में हो सके। राज्यपाल ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि नवाचारों के माध्यम से नागरिकों के कल्याण और विकास के नए समाधान प्रस्तुत करने के लिये तत्परता से कार्य करें। राष्ट्र का कल्याण युवाओं का लक्ष्य होना चाहिए।
टेलेंट, टेक्नालॉजी, प्रबंधन और नेतृत्व का संगम भारत को बनायेगा विश्व गुरू – मुख्यमंत्री चौहान
समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज भारत के पास टेलेंट, टेक्नालॉजी, प्रबंधन और नेतृत्व का संगम है, जो भारत को आने वाले समय में विश्व गुरू बनायेगा। जिस प्रकार 18वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान वैश्विक अर्थ-व्यवस्था को गतिमान रखने के लिये डीजल और पेट्रोल की आवश्यकता थी, उसी प्रकार 21वीं सदी में गति के लिये डाटा ईंधन का काम कर रहा है। एनालेटिक्स, मशीन लर्निंग, बिग डाटा और क्वांटम कम्प्यूटिंग सभी आज के युग की बड़ी आवश्यकता हैं। विद्यार्थी स्वयं इन सभी में महारत हासिल कर, समाज और देश को आगे बढ़ायें।
विद्यार्थी छोटे लक्ष्य से संतुष्ट न होकर सदैव आगे बढ़ने का भाव रखें : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विद्यार्थियों का आहृवान किया कि अपने मन में सदैव यह भाव रखें कि हम केवल लक्ष्य की पूर्ति से संतुष्ट न होकर सदैव आगे बढ़ने का प्रयास करते रहेंगे। साथ ही जिस संस्थान से शिक्षा ग्रहण की है उस संस्थान का मान-सम्मान रखकर देश का गौरव बढ़ाने में योगदान देते रहें। भारत तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा है। कुछ साल पहले तक भारत 11वीं आर्थिक शक्ति हुआ करता था जो अब पांचवीं आर्थिक शक्ति बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2030 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था वाला देश बन जायेगा। देश का भविष्य निर्माण में आप सबके सहयोग से ही होगा।
जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम देखने पहुंची राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मु ने आज अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। जल संसाधन मंत्री एवं मिनिस्टर इन वेटिंग तुलसी सिलावट, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्रि-परिषद के अन्य सदस्यों एवं सांसद विवेक नारायण शेजवलकर आदि ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत किया। म्यूजियम आगमन पर राष्ट्रपति का लोक एवं शास्त्रीय नर्तकों ने परंपरागत तरीके से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी धर्मपत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया ने राष्ट्रपति मुर्मु को समृद्धशाली और गौरवशाली मराठा इतिहास के बारे में उन्हें बताया।

जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम पहुंची राष्ट्रपति
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MP News: लाड़ली बहनों को 14 अक्टूबर को मिलेगी 41वीं किस्त, खाते में आएंगे ₹1,500

भोपाल: मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाओं के लिए 14 अक्टूबर का दिन अहम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नवरात्रि के दौरान उमरिया जिले के गुरुवाही गांव में आयोजित कार्यक्रम से योजना की 41वीं किस्त जारी करेंगे। सिंगल क्लिक के जरिए करीब 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 1,500-1,500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री क्षेत्र के विकास कार्यों की भी सौगात देंगे। वे करीब 144.16 करोड़ रुपये की लागत वाले 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे।
जून 2023 में शुरू हुई थी योजना
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देना है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाली पात्र महिलाओं को योजना के नियमों के अनुसार हर महीने 900 रुपये की सहायता मिलती है। राशि सीधे आधार से जुड़े और डीबीटी सक्रिय बैंक खातों में भेजी जाती है।
सितंबर 2026 तक योजना की 40 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। अब 14 अक्टूबर को 41वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके अलावा अगस्त 2023, 2024, 2025 और 2026 में महिलाओं को चार बार 250-250 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी गई थी।
योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट
वित्तीय वर्ष 2026-27 में लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता दी जाती है।
144.16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन
उमरिया जिले के गुरुवाही गांव में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। इनकी कुल लागत करीब 144.16 करोड़ रुपये है। इनमें 68 कार्यों का लोकार्पण और 68 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। बांधवगढ़ और मानपुर विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्य भी इस सूची में शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान पूरे हो चुके कार्यों का लोकार्पण और नए निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया जाएगा।
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MP News: प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल, 4 बार विधायक और बालाघाट से सांसद रह चुके

भोपाल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया। सिवनी जिले के पिपरिया गांव में जन्मे बिसेन चार बार विधायक रह चुके हैं। वे मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
2019 में बालाघाट से बने थे सांसद
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2019 के लोकसभा चुनाव में डॉ. बिसेन को बालाघाट सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव जीतने के बाद वे 17वीं लोकसभा के सदस्य बने और 2024 तक सांसद रहे।
विधायक से राज्यपाल तक का सफर
डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर मध्यप्रदेश की राजनीति से शुरू हुआ। विधायक और मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने लोकसभा में बालाघाट सीट से प्रतिनिधित्व किया। अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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MP में हेलीकॉप्टर से पकड़े 97 कृष्णमृग, शुजालपुर में बोमा तकनीक से रेस्क्यू अभियान

शुजालपुर: मध्यप्रदेश के शुजालपुर में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया है। शनिवार को हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया। 9 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञों समेत करीब 200 कर्मचारी जुटे हैं।
हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर पकड़े 97 कृष्णमृग
शुजालपुर के ग्राम हन्नूखेड़ी में वन विभाग ने शनिवार को अभियान शुरू किया। हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में ले जाकर बोमा पद्धति से तैयार सुरक्षित घेरे में पहुंचाया गया। पहले चरण में 97 कृष्णमृग पकड़े गए।
दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर अभियान रोक दिया गया। रेस्क्यू का अगला चरण रविवार सुबह शुरू करने की योजना बनाई गई।
दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ संभाल रहे जिम्मेदारी
अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशन’ टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं। इनके साथ वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं। भोपाल और अन्य जिलों से पहुंचे करीब 200 कर्मचारी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए कृष्णमृगों को पकड़ने की यह पहल लगातार दूसरे साल शुजालपुर से शुरू हुई है। पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।
क्या है बोमा तकनीक?
बोमा तकनीक में वन्यजीवों को धीरे-धीरे एक खास तरीके से बनाए गए सुरक्षित घेरे की ओर ले जाया जाता है। घेरे की बनावट ऐसी होती है कि जानवरों को नियंत्रित तरीके से भीतर लाकर सुरक्षित पकड़ा जा सके। इस अभियान में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में बढ़ाया जाता है। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होती है, ताकि वन्यजीवों को चोट और अनावश्यक तनाव से बचाया जा सके।
प्रमुख सचिव समेत अधिकारियों ने परखी तैयारियां
अभियान शुरू होने से एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह, वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन ने हन्नूखेड़ी पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान संबंधित खेतों में सिंचाई और कृषि कार्य रोककर रखें। बच्चों को बोमा स्थल से दूर रखें और पालतू मवेशियों को बाड़े में बांधकर रखें। हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर मौके पर भीड़ नहीं लगाने की भी हिदायत दी गई है।
फसलों को नुकसान से राहत दिलाने की कोशिश
कृष्णमृग और नीलगाय खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या से राहत दिलाने के लिए वन विभाग पहले भी जिले में अभियान चलाकर कृष्णमृगों और नीलगायों को दूसरे स्थानों पर पहुंचा चुका है। इस बार भी अभियान में स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली जाएगी। क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी होने के कारण ग्रामीण रेस्क्यू टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। उनके सहयोग से अभियान स्थल पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
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मध्यप्रदेश में पटवारियों की हड़ताल खत्म, 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम शुरू

भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार शाम मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। बैठक में पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर सहमति बनने की बात कही गई।
कानूनी संरक्षण के मुद्दे पर बनी सहमति
पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्रियों से जुड़े मामलों में पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने के आदेश जारी किए जाएंगे। पटवारी संघ लंबे समय से इस योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े विवादों में संभावित कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रहा था। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने बताया कि बैठक में इस संबंध में आ रही अड़चनों का समाधान कर दिया गया है। साथ ही, 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर भी सहमति बनी है।
वेतन विसंगति पर आयोग के गठन के बाद विचार
बैठक में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। गुर्जर के मुताबिक, वेतन विसंगति के मामले में आयोग के गठन के बाद विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले पटवारी महासम्मेलन में आर्थिक मांगों को लेकर घोषणा करने का आश्वासन दिया है।
50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्वामित्व योजना का काम पूरी निष्ठा से करने की बात कही है। सरकार इस योजना को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत करीब 50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य बताया गया है। बैठक में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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MP News: पटवारियों पर कार्रवाई तेज, 102 पर गिरी गाज, 27 बर्खास्त और 75 निलंबित; स्वामित्व योजना पर टकराव

भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीनों के मालिकाना हक और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में हस्ताक्षर करने पर पटवारियों की आपत्ति के बीच प्रदेश में 102 पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 27 को बर्खास्त और 75 को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व कार्यों का बहिष्कार किया। इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में शासकीय कार्यों में लापरवाही के आरोप में 12 पटवारियों को आरोप-पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा विवाद, बैठक में नहीं निकला हल
पटवारियों के विरोध और उनके खिलाफ कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में प्रस्तावित बैठक भी उनकी व्यस्तता के कारण टल गई। पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाने पर निर्णय नहीं होता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ ने कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है।
50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर 3,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज लोगों के अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। अब इन संपत्तियों के मालिकाना हक को रजिस्ट्री के जरिए औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी काम में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन में योजना का काम पूरा कराने और प्रदर्शन दिखाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में काम नहीं हुआ तो कलेक्टरों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। योजना की तय समय-सीमा में केवल नौ दिन शेष होने की बात भी कही गई है।
मुख्य सचिव की सख्ती
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों को निर्देश दिए कि पटवारियों और तहसीलदारों से काम कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पहले पटवारियों को समझाकर काम कराया जाए। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन योजना का काम पूरा होना चाहिए। बर्णवाल ने कहा कि तीन सप्ताह बीत जाने के बावजूद योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि और राजस्व से जुड़े काम संबंधित कर्मचारियों से ही कराए जाने चाहिए।
उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि जो अधिकारी सात दिन में काम नहीं करा पाएंगे, उन्हें भोपाल बुलाकर जवाब मांगा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि काम में लापरवाही पर कलेक्टरों के साथ उन तहसीलदारों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो पटवारियों से काम नहीं करा पा रहे हैं।
‘पटवारी कलेक्टर के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे’
मुख्य सचिव ने प्रदर्शन के दौरान कलेक्टरों के खिलाफ नारेबाजी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार पटवारियों की मांगों पर बातचीत कर चुकी है। इसके लिए पांच मंत्रियों की समिति के साथ चर्चा कराई गई और उनकी मांगों के अनुरूप सर्कुलर भी जारी किया गया। इसके बावजूद काम नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
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