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Gwalior: IIITM के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति, 7 विद्यार्थियों को दिए गोल्ड मेडल

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Gwalior: President attends IIITM's 4th convocation

Gwalior(IIITM): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान ग्वालियर (ABV-IIITM) के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शिरकत की। समारोह में प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह भी मौजूद रहे।

अपने को बेहतर बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहे-राष्ट्रपति

दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विद्यार्थी आत्म-विश्वास के साथ दुनिया में कदम रखें और आगे बढ़ते जाएं। लक्ष्य से निगाह न हटने दें, कोई भी बाधा और चुनौती आपको अपना लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक पाएगी। सफल होकर आप सब दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें। साथ ही शिक्षा का उपयोग कर देश को आगे ले जाएं और अपनी सोच व कार्यों से देश व दुनिया की समस्याओं का समाधान ढूंढने में योगदान दें। जीवन में स्वयं से सवाल कर अपने को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर जारी रहे।

7 विद्यार्थियों को मिले गोल्ड मेडल

समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने 7 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए। इसमें पीयूष चेटवानी एमबीए, रितिका तोमर एमटेक, सौम्या पाठक एमबीए, यश अग्रवाल एमटेक (सीएन), अश्विनी कुमार पादी एमटेक (आईएस), मुशीर उल हक एमटेक (वीएलएसआई) और देबादित्य पाल बीटेक शामिल हैं। पीयूष चेटवानी और रितिका तोमर को डबल गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। वर्ष 2023 में पास आउट 283 विद्यार्थियों को बीटेक, एमटेक एवं मेनेजमेंट की उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चेयरमेन पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने ट्रिपल आईटीएम में 500 बेड के छात्रावास की आधारशिला भी रखी। साथ ही मलिन बस्तियों के बच्चों से मुलाकात कर उन्हें पुस्तकें भेंट की।

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सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सामाजिक न्याय के साधन के रूप में हो – राज्यपाल पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कल्याणकारी राज्य में वही प्रौद्योगिकी सफल है, जिसका उपयोग सामाजिक न्याय के एक साधन के रूप में हो सके। राज्यपाल ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि नवाचारों के माध्यम से नागरिकों के कल्याण और विकास के नए समाधान प्रस्तुत करने के लिये तत्परता से कार्य करें। राष्ट्र का कल्याण युवाओं का लक्ष्य होना चाहिए।

टेलेंट, टेक्नालॉजी, प्रबंधन और नेतृत्व का संगम भारत को बनायेगा विश्व गुरू – मुख्यमंत्री चौहान

समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज भारत के पास टेलेंट, टेक्नालॉजी, प्रबंधन और नेतृत्व का संगम है, जो भारत को आने वाले समय में विश्व गुरू बनायेगा। जिस प्रकार 18वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान वैश्विक अर्थ-व्यवस्था को गतिमान रखने के लिये डीजल और पेट्रोल की आवश्यकता थी, उसी प्रकार 21वीं सदी में गति के लिये डाटा ईंधन का काम कर रहा है। एनालेटिक्स, मशीन लर्निंग, बिग डाटा और क्वांटम कम्प्यूटिंग सभी आज के युग की बड़ी आवश्यकता हैं। विद्यार्थी स्वयं इन सभी में महारत हासिल कर, समाज और देश को आगे बढ़ायें।

विद्यार्थी छोटे लक्ष्य से संतुष्ट न होकर सदैव आगे बढ़ने का भाव रखें : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया

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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विद्यार्थियों का आहृवान किया कि अपने मन में सदैव यह भाव रखें कि हम केवल लक्ष्य की पूर्ति से संतुष्ट न होकर सदैव आगे बढ़ने का प्रयास करते रहेंगे। साथ ही जिस संस्थान से शिक्षा ग्रहण की है उस संस्थान का मान-सम्मान रखकर देश का गौरव बढ़ाने में योगदान देते रहें। भारत तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा है। कुछ साल पहले तक भारत 11वीं आर्थिक शक्ति हुआ करता था जो अब पांचवीं आर्थिक शक्ति बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2030 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था वाला देश बन जायेगा। देश का भविष्य निर्माण में आप सबके सहयोग से ही होगा।

जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम देखने पहुंची राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मु ने आज अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। जल संसाधन मंत्री एवं मिनिस्टर इन वेटिंग तुलसी सिलावट, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्रि-परिषद के अन्य सदस्यों एवं सांसद विवेक नारायण शेजवलकर आदि ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत किया। म्यूजियम आगमन पर राष्ट्रपति का लोक एवं शास्त्रीय नर्तकों ने परंपरागत तरीके से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी धर्मपत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया ने राष्ट्रपति मुर्मु को समृद्धशाली और गौरवशाली मराठा इतिहास के बारे में उन्हें बताया।

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जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम पहुंची राष्ट्रपति

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MP Cabinet Decisions: मोहन कैबिनेट में 2,050 करोड़ के कैंपा प्लान को मंजूरी, भ्रष्टाचार पर 392 अफसर-कर्मचारियों पर कार्रवाई

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक, कैंपा फंड के 2,050 करोड़ रुपये के प्लान को मंजूरी और नगरीय निकायों में अनियमितताओं पर कार्रवाई।

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक में विकास योजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मामलों पर चर्चा हुई। कैबिनेट ने कैंपा फंड के ₹2,050 करोड़ के प्लान को मंजूरी दी। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के कार्यों के लिए ₹345 करोड़ और नर्मदा घाटी विकास विभाग की चार योजनाओं को जारी रखने के लिए ₹3,378 करोड़ की स्वीकृति दी गई।

बैठक में नगरीय निकायों की खरीदी में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। विभागीय जानकारी के मुताबिक, अब तक 201 मामलों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा दिसंबर में मंत्रियों का चिंतन शिविर आयोजित करने की तैयारी है।

कैंपा फंड के ₹2,050 करोड़ के प्लान को मंजूरी

कैबिनेट ने कैंपा फंड के तहत ₹2,050 करोड़ के प्लान को मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल निर्धारित योजनाओं और पर्यावरण से जुड़े कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के कामकाज के लिए ₹345 करोड़ मंजूर किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच और संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाना है।

नर्मदा घाटी की चार योजनाओं के लिए ₹3,378 करोड़

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नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से चल रही चार योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं के लिए ₹3,378 करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। ये परियोजनाएं छिंदवाड़ा, मुरैना, सिवनी और सागर जिलों से संबंधित हैं।

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात योजनाओं के लिए भी ₹351 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इससे संबंधित योजनाओं को आगे जारी रखने में मदद मिलेगी।

भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री सख्त, 392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई

कैबिनेट बैठक में नगरीय निकायों में खरीद के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप के मुताबिक, नगरीय निकायों की खरीद में गड़बड़ियों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल रिकॉर्ड की मदद ली गई। विभागीय जानकारी के अनुसार, 201 मामलों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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अलग-अलग मामलों में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति, बर्खास्तगी और राशि की वसूली जैसे कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

चार नए जिलों में खुलेंगे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय

कैबिनेट ने नवगठित जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय खोलने की मंजूरी दी है। इन कार्यालयों के लिए आवश्यक पदों को भी स्वीकृति दी गई है। इससे इन जिलों में शिक्षा विभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के संचालन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

21 और 22 दिसंबर को मंत्रियों का चिंतन शिविर

राज्य सरकार 21 और 22 दिसंबर को मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसमें सरकार के तीन साल के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। साथ ही आगामी वर्ष की प्राथमिकताओं, योजनाओं और विकास कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा होगी।

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12 जिलों में कम बारिश पर रिपोर्ट मांगी

कैबिनेट बैठक में किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग की योजनाओं का प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रदेश के 12 जिलों में कम बारिश की स्थिति पर भी चर्चा हुई। संबंधित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर किसानों को सहायता देने के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार की ओर से प्रभावित जिलों में बारिश की स्थिति और कृषि पर उसके असर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय कुम्हारों और मिट्टी के दीयों को बढ़ावा देने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को दीपावली के दौरान अपने प्रभार वाले जिलों में स्थानीय कुम्हारों और माटी कला को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। लोगों को मिट्टी के दीये और स्थानीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया, ताकि पारंपरिक कारीगरों की आमदनी बढ़ सके।

सेवा संकल्प अभियान में 17 लाख से अधिक आवेदन

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बैठक में सेवा संकल्प अभियान की प्रगति की जानकारी भी साझा की गई। इसके तहत 1,345 शिविरों में 17 लाख से अधिक आवेदन मिलने की जानकारी दी गई। प्रदेश में 1,600 से ज्यादा सेवा ज्योति यात्राएं भी निकाली गईं।

सेमीकंडक्टर निवेश और स्थापना दिवस पर भी चर्चा

बैठक में इंदौर में आयोजित सेमीकंडक्टर कॉन्क्लेव में ₹5,800 करोड़ के निवेश प्रस्तावों की जानकारी दी गई। इसके अलावा धन-धान्य कृषि योजना में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रदेश के पांच जिलों को मिले पुरस्कार, विश्व कौशल प्रतियोगिता में पन्ना के युवाओं की उपलब्धि और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 2.6 प्रतिशत ट्रांसमिशन लॉस पर मिले सम्मान का उल्लेख किया गया।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस एक नवंबर से तीन दिन तक मनाया जाएगा। वहीं, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल और 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां भी की जा रही हैं।

कैबिनेट बैठक में विकास योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी के साथ प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर जोर दिया गया। सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय करने और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है।

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MP SI Admit Card 2026: एमपी एसआई और सूबेदार भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, 28 अक्टूबर से परीक्षा

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भोपाल: मध्य प्रदेश में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और सूबेदार भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) ने भर्ती परीक्षा 2026 का प्रवेश पत्र जारी कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था, वे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 28 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से पहले अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लें और उस पर दर्ज परीक्षा तिथि, शिफ्ट, रिपोर्टिंग टाइम तथा परीक्षा केंद्र के पते को ध्यान से जांच लें।

एमपीईएसबी के अनुसार, सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी। आवेदन करने की अंतिम तारीख 23 सितंबर 2026 थी, जबकि आवेदन पत्र में सुधार के लिए 28 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया था।

ऐसे डाउनलोड करें प्रवेश पत्र

उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

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  • सबसे पहले एमपीईएसबी की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं।
  • वेबसाइट पर Test Admit Card या संबंधित भर्ती परीक्षा का लिंक खोलें।
  • Subedar & Sub-Inspector Recruitment Test 2026 का विकल्प चुनें।
  • मांगी गई जानकारी, जैसे आवेदन संख्या और जन्मतिथि, दर्ज करें।
  • स्क्रीन पर मांगी गई सत्यापन संबंधी जानकारी भरकर सबमिट करें।
  • एडमिट कार्ड खुलने पर उसमें दर्ज सभी विवरण जांचें।
  • प्रवेश पत्र डाउनलोड करके उसका प्रिंट निकाल लें।

एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी होने पर उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर दोबारा प्रयास करें। लॉगिन संबंधी जानकारी भरते समय सावधानी रखें।

एडमिट कार्ड पर इन जानकारियों को जरूर जांचें

प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार को निम्नलिखित विवरणों का मिलान कर लेना चाहिए:

  • उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर
  • आवेदन संख्या और जन्मतिथि
  • फोटो और हस्ताक्षर
  • परीक्षा की तारीख और शिफ्ट
  • रिपोर्टिंग टाइम और प्रवेश से जुड़े निर्देश

परीक्षा केंद्र का नाम और पूरा पता

यदि नाम, फोटो या किसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी में गलती दिखाई देती है, तो एमपीईएसबी के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।

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MP Coaching Rules 2026: कोचिंग सेंटरों को 90 दिन में कराना होगा पंजीयन, फीस और शिक्षकों की जानकारी वेबसाइट पर देना अनिवार्य

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भोपाल: मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को व्यवस्थित करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए नियमों का प्रारूप जारी किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 के प्रारूप में कोचिंग संस्थानों के पंजीयन, फीस में पारदर्शिता, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा व्यवस्था और शिकायतों के निराकरण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर फीस, शिक्षकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की निजता, मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर भी जोर दिया गया है।

90 दिन में पंजीयन के लिए आवेदन, तीन साल की होगी वैधता

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, कोचिंग संचालकों को नियमों के प्रकाशन के 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है। इसके बाद संस्थान को नवीनीकरण कराना होगा। पंजीयन हस्तांतरणीय नहीं होगा।

यदि किसी कोचिंग संस्थान की एक से अधिक शाखाएं संचालित होती हैं, तो प्रत्येक शाखा को अलग कोचिंग केंद्र माना जाएगा। इस व्यवस्था से अलग-अलग शाखाओं के संचालन और निर्धारित मानकों के पालन की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

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वेबसाइट पर फीस और शिक्षकों की जानकारी देनी होगी

कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें संबंधित परीक्षा और पाठ्यक्रम, फीस का पूरा विवरण, शिक्षकों की योग्यता, संस्थान में उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शामिल होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को दाखिले से पहले संस्थान के बारे में पर्याप्त जानकारी देना और फीस तथा सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है।

CCTV लगेंगे, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं

विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसर में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, शौचालयों, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी।

कोचिंग संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम भी करने होंगे। सुरक्षा कर्मचारियों की उपलब्धता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया है।

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ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक

प्रारूप में ट्यूटर के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा और उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यक्तियों को ट्यूटर या सहायक कर्मचारी के रूप में नियुक्त नहीं करने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। कोचिंग संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था करनी होगी।

मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर जोर

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परिणाम का दबाव बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नियमों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर मार्गदर्शन की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। संस्थानों को नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने, अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने और विद्यार्थियों की समस्याओं को समय रहते समझने की व्यवस्था विकसित करनी होगी। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सरकारी नीति के अनुरूप काम करने पर भी जोर दिया गया है।

जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकेंगे संस्थान

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प्रस्तावित नियमों के अनुसार, प्रवेश और शिक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी विद्यार्थी के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या अन्य निर्धारित आधारों पर भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। इन आधारों पर विद्यार्थियों के अलग-अलग बैच बनाने पर भी रोक का प्रावधान है। इसके अलावा, विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और संस्थान के कर्मचारियों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।

पंजीयन रद्द होने पर 30 दिन में अपील का अधिकार

यदि किसी कोचिंग सेंटर का पंजीयन या नवीनीकरण अस्वीकार किया जाता है अथवा उसका पंजीयन निलंबित या रद्द किया जाता है, तो संबंधित आदेश के खिलाफ अपील की जा सकेगी। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत की जा सकती है। सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने की व्यवस्था का उल्लेख है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों को क्या होगा फायदा?

नए प्रावधान लागू होने पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को दाखिले से पहले कोचिंग की फीस, शिक्षकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग से जुड़ी सुविधाएं परीक्षा के दबाव से निपटने में मदद कर सकती हैं। शिकायतों के समाधान के लिए औपचारिक व्यवस्था बनने से संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

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MP News: बैतूल में बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ₹1.5 करोड़ का घोटाला, जिंदा खाताधारकों को कागजों में मृत दिखाकर तोड़ीं एफडी

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बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिंदा खाताधारकों को दस्तावेजों में मृत दिखाकर उनके नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाकर रकम निकाल ली गई। इसके अलावा नेट बैंकिंग में खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलकर पैसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।

मामले में बोरदेही पुलिस ने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लुकेश गोखे, टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी और 15 वर्षीय नाबालिग को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक छह खाताधारकों ने एफआईआर दर्ज कराई है। पीड़ितों की कुल संख्या का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

ऑनलाइन कियोस्क चलाने वाला किशोर मुख्य सूत्रधार

एसपी वीरेंद्र जैन के अनुसार, बैंक शाखा के पास ऑनलाइन कियोस्क सेंटर चलाने वाले 15 वर्षीय किशोर को इस कथित घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। बैंक में नियमित रूप से आने-जाने के कारण उसे बड़े खाताधारकों की जमा राशि की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर बैंक के असिस्टेंट मैनेजर को अपने साथ मिला लिया।

पुलिस के मुताबिक, असिस्टेंट मैनेजर की आईडी का इस्तेमाल कर जनवरी 2026 से अब तक करीब 10 बार खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदले गए। इसके बाद नेट बैंकिंग के जरिए लेनदेन किए गए और एफडी तुड़वाकर रकम निकालने का आरोप है।

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टैक्सी ड्राइवर के खाते में मिली सवा करोड़ की रकम

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी के बैंक खाते में कथित घोटाले से जुड़ी करीब 1.25 करोड़ रुपये की रकम मिली है। पुलिस ने संबंधित खाते को फ्रीज करा दिया है। इस मामले में धोखाधड़ी का एक तरीका यह भी सामने आया है कि जब कोई खाताधारक अपने खाते से रकम गायब होने की शिकायत लेकर बैंक पहुंचता था, तो आरोपी उसके खाते में रकम वापस जमा कर देते थे। पुलिस को आशंका है कि ऐसा खाताधारकों का संदेह दूर रखने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किया जाता था।

रिटायर्ड टीचर की शिकायत से खुला मामला

मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक सेवानिवृत्त शिक्षक के बैंक खाते से बिना अनुमति बड़ी रकम निकाल ली गई। जांच में अन्य खाताधारकों के साथ भी वित्तीय हेराफेरी की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ज्योति रघुवंशी के खाते से 4.86 लाख रुपये, फूलवंती के खाते से 2.74 लाख रुपये, इंद्रेश रघुवंशी के खाते से 1.85 लाख रुपये, भोजराज सोनी के खाते से 5.50 लाख रुपये और रागिनी साहू के खाते से 1.55 लाख रुपये की हेराफेरी सामने आई है।

पुलिस का कहना है कि अभी पीड़ितों की वास्तविक संख्या और कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अब तक छह खाताधारकों की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की गई है।

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बैंक प्रबंधन पर मामला दबाने का आरोप

मामले में बैंक प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अनियमितताएं सामने आने के बाद बैंक ने असिस्टेंट मैनेजर लुकेश गोखे को निलंबित कर दिया था। हालांकि, रीजनल ऑफिस को मामले की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

बोरदेही पुलिस ने खाताधारकों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 24 अक्टूबर को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब बैंक के अन्य खातों, संदिग्ध लेनदेन और आरोपियों की संपत्तियों की जांच कर रही है।

₹22.33 लाख की संपत्ति जब्त

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपये का सोना, 1.40 लाख रुपये की चांदी और करीब 12 लाख रुपये कीमत की एक कार जब्त की गई है। जब्त संपत्ति की कुल कीमत 22.33 लाख रुपये बताई गई है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है, कितने खाताधारक प्रभावित हुए हैं और रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।

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MP News: 70 हजार शिक्षकों को मिल सकता है छठे वेतनमान का एरियर, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया 4 सप्ताह का समय

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मध्य प्रदेश शिक्षक एरियर, छठा वेतनमान 2006, जबलपुर हाईकोर्ट शिक्षक मामला, 70 हजार शिक्षक, शिक्षक वेतन वृद्धि, MP Teachers Salary

जबलपुर: मध्य प्रदेश में पंचायत विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किए गए शिक्षकों के वेतन और सेवा लाभ से जुड़े मामले में जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश से हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। मामला 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने और पहली नियुक्ति से सेवा की गणना करने से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। इस मामले से प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने की मांग

शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया गया। उनका तर्क है कि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना किए जाने पर वे 2006 से ही वेतनमान और उससे जुड़े अन्य सेवा लाभों के हकदार हैं। इस मांग को लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, राजेश कुमार पांडे सहित 497 शिक्षकों की याचिकाओं में वेतनमान के पुनर्निर्धारण, वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और पेंशन जैसे लाभों की मांग की गई थी।

सरकार को चार सप्ताह में पालन करने का निर्देश

मामले में हाईकोर्ट के पहले के आदेश के पालन की मांग करते हुए शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया था।

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रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में आदेश के पालन की मांग उठाई।

प्रत्येक शिक्षक को 7 से 8 लाख रुपए मिलने का दावा

शिक्षक पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि 2006 से वेतनमान का लाभ मिलने पर प्रत्येक पात्र शिक्षक को लगभग 7 लाख से 8 लाख रुपए तक का एरियर मिल सकता है। इसके अलावा, मासिक वेतन में 15,000 से 20,000 रुपए तक का अंतर आने का अनुमान भी बताया गया है।

शिक्षकों ने बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग भी उठाई है। हालांकि, ये आंकड़े शिक्षकों की ओर से बताए गए अनुमान और मांग हैं। वास्तविक एरियर, ब्याज और वेतन में बदलाव का निर्धारण संबंधित आदेश, पात्रता तथा सरकार की गणना के आधार पर ही होगा।

संविलियन के बाद शुरू हुआ विवाद

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शिक्षकों के अनुसार, पंचायत विभाग में नियुक्त कर्मचारियों का बाद में अध्यापक संवर्ग में संविलियन किया गया और 2018 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल किया गया। विवाद इस बात को लेकर है कि सेवा की गणना और वेतन संबंधी लाभ किस तारीख से दिए जाएं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहली नियुक्ति से सेवा मान्य होने पर वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना भी उसी आधार पर की जानी चाहिए।

करीब 70 हजार शिक्षकों की नजर सरकार के फैसले पर

इस मामले का असर याचिका दायर करने वाले शिक्षकों से आगे प्रदेश के अन्य पात्र शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, करीब 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने का आंकड़ा अधिवक्ता और मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है। सभी शिक्षकों को समान लाभ मिलेगा या नहीं, यह आदेश के दायरे, पात्रता और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। अब शिक्षकों की नजर राज्य सरकार की कार्रवाई और अदालत में अनुपालन की स्थिति पर है।

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