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बिलासपुर को मुख्यमंत्री बघेल ने दी करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात, तिफरा फ्लाईओवर सहित व्यापार विहार स्मार्ट रोड और प्लेनेटोरियम का लोकार्पण

बिलासपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर को 107.49 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित तिफरा फ्लाई ओवर सहित व्यापार विहार स्मार्ट रोड और प्लेनेटोरियम की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर शहर और बिलासपुर जिले के लिए लगभग 353 करोड़ 56 लाख रुपए की लागत के 97 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों में से 277 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत के 62 कार्यों का लोकार्पण और 76 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत के 35 कार्यों का भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री बघेल ने बिलासपुर में जिन प्रमुख कार्यों का लोकार्पण किया, उनमें 107 करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से बिलासपुर-रायपुर रोड स्थित महाराणा प्रताप चौक पर नवनिर्मित तिफरा फ्लाईओव्हर, 36 करोड़ 56 लाख रुपए की लागत से बिलासपुर विश्वविद्यालय में निर्मित अकादमी भवन, पहुंच मार्ग तथा बाउंड्रीवॉल, 28 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से तिफरा में पुलिस कर्मचारियों के लिए निर्मित 264 आवास, 26 करोड़ 83 लाख रुपए की लागत से बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा व्यापार विहार स्मार्ट रोड महाराणा प्रताप चौक से तारबहार चौक तक निर्मित स्मार्ट रोड और 6 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से व्यापार विहार में निर्मित प्लेनेटोरियम शामिल हैं।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री बघेल ने बिलासपुर में जिन प्रमुख कार्यों का भूमिपूजन किया, उनमें 10 करोड़ 89 लाख रुपए की लागत से पुराना बस स्टैंड, बिलासपुर में बनने वाली स्वचालित मल्टी लेबल कार पार्किंग, 9 करोड़ 99 लाख रुपए की लागत से बिलासपुर स्मार्ट सिटी में स्थापित की जाने वाली जीआईएस समाधान प्रणाली के क्रियान्वयन से संबंधित कार्य, 5 करोड़ 61 लाख रुपए की लागत से मंगला भैंसाझार से दीनदयाल कॉलोनी, लोखण्डी रेलवे गेट तक बनने वाली 3.5 किलोमीटर लंबी 2 लेन सड़क शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने 4 करोड़ 85 लाख रुपए की लागत से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कोटा विकासखण्ड में 31.45 किलोमीटर लंबाई की 9 सड़कों के नवीनीकरण कार्य तथा 3 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से बिलासपुर में विभिन्न सड़कों के लिए सौर प्रावधान के साथ मौजूदा स्ट्रीट और सहायक रोशनी की दोहरी फीड में परिवर्तित करने के लिए हाइब्रिड सौर ऊर्जा प्रणाली का निर्माण कार्य शामिल हैं।
तिफरा फ्लाई ओवर ब्रिज बन जाने से शहर को मिलेगी जाम से मुक्ति
तिफरा का नया फ्लाई ओवर ब्रिज बन जाने से महाराणा प्रताप चौक और तिफरा छोर में जाम से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही रायपुर मार्ग को बिलासपुर शहर से जोड़ने वाले इस ब्रिज से शहरवासियों के साथ ही साथ उन तमाम राहगीरों को भी राहत मिलेगी, जो एनएच -130 का उपयोग आवागमन के लिए करते हैं। बिलासपुर-रायपुर मार्ग में काफी लंबे समय से तिफरा रेलवे क्रासिंग में व्यवस्थित और चौड़े फ्लाईओवर ब्रिज की ज़रूरत महसूस की जा रही थी। तिफरा छोर से स्वर्गीय जमुना प्रसाद वर्मा कॉलेज तक 1620 मीटर की लंबाई में तिफरा फ्लाई ओवर ब्रिज का निर्माण 107 करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा किया गया है।
स्मार्ट रोड के बनने से व्यापार विहार में सुगम होगा यातायात
बिलासापुर शहर में महाराणा प्रताप चौक से तारबाहर चौक तक बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा लगभग 26 करोड़ 83 लाख रूपये की लागत से व्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्मार्ट रोड का निर्माण किया गया है। संभाग के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र होने की वजह से इस मार्ग में भारी वाहनों का आवागमन हमेशा लगे रहता है लेकिन पूर्व में इस मार्ग के अव्यवस्थित होने की वजह से हमेशा ट्रैफिक और जाम की समस्या बनी रहती थी। फोरलेन स्मार्ट रोड के बन जाने से व्यापार विहार में व्यापारिक परिवहन सहज और सुगम होगा।
मनोरंजन और ज्ञान के केंद्र प्लेनेटोरियम की मिली सौगात
बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा साढ़े तीन एकड़ में 6 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्लेनेटोरियम का निर्माण किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसका लोकार्पण किया। इस प्लेनेटोरियम में शहरवासियों को दिन में ही आकाशीय नज़ारे के अवलोकन के साथ ही साथ विज्ञान तथा खगोलशास्त्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। दो सौ लोगों की बैठक क्षमता वाले इस प्लेनेटोरियम में आगंतुकों के लिए फोर के सिंगल टेक्नोलॉजी का प्रोजेक्टर लगाया गया है, इसके अलावा प्लेनेटोरियम परिसर में ऑक्सीजोन का भी निर्माण किया गया है। प्लेनेटोरियम पहुंचने वाले आगंतुकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा पहुंच मार्ग का भी निर्माण किया गया है।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां शुरू, CM रायपुर में फहराएंगे तिरंगा

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के आयोजन को लेकर सभी जिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस बार का आयोजन विशेष रहेगा क्योंकि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सभी सरकारी समारोहों में इसका सामूहिक गायन अनिवार्य किया गया है। राज्य शासन ने कलेक्टरों और विभागीय प्रमुखों को तैयारियों की निगरानी के निर्देश दिए हैं।
रायपुर में होगा मुख्य राज्य स्तरीय समारोह
राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में 15 अगस्त को सुबह 9 बजे मुख्य राज्य स्तरीय समारोह आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, परेड की सलामी लेंगे और प्रदेशवासियों के नाम अपना संदेश देंगे।समारोह में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, नगर सेना, एनसीसी और बैंड प्लाटून की टुकड़ियां भाग लेंगी।
जिलों में मंत्री करेंगे ध्वजारोहण
जिला मुख्यालयों पर राज्य सरकार द्वारा नामित मंत्री ध्वजारोहण करेंगे और मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ेंगे। कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। जनपद पंचायत, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर संबंधित अध्यक्ष एवं सरपंच ध्वजारोहण करेंगे।
शहीदों के परिजनों का होगा सम्मान
राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को जिला स्तरीय समारोह में सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए।
सरकारी भवनों पर होगी विशेष रोशनी
15 अगस्त की रात प्रदेश के सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। आम नागरिकों और निजी संस्थानों से भी अपने भवनों पर तिरंगा फहराने और रोशनी करने की अपील की जाएगी।
स्कूलों में होंगे सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम
सरकार ने सभी शासकीय एवं शिक्षण संस्थानों में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, प्रभात फेरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक गतिविधियां, खेलकूद प्रतियोगिताएं और वृक्षारोपण कराने के निर्देश दिए हैं। लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा और केवल देशभक्ति गीतों के प्रसारण की अनुमति रहेगी।
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Chhattisgarh: प्रदेश में कारोबार शुरू करना होगा आसान, विधानसभा से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ पास

Raipur:छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्य उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए रिस्क बेस्ड (जोखिम आधारित) और ट्रस्ट बेस्ड (विश्वास आधारित) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने की ओर बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून से कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
सरकार के अनुसार, नए कानून का उद्देश्य उद्योगों और व्यवसायों से जुड़े अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं को कम करना है, ताकि विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को तेजी से मंजूरी मिल सके और निवेश का बेहतर माहौल तैयार हो।
कारोबार के जोखिम के आधार पर मिलेगी मंजूरी
नई व्यवस्था में उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर अलग-अलग जोखिम श्रेणियों में रखा जाएगा। कम जोखिम वाले कारोबारों को सरल और त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण और भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल की सुविधा
अधिनियम के तहत कम जोखिम वाले कारोबारों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षण की जगह सेल्फ सर्टिफिकेशन या अधिकृत इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा अन्य विशेषज्ञों के प्रमाण-पत्र को मान्यता दी जाएगी। इसके अलावा यदि निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग आवेदन पर फैसला नहीं लेता है, तो पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी।
हर साल लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत नहीं
नए कानून के तहत कई मामलों में हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे उद्यमियों का समय और लागत दोनों बचेंगे तथा वे कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
8 विभागों की 43 सेवाएं होंगी शामिल
राज्य सरकार ने फिलहाल 8 विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया है। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य सेवाओं को भी इसमें जोड़ा जा सकेगा।
15 लाख से ज्यादा MSME इकाइयों को होगा लाभ
सरकार का दावा है कि इस कानून से राज्य की 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जल प्रदाय अनुमति, सोसायटी एवं फर्म पंजीयन तथा भवन अनुज्ञा जैसी कई सेवाएं भी अब सरल और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाएंगी।
निगरानी के लिए बनेगी त्रिस्तरीय व्यवस्था
अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति निगरानी करेगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।
सरकार का मानना है कि यह कानून राज्य में निवेश बढ़ाने, कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल बनाने और उद्यमियों के लिए पारदर्शी एवं भरोसेमंद व्यावसायिक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग की बड़ी भर्ती, 595 प्राध्यापकों की सीधी भर्ती शुरू, 700 नए पदों को मंजूरी

Raipur:छत्तीसगढ़ सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त पदों को भरने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शासकीय महाविद्यालयों में विभाग ने 700 नए पदों पर भर्ती को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश के युवाओं को सरकारी सेवा में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार स्वीकृत 700 पदों में 625 सहायक प्राध्यापक, 50 ग्रंथपाल और 25 क्रीड़ाधिकारी शामिल हैं। इन नियुक्तियों से विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी, पुस्तकालयों को मजबूती मिलेगी और खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
4 अक्टूबर को होगी CG-SET परीक्षा
उच्च शिक्षा विभाग ने सहायक प्राध्यापक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (CG-SET) की तिथि भी घोषित कर दी है। परीक्षा 4 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। विभाग का मानना है कि यह परीक्षा युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
प्रयोगशालाओं के लिए तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति
विभाग ने विज्ञान और तकनीकी विषयों की प्रयोगशालाओं को मजबूत करने के लिए भी नियुक्तियां की हैं। वर्ष 2025-26 में 260 प्रयोगशाला तकनीशियन के रिक्त पदों के विरुद्ध 247 अभ्यर्थियों तथा 429 प्रयोगशाला परिचारक के पदों के विरुद्ध 399 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। इससे प्रयोगशालाओं के संचालन और विद्यार्थियों के प्रायोगिक प्रशिक्षण में सुधार आने की उम्मीद है।
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Raipur: राजिम बना नगर पालिका, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना, विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राजिमवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए राजिम नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा दे दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। नई अधिसूचना के अनुसार, वर्तमान नगर पंचायत की सीमाएं ही नगर पालिका की सीमाएं रहेंगी।
नगर पालिका बनने के साथ ही राजिम में शहरी विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विकास परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि नगर पालिका बनने से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी। अब शहर में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अधिक वित्तीय और प्रशासनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न शहरी विकास योजनाओं का लाभ भी अब अधिक प्रभावी ढंग से स्थानीय नागरिकों तक पहुंचाया जा सकेगा।
लंबे समय से थी मांग
राजिम को नगर पालिका का दर्जा देने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद शहर में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नगर पालिका बनने से शहर के विकास कार्यों में तेजी आएगी और नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज को मंजूरी, 250 MBBS सीटें बढ़ीं

Raipur: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने राज्य में 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दे दी है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होगी। प्रत्येक कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटें होंगी। इस फैसले से प्रदेश में एक साथ 250 नई MBBS सीटों का इजाफा होगा। स्वीकृति मिलने वाले मेडिकल कॉलेज गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में स्थापित किए जाएंगे।
प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का होगा बड़ा विस्तार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को डॉक्टर बनने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि भविष्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और स्थानीय मानव संसाधन विकास के प्रमुख संस्थान बनेंगे।
दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
सरकार का मानना है कि दंतेवाड़ा और जशपुर जैसे आदिवासी और दूरस्थ जिलों में मेडिकल कॉलेज खुलने से स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा।
पीएम मोदी और जेपी नड्डा का जताया आभार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नए मेडिकल कॉलेज प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत करेंगे।
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