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Chhattisgarh: मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडर, बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह : मुख्यमंत्री साय

Jagdalpur: आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्री साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं।
राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है- कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहां हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।”
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा।
अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफ अमित कुमार, एडीजी बीएसएफ नामग्याल, एडीजी (एएनओ) विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पुलेला गोपीचंद, CM बोले- बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी

नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू की जाएगी। पद्म भूषण सम्मानित बैडमिंटन खिलाड़ी और प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद इस अकादमी की शुरुआत करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने क्लब के संस्थापकों और टीम को शुभकामनाएं दीं।
खेल सुविधाओं के लिए बजट में ₹100 करोड़
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष खेलों के समग्र विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, तराशने और बेहतर अवसर देने की है। सरकार चाहती है कि शहरों के साथ दूरस्थ वनांचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी संसाधनों के अभाव में पीछे न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा, खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं। इनसे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है। खेलों में निवेश युवाओं और प्रदेश के भविष्य में निवेश है।
गोपीचंद बोले- खेल और स्वास्थ्य को मिले प्राथमिकता
पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में स्वागत के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने नवा रायपुर के विकास की सराहना करते हुए कहा कि इलेशियम क्लब्स की पहल खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गोपीचंद ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की जीत और तिरंगे का ऊंचा होना पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ाता है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के साथ शारीरिक विकास पर भी समान ध्यान देने की जरूरत बताई। बच्चों को दौड़ने, कूदने, चढ़ने और अलग-अलग खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
2047 तक विकसित भारत के लिए स्वस्थ युवा जरूरी
गोपीचंद ने कहा कि खेलों में निवेश सिर्फ खिलाड़ी तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज का निर्माण भी होता है। उन्होंने खेल सुविधाओं, उत्कृष्टता और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उनके मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी जरूरी है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो।
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छत्तीसगढ़ में 18 IPS अधिकारियों के तबादले, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए 18 IPS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह (पुलिस) विभाग की ओर से जारी आदेश में 2021 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना के साथ विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) और सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद शामिल हैं। सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
पुलिस मुख्यालय में इन अधिकारियों को जिम्मेदारी
- झा अमनकुमार रमनकुमार: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पुलिस अधीक्षक (SIA)।
- अजय कुमार: नारायणपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (SIB), पुलिस मुख्यालय।
- आकाश श्रीमाल: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी।
- अक्षय प्रमोद सबद्रा: ASP (ऑप्स), नारायणपुर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (योजना/प्रबंध)।
- आकाश कुमार शुक्ला: एसटीएफ बघेरा, दुर्ग से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (ANTF)।
- रविन्द्र कुमार मीणा: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (चिटफंड एवं महिला विरुद्ध अपराध)।
- रोहित कुमार शाह: सुकमा में ASP (ऑप्स) से 15वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, बीजापुर के सेनानी।
इन पदस्थापनाओं के जरिए पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।
कई जिलों में ASP (ऑप्स) की नई पोस्टिंग
जिलों में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई पदस्थापनाएं इस प्रकार हैं:
- सुमीतकुमार दत्ताहारी ASP (ऑप्स)- कांकेर
- ईशु अग्रवाल ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
- मयंक मिश्रा ASP (ऑप्स)- सुकमा
- वैशाली जैन ASP (ऑप्स)- जगदलपुर
- विमल कुमार पाठक ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
- हर्षित मेहर ASP (ऑप्स)- कोंडागांव
- राहुल बंसल ASP (ऑप्स)- बीजापुर
इनमें सुमीतकुमार दत्ताहारी पहले जगदलपुर में नगर पुलिस अधीक्षक थे। ईशु अग्रवाल रायपुर में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। मयंक मिश्रा रायगढ़, वैशाली जैन राजनांदगांव, विमल कुमार पाठक कोरबा, हर्षित मेहर दुर्ग और राहुल बंसल अंबिकापुर में पदस्थ थे।
प्रशिक्षु अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी
तबादला आदेश में प्रशिक्षु अधिकारियों को भी नई पदस्थापना दी गई है।
- अंशिका जैन: नगर पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर।
- साकोर मानसी नानाभाउ: सहायक पुलिस आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय।
- आदित्य कुमार: नगर पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव।
- प्रतीक बंसोडे: नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर।
ये अधिकारी 2022 से 2024 बैच तक के हैं। नई पदस्थापनाओं के साथ उन्हें शहरी पुलिसिंग और जिलों में जिम्मेदारी संभालने का अवसर दिया गया है।
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Chhattisgarh: सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में 3 को फांसी, एक को उम्रकैद, प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 साल की बेटी की हत्या का मामला

सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने चारों दोषियों को सजा सुनाई। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मौत की सजा और चौथे आरोपी को उम्रकैद दी गई। मौत की सजा पाने वालों में कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) शामिल हैं। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
13 अक्टूबर 2024 को हुई थी मां-बेटी की हत्या
मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। पुलिस के मुताबिक, सूरजपुर शहर में प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के साथ पहले रेप किया गया और इसके बाद मां-बेटी की हत्या कर शवों को पिढ़ा गांव के पास फेंक दिया गया था। करीब दो साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने 29 सितंबर 2026 को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था। गुरुवार को अदालत ने सजा का ऐलान किया।
मां-बेटी के शरीर पर मिले थे 61 चोट के निशान
पोस्टमॉर्टम में महिला के शरीर पर 33 और बच्ची के शरीर पर 28 चोट के निशान मिले थे। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को मामले की गंभीरता के तौर पर अदालत के सामने रखा। अभियोजन के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपियों के कपड़ों पर खून के निशान और अन्य साक्ष्य भी सामने आए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों को दोषी माना।
पुलिसकर्मी पर गर्म तेल फेंकने से शुरू हुआ घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, वारदात वाली रात कुलदीप साहू ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते में तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। पुलिस का दावा है कि उसे पकड़ने की कोशिश के दौरान साहू ने पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने का प्रयास किया और वहां से भाग निकला। इसके बाद वह प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी और बेटी पर हमला किया गया।
शव घर से करीब 4 किलोमीटर दूर मिले
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद दोनों के शवों को घर से करीब चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव के पास ले जाकर फेंक दिया गया था। मामले में कुलदीप साहू के साथ चंद्रकांत चौधरी, फूल सिंह और आर्यन विश्वकर्मा को आरोपी बनाया गया था।
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Raipur: तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदलेगा, CM साय बोले- भ्रम में न रहें, ‘सेवा ज्योति संकल्प’ के तहत होगा विकास

रायपुर: राजधानी के तेलीबांधा चौक का नाम बदलने की चर्चा पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है। इसका मौजूदा नाम और मूल स्वरूप यथावत रहेगा। चौक को केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 38 स्थानों पर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ विकसित करने की घोषणा की गई है। इनमें रायपुर का तेलीबांधा चौक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
नाम और मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं
सीएम साय ने स्पष्ट किया कि तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रहेगा। यहां ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकास कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह बयान चौक का नाम बदलने को लेकर सामने आई चर्चाओं के बीच आया है।
38 स्थानों पर बनेंगे सेवा ज्योति संकल्प चौक
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के 38 प्रमुख स्थानों को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की योजना है।
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Chhattisgarh: राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निपटारे में चार साल से ज्यादा की देरी के मामले में द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई विमानन संचालनालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की है। मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से जुड़ा है। सरकार ने हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था और बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया गया था। हादसे के बाद राज्य सरकार ने बीमा दावा पेश किया, लेकिन कंपनी ने इसे चार साल से ज्यादा समय तक लंबित रखा और अगस्त 2026 में दावा खारिज कर दिया।
सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े दावे में देरी पर कार्रवाई
विमानन संचालनालय की जांच में सामने आया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निपटारे में अत्यधिक देरी हुई। सरकार ने इसे सार्वजनिक धन और शासकीय हित से जुड़ा गंभीर मामला माना। अधिकारियों के मुताबिक, शासकीय हेलीकॉप्टर सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी खरीद व बीमा में जनता का पैसा लगा है। ऐसे में बीमा दावे को वर्षों तक लंबित रखने से राज्य के वित्तीय हित प्रभावित होते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसके साथ काम करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों का समय पर पालन करना होगा।
कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया
ब्लैकलिस्ट करने से पहले सरकार ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने अपना लिखित जवाब दिया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों की जांच के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश जारी करते हुए कंपनी को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया।
बीमा राशि की वसूली के लिए कार्रवाई जारी रहेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने से बीमा दावे का मामला खत्म नहीं हुआ है। राज्य शासन अपने दावे की राशि हासिल करने के लिए आगे भी आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक धन की सुरक्षा और राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए देय राशि की वसूली के सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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