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Chhattisgarh: हिमालय में गूंजी जशपुर की गूंज, आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया रूट

Jashpur: छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की— वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है। यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पांचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की।
अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहां पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की।
अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
“विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।
यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियां भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएं खोल सकती हैं।
अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया।
प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे।
यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।” इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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CG Cabinet: होली से पहले किसानों को 10 हजार करोड़ की सौगात: 3100 रु./क्विंटल के हिसाब से मिलेगा धान का अंतर

Raipur:मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। मंत्रिपरिषद ने फरवरी-मार्च 2026 में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ की षष्ठम् विधानसभा के अष्टम् सत्र के लिए राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दे दी। साथ ही वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई।
होली से पहले किसानों के खाते में 10 हजार करोड़
कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला किसानों को लेकर रहा। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अंतर की राशि होली से पहले एकमुश्त भुगतान की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। कृषक उन्नति योजना के तहत इस अंतर राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए होली से पहले किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे।
देश में सर्वाधिक दर पर हो रही खरीदी
राज्य सरकार के अनुसार, कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। पिछले दो वर्षों में इसी योजना के तहत किसानों को धान के मूल्य अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस वर्ष होली से पहले 10 हजार करोड़ के भुगतान के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगा।
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Chhattisgarh: सीएम साय ने जीपीएम में नवीन जिला अस्पताल भवन निर्माण कार्य का किया शुभारंभ,

GPM News: जीपीएम जिले की स्थापना की छठवीं वर्षगांठ पर जिले को स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 18 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 100 बिस्तरयुक्त अत्याधुनिक जिला अस्पताल भवन का शुभारंभ किया। यह नया अस्पताल बनने के बाद जिले के लोगों को बेहतर, आधुनिक और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक प्रणव मरपच्ची ने की।
स्वस्थ समाज से ही मजबूत राज्य: सीएम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “स्वस्थ समाज ही समृद्ध राज्य की नींव होता है। जीपीएम में नए अस्पताल का निर्माण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।” उन्होंने कहा कि 52 ग्राम पंचायतों का टीबी मुक्त और 71 पंचायतों का बाल विवाह मुक्त घोषित होना इस बात का प्रमाण है कि जब शासन और समाज साथ मिलकर काम करते हैं तो बड़ा सामाजिक परिवर्तन संभव है। सरकार छत्तीसगढ़ को रोगमुक्त, सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पंचायतों को किया सम्मानित
कार्यक्रम में 52 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त और 71 पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया। संबंधित सरपंचों को प्रशस्ति पत्र और महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। बाल विवाह मुक्त पंचायतों में पिछले 2 वर्षों में एक भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ। टीबी मुक्त पंचायतों में 2–3 वर्षों से कोई नया मामला सामने नहीं आया। यह उपलब्धि जनजागरूकता, स्वास्थ्य विभाग और पंचायतों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत जागरूकता के लिए तीन प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 10 फरवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के तहत लोगों को निःशुल्क दवा दी जाएगी। कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
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Raipur: मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में 6,412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे, गोल्डन बुक में दर्ज हुआ रिकॉर्ड, कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का हुआ शुभारंभ

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता, अंत्योदय और संवेदनशील शासन की भावना को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि एक समय गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, जिसे इस योजना ने सम्मान और भरोसे में बदल दिया है। मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कुल 6,412 जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक जीवन में बंधे। साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान किया, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस वृहद आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरगुजा एवं बस्तर संभाग के आठ जिलों में इस अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सहभागिता आवश्यक है तथा अभियान की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेशवासियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में ही मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में मानक बोरा मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः प्रारंभ, श्रीरामलला दर्शन योजना तथा भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सहायता जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख भी किया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री साय आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में जनसहभागिता आवश्यक है।
कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है।
कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर तथा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव अनेक जनप्रतिधि और अधिकारी कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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Chhattisgarh: अरपा महोत्सव में मुख्यमंत्री साय ने दी 100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात, मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में शामिल करने सहित कई घोषणाएं

Bilaspur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव एवं गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के छठवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर जिले को लगभग 100 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने कहा कि जिले के समन्वित विकास के लिए हर संभव पहल की जाएगी। उन्होंने इस मौके पर मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जिले को शामिल करने के साथ ही कई घोषणाएं की। उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 300 नव विवाहित जोड़ों को सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 100 करोड़ से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन जिले के समन्वित विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि पेंड्रारोड से अमरकंटक तक 19 किलोमीटर सड़क निर्माण से आवागमन में सुविधा होगी तथा केवची मार्ग के निर्माण से पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में 6 हजार 414 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है, जो ऐतिहासिक क्षण है तथा इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बेटियों के सम्मान और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना है।
मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर नगर पंचायत मरवाही में उच्च विश्राम गृह की स्वीकृति, मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जीपीएम जिले को शामिल करने, जिला मुख्यालय में भव्य ऑडिटोरियम निर्माण तथा समदलई पर्यटन स्थल में स्टॉप डैम निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को चेक एवं सामग्री का वितरण के साथ ही स्वामित्व योजना अंतर्गत 435 किसानों को पट्टा प्रदान किया गया। कार्यक्रम स्थल पर जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाए गए सभी स्टालों का मुख्यमंत्री साय ने अवलोकन किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने जिले के विकास कार्यों पर आधारित बुकलेट का विमोचन भी किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में जिले की पर्यटन संभावनाओं और जिले की दो वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित वीडियो फिल्म का भी प्रदर्शन हुआ। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची, अटल श्रीवास्तव, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे।
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Bastar Pandum 2026: अमित शाह बोले- बस्तर की पहचान बारूद नहीं, संस्कृति है; 55 हजार आदिवासियों की भागीदारी नक्सल भय खत्म होने का सबूत

Bastar Pandum 2026: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान कभी भी बारूद और बंदूक नहीं रही, बल्कि उसकी असली पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और विरासत हैं। वे छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सली हिंसा, IED धमाकों और गोलियों की आवाज से दहला रहता था, आज वहीं 55 हजार से ज्यादा आदिवासी खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि सहित 12 विधाओं के जरिए अपनी संस्कृति को जीवंत कर रहे हैं। यह बस्तर के नक्सल भय से मुक्त होने का बड़ा प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि पिछली बार जहां 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं हुई थीं, वहीं इस बार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5 नई विधाओं को जोड़कर आदिवासी संस्कृति को और मजबूती दी। बस्तर के सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से हजारों प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया।
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी कला और संस्कृति दुनिया के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में दुर्लभ है। यह सिर्फ बस्तर की नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश-दुनिया तक पहुंचे और इसे वैश्विक पहचान मिले।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार आदिवासी जनजातियों के संरक्षण और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना इसी सम्मान का प्रतीक है। सरकार ने जनजातीय शिल्प, व्यंजन और वन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया है।
नक्सलवाद पर सख्त संदेश देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वासन देगी, लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें हथियार से ही जवाब मिलेगा।
अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा। नई पर्यटन गतिविधियां, एडवेंचर टूरिज्म, होम-स्टे और औद्योगिक क्षेत्र बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगे। 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र, रेल परियोजनाएं, सिंचाई योजनाएं और कनेक्टिविटी बस्तर की तस्वीर बदल देंगी।
उन्होंने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू नहीं, बल्कि रात में सांस्कृतिक नृत्य दिखाई देते हैं। स्कूल, अस्पताल, सड़कें और मोबाइल टावर बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। तय समय सीमा में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
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