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Chhattisgarh: जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई, गुटखा कारोबारी गुरुमुख जुमनानी गिरफ्तार, चार सालों से हो रही थी कर चोरी

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Chhattisgarh: GST department takes major action, gutkha businessman Gurmukh Jumanani arrested, tax evasion was going on for four years

Raipur: राज्य कर (जीएसटी) विभाग ने गुटखा कारोबार में बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए सितार ब्रांड के गुटखा निर्माता गुरुमुख जुमनानी को गिरफ्तार कर लिया है। विभागीय जांच में सामने आया कि जुमनानी पिछले चार वर्षों से बिना जीएसटी पंजीयन के गुटखा निर्माण कर करोड़ों रुपए की कर चोरी कर रहा था। जीएसटी विभाग द्वारा 25 और 27 जून 2025 को दुर्ग और राजनांदगांव में की गई जांच के दौरान यह मामला उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि वर्ष 2021 से लगातार सितार गुटखा का उत्पादन अवैध रूप से किया जा रहा था। इसके बाद विभाग द्वारा जुमनानी को समन जारी किया गया, लेकिन वह दो माह तक उपस्थित नहीं हुआ।

जांच में पाया गया कि उन्होंने अप्रैल 2021 से सितंबर 2022 तक राजनांदगांव के ग्राम मनकी और खैरागढ़ के ग्राम ठेलकाडीह में, जनवरी 2023 से जून 2023 तक रायपुर के मंदिर हसौद एवं भनपुरी में तथा जुलाई 2023 से जून 2025 तक दुर्ग के बाईरडीह, जोरातराई और गनियारी क्षेत्र में फैक्ट्रियां संचालित कीं। प्रशासनिक छापों से बचने के लिए कारोबारी हर महीने फैक्ट्री का स्थान बदल देते थे तथा माल को विभिन्न नामों से गोदामों में छिपाकर बाजार में बेचते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि जुमनानी ने अपने बेटे सागर जुमनानी के नाम से कोमल फूड नामक सुपारी गोदाम दुर्ग जिले में संचालित किया। यहां से सुपारी को गुटखे में बदलकर बेचा जाता था, जबकि कागजों में केवल सुपारी बिक्री दर्शायी जाती थी। उल्लेखनीय है कि सुपारी पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है, जबकि गुटखे पर 28 प्रतिशत तथा 204 प्रतिशत तक का सेस लगाया जाता है। इस हेराफेरी से सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। पूर्व में भी विभाग ने मार्च 2024 में दुर्ग और राजनांदगांव में छापेमारी कर 50 लाख रुपए टैक्स जमा कराया था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी लगभग 1.5 करोड़ रुपए की सुपारी जब्त की थी।

जांच से यह भी पता चला कि जुमनानी फैक्ट्री में मध्यप्रदेश के युवकों को बंधुआ मजदूर की तरह काम कराता था। मजदूरों से पूरी रात काम लिया जाता था और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। हर तीन माह में मजदूरों को बदल दिया जाता था। मजदूरों को रातभर काम करना होता था और उन्हें फैक्ट्री से बाहर निकलने की मनाही थी। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि फैक्ट्री का वास्तविक संचालन स्वयं गुरूमुख जुमनानी ही कर रहे थे।

राज्य कर (जीएसटी) विभाग ने 23 सितम्बर 2025 को जुमनानी को जीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी प्रतिदिन लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का गुटखा तैयार कर विक्रय करता था। पिछले चार वर्षों से जारी इस अवैध कारोबार के आधार पर विभाग द्वारा अपवंचित कर की गणना की जा रही है। जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है तथा आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी, अवैध कारोबार और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सरकार ने दोहराया कि जो भी कारोबारी या संस्था कानून तोड़कर अवैध ढंग से व्यापार करेगी, राजस्व की चोरी करेगी या आम नागरिकों की सेहत को खतरे में डालेगी, उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में न केवल टैक्स वसूला जाएगा बल्कि दंडात्मक प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जनता के हितों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

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CM Vishnu Deo Sai: देर रात बैठक पर बोले- इमरजेंसी मीटिंग नहीं थी, UCC लागू होगा लेकिन अभी नहीं

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Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास में देर रात तक चली हाई-लेवल बैठक को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई इमरजेंसी बैठक नहीं थी, बल्कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और अभियानों की समीक्षा बैठक थी।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पर हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर “12 साल विश्वास के, 12 साल विकास के, 12 साल बेमिसाल” जैसे अभियानों के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी मंत्रियों और विधायकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बैठक में इन्हीं कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू होगा, लेकिन अभी नहीं

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में सरकार काम कर रही है और इसके लिए समिति का गठन भी किया जा चुका है।हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सत्र में UCC विधेयक लाए जाने की संभावना कम है।

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मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश में UCC लागू होगा, लेकिन मानसून सत्र में इतनी जल्दी इसे लाना संभव नहीं है। समिति अपना काम कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी।”

देर रात तक चली बैठक से बढ़ी थीं अटकलें

गुरुवार रात मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में राज्य सरकार के सभी मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक देर रात तक चली, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।

सूत्रों के अनुसार बैठक रात करीब दो बजे तक चली, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार और संगठन के स्तर पर कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा और रणनीति तय करना था।

UCC को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

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मुख्यमंत्री के बयान के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार पहले ही इस विषय पर अध्ययन और सुझावों के लिए समिति गठित कर चुकी है। अब समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि UCC को लेकर सरकार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहती है, ताकि व्यापक सहमति और कानूनी तैयारी के बाद ही इसे लागू किया जा सके।

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Chhattisgarh: गरियाबंद को 603 करोड़ की विकास सौगात, CM साय ने 76 परियोजनाओं का लोकार्पण-भूमिपूजन किया

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Gariyaband: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को गरियाबंद जिले को 603.46 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 86.75 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुए 46 कार्यों का लोकार्पण किया, जबकि 516.70 करोड़ रुपए के 30 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से जिले में सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, विद्युत और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। किसानों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और गरीब परिवारों के कल्याण के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

बिजली बिलों में राहत का जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। इस योजना के माध्यम से करीब 757 करोड़ रुपए के बकाया बिजली बिलों में छूट प्रदान की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर लोगों के बिजली खर्च को कम किया जा रहा है।

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किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि सहकारी समितियों के नए केंद्र खोले जा रहे हैं ताकि किसानों को ऋण, खाद और बीज जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने किसानों से नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का करें उपयोग

साय ने कहा कि सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई है, जिसका नागरिकों को अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।

सुपेबेड़ा की पेयजल समस्या के समाधान का दावा

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मुख्यमंत्री ने बताया कि सुपेबेड़ा क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तेल नदी पर 7 करोड़ रुपए की लागत से एनीकट निर्माण को मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

शाला प्रवेश उत्सव में भागीदारी की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और 27 जून तक शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की।

आवास, महतारी वंदन और धान खरीदी का भी जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 26 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 18,165 करोड़ रुपए से अधिक राशि महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। साय ने कहा कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और कृषक उन्नति योजना के माध्यम से अंतर की राशि का भुगतान भी किया जा रहा है।

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आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरियाबंद आदिवासी बहुल जिला है, जहां कमार और भुंजिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के जरिए इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और आजीविका के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आज शुरू हुए विकास कार्य जिले के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देंगे। कार्यक्रम में खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

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Koriya Murder Case: रेत विवाद में भाजपा नेता को जिंदा जलाया, कोरिया में पूर्व जनपद अध्यक्ष की हत्या, एक और युवक की इलाज के दौरान मौत

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Koriya Murder Case: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत कारोबार को लेकर चल रहे विवाद ने खूनी रूप ले लिया। सोनहत थाना क्षेत्र में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की कथित तौर पर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि रेत कारोबार से जुड़े लोगों ने उनकी फॉर्च्यूनर कार को हाईवा वाहनों से घेरकर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। इस सनसनीखेज वारदात में गंभीर रूप से घायल एक अन्य युवक विरेंद्र सिंह की भी इलाज के दौरान मौत हो गई है। इसके साथ ही मामले में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।

कार में जिंदा जल गए भाजपा नेता

जानकारी के अनुसार, घटना देर रात सोनहत क्षेत्र के नौगई गांव में हुई। पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपनी फॉर्च्यूनर कार में सवार थे। आरोप है कि हमलावरों ने कार के आगे और पीछे हाईवा वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। इसके बाद कार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। आग लगने से भरत सिंह कार के भीतर ही फंस गए और मौके पर उनकी मौत हो गई।

बाहर निकले तो फरसे और डंडों से हमला

कार में भरत सिंह के साथ उनके भाई नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और रायपुर निवासी विरेंद्र सिंह भी मौजूद थे। तीनों किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। हमले में विरेंद्र सिंह के गले पर फरसे से वार किया गया, जबकि अन्य लोगों की बेरहमी से पिटाई की गई।

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इलाज के दौरान विरेंद्र सिंह ने तोड़ा दम

गंभीर रूप से घायल विरेंद्र सिंह को अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सरगुजा रेंज के आईजी ने विरेंद्र सिंह की मौत की पुष्टि की है। विरेंद्र रायपुर में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे।

तीन अन्य घायल, रायपुर रेफर

हमले में मयंक सिंह के चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। नागेंद्र सिंह के हाथ और चेहरे पर चोटें हैं तथा वे झुलस भी गए हैं। वहीं योगेंद्र सिंह का हाथ टूट गया है और उन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं। तीनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है।

रेत घाट के ठेके को लेकर चल रहा था विवाद

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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नौगई रेत घाट का ठेका नागेंद्र सिंह के बेटे ने लिया था। रेत खनन और परिवहन को लेकर उनका भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी के परिवार से लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि इसी विवाद के चलते देर रात दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा और मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया।

पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Electricity Tariff: छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में संशोधन, 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार

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Electricity Tariff: छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में संशोधन, 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार

Raipur: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में संशोधन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने औसतन 6.23 प्रतिशत यानी करीब 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि को मंजूरी दी है। हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि विभिन्न राहत योजनाओं और सब्सिडी के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका असर बेहद सीमित रहेगा।

सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के चलते प्रदेश के लाखों परिवारों को बिजली दर वृद्धि से राहत मिलेगी।

41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर असर बेहद कम

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को हर महीने 30 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है। इन्हें 200 यूनिट तक बिजली खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। सरकार के मुताबिक इन दोनों योजनाओं के कारण करीब 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर अधिकतम 3.65 प्रतिशत तक ही रहेगा।

किसानों पर नहीं बढ़ेगा बिजली खर्च

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राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसका अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। इसके साथ ही कृषि पंपों पर लगने वाला स्थायी प्रभार भी पहले की तरह यथावत रखा गया है। इससे किसानों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ जीरो

पीएम सूर्यघर योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 66 हजार उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में 89 हजार घरों में सोलर प्लांट लगाने का काम जारी है। राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों में 5 लाख घरों तक इस योजना का विस्तार करने का लक्ष्य रखा है।

बिजली बिल समाधान योजना से 749 करोड़ की राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत और सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। शेष राशि को 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी गई है। अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू और 33 हजार कृषि उपभोक्ता इस योजना से जुड़ चुके हैं। करीब 1328 करोड़ रुपए के बकाया बिलों का निपटारा किया गया है, जिसमें उपभोक्ताओं को 749 करोड़ रुपए की राहत मिली है।

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उद्योगों और छात्रावासों को भी राहत

राज्य सरकार ने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए स्टील उद्योगों को मिलने वाली 25 प्रतिशत लोड फैक्टर छूट को जारी रखा है। वहीं बस्तर और सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर बिजली खर्च में राहत दी गई है।

कम बिजली खर्च करने पर मिलेगी छूट

10 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय यानी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं पीक आवर्स में बिजली खपत पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इससे उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने हजारों करोड़ का निवेश

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राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक चालू होने की संभावना है।  इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट के नए बिजली संयंत्र की योजना पर भी काम चल रहा है। राज्यभर में नए ग्रिड, उपकेंद्र और वितरण नेटवर्क विस्तार की परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और ऊर्जा अधोसंरचना विस्तार की जरूरतों के बाजूद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है।

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Arun Sao Action: बस्तर में धीमे निर्माण कार्यों पर सख्ती, 2 ठेकेदारों का पंजीयन निरस्त, 8 को नोटिस

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Raipur: बस्तर में सड़कों और पुलों के निर्माण कार्यों में लगातार हो रही देरी पर उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने सख्त रुख अपनाया है। उनके निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग ने दो ठेकेदारों का पंजीयन निरस्त कर दिया है, जबकि आठ ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा दो अन्य ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन भी मांगा गया है।

हाल ही में चार दिवसीय बस्तर प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण और विभागीय समीक्षा बैठकें ली थीं। इस दौरान उन्होंने कई कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

दो ठेकेदारों का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुल निर्माण कार्यों में लगातार खराब प्रगति के चलते मेसर्स गुप्ता कंस्ट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है।

कंपनी कोंडागांव जिले में भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण कर रही थी। इसके अलावा कबीरधाम जिले में बांटीपथरा-कुई (दमगढ़) मार्ग पर हॉफ नदी में पुल निर्माण का कार्य भी इसी कंपनी को सौंपा गया था।

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वहीं कांकेर जिले में आमाबेड़ा-सेमर गांव मार्ग पर नेरूल नदी और बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग पर डुमरीकेल नाला में उच्च स्तरीय पुल निर्माण में देरी के कारण ठेकेदार निर्भय राम साहू का पंजीयन भी आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया गया है।

दो अन्य ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी

नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा सड़क चौड़ीकरण एवं सुधार कार्य की धीमी प्रगति को लेकर ठेकेदार पंकज हालदार के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है।

इसी तरह सुकमा जिले में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग और केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर ठेकेदार आशीष भदौरिया के मामले में भी मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन तलब किया गया है।

8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस

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लोक निर्माण विभाग ने बस्तर संभाग में कई सड़क परियोजनाओं की धीमी गति को लेकर आठ ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

इनमें कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बीएमएस प्रोजेक्ट, कोंडागांव के हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी तथा जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एसके अरोरा शामिल हैं।

इसके अलावा सुकमा जिले में चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग और भेज्जी-चिंतागुफा सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

केशलूर रेलवे ओवरब्रिज पर भी नोटिस

राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर के पास निर्माणाधीन फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज परियोजना की धीमी प्रगति पर भी विभाग ने 10 जून को ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी किया था। विभाग ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित माइलस्टोन के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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‘गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता’

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सड़क और पुल निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्धारित समय में परियोजनाएं पूरी नहीं होने से आम लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बस्तर में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना आवश्यक है और काम में लापरवाही या देरी करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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