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Chhattisgarh: रोबोटिक सर्जरी में ‘देव हस्त’ करेगा कमाल, एम्स रायपुर में मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

Raipur: मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित टाटीबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मध्य भारत के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रथम रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम ‘देव हस्त’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विकास में एक नया आयाम है। यह ऐतिहासिक क्षण प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” मुख्यमंत्री साय ने स्वयं ‘देव हस्त’ पर पहला ड्राई लैब डिसेक्शन कर इस अत्याधुनिक तकनीक की औपचारिक शुरुआत की। यह सिस्टम मध्य भारत के किसी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित होने वाला पहला रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर एम्स रायपुर में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भर्ती होने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा हेतु एम्स रायपुर में सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास निर्माण की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि “डॉक्टरों को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करते हैं। आज जिस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ हो रहा है, उसे ‘देव हस्त’ नाम दिया गया है। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि एम्स रायपुर में भर्ती होने वाले अन्य राज्यों के मरीजों को भी मिलेगा। एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार मील का पत्थर साबित हो रहा है।”
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर से मुझे विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि “जब रायपुर एम्स के निर्माण को स्वीकृति मिली, उस समय मैं सांसद था और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से छत्तीसगढ़ में एम्स की शाखा स्थापित करने का आग्रह किया था। यह आवश्यक था ताकि दिल्ली स्थित एकमात्र एम्स पर मरीजों का दबाव कम हो और अन्य राज्यों के लोगों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके राज्य में ही उपलब्ध हो। हमारा सौभाग्य है कि जिन छह राज्यों में एम्स स्थापित करने की स्वीकृति मिली, उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था।”
मुख्यमंत्री साय ने परिजन निवास की घोषणा करते हुए कहा कि “दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा कितनी आवश्यक है, यह मैं भली-भांति समझता हूं। सांसद रहते हुए दिल्ली स्थित मेरे आवास को लोग ‘मिनी एम्स’ कहते थे क्योंकि वहां मैं मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था करता था। जनसेवा का यह कार्य मेरे दिल के बेहद करीब है। 2014 से 2019 के संसदीय कार्यकाल में मैंने लगभग 12 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष से मरीजों को दिलवाए थे। रायपुर में भी कुनकुरी सदन में मरीजों के परिजनों की व्यवस्था की गई है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के लोग उठाते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 महीनों में सरकार बनने के बाद राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और इनका इलाज भी महंगा होता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लोगों को पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। अब वय वंदन योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वर्गों के मरीजों को भी यह सुविधा प्रदान की जा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जहाँ चिकित्सा सुविधाएं बढ़ रही हैं, वहीं बीमारियों का दायरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोटिक सर्जरी का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से चिकित्सकीय क्षमता और गुणवत्ता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। छत्तीसगढ़ को ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का अत्यधिक लाभ मिलेगा और शीघ्र ही राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ‘देव हस्त’ के नामकरण हेतु आयोजित प्रतियोगिता की विजेता ज्योत्स्ना किराडू को पांच हजार रुपए की पुरस्कार राशि भेंट की। कार्यक्रम में एम्स रायपुर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल, विभागाध्यक्ष डॉ. देवज्योति मोहंती, बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र और गणमान्यजन उपस्थित थे।
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Chhattisgarh: धान खरीदी में नया रिकॉर्ड, 13 जनवरी तक 17.77 लाख किसानों को मिला ₹23,448 करोड़

Raipur:छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही धान खरीदी ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 13 जनवरी तक प्रदेश के 17.77 लाख किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके बदले किसानों के खातों में सीधे ₹23,448 करोड़ की रिकॉर्ड राशि ट्रांसफर की गई है।
यह 13 जनवरी तक अब तक के सभी वर्षों में सबसे अधिक खरीदी और सबसे अधिक भुगतान है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में इसी तारीख तक 72.15 LMT धान खरीदा गया था और किसानों को ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था। वहीं 2021-22 में 68.77 LMT धान की खरीदी के एवज में ₹13,410 करोड़ दिए गए थे।
खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 13 जनवरी तक 97.67 LMT धान की खरीदी हुई थी और किसानों को ₹20,022 करोड़ का भुगतान किया गया था। इन सभी वर्षों की तुलना में 2025-26 में न केवल खरीदी की मात्रा, बल्कि किसानों को मिली राशि भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
आंकड़े बताते हैं कि जहां पहले वर्षों में 70 से 97 LMT तक खरीदी होती थी, वहीं इस साल 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान खरीदा जा चुका है। भुगतान की राशि भी बढ़कर ₹23,448 करोड़ तक पहुंच गई है।
सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि पारदर्शी खरीदी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान प्रणाली और किसान-हितैषी नीतियों का परिणाम है। किसानों को समर्थन मूल्य पर समय पर भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि धान भंडारण में सूखत और अनियमितताओं को लेकर सख्त कार्रवाई की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में जिन संग्रहण केंद्रों में 0.5 से 1 प्रतिशत तक कमी पाई गई, वहां केंद्र प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। 1 से 2 प्रतिशत तक कमी पर विभागीय जांच शुरू की गई, जबकि 2 प्रतिशत से अधिक कमी पाए जाने पर निलंबन और एफआईआर तक की कार्रवाई की गई है।
पिछले दो वर्षों में धान खरीदी और भंडारण में लापरवाही के मामलों में 33 खाद्य निरीक्षकों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए, दो मामलों में एफआईआर दर्ज की गई और एक केंद्र प्रभारी को निलंबित किया गया है। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही पर शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है।
सरकार ने यह भी बताया कि केंद्रीय पूल के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप चावल मिलिंग और भंडारण में समय लगने के कारण कुछ स्थानों पर सूखत की संभावना बनी, लेकिन संपूर्ण धान निराकरण के बाद ही वास्तविक आंकलन किया जाएगा। वर्तमान में संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव और नीलामी की प्रक्रिया प्रगतिरत है।
राज्य सरकार का साफ संदेश है कि किसानों के धन, अनाज और विश्वास से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। धान खरीदी से लेकर भुगतान और भंडारण तक पूरी प्रक्रिया को तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है।
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Chhattisgarh: धान भंडारण में सूखत और कीट-क्षति स्वाभाविक प्रक्रिया, अफवाहों से अलग है सच्चाई

Raipur: धान खरीदी और भंडारण के दौरान सूखत और चूहा जैसे कीटों से होने वाले नुकसान को लेकर कुछ जगहों पर भ्रम फैलाया जा रहा है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड और वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक यह नुकसान कोई नई या असामान्य घटना नहीं, बल्कि भंडारण प्रक्रिया से जुड़ी एक स्वाभाविक तकनीकी वास्तविकता है।
धान भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में जो आंशिक गिरावट आती है, उसे ‘सूखत’ कहा जाता है। यह प्रक्रिया देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में वर्षों से चली आ रही है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में सूखत 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार भंडारण केंद्रों में तापमान, नमी, परिवहन और संग्रहण अवधि जैसे कारकों के कारण धान में कुछ प्रतिशत वजन कम होना स्वाभाविक है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘मॉइस्चर लॉस’ या ‘ड्रायिंग लॉस’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे नियंत्रित और मापनीय जरूर बनाया जा सकता है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत की संभावना जताई गई है, जो पूर्व वर्षों के औसत के अनुरूप है और सामान्य मानी जाती है। वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था में अब डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग और परिवहन निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इससे सूखत अब केवल अनुमान नहीं, बल्कि पूरी तरह डेटा-आधारित और ट्रैक करने योग्य प्रक्रिया बन गई है। जहां सूखत तय मानकों के भीतर रहती है, उसे सामान्य माना जाता है, वहीं असामान्य स्थिति में जांच और जवाबदेही तय की जाती है।
धान खरीदी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके धान का पूरा और न्यायसंगत मूल्य दिलाना और पूरी प्रणाली को पारदर्शी बनाए रखना है। डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं ने प्रदेश की धान खरीदी प्रणाली को देश की सबसे संगठित व्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। स्पष्ट है कि सूखत कोई अनियमितता नहीं, बल्कि भंडारण की एक वैज्ञानिक वास्तविकता है—जिसे अब पारदर्शिता और निगरानी के साथ नियंत्रित किया जा रहा है।
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Chhattisgarh: रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की तैयारियों को अंतिम रूप देने की कवायद, व्यवस्थाओं को लेकर हुई समीक्षा बैठक

Raipur: रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के रूप में छत्तीसगढ़ की राजधानी में शब्दों और विचारों का एक भव्य उत्सव आकार ले रहा है। इस प्रतिष्ठित आयोजन की तैयारियों को लेकर नवा रायपुर स्थित संवाद भवन में आयोजन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की सहभागिता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, साहित्यिक सत्रों तथा प्रचार-प्रसार की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने बैठक में कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बौद्धिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का अवसर है। उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर अटल नगर के पुरखौती मुक्तांगन में 23 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
देशभर के साहित्यकार और विचारक होंगे शामिल
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। इस दौरान साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर पुस्तक मेले का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के ख्यातिनाम प्रकाशण समुह शामिल होंगे।
पुरखौती मुक्तांगन बनेगा साहित्य और संस्कृति का केंद्र
यह उत्सव पुरखौती मुक्तांगन, अटल नगर, नवा रायपुर में आयोजित किया जाएगा, जहां छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और समकालीन साहित्यिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।
राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ता रायपुर साहित्य उत्सव
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को देश के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। यह उत्सव न केवल लेखकों और पाठकों को जोड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छवि को भी राष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ करेगा। आयोजन से जुड़ी विस्तृत कार्यक्रम-सारणी और अतिथियों की सूची शीघ्र ही सार्वजनिक की जाएगी। बैठक में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शंशाक शर्मा, जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विश्वरंजन, अपर संचालक जनसंपर्क उमेश मिश्रा एवं आलोक देव ने भी रायपुर साहित्य उत्सव के सफल आयोजन को लेकर मार्गदर्शन दिया।
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Chhattisgarh: बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से मजबूत होगा जनविश्वास : मुख्यमंत्री साय

Raipur: छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल हो रही है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा फिर कभी सिर न उठा सके और इसके लिए बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर मिशन मोड में उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्वस्फूर्त जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार कार्ड निर्माण, बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत चिन्हित स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण तथा युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने के पहल की विशेष रूप से सराहना की।
बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय एवं पीएमश्री स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएँ, आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव चा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंRaipurसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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Makar Sankranti: प्रदेश में चीनी मांझा प्रतिबंधित, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई, सीएम साय ने पतंग उत्सव सुरक्षित और पारंपरिक रूप से मनाने की अपील की

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों से पतंगों के इस उल्लासपूर्ण पर्व को सुरक्षित, जिम्मेदार और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि त्योहार के आसपास चीनी मांझा से होने वाली दुर्घटनाओं की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं, इसलिए इसका प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है और इसका उपयोग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, पक्षियों और राहगीरों के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देशित किया है कि चीनी मांझा के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि नागरिकों को इसके खतरों और कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी मिल सके। सीएम साय ने कहा कि मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर परंपरा, आनंद और सुरक्षा—तीनों का संतुलन बनाए रखें। उन्होंने सभी को मिलकर इस पर्व को हर्ष, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ मनाने की अपील की।













