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Chhattisgarh Assembly: राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, वित्तमंत्री बोले- सरकार वादों पर नहीं, परिणामों पर विश्वास करती है

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Chhattisgarh Assembly: Presents supplementary budget of ₹35,000 crore, the largest ever in the state's history; Finance Minister says government believes in results, not promises

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत कर विकास, वित्तीय अनुशासन और दूरदर्शी शासन की स्पष्ट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह अनुपूरक बजट केवल संसाधनों की व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर आर्थिक प्रगति और संतुलित विकास की मजबूत दिशा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा विभिन्न बोर्डों और निगमों पर छोड़े गए ₹45,000 करोड़ से अधिक के लंबित ऋण ने इन संस्थानों को लगभग निष्क्रिय स्थिति में पहुँचा दिया था। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार ने मार्कफेड और नान (NAAN) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को संबल प्रदान करने का गंभीर प्रयास किया है, जो राज्य में धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ हैं। इन संस्थाओं को सुदृढ़ किए बिना किसानों का कल्याण और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगिक विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने तथा विभिन्न औद्योगिक विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को निरंतरता प्रदान करने के लिए अनुपूरक बजट में ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश, रोजगार और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र और संतुलित विकास के लिए केवल राजस्व व्यय पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दूरदर्शी पूंजीगत व्यय ही भविष्य की समृद्ध अर्थव्यवस्था और मजबूत अधोसंरचना का आधार बनता है। सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया निवेश आने वाले दशकों तक विकास के स्थायी स्रोत तैयार करता है। इसी सोच के साथ सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाया है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में पूंजीगत व्यय में लगभग 55 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ पूंजीगत व्यय ₹13,320 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹15,419 करोड़ और 2024-25 में ₹20,055 करोड़ तक पहुँचा। मुख्य बजट 2025-26 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹26,341 करोड़ का प्रावधान किया गया है, साथ ही अनुपूरक बजट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के कुल आकार के अनुपात में भी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहाँ पूर्व सरकार के समय यह लगभग 3.5 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसके 4.1 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक विकास और मजबूत अधोसंरचना निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

अपने वक्तव्य के समापन में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह सरकार वादों पर नहीं, बल्कि परिणामों पर विश्वास करती है। पूंजीगत व्यय के माध्यम से संकल्पों को कागज से जमीन तक उतारने का कार्य किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त, अधोसंरचना के दृष्टिकोण से मजबूत और देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है।

अनुपूरक बजट में सड़क एवं भवन निर्माण क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के उद्देश्य से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण सड़क कार्यक्रम (आरआरपी फेज-2) हेतु ₹175 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य में प्रमुख सड़कों के उन्नयन एवं विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना (एडीबी लोन-3) के अंतर्गत ₹150 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही चिरमिरी-नागपुर हॉल्ट रेल लाइन परियोजना के लिए ₹86 करोड़ की राशि का प्रावधान कर क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।

अनुपूरक बजट में कृषि विकास एवं किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि उन्नति योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही किसानों को 5 एचपी तक के पंपों के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने हेतु ₹1,700 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सिंचाई लागत में कमी आएगी और कृषि उत्पादन को स्थायी बल मिलेगा। किसानों को बिना ब्याज के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुपूरक में ₹187 करोड़ का प्रावधान कर उन्हें वित्तीय संबल प्रदान किया गया है।

इसके अतिरिक्त, फसल जोखिम से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹122 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन एवं सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हेतु ₹35 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कृषि नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के भवन निर्माण के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान कर राज्य में कृषि आधारित नवाचार एवं तकनीकी विकास को नई गति देने का प्रयास किया गया है।

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अनुपूरक बजट में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए लंबित भुगतानों के निपटान हेतु अनुपूरक बजट में कुल ₹19,224 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा तंत्र को स्थायित्व प्रदान किया जा सके। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत ₹6,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

इसके साथ ही राज्य में धान खरीदी की महत्वपूर्ण व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मार्कफेड को धान खरीदी में हुई हानि के निपटान हेतु ₹12,424 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान से न केवल किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा ढांचे को भी दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी, जिससे आम नागरिकों के पोषण एवं खाद्य अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अनुपूरक बजट में सड़क सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों तक फायर वाहन एवं आधुनिक अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था हेतु अनुपूरक बजट में ₹154 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे आपदा एवं अग्नि दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरा प्रणाली के लिए ₹75 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से राज्य के समस्त परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के निर्माण हेतु अनुपूरक में ₹12 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु अनुपूरक बजट में ₹35 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इन पहलों के माध्यम से सरकार न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और हरित परिवहन की दिशा में भी ठोस कदम उठा रही है।

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अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से कुल ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश के लिए अनुकूल अधोसंरचना विकसित होगी और उद्योगों को सुस्पष्ट स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से कुल ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए ₹180 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश के लिए अनुकूल अधोसंरचना विकसित होगी और उद्योगों को सुस्पष्ट स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने हेतु लागत पूंजी अनुदान के रूप में ₹130 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे नए उद्यमों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार को बल मिलेगा।

इसके अतिरिक्त उद्योगों की वित्तीय लागत को कम करने और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से ब्याज अनुदान के रूप में ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के माध्यम से राज्य सरकार निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में संतुलित और सतत औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी।

अनुपूरक बजट में महिला एवं बाल विकास को सशक्त बनाने के लिए ठोस वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से राज्य की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके जीवन स्तर को सुदृढ़ करने और पारिवारिक निर्णयों में उनकी भूमिका को और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही मातृ एवं शिशु पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल और आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत अनुपूरक में ₹225 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों से पोषण स्तर में सुधार, स्वास्थ्य संकेतकों को सुदृढ़ करने और भावी पीढ़ी के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

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ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास और आवासीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य बजट में ₹8,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं अनुपूरक बजट के माध्यम से इसके लिए ₹1,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास सुनिश्चित किया जा सके।

इसके साथ ही ग्रामीण अधोसंरचना और बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ₹378 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे गांवों की सड़क कनेक्टिविटी को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। स्वच्छता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन हेतु ₹150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के लिए ₹40 करोड़ तथा ग्रामीण महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के आजीविका सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ₹286 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

हवाई कनेक्टिविटी से लेकर किसान कल्याण और बस्तर में शांति तक: साय सरकार की बहुआयामी विकास रणनीति

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के समावेशी विकास और संतुलित क्षेत्रीय प्रगति के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट में बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹150 करोड़ तथा रायगढ़ एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन निवेशों से क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय की सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार की संवेदनशील और किसान-हितैषी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि बीते दो वर्षों में ₹25,000 करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों तक पहुँची है। यह न केवल किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान करता है।

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राज्य में शांति और सुरक्षा की दिशा में भी साय सरकार निर्णायक परिणाम लेकर आई है। 31 मार्च 2026 की समयसीमा के निकट आते हुए सरकार इस बात को लेकर आश्वस्त और प्रतिबद्ध है कि छत्तीसगढ़ जल्द ही वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) की समस्या से पूर्णतः मुक्त होगा। शांति, संवाद, विकास और सुरक्षा की बहुआयामी रणनीति के माध्यम से साय सरकार ने ऐसे वातावरण का निर्माण किया है, जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और विकास की यात्रा में सहभागी बन रहे हैं।

बस्तर, जहाँ कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, आज वहाँ बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजन और बस्तर ओलंपिक जैसे खेल महोत्सव नई पहचान बना रहे हैं। यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि साय सरकार की उस बहुआयामी विकास नीति का प्रमाण है, जिसने विश्वास, उत्सव और भविष्य की आशा को बस्तर की धरती पर पुनः स्थापित किया है।

“₹35,000 करोड़ का यह ऐतिहासिक अनुपूरक बजट छत्तीसगढ़ के भविष्य को मजबूत आधार देने वाला बजट है, जिसमें विकास, वित्तीय अनुशासन और संवेदनशील शासन की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। यह बजट किसानों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं और उद्योगों के लिए समान रूप से अवसर सृजित करता है। पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देकर सरकार ने सड़कों, आवास, कृषि, उद्योग, कनेक्टिविटी और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लिया है। बस्तर में शांति, किसानों को सीधा आर्थिक लाभ, महिलाओं का सम्मान और ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास—ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार वादों नहीं, परिणामों की राजनीति कर रही है और छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।”- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पुलेला गोपीचंद, CM बोले- बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी

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नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू की जाएगी। पद्म भूषण सम्मानित बैडमिंटन खिलाड़ी और प्रशिक्षक पुलेला गोपीचंद इस अकादमी की शुरुआत करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने क्लब के संस्थापकों और टीम को शुभकामनाएं दीं।

खेल सुविधाओं के लिए बजट में ₹100 करोड़

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष खेलों के समग्र विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, तराशने और बेहतर अवसर देने की है। सरकार चाहती है कि शहरों के साथ दूरस्थ वनांचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी संसाधनों के अभाव में पीछे न रहना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा, खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं। इनसे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होती है। खेलों में निवेश युवाओं और प्रदेश के भविष्य में निवेश है।

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गोपीचंद बोले- खेल और स्वास्थ्य को मिले प्राथमिकता

पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में स्वागत के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने नवा रायपुर के विकास की सराहना करते हुए कहा कि इलेशियम क्लब्स की पहल खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गोपीचंद ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की जीत और तिरंगे का ऊंचा होना पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ाता है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के साथ शारीरिक विकास पर भी समान ध्यान देने की जरूरत बताई। बच्चों को दौड़ने, कूदने, चढ़ने और अलग-अलग खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

2047 तक विकसित भारत के लिए स्वस्थ युवा जरूरी

गोपीचंद ने कहा कि खेलों में निवेश सिर्फ खिलाड़ी तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज का निर्माण भी होता है। उन्होंने खेल सुविधाओं, उत्कृष्टता और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उनके मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी जरूरी है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो।

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छत्तीसगढ़ में 18 IPS अधिकारियों के तबादले, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए 18 IPS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह (पुलिस) विभाग की ओर से जारी आदेश में 2021 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना के साथ विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) और सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद शामिल हैं। सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

पुलिस मुख्यालय में इन अधिकारियों को जिम्मेदारी

  • झा अमनकुमार रमनकुमार: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पुलिस अधीक्षक (SIA)।
  • अजय कुमार: नारायणपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (SIB), पुलिस मुख्यालय।
  • आकाश श्रीमाल: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी।
  • अक्षय प्रमोद सबद्रा: ASP (ऑप्स), नारायणपुर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक (योजना/प्रबंध)।
  • आकाश कुमार शुक्ला: एसटीएफ बघेरा, दुर्ग से पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (ANTF)।
  • रविन्द्र कुमार मीणा: बीजापुर में ASP (ऑप्स) से पुलिस अधीक्षक (चिटफंड एवं महिला विरुद्ध अपराध)।
  • रोहित कुमार शाह: सुकमा में ASP (ऑप्स) से 15वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, बीजापुर के सेनानी।

इन पदस्थापनाओं के जरिए पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।

कई जिलों में ASP (ऑप्स) की नई पोस्टिंग

जिलों में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई पदस्थापनाएं इस प्रकार हैं:

  • सुमीतकुमार दत्ताहारी ASP (ऑप्स)- कांकेर
  • ईशु अग्रवाल ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
  • मयंक मिश्रा ASP (ऑप्स)- सुकमा
  • वैशाली जैन ASP (ऑप्स)- जगदलपुर
  • विमल कुमार पाठक ASP (ऑप्स)- नारायणपुर
  • हर्षित मेहर ASP (ऑप्स)- कोंडागांव
  • राहुल बंसल ASP (ऑप्स)- बीजापुर

इनमें सुमीतकुमार दत्ताहारी पहले जगदलपुर में नगर पुलिस अधीक्षक थे। ईशु अग्रवाल रायपुर में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। मयंक मिश्रा रायगढ़, वैशाली जैन राजनांदगांव, विमल कुमार पाठक कोरबा, हर्षित मेहर दुर्ग और राहुल बंसल अंबिकापुर में पदस्थ थे।

प्रशिक्षु अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी

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तबादला आदेश में प्रशिक्षु अधिकारियों को भी नई पदस्थापना दी गई है।

  • अंशिका जैन: नगर पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर।
  • साकोर मानसी नानाभाउ: सहायक पुलिस आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय।
  • आदित्य कुमार: नगर पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव।
  • प्रतीक बंसोडे: नगर पुलिस अधीक्षक, अंबिकापुर।

ये अधिकारी 2022 से 2024 बैच तक के हैं। नई पदस्थापनाओं के साथ उन्हें शहरी पुलिसिंग और जिलों में जिम्मेदारी संभालने का अवसर दिया गया है।

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Chhattisgarh: सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में 3 को फांसी, एक को उम्रकैद, प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 साल की बेटी की हत्या का मामला

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सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने चारों दोषियों को सजा सुनाई। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मौत की सजा और चौथे आरोपी को उम्रकैद दी गई। मौत की सजा पाने वालों में कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) शामिल हैं। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

13 अक्टूबर 2024 को हुई थी मां-बेटी की हत्या

मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। पुलिस के मुताबिक, सूरजपुर शहर में प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के साथ पहले रेप किया गया और इसके बाद मां-बेटी की हत्या कर शवों को पिढ़ा गांव के पास फेंक दिया गया था। करीब दो साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने 29 सितंबर 2026 को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था। गुरुवार को अदालत ने सजा का ऐलान किया।

मां-बेटी के शरीर पर मिले थे 61 चोट के निशान

पोस्टमॉर्टम में महिला के शरीर पर 33 और बच्ची के शरीर पर 28 चोट के निशान मिले थे। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को मामले की गंभीरता के तौर पर अदालत के सामने रखा। अभियोजन के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपियों के कपड़ों पर खून के निशान और अन्य साक्ष्य भी सामने आए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों को दोषी माना।

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पुलिसकर्मी पर गर्म तेल फेंकने से शुरू हुआ घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, वारदात वाली रात कुलदीप साहू ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते में तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। पुलिस का दावा है कि उसे पकड़ने की कोशिश के दौरान साहू ने पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने का प्रयास किया और वहां से भाग निकला। इसके बाद वह प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी और बेटी पर हमला किया गया।

शव घर से करीब 4 किलोमीटर दूर मिले

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद दोनों के शवों को घर से करीब चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव के पास ले जाकर फेंक दिया गया था। मामले में कुलदीप साहू के साथ चंद्रकांत चौधरी, फूल सिंह और आर्यन विश्वकर्मा को आरोपी बनाया गया था।

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Raipur: तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदलेगा, CM साय बोले- भ्रम में न रहें, ‘सेवा ज्योति संकल्प’ के तहत होगा विकास

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रायपुर: राजधानी के तेलीबांधा चौक का नाम बदलने की चर्चा पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है। इसका मौजूदा नाम और मूल स्वरूप यथावत रहेगा। चौक को केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 38 स्थानों पर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ विकसित करने की घोषणा की गई है। इनमें रायपुर का तेलीबांधा चौक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।

नाम और मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं

सीएम साय ने स्पष्ट किया कि तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रहेगा। यहां ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकास कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह बयान चौक का नाम बदलने को लेकर सामने आई चर्चाओं के बीच आया है।

38 स्थानों पर बनेंगे सेवा ज्योति संकल्प चौक

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के 38 प्रमुख स्थानों को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की योजना है।

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Chhattisgarh: राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निपटारे में चार साल से ज्यादा की देरी के मामले में द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई विमानन संचालनालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की है। मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से जुड़ा है। सरकार ने हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था और बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया गया था। हादसे के बाद राज्य सरकार ने बीमा दावा पेश किया, लेकिन कंपनी ने इसे चार साल से ज्यादा समय तक लंबित रखा और अगस्त 2026 में दावा खारिज कर दिया।

सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े दावे में देरी पर कार्रवाई

विमानन संचालनालय की जांच में सामने आया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निपटारे में अत्यधिक देरी हुई। सरकार ने इसे सार्वजनिक धन और शासकीय हित से जुड़ा गंभीर मामला माना। अधिकारियों के मुताबिक, शासकीय हेलीकॉप्टर सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी खरीद व बीमा में जनता का पैसा लगा है। ऐसे में बीमा दावे को वर्षों तक लंबित रखने से राज्य के वित्तीय हित प्रभावित होते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसके साथ काम करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों का समय पर पालन करना होगा।

कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया

ब्लैकलिस्ट करने से पहले सरकार ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने अपना लिखित जवाब दिया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों की जांच के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश जारी करते हुए कंपनी को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया।

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बीमा राशि की वसूली के लिए कार्रवाई जारी रहेगी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने से बीमा दावे का मामला खत्म नहीं हुआ है। राज्य शासन अपने दावे की राशि हासिल करने के लिए आगे भी आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक धन की सुरक्षा और राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए देय राशि की वसूली के सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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