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Nepal Gen-Z Protests: प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन को फूंका, पीएम केपी शर्मा ओली का इस्तीफा

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Nepal Gen-Z Protests: Protesters burn down Parliament building, PM KP Sharma Oli resigns

Nepal Gen-Z Protests: नेपाल में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। नेपाल में लगातार उग्र होते युवाओं के विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दिया है। बताया जा रहा है कि नेपाली सेना उन्हें हेलिकॉप्टर से अ‍ज्ञात स्थान पर ले गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफे से पहले सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने ओली को पद छोड़ने की सलाह दी थी। वहीं, कैबिनेट के कई मंत्री, जिनमें गृहमंत्री रमेश लेखक और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल शामिल हैं, उन्होंने पहले ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे चुके थे।

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, देश भर में विरोध प्रदर्शन बढ़ने के बीच नेपाल की सेना ने हेलीकॉप्टरों की मदद से भैसपति स्थित मंत्रियों के आवासों से उन्हें निकालना शुरू कर दिया है। यह कदम मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के घरों को निशाना बनाकर की गई आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने भैसपति स्थित मंत्री के आवास में भी आग लगा दी। वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि संसद भवन की सुरक्षा के लिए सेना भी तैनात की गई है। उच्च पदस्थ अधिकारियों को सैन्य बैरकों में सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

नेपाल में सोमवार सुबह से जारी उग्र आंदोलन के बीच पहली बार शांति की अपील सामने आई है। नेपाल के सुरक्षा प्रमुखों और सरकार के मुख्य सचिव ने संयुक्त रूप से युवाओं से अपील की है कि वे संयम बरतें और देश में शांति बनाए रखें। इस अपील में नेपाली सेना के प्रधान सेनापति, नेपाल पुलिस के प्रमुख, सशस्त्र प्रहरी बल के प्रमुख और मुख्य सचिव शामिल रहे। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने भी सोशल मीडिया पर Gen-Z प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि संयम बरतें और शांति रखें, क्योंकि मांगें पूरी हो चुकी हैं।

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Iran Israel War: ईरान के तेल ठिकानों पर इजराइल के हमले तेज, 30 फ्यूल टैंक और कई डिपो निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा

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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। Israel और Iran के बीच संघर्ष के नौवें दिन इजराइल ने ईरान के तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में करीब 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है। इन हमलों से ईरान के ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रम्प बोले- ईरान को पूरी तरह हार माननी होगी

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले। ट्रम्प ने कहा कि या तो ईरान खुद आत्मसमर्पण करे या फिर उसकी सैन्य ताकत इतनी कमजोर कर दी जाए कि वह आगे लड़ने की स्थिति में न रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि लगातार दबाव के कारण ईरान अब पहले जैसा प्रभावशाली नहीं रहा।

फारस की खाड़ी को लेकर बढ़ा तनाव

दूसरी ओर ईरानी सेना ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में आते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी नौसेना द्वारा ऑयल टैंकरों की सुरक्षा के लिए जहाज भेजने की संभावना जताई जा रही है। ये टैंकर आमतौर पर Strait of Hormuz से होकर गुजरते हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

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जंग से भारी नुकसान

संघर्ष के दौरान अब तक ईरान में कई नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक हजारों घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई स्कूल और मेडिकल सेंटर भी हमलों की चपेट में आए हैं। इस युद्ध में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

पड़ोसी देशों से माफी का दावा

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि ईरान ने कुछ पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और वादा किया है कि उनकी जमीन से ईरान पर हमला न होने तक वह उन पर हमला नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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Iran Israel US War: दूसरे दिन भी ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले, IRGC मुख्यालय निशाने पर, 200 से ज्यादा मौतें, क्षेत्र में जंग जैसे हालात

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Iran Israel US War: ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने लगातार दूसरे दिन भी भीषण हमले किए। रविवार को किए गए हमलों में ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। इससे पहले शनिवार को हुए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की पुष्टि हुई थी। उनके मारे जाने के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ताजा हमलों में 48 ईरानी ‘नेता’ मारे गए हैं और अमेरिका ने ईरान के 9 जहाज भी डुबो दिए हैं। इजराइली वायुसेना के अनुसार, पिछले 24 घंटे में अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर 1,200 से अधिक बम गिराए गए। खामेनेई के ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें उनके परिवार के कई सदस्य और 40 कमांडर भी मारे गए।

तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया गया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 740 से अधिक लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत और 45 घायल होने की खबर है। नागरिक ठिकानों पर हमलों की इन खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरानी सेना और IRGC ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। UAE के दुबई शहर में Burj Khalifa और पाम होटल एंड रिसोर्ट के आसपास ड्रोन हमले की खबर है। इजराइल में एक हमले में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है।

सत्ता के स्तर पर ईरान में फिलहाल तीन सदस्यों की अस्थायी समिति बनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पजश्कियान, न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी एजेही और धर्मगुरु अली रजा अराफी शामिल हैं। यह समिति नए सर्वोच्च नेता के चयन तक प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेगी। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञों की सभा अंतिम निर्णय लेगी।

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लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। हवाई क्षेत्र बंद किए जा रहे हैं, सैन्य ठिकानों पर अलर्ट बढ़ा दिया गया है और वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता देखी जा रही है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदलेगा या कूटनीतिक रास्ता निकलेगा।

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Ali Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए, मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात

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Ali Khamenei Death: तेहरान पर शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है। 36 वर्षों से सत्ता में रहे खामेनेई के निधन के बाद देश में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और उत्तराधिकार संकट गहरा गया है।

हमले में खामेनेई की मौत की पुष्टि

ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी तसनीम के अनुसार, सर्वोच्च नेता Ali Khamenei शनिवार 28 फरवरी की सुबह तेहरान पर हुए संयुक्त हमले में मारे गए। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। वे इस्लामी गणराज्य की सभी प्रमुख संस्थाओं- सरकार, सेना और न्यायपालिका पर सर्वोच्च अधिकार रखते थे।

अमेरिका-इजरायल का संयुक्त ऑपरेशन

तेहरान पर अटैक के ऑपरेशन को इजरायली सेना ने ‘Roaring Lion’ और अमेरिकी पेंटागन ने ‘Operation Epic Fury’ नाम दिया।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि खामेनेई “अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाए” और ऑपरेशन जारी रहने की चेतावनी दी। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह अभियान “ईरान से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरे को खत्म करने” के लिए था।

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4 प्रांतों में हमले, भारी तबाही

हमले तेहरान, इस्फहान, कोम, कराज और करमानशाह सहित 24 प्रांतों में किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 700 से ज्यादा घायल हुए हैं। कई स्कूलों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि “इतिहास का सबसे भीषण जवाबी हमला” किया जाएगा। ईरानी सेना ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के कई देशों में हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइल में एक हमले में 9 लोगों की मौत हो गई है। तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो गई है। हमलों के बाद पूरे इजरायल में सायरन बजने लगे और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।

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Trump Resort: ट्रंप के रिसॉर्ट में शॉटगन और पेट्रोल बम के साथ घुसपैठ की कोशिश, हमलावर को सीक्रेट सर्विस ने मार गिराया

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Trump Resort: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के पाम बीच स्थित Mar-a-Lago रिसॉर्ट में एक व्यक्ति ने घुसने की कोशिश की। उसके पास शॉटगन और पेट्रोल बम था। जवाबी कार्रवाई में United States Secret Service ने फायरिंग की, जिसमें 20 वर्षीय हमलावर की मौके पर ही मौत हो गई। घटना फ्लोरिडा के Palm Beach स्थित एस्टेट के उत्तरी गेट के पास हुई। एजेंसी के अनुसार, संदिग्ध व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गया था। मौके पर मौजूद सीक्रेट सर्विस अधिकारियों और Palm Beach County Sheriff’s Office के एक डिप्टी ने उसका सामना किया।

सीक्रेट सर्विस के बयान में कहा गया, “मार-ए-लागो प्रॉपर्टी के उत्तरी गेट के पास एक व्यक्ति को शॉटगन और पेट्रोल बम के साथ देखा गया। प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसते ही अधिकारियों ने उसे रोकने की कोशिश की। संभावित खतरे को देखते हुए उस पर फायरिंग की गई।” गोली लगने के बाद संदिग्ध की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उसकी पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी सीक्रेट सर्विस या शेरिफ कर्मचारी को चोट नहीं आई है। घटना के समय राष्ट्रपति वॉशिंगटन में थे।हमलावर के मकसद और बैकग्राउंड की जांच जारी है।

प्रेस ब्रीफिंग में क्या कहा गया?

पाम बीच काउंटी के शेरिफ Ric Bradshaw ने बताया कि स्थानीय समयानुसार करीब 1:30 बजे संदिग्ध सुरक्षा घेरे में दाखिल हुआ। अधिकारियों ने उसे हथियार छोड़ने के लिए कहा, लेकिन वह गन उठाकर फायरिंग की मुद्रा में आ गया। इसके बाद एजेंटों ने जवाबी कार्रवाई की। घटना की संयुक्त जांच Federal Bureau of Investigation(FBI), सीक्रेट सर्विस और पाम बीच काउंटी शेरिफ कार्यालय कर रहे हैं।

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Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ रद्द किए, 6-3 से फैसला, भारत पर 18% शुल्क भी अवैध

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Trump Tariff: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of the United States ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति Donald Trump के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में अदालत ने कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) को है, राष्ट्रपति को नहीं। इस फैसले के साथ ही भारत पर लगाया गया 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अवैध घोषित हो गया है। कोर्ट का निर्णय ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रम्प ने सुनवाई के दौरान कहा था कि यदि वे यह केस हार गए तो देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

क्या था पूरा मामला

अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कई देशों से आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। उनका तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगा होगा और अमेरिकी कंपनियों को फायदा मिलेगा। टैरिफ लगाने के लिए ट्रम्प ने 1977 में बने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का सहारा लिया था। यह कानून गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट या राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे की स्थिति में राष्ट्रपति को विशेष आर्थिक शक्तियां देता है। हालांकि अदालत ने माना कि IEEPA के तहत राष्ट्रपति को इतनी व्यापक टैक्स लगाने की शक्ति नहीं दी जा सकती।

फैसले का असर

कोर्ट के निर्णय के बाद ट्रम्प के लगाए गए कई ग्लोबल टैरिफ हट जाएंगे। अमेरिकी सरकार को कंपनियों से वसूला गया शुल्क लौटाना पड़ सकता है। भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को राहत मिलेगी और कई आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। शेयर बाजारों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। वैश्विक व्यापार में स्थिरता बढ़ सकती है।

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कौन से टैरिफ खत्म, कौन से बरकरार

अदालत के फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे फिलहाल लागू रहेंगे। हालांकि दो बड़ी कैटेगरी के टैरिफ पर रोक लग गई है। इसमें रेसिप्रोकल टैरिफ के तहत चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ अमान्य हो गए हैं। वहीं कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगाया गया 25% विशेष टैरिफ भी निरस्त कर दिया गया है। ट्रम्प प्रशासन का दावा था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

12 राज्यों ने दायर किया था मुकदमा

टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर अदालत में चुनौती दी थी। इनमें एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमा से बाहर जाकर आयात शुल्क लगाए।

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