ख़बर यूपी / बिहार
UP News: श्री कृष्ण जन्मभूमि केस में सुनवाई पूरी, जजमेंट रिजर्व, जुलाई में आ सकता है फैसला

Shri Karishna Janmbhoomi Case: मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले दाखिल याचिकाओं की पोषणीयता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत ने बहस पूरी होने के बाद याचिकाओं की पोषणीयता पर अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया है। इस मामले में फैसला जुलाई महीने में आने की उम्मीद है। बता दें कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल की गई 18 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। ज्यादातर अर्जियों में विवादित स्थल हिंदुओं को दिए जाने की मांग की गई है।
हिंदू पक्ष की याचिकाओं में विवादित परिसर को भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि बताकर उसे हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग की गई है और वहां पूजा पाठ की इजाजत दिए जाने की मांग की गई है। वहीं मुस्लिम पक्ष की दलील है कि विवादित संपत्ति वक्फ बोर्ड की संपत्ति है, इसलिए इस विवाद का निपटारा वक्फ ट्रिब्यूनल में ही हो सकता है।
हिंदू पक्ष का कहना है कि किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करना उसकी प्रकृति बदलना और उसे बिना स्वामित्व के वक्फ संपत्ति के रूप में परिवर्तित करना वक्फ की प्रकृति रही है। इस तरह की प्रथा की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस मामले में वक्फ अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे क्योंकि विवादित संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है।
हिंदू पक्ष ने अदालत में यह भी दलील दी कि विवादित स्थल पर जबरन कब्जा करने के बाद नमाज अदा करना शुरू किया गया। इस तरह से जमीन का चरित्र नहीं बदला जा सकता है। दलील दी गई है कि विचाराधीन संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है इसलिए अदालत को ही इस मामले में सुनवाई का अधिकार है।
ख़बर उत्तरप्रदेश
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य, उज्जैन के विश्व रिकॉर्ड को चुनौती

अयोध्या दीपोत्सव 2026: दीपों की रोशनी से रामनगरी को जगमगाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए करीब 33 लाख दीप मंगाए जाने की तैयारी है। यह लक्ष्य पूरा होने पर अयोध्या एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने के मामले में उज्जैन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच सकती है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर 33,27,125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में अयोध्या के सामने अपने पिछले रिकॉर्ड को बेहतर बनाने के साथ उज्जैन के आंकड़े तक पहुंचने की चुनौती भी है। हालांकि, 30 लाख दीपों का लक्ष्य उज्जैन के बताए गए आंकड़े से कम है।
2017 में 1.87 लाख दीपों से हुई थी शुरुआत
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में 1,87,213 दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुई थी। इसके बाद हर साल दीपों की संख्या बढ़ती गई। वर्ष 2018 में 3,01,152, 2019 में 4,04,026 और 2020 में 6,06,569 दीप जलाए गए।
वर्ष 2021 में 9,41,551 दीप प्रज्ज्वलित कर अयोध्या ने नया कीर्तिमान बनाया। वर्ष 2022 में उज्जैन में 11,71,078 दीप जलाए जाने के बाद अयोध्या ने उसी वर्ष 15,76,955 दीप प्रज्ज्वलित किए। वर्ष 2023 में अयोध्या में 22,23,000 दीप जलाए गए, जबकि वर्ष 2024 में दीपों की संख्या 25.12 लाख से अधिक रही।
वर्ष 2025 में रामनगरी के 56 घाटों पर 26,17,215 दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
उज्जैन में 33.27 लाख दीप जलाने का दावा
17 सितंबर 2026 को उज्जैन में क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में 33,27,125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की सूचना सामने आई। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और मध्य प्रदेश में शुरू किए गए सेवा संकल्प अभियान से जुड़ा था।
उज्जैन के इस आंकड़े को पार करने के लिए अयोध्या में 33.28 लाख से अधिक दीप जलाने होंगे। 30 लाख दीपों का लक्ष्य पूरा होने पर भी रामनगरी अपने पिछले वर्ष के रिकॉर्ड से करीब 3.83 लाख अधिक दीप जलाएगी।
दीपोत्सव की तैयारियों पर नजर
अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों का भी प्रमुख आयोजन बन चुका है। सरयू तट पर लाखों दीपों की सजावट, घाटों की रोशनी और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन का आकर्षण रहते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। हालांकि, 30 लाख दीपों के लक्ष्य और आयोजन की अंतिम रूपरेखा को लेकर आधिकारिक घोषणा से पुष्टि करना जरूरी होगा।
ख़बर उत्तरप्रदेश
UP PET 2026: लखनऊ में परीक्षा देने वालों को राहत, 24 घंटे मिलेंगी बसें; स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। लखनऊ में परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए रोडवेज प्रशासन अतिरिक्त बसें चलाएगा। वहीं, रेलवे भी अलग-अलग रूटों पर परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन करेगा।
लखनऊ में PET-2026 की परीक्षा 25 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने और परीक्षा के बाद घर लौटने में अभ्यर्थियों को परेशानी न हो, इसके लिए परिवहन सेवाओं की व्यवस्था की गई है।
आलमबाग, कैसरबाग और अवध बस स्टेशन से 24 घंटे बसें
अवध बस डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस वर्मा को परीक्षार्थियों के लिए परिवहन सेवाओं का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश के आठ शहरों और बिहार से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लखनऊ पहुंचने की संभावना है।
परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए आलमबाग, कैसरबाग और अवध बस स्टेशन से 24 घंटे अतिरिक्त बसें उपलब्ध रहेंगी। इनमें एसी जनरथ बसें भी शामिल होंगी। अभ्यर्थी जनरथ बसों में उपलब्ध सीटों की ऑनलाइन बुकिंग करा सकेंगे। इसके अलावा विभिन्न मार्गों पर अतिरिक्त साधारण बसें भी चलाई जाएंगी।
मुरादाबाद-लखनऊ के बीच चलेंगी परीक्षा स्पेशल ट्रेनें
रेलवे प्रशासन ने PET अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए मुरादाबाद और लखनऊ के बीच विशेष अनारक्षित ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था की है। ट्रेन संख्या 04322 मुरादाबाद से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई और बालामऊ होते हुए शाम 6:10 बजे लखनऊ पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04321 लखनऊ से शाम 7 बजे रवाना होगी और निर्धारित स्टेशनों से गुजरते हुए अगले दिन रात 1:50 बजे मुरादाबाद पहुंचेगी।
रेलवे की प्रकाशित समय-सारणी के अनुसार, इस रूट पर 25 और 30 अक्टूबर तथा 1 नवंबर को विशेष सेवाएं निर्धारित हैं। यात्रा से पहले अभ्यर्थी संबंधित ट्रेन की तारीख और समय की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक जानकारी से कर लें।
गोरखपुर और बरेली रूट पर भी विशेष ट्रेनों की व्यवस्था
परीक्षार्थियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए दूसरे मार्गों पर भी विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। गोरखपुर-लखनऊ रूट पर विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लखनऊ और बरेली के बीच भी परीक्षा स्पेशल ट्रेनें निर्धारित की गई हैं।
इन सेवाओं से विभिन्न जिलों से लखनऊ आने वाले अभ्यर्थियों को आवागमन में मदद मिलेगी। अलग-अलग रूटों पर ट्रेनों की तारीख और समय अलग हो सकते हैं, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले रेलवे की ताजा समय-सारणी जरूर देख लें।
अभ्यर्थी यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय लेकर निकलें।
- बस या ट्रेन की उपलब्धता और प्रस्थान का समय पहले जांच लें।
- ऑनलाइन बुकिंग करते समय यात्रा की तारीख और बस का रूट ध्यान से चुनें।
- परीक्षा के बाद वापसी की यात्रा के लिए भी पहले से योजना बनाएं।
- रोडवेज और रेलवे की अतिरिक्त सेवाओं से PET अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में राहत मिलने की उम्मीद है।
ख़बर बिहार
JDU का बड़ा एक्शन: अनंत सिंह और पत्नी नीलम देवी 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित, विधायकी पर भी संकट

पटना: बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बड़ा कदम उठाते हुए मोकामा से विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी व पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने दोनों की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी किया है। अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने और बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार के विरोध में प्रचार करने के आरोप हैं।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से 24 अक्टूबर को जारी कार्यालय आदेश में यह कार्रवाई की गई। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए बिहार विधानसभा अध्यक्ष से भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की है। हालांकि, विधायक पद पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष की संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अनंत सिंह पर क्यों हुई कार्रवाई?
जदयू के अनुसार, अनंत सिंह पिछले कुछ समय से पार्टी की लाइन से हटकर बयान दे रहे थे। उन पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और संगठन के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है।विवाद की बड़ी वजह बिहार विधान परिषद चुनाव में उनका रुख बताया जा रहा है।
अनंत सिंह ने जदयू के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किया और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया था। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना। इन्हीं आरोपों के आधार पर जदयू ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है।
पत्नी नीलम देवी भी छह साल के लिए निष्कासित
जदयू ने केवल अनंत सिंह पर ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी के कार्यालय आदेश में उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की बात कही गई है।
नीलम देवी पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है। उन्हें भी छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। इसके अलावा, पार्टी ने बाढ़ जिले के जिलाध्यक्ष मयंक राज को भी तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया है। इस कार्रवाई को जदयू के भीतर अनुशासन बनाए रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अनंत सिंह की विधायकी पर भी खतरा
जदयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है। पार्टी ने अपने आदेश में भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया है, जो दल-बदल के आधार पर विधायकों और सांसदों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है।
हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जदयू की अनुशंसा अपने आप अनंत सिंह की विधायकी खत्म नहीं करती। इस पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष को संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और तथ्यों के आधार पर लेना होगा।
अनंत सिंह के समर्थन में आए जदयू के पूर्व MLC वाल्मिकी सिंह
अनंत सिंह को पार्टी से निकाले जाने के बाद जदयू के पूर्व विधान परिषद सदस्य वाल्मिकी सिंह ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का नेतृत्व कर रहे कुछ लोग संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वाल्मिकी सिंह के मुताबिक, जदयू में नीतीश कुमार के समर्थक और निशांत कुमार को आगे बढ़ते देखना चाहने वाले लोगों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। उन्होंने अनंत सिंह के निष्कासन को गलत बताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी कहा कि अनंत सिंह लगातार नीतीश कुमार और निशांत कुमार का नाम लेते रहे हैं। उनके इस बयान से जदयू के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर चल रही खींचतान की चर्चा तेज हो सकती है।
जदयू के फैसले से बिहार की राजनीति में हलचल
अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन के साथ जदयू ने पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा संदेश दिया है। वहीं, अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर कार्रवाई की अनुशंसा ने इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम और अनंत सिंह की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर रहेगी। साथ ही, यह भी देखना होगा कि पार्टी के भीतर इस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल आगे क्या राजनीतिक रूप लेते हैं।
ख़बर बिहार
Siwan Blast: बिहार के सीवान में पटाखा बनाते समय भीषण धमाका, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत

सीवान: बिहार के सीवान जिले के आलमपुर गांव में शुक्रवार शाम पटाखे बनाने के दौरान भीषण विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि मकान का एक हिस्सा ढह गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती रिपोर्टों में 5 मौतों की पुष्टि हुई है। हालांकि राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद मृतकों की अंतिम संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में हुआ धमाका
यह घटना सीवान के जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव की है। रिपोर्टों के मुताबिक, मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे या उनका भंडारण किया गया था। इसी दौरान आग लगने के बाद लगातार विस्फोट होने लगे। धमाकों से मकान को भारी नुकसान पहुंचा और उसका अगला हिस्सा ढह गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब डेढ़ से दो घंटे तक रुक-रुककर धमाकों की आवाज आती रही। घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
पटाखा कारोबारी के परिवार के लोग भी हादसे का शिकार
विस्फोट के शिकार मकान को पटाखा कारोबारी अमीरुद्दीन मियां का बताया जा रहा है। शुरुआती खबरों में उनके परिवार के कई सदस्यों के हादसे का शिकार होने की जानकारी सामने आई है। मृतकों की संख्या और उनकी पहचान को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें प्रकाशित हुईं। ऐसे में अंतिम आंकड़े के लिए प्रशासन की नवीनतम आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है।
धमाके के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश और राहत-बचाव कार्य चलाया गया। लगातार विस्फोट होने के कारण बचाव दल को सावधानी बरतनी पड़ी।
लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की जांच होगी
पुलिस के मुताबिक, हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पटाखा बनाने और भंडारण से जुड़े लाइसेंस की वैधता भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों ने कहा कि जांच में यदि नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नौ महीने पहले भी सीवान में हुआ था पटाखा विस्फोट
सीवान जिले में पटाखा निर्माण से जुड़ा यह पहला हादसा नहीं है। 22 जनवरी 2026 को हुसैनगंज थाना क्षेत्र के बड़रम गांव में पटाखा निर्माण इकाई में विस्फोट हुआ था। उस घटना में 50 वर्षीय मुर्तुजा मंसूरी की मौत हो गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि मकान को भारी नुकसान पहुंचा और मृतक के शरीर के अंग घटनास्थल से दूर मिले थे।
ख़बर उत्तरप्रदेश
UP Liquor Shops Closed: यूपी के 72 जिलों में 23 और 27 अक्टूबर को शराब की दुकानें बंद, जानें वजह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर होने वाले चुनाव के मद्देनजर 23 और 27 अक्टूबर को लखनऊ समेत 72 जिलों में शराब की दुकानें बंद रहेंगी। इन तारीखों पर शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। प्रतिबंध के दायरे में बार, मॉडल शॉप और सैन्य कैंटीन भी शामिल हैं।
लखनऊ के जिलाधिकारी के मुताबिक, यह फैसला चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। ऐसे में शराब की बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों को निर्धारित तारीखों पर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। इन चुनावों में पांच स्नातक खंड और छह शिक्षक खंड की सीटें शामिल हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू की गई है।
प्रशासन ने मतदान और मतगणना के दिन शराब की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना है।
इन तीन जिलों में नहीं रहेगी पाबंदी
कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होने की जानकारी दी गई है। इसलिए इन तीन जिलों में इस चुनाव के कारण मतदान नहीं होगा और शराब की दुकानों को भी बंद नहीं रखा जाएगा। हालांकि, किसी अन्य स्थानीय आदेश या अलग प्रतिबंध की स्थिति में संबंधित प्रशासन के निर्देश लागू होंगे।
विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव
इस चुनाव में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।
स्नातक खंड की पांच सीटें:
- लखनऊ
- वाराणसी
- आगरा
- मेरठ
- इलाहाबाद-झांसी
शिक्षक खंड की छह सीटें:
- लखनऊ
- वाराणसी
- आगरा
- मेरठ
- बरेली-मुरादाबाद
- गोरखपुर-फैजाबाद
इन सीटों पर मतदान के बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। चुनाव परिणामों के साथ विधान परिषद में विभिन्न राजनीतिक दलों और शिक्षक समूहों की स्थिति में बदलाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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