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डेनिस मुकवेगे और नादिया मुराद को मिलेगा 2018 का नोबल शांति पुरस्कार
ओस्लो: नोबेल पुरस्कारों में शुक्रवार को शांति के पुरस्कार की घोषणा की गई। ओस्लो में पांच सदस्यों की कमिटी ने डीआर कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे और नादिया मुराद को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना है। ओस्लो में घोषित किए जाने वाले शांति पुरस्कार के लिए कुल 331 लोगों और संगठनों का नाम मुकाबले में थे। दरअसल, इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाना है, इसलिए शांति पुरस्कार की ही सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी।
कौन हैं डेनिस मुकवेगे और नादिया मुराद ?
डॉक्टर मुकवेगे पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और वह यौन हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। नादिया मुराद की बात करें तो वह इराक के अल्पसंख्यक यजीदी समुदाय से आती हैं। उन्हें इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने अगवा कर सेक्स स्लेव बनाया था। वहां से जान बचाकर निकलने के बाद से वो इस वक्त पूरी दुनिया में महिलाओं को यौन हिंसा के खिलाफ जागरूक करने का काम कर रही हैं।
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Air Pollution: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लाहौर टॉप पर पहुंचा, भारत के 3 शहर भी टॉप-10 में

IQAir: पाकिस्तान के लाहौर में वायु प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय बन गया है। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 410 तक पहुंच गया। इस स्तर पर प्रदूषित हवा स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। रिपोर्ट में भारत के कोलकाता, नई दिल्ली और मुंबई का नाम भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल बताया गया है।
AQI 410 का क्या मतलब है?
एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर और उनसे होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को समझने का एक पैमाना है। AQI का मान जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब मानी जाती है।
IQAir के अमेरिकी AQI पैमाने के अनुसार, 300 से अधिक की रीडिंग ‘खतरनाक’ श्रेणी में आती है। ऐसे हालात में स्वस्थ लोगों को भी परेशानी हो सकती है, जबकि बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए जोखिम अधिक रहता है।
WHO की तय सीमा से 45.2 गुना अधिक PM2.5
रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर में PM2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वार्षिक वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश में निर्धारित सीमा से 45.2 गुना अधिक दर्ज की गई। PM2.5 हवा में मौजूद बेहद महीन कण होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। अपने छोटे आकार के कारण ये कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों, हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।
भारत के तीन शहर भी सूची में शामिल
रिपोर्ट में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की शीर्ष 10 सूची में भारत के तीन शहरों का उल्लेख किया गया है।
कोलकाता: चौथा स्थान
नई दिल्ली: पांचवां स्थान
मुंबई: छठा स्थान
हालांकि, IQAir की लाइव रैंकिंग में शहरों की स्थिति और AQI का स्तर समय के साथ बदलता रहता है। इसलिए इन स्थानों को संबंधित रिपोर्ट के समय के आंकड़ों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
अक्टूबर से फरवरी तक बढ़ती है स्मॉग की समस्या
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हर साल, खासकर अक्टूबर से फरवरी के बीच, स्मॉग की समस्या गंभीर हो जाती है। लाहौर सहित कई इलाकों में धुएं और कोहरे के मिश्रण से दृश्यता प्रभावित होती है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण इस क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वायु गुणवत्ता से जुड़े अधिकारी लोगों को गंभीर स्मॉग के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।
प्रदूषित हवा से बचने के लिए क्या करें?
IQAir की सलाह के मुताबिक, वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
- बाहर दौड़ने, व्यायाम करने और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों से बचें।
- प्रदूषित हवा का प्रवेश कम करने के लिए खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, जब तक घर के अंदर की हवा बाहर से अधिक प्रदूषित न हो।
- जरूरी होने पर बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला, कणों को छानने में सक्षम मास्क पहनें।
- घर के अंदर उपयुक्त एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने दें।
- सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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फ्रांस: महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, गाड़ियों में आगजनी; 1,200 गिरफ्तार

पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को देशभर में बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति भवन एलिजे पैलेस के पास प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल में आग लगा दी। बताया गया है कि आग से 143 साल पुरानी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना रहा।
चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:
- वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी
- महंगाई पर नियंत्रण
- सरकारी सेवाओं में सुधार
स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना और जर्जर इमारतों की मरम्मत
स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला
रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के लाइसी सेंट-एक्सूपेरी स्कूल के छात्रों के विरोध से हुई थी। छात्रों ने शिक्षकों और संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। 29 सितंबर को प्रशासन की ओर से अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक दूसरे स्कूलों में भी विरोध शुरू हो चुका था।
इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और मजदूर संगठन भी आंदोलन से जुड़ गए। 5 अक्टूबर को लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक ग्रेनेड से 15 वर्षीय लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसका एक हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ गई।
दुकानों में लूटपाट और आगजनी के आरोप
प्रदर्शन के दौरान कई शहरों में दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आने की बात कही गई है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समूहों ने नकाब पहनकर और दस्ताने लगाकर दुकानों को निशाना बनाया। आरोप है कि कुछ जगहों पर सुरक्षा कैमरों के कनेक्शन काटने के बाद दुकानों में घुसकर सामान लूटा गया।
मैक्रों ने दी कार्रवाई की चेतावनी
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी इमारतों और कारोबारों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा और कानून के तहत सजा दी जाएगी।
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हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन का दावा- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका से मिल रही फंडिंग

Mary Millben: हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। मिलबेन के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है।
मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’
अमेरिकी डोनर्स पर लगाया आरोप
मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर्स दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक तय तरीका अपनाते हैं। उनके आरोप के मुताबिक, ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति की पहचान करते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं और फिर अपने देश लौटने के बाद अराजकता फैलाने के लिए फंडिंग देते हैं।
पीएम मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मिलबेन?
मैरी मिलबेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह करीब 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी अमेरिका से आने वाली ऐसी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन के बयान के बाद इस कथित फंडिंग और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े दावों पर चर्चा शुरू हो गई है।
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अजरबैजान के स्कूलों में हिजाब पर विवाद, छात्राओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार

अजरबैजान: स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर अजरबैजान में विवाद शुरू हो गया है। सरकार के नए नियमों के बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोकने की खबरें सामने आई हैं। इसके विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। विवाद का असर पड़ोसी देश तुर्किये तक भी पहुंच गया है।
अजरबैजान की करीब 96% आबादी मुस्लिम है। इसके बावजूद देश का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है। ऐसे में स्कूलों में धार्मिक पहनावे को लेकर नए नियमों ने धार्मिक स्वतंत्रता और समान ड्रेस कोड की बहस को तेज कर दिया है।
हिजाब का नाम लेकर रोक नहीं, ड्रेस कोड में बदलाव
सरकार का कहना है कि स्कूलों में सभी विद्यार्थियों के लिए एक जैसा ड्रेस कोड होना चाहिए। इसी उद्देश्य से यूनिफॉर्म से जुड़े नियम बदले गए हैं। नए नियमों में हिजाब का सीधे नाम लेकर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है, लेकिन सरकार जिन कपड़ों को धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के खिलाफ मानती है, उन पर रोक लगाई गई है।
सरकार के अनुसार, देश की संस्कृति और राष्ट्रीय परंपराओं से जुड़े कपड़े विशेष अवसरों पर पहने जा सकते हैं। इसके लिए स्कूल की संबंधित समिति से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
कम से कम दो स्कूलों में कक्षाओं का बहिष्कार
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, नए नियमों के विरोध में कम से कम दो स्कूलों में विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में स्कूल में प्रवेश से रोके जाने के बाद छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती और रोती दिखाई दे रही हैं।
96% मुस्लिम आबादी, फिर भी धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था
अजरबैजान में अधिकांश आबादी मुस्लिम है। इनमें शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम भी बड़ी संख्या में रहते हैं। हालांकि, देश की संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष है और नागरिकों को धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्राप्त है।अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि स्कूलों में समान ड्रेस कोड लागू करने और विद्यार्थियों की धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार समान नियमों पर जोर दे रही है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है।
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Saudi Arabia: रियाद एयरपोर्ट पर हमले में भारतीय समेत 13 की मौत, 309 घायल

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमले को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर को हुए हमले में एक भारतीय समेत 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद रियाद एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन रोकने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 को भी निशाना बनाया गया। इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत होने का दावा है।
रविवार को घरेलू उड़ानों के टर्मिनल पर भी हमला
सऊदी अरब की नागरिक उड्डयन एजेंसी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 पर एक और हमला हुआ। इन टर्मिनलों से घरेलू उड़ानें संचालित होती हैं। इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। इससे पहले 10 अक्टूबर को हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई थी। रविवार को घायल भारतीय नागरिक की मौत के बाद पहले हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
एयर इंडिया समेत कई एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं
हमलों के बाद रियाद एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित हुआ। खबरों के मुताबिक, एयर इंडिया, फ्लाईदुबई, लुफ्थांसा समूह और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस समेत कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के लिए उड़ानों पर रोक लगाई या उनमें बदलाव किया। यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने, जरूरत पड़ने पर घर के अंदर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।
एक हफ्ते में रियाद एयरपोर्ट पर कई हमले
रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के पहले सप्ताह में भी रियाद एयरपोर्ट पर हमले हुए थे। 8 अक्टूबर को हुए हमलों में एक सऊदी पायलट समेत तीन लोगों की मौत हुई थी। 10 अक्टूबर का हमला इस श्रृंखला की सबसे घातक घटना बताया गया।
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच संघर्ष बढ़ने के साथ हवाई अड्डों और अन्य ठिकानों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। हूती विद्रोहियों ने अपने हमलों को यमन के संघर्ष में सऊदी अरब की भूमिका से जोड़ा है।
यमन की राजधानी सना पर भी हमले का दावा
हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले मीडिया ने रविवार को दावा किया कि सऊदी अरब के विमानों ने यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमला किया। हूती-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिहायशी इमारत पर हमले में एक बच्चे की मौत होने की बात भी कही। मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही के मुताबिक, 3 सितंबर से सऊदी हवाई हमलों में 91 लोगों की मौत हुई है।
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