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Vikas Parv: सिवनी बनेगा नगर निगम, धनौरा में खुलेगा कॉलेज, मुख्यमंत्री शिवराज ने की घोषणा

Vikas Parv: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज सिवनी जिले में विकास पर्व में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 287 करोड़ 48 लाख 39 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमि-पूजन/लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि जनता की जिंदगी बदलना और प्रदेश का विकास हमारी सरकार का मकसद है। प्रदेश में विकास पर्व मनाया जा रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर विकास कार्यों का लोकार्पण/भूमि-पूजन के साथ ही जनता को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जन-दर्शन के दौरान, मुझे एक बुजुर्ग अम्मा मिली, जिनका मकान टूट गया था। मैंने तुरंत उनको मकान बनाने के लिये स्वेच्छानुदान से ढाई लाख रुपए स्वीकृत किए। मैं किसी बहन की आंखों में आंसू नहीं रहने दूंगा, यह मेरा संकल्प है।
https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1681630790348861440?s=20
सिवनी में मुख्यमंत्री की घोषणाएं
सिवनी नगर को नगर निगम बनाया जाएगा
कुरई में महाविद्यालय भवन बनाया जाएगा।
नगर के मठ स्कूल का नवीन भवन बनेगा।
नहरों को पक्का किया जाएगा।
मंडी जलाशय में नहर का विस्तार कराया जाएगा।
पावर ग्रिड हाउस तक सड़क निर्माण होगा।
धनौरा में कॉलेज खोला जाएगा।
इन विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन/लोकार्पण
| मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा सिवनी जिले में भूमि-पूजन/लोकार्पण | ||
| कार्य का नाम | लागत (लाख में) | रिमार्क |
| सीएम राईज स्कूल धनौरा | 3276.04 | भूमि-पूजन |
| सीएम राईज स्कूल मुर्गहाई | 2860.49 | भूमि-पूजन |
| क्रिटिकल केयर हेल्थ यूनिट सिवनी | 1663.00 | भूमि-पूजन |
| माल्हनवाड़ा से खैरलांजी मार्ग लं. 17 किमी | 940.32 | भूमि-पूजन |
| सिवनी-मण्डला (लोपा) से परासपानी मार्ग लं. 8.542 किमी | 287.22 | भूमि-पूजन |
| सिवनी-मण्डला (लोपा) से पलारी मार्ग लं. 3.88 किमी | 112.58 | भूमि-पूजन |
| 06 बिस्तरीय प्राथ. स्वा. केन्द्र बगहाई का निर्माण कार्य | 184.71 | भूमि-पूजन |
| अमृत 2.0 के अंतर्गत सिवनी जलार्वधन योजना निर्माण एवं विस्तार कार्य | 5328.00 | भूमि-पूजन |
| दल सागर तालाब में फाउंटेन लाईट एवं साउंड सिस्टम कार्य | 744.75 | भूमि-पूजन |
| सिवनी शहर से गुजरने वाले पुराने एनएच-07 पर 630 मी. रेल्वे ओवर ब्रिज तथा 12.67 किमी की लंबाई टू लेन के स्थान पर फोरलेन | 12621.00 | भूमि-पूजन |
| अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय भवन, बरघाट | 115.50 | लोकार्पण |
| शासकीय महाविद्यालय बरघाट में 06 अतिरिक्त कक्ष | 353.09 | लोकार्पण |
| ग्राम ग्वारी (लखनादौन) प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन एवं आवास गृह | 131.69 | लोकार्पण |
| सिवनी नगरीय क्षेत्र के पाँच प्रमुख सड़कों का डामरीकरण कार्य | 130.00 | लोकार्पण |
| कुल | 28748.39 | |
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MP Weather: प्रदेश में दो सिस्टम एक्टिव, 30+ जिलों में बारिश-ओले, ग्वालियर में ढाई इंच पानी, फसलों को नुकसान

Bhopal: मध्य प्रदेश में दो मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। बीते 24 घंटे में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर समेत 30 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश ग्वालियर में ढाई इंच हुई, जबकि 8 जिलों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। इससे गेहूं, चना और सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम, खंडवा, बड़वानी, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, रीवा, सतना, टीकमगढ़, छतरपुर, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा, देवास, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, खरगोन, सीहोर, सागर, मऊगंज, धार सहित कई जिलों में बारिश का दौर रहा।
ग्वालियर में सबसे ज्यादा ढाई इंच, गुना, शिवपुरी और सागर में करीब 1 इंच, दतिया में पौन इंच और राजगढ़ में आधा इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, मुरैना, सीहोर, सागर, रायसेन सहित कई जिलों में ओले भी गिरे।
बारिश और ओलावृष्टि के बीच बुधवार सुबह घना कोहरा भी छाया रहा। ग्वालियर में सबसे कम विजिबिलिटी दर्ज की गई, जहां 50 मीटर के बाद कुछ नजर नहीं आया। इसके अलावा खजुराहो, भोपाल, दतिया, नर्मदापुरम, नौगांव, रीवा, सतना, राजगढ़, सागर, गुना, रायसेन, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सिवनी, मंडला, छिंदवाड़ा, दमोह और जबलपुर में भी कोहरा दर्ज किया गया। हालांकि, रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
ग्वालियर-शिवपुरी में स्कूलों की छुट्टी
बारिश और ठंड को देखते हुए ग्वालियर प्रशासन ने बुधवार को कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। भोपाल और इंदौर में मंगलवार को गरज-चमक के साथ बारिश हुई, जबकि ग्वालियर में लगातार बारिश के चलते ठंड बढ़ गई।
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MP News: 5-डे वीक की मांग पर मध्य प्रदेश में बैंककर्मियों की हड़ताल, 40 हजार कर्मचारी रहेंगे बाहर, 7 हजार से ज्यादा ब्रांच बंद

Bhopal: पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर बैंककर्मियों की हड़ताल रहेगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी और अधिकारी कामकाज से दूर रहेंगे। इसका असर 7 हजार से अधिक बैंक शाखाओं पर पड़ेगा और करोड़ों रुपये के दैनिक लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं।
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बैंकों पर ताले लटके नजर आ सकते हैं। हड़ताल के चलते चेक क्लियरेंस, कैश ट्रांजैक्शन और अन्य बैंकिंग सेवाएं बाधित रहेंगी। इसके अलावा कई जगहों पर एटीएम में नकदी की कमी की स्थिति भी बन सकती है।
इन बैंकों में कामकाज रहेगा ठप
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, हड़ताल में सरकारी क्षेत्र की 12 प्रमुख बैंकें शामिल होंगी। इनमें
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ निजी क्षेत्र की बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हो सकता है।
सिर्फ एक मांग, लेकिन लंबे समय से लंबित
बैंककर्मियों की प्रमुख मांग है कि बैंकिंग सेक्टर में भी पूरी तरह 5-डे वीक सिस्टम लागू किया जाए और मौजूदा व्यवस्था के तहत केवल दूसरे व चौथे शनिवार की जगह सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस मध्य प्रदेश के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि देशभर में करीब 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल में शामिल होंगे, जिनमें एमपी के लगभग 40 हजार कर्मचारी हैं।
2015 से चल रही है मांग
शर्मा के अनुसार, वर्ष 2015 में 10वें द्विपक्षीय समझौते/7वें जॉइंट नोट के दौरान इस मांग पर सहमति बनी थी। उस समय दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया और बाकी शनिवारों को पूरा कार्य दिवस बनाया गया था। साथ ही भविष्य में सभी शनिवारों को अवकाश देने पर विचार का आश्वासन भी दिया गया था।
2023 में बनी सहमति, फिर भी मंजूरी नहीं
साल 2023 में हुई बातचीत में यह सहमति बनी कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य समय बढ़ाकर शेष शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से मंजूरी लंबित है। सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं आने के कारण बैंक यूनियनों ने एक बार फिर हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
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Ujjain: तराना हिंसा के तीन दिन बाद हालात सामान्य, 25 उपद्रवी गिरफ्तार, रासुका के तहत सख्त कार्रवाई

Ujjain: तराना में बजरंग दल के नगर मंत्री सोहिल ठाकुर पर हमले के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा पर काबू पाने में पुलिस-प्रशासन को करीब तीन दिन का समय लग गया। शनिवार को स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन ने शहर में शांति बहाल होने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक 25 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसा फैलाने और माहौल बिगाड़ने में शामिल आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
72 घंटे तक बेकाबू रहे हालात, आगजनी और पथराव
22 जनवरी, गुरुवार रात से तराना में हालात बिगड़ने लगे थे। उपद्रवियों ने शहर में जमकर तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की। इस दौरान 12 बसें, 10 से अधिक कारें, कई बाइकें क्षतिग्रस्त कर दी गईं। इसके अलावा एक दुकान, एक बस और एक आरामशीन टाल को आग के हवाले कर दिया गया। कई घरों पर पथराव हुआ। करीब 72 घंटे बाद शनिवार को स्थिति पूरी तरह शांत हुई।
CCTV फुटेज से पहचान, रातभर चला सर्च ऑपरेशन
पुलिस ने हालात काबू में आने के बाद रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया। CCTV फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बलराम जोशी मार्ग पर घरों में की गई तोड़फोड़ और पथराव को लेकर एक और एफआईआर दर्ज की गई है। स्थानीय निवासी शक्तिबाला जोशी की शिकायत पर छह से अधिक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि अन्य चिन्हित आरोपियों की तलाश जारी है।
लाखों का नुकसान, व्यापार प्रभावित
हिंसा की घटनाओं से तराना के रहवासी दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि दो गुटों की आपसी रंजिश में पूरा नगर हिंसा की चपेट में आ गया। बसों और कारों में हुई तोड़फोड़ से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। तीन दिन बाद बाजार तो खुले, लेकिन सामान्य रौनक नहीं लौट पाई। शाम को हिंदुवादी संगठनों ने थाने पहुंचकर कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठाए।
शांति और सौहार्द की अपील
घटना के बाद शहर काजी ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। विधायक महेश परमार ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमन-चैन और भाईचारे की अपील की। पूर्व भाजपा विधायक ताराचंद गोयल ने प्रशासन पर भरोसा जताया। वहीं, तिलभांडेश्वर मंदिर के महंत मोहन भारती महाराज (जूना अखाड़ा) ने तराना की पुरानी परंपरा—शांति, सामंजस्य और सद्भाव—को याद दिलाते हुए संयम बरतने का संदेश दिया।
एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा, ‘बाजार खुल चुके हैं। CCTV फुटेज के आधार पर 25 उपद्रवी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं और माहौल खराब करने में उनकी भूमिका सामने आई है। रासुका के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।’
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Dhar: भोजशाला में बसंत पंचमी पर साथ-साथ पूजा और नमाज, 8 हजार जवानों की तैनाती

Dhar: मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा और जुमे की नमाज साथ-साथ कराई गई। सुबह 6 बजे सूर्योदय के साथ हिंदू समाज ने सरस्वती पूजन शुरू किया, जो सूर्यास्त तक चला। वहीं, दोपहर 1 से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर में ही मुस्लिम समाज ने जुमे की नमाज अदा की। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। भोजशाला परिसर को 6 सेक्टर, जबकि पूरे शहर को 7 जोन में बांटा गया था।
स्थानीय पुलिस के साथ सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के 8 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए ड्रोन और एआई तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।
नमाज को लेकर दो अलग-अलग दावे
नमाज को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज ने शांतिपूर्वक नमाज अदा की। वहीं, गुलमोहर कॉलोनी के रहवासियों का आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर रोशनी पाटीदार और डीएसपी आनंद तिवारी ने उन्हें और उनके साथियों को 16 घंटे तक कमाल मौला मस्जिद में रोके रखा, लेकिन उनसे नमाज नहीं पढ़वाई गई। उनका दावा है कि पीछे की ओर कुछ लोगों से नमाज पढ़वाकर वीडियो बनाया गया।
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भोजशाला विवाद: बसंत पंचमी पर पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई

Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का अधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन की ओर से दायर की गई है, जो इससे पहले अयोध्या राम जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी–श्रृंगारगौरी मामलों में भी याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर चुके हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में केवल एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष पर्व है, जबकि जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में करीब 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय उस दिन अन्य मस्जिदों में नमाज अदा कर सकता है।
हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसे देखते हुए धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और शहर में करीब 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी हवाला दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
याचिका में 2013 और 2016 के उदाहरण भी पेश किए गए हैं, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना वहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के विपरीत है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
भोजशाला विवाद को करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (वर्तमान धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के दौरान हुआ था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर लंबे समय से अधिकार की मांग करते आ रहे हैं।
धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का एकाधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। यह अर्जी एडवोकेट विष्णुशंकर जैन की ओर से दाखिल की गई है, जो अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद व काशी ज्ञानवापी-श्रृंगारगौरी केस में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर चुके हैं।
बता दें कि हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसको लेकर धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च निकाल रही है। धार शहर में 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात कर दिए गए हैं।
तर्क- नमाज के लिए साल में 50 शुक्रवार, 25 मस्जिदें, पूजा के लिए साल में 1 दिन, 1 स्थल
अर्जी में कहा गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष दिन है। जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष में लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। इसी आधार पर मांग की गई है कि बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के सदस्य अन्य मस्जिदों में नमाज़ अदा कर सकते हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
अर्जी में 2013 और 2016 के उदाहरण भी दिए गए हैं। वर्ष 2013 में 15 फरवरी और 2016 में 12 फरवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी थी। याचिका के अनुसार, उन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना यहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के खिलाफ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
700 साल पुराना विवाद : भोजशाला विवाद करीब 700 साल पुराना है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (अब धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत काल में हुआ। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर अधिकार की मांग करते रहे हैं।
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