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Telecom Bill 2023: फर्जी सिम खरीदी या बेची तो होगी जेल, लगेगा लाखों का जुर्माना

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Telecom Bill 2023: If you buy or sell fake SIM, you will face jail, fine of lakhs

Telecom Bill 2023: लोकसभा में बुधवार को पास होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी टेलीकॉम बिल 2023 पास हो गया। ये बिल 138 साल पुराने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम को रिप्लेस करेगा। नए बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही ये कानून की शक्ल ले लेगा। जिसके बाद सिम कार्ड बेचने और खरीदने पर नए नियम लागू हो गए हैं। अब अगर कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है तो उसपर लाखों का जुर्माना और कई साल की सजा का प्रावधान है।

टेलीकॉम बिल 2023 में क्या है?

नए बिल के तहत यदि कोई व्यक्ति टेलीकॉम गैजेट्स जैसे मोबाइल, सिमकार्ड, WiFi आदि के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है या इस तरह के कार्य में लिप्त पाया जाता है, तो उसे 3 साल की सजा या 2 करोड़ का फाइन भरना होगा या उसे दोनों सजा भी दी जा सकती हैं। यदि टेलीकॉम ऑपरेटर को कोई नुकसान होता है तो 50 लाख का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके साथ ही सरकारी अधिकारी और सरकार के पास ये अधिकार होगा, कि वे संबंधित व्यक्ति के कनेक्शन को टैप और जरूरत पड़ने पर हमेशा के लिए रद्द भी कर सकते हैं।

फर्जी सिम लेने पर लगेगा 50 हजार जुर्माना

नए कानून के लागू होने के बाद अगर कोई व्यक्ति फर्जी आईडी से सिमकार्ड लेता है तो उसे 3 साल की सजा और 50 हजार का जुर्माना भरना पड़ सकता है। या ये दोनों सजाएं भी उसे मिल सकती हैं। सिम कार्ड बेचने वाले दुकानदारों के लिए वेरिफिकेशन जरूरी है। इसके बिना वे अब कोई भी सिम नहीं बेच पाएंगे। साथ ही ग्राहकों का भी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अब मेंडेटरी है।

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बिना अनुमति प्रमोशनल मैसेज भेजना अपराध

नए बिल के तहत अब आपको प्रमोशनल मैसेज भेजने से पहले कंपनियों को आपकी अनुमति लेनी होगी। यदि बिना परमिशन के आपको कॉल की जाती है तो 2 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि जनहित के मैसेज भेजने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को आपकी परमिशन नहीं लेनी पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति किसी सिम को गलत तरीके से क्लोन करता है, यानि उसी सिम को अपने नाम पर इशू करता है तो ये भी एक क्राइम में गिना जाएगा।

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Defence News: सेना के लिए ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी, 82% खरीद भारत से होगी

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राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में DAC द्वारा ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रस्तावों के तहत होने वाली कुल खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से लिया जाएगा।

इस फैसले से स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता, निगरानी, मारक क्षमता और हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावों में आधुनिक तोप प्रणाली, हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, निगरानी उपकरण और नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

सेना को मिलेंगे आधुनिक गन सिस्टम, ड्रोन और एयर डिफेंस उपकरण

भारतीय थल सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इनमें हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम, गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम (GSRS), लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (LMRH) और वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) शामिल हैं।

इसके अलावा, प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS), लंबी दूरी के अनमैन्ड एरियल सिस्टम, सर्विलांस UAVs, इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम और लॉन्ग-रेंज कामिकेज ड्रोन सिस्टम की खरीद के प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है।

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दुर्गम इलाकों में सेना की आवाजाही होगी बेहतर

हाई मोबिलिटी व्हीकल्स से कठिन और दुर्गम इलाकों में सेना की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और अन्य परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम मैकेनाइज्ड सैन्य टुकड़ियों को बेहतर गतिशीलता और मारक क्षमता प्रदान करेगा।

गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम सैनिकों को गोलीबारी से जुड़ी स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इससे युद्धक्षेत्र में खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

हेलीकॉप्टर और ड्रोन से बढ़ेगी निगरानी क्षमता

लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टोही, निगरानी, युद्धक गतिविधियों, खोज एवं बचाव तथा आपदा राहत जैसे कार्यों में किया जाएगा। इनका उपयोग भारतीय सेना और वायुसेना दोनों की जरूरतों के लिए प्रस्तावित है।

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VSHORADS से नई पीढ़ी के छोटे हवाई खतरों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। वहीं, काउंटर-ड्रोन सिस्टम आधुनिक युद्धक्षेत्र में टैंकों की सुरक्षा और उनकी परिचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किया गया है।

लंबी दूरी के ड्रोन, निगरानी UAVs और इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, लक्ष्यों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई करने की क्षमता मजबूत होगी।

नौसेना को मिलेगा एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम

भारतीय नौसेना के लिए एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS) और अन्य प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।

AODS नौसेना के जहाजों की मिसाइल-रोधी सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा। खासकर आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से पैदा होने वाले खतरे के खिलाफ यह प्रणाली उपयोगी होगी।

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नौसेना के लिए प्रस्तावित अन्य प्लेटफॉर्म स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किए जाएंगे। इनसे नौसेना की युद्धक क्षमता और आधुनिक समुद्री अभियानों के लिए तैयारी को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, हथियार और मौसम रडार

भारतीय वायुसेना के लिए हेलीकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार और मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है।

स्पेशल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर वायुसेना की महत्वपूर्ण हवाई परिवहन जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे। वहीं, नए एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों से वायु रक्षा तथा युद्धक क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य है।

मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार अग्रिम क्षेत्रों में स्थानीय मौसम की उच्च-रिजॉल्यूशन निगरानी उपलब्ध कराएगा। इससे परिचालन क्षेत्रों में मौसम संबंधी स्थितियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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रक्षा खरीद का 82% हिस्सा भारतीय उद्योग से

इस फैसले की अहम विशेषता घरेलू रक्षा उद्योग को प्राथमिकता देना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वीकृत प्रस्तावों के तहत होने वाली खरीद का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योग से प्राप्त किया जाएगा। इससे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, तकनीकी विकास और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, तीनों सेनाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस करने और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयारियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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Operation Trident: ड्रग कार्टेल पर बड़ा प्रहार, 18 गिरफ्तार; 1,424 बैंक खाते फ्रीज

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Operation Trident, ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर छापेमारी। 18 गिरफ्तार, 1,424 बैंक खाते फ्रीज और ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का खुलासा।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन ट्राइडेंट की सराहना की है। इस कार्रवाई के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। एजेंसियों के मुताबिक, अभियान में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि ड्रग तस्करी और हवाला नेटवर्क से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है।

अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कार्रवाई की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत ड्रग कार्टेल के खिलाफ तब तक कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा, जब तक इन नेटवर्कों को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।

₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का खुलासा

ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान जांच एजेंसियों को करीब ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन से जुड़े सुराग मिले। कार्रवाई में ₹17.82 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गईं। इसके अलावा, 500 डेटोनेटर और ₹12 लाख नकद भी जब्त किए गए।

जांच का फोकस केवल नशीले पदार्थों की तस्करी पर ही नहीं, बल्कि इस अवैध कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और धन के लेनदेन को तोड़ने पर भी रहा।

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तीन राज्यों में 38 ठिकानों पर छापेमारी

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस ने समन्वय के साथ कार्रवाई की। छापेमारी असम, मिजोरम और मणिपुर में की गई।

एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच सक्रिय था और सीमापार नशीले पदार्थों की तस्करी के साथ हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन करता था। अमित शाह ने इस तस्करी मार्ग को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ बताया।

31 दिसंबर 2029 तक ड्रग नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि ऑपरेशन ट्राइडेंट सरकार के उस संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत 31 दिसंबर 2029 तक देश में सक्रिय हर ड्रग नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अभियान में शामिल केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस टीमों को बधाई दी। इस कार्रवाई को नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर एक साथ प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

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India-China Tension: अरुणाचल में चीनी सैनिकों से टकराव जारी, ITBP ड्रोन पर खर्च करेगी ₹1,000 करोड़

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और कुछ जगहों पर स्थिति अब भी जारी है।

राजस्थान के अलवर स्थित ITBP के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने सीमा पर आधुनिक तकनीक और बेहतर युद्ध क्षमता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि फोर्स सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बना चुकी है। इसके साथ ही ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और अपने ड्रोन विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

अरुणाचल में कई जगह आमने-सामने आए भारतीय और चीनी सैनिक

ITBP DG के मुताबिक, हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आए। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर स्थिति अब भी बनी हुई है। उन्होंने सीमा पर तैनात ITBP की शौर्य कमांडो टीमों के काम की भी सराहना की।

रिपोर्टों के मुताबिक, ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत भी हुई थी। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाएं होने के कारण समय-समय पर इस तरह की स्थितियां बनती रही हैं।

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ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च होंगे ₹1,000 करोड़

ITBP अपनी सैन्य क्षमता के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही है। कपूर ने बताया कि करीब ₹4,000 करोड़ की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। इसमें से लगभग ₹1,000 करोड़ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इसके अलावा, मौजूदा ₹400 करोड़ की आधुनिकीकरण योजना में भी करीब 70% राशि ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर खर्च की जा रही है। कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाना जरूरी है।

हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून

ITBP ने अपनी सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून स्थापित की हैं। फोर्स ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित कर रही है और घरेलू स्तर पर ड्रोन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।

ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, दुर्गम क्षेत्रों की जानकारी जुटाने और सीमा पर गतिविधियों पर नजर रखने में किया जा सकता है। वहीं, एंटी-ड्रोन सिस्टम संभावित दुश्मन ड्रोन से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।

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LAC पर बनाए जा रहे भूमिगत शेल्टर

ITBP सीमा चौकियों पर जवानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए भूमिगत ढांचे विकसित कर रही है। कपूर के अनुसार, आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर मौजूद जवानों और इमारतों को निशाना बनाए जाने का खतरा बढ़ गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सीमा चौकियों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत संरचनाएं बनाई जा रही हैं। योजना है कि इनके सफल होने पर इन्हें स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए।

गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ कोर्स

ITBP ने जवानों को आधुनिक युद्ध कौशल और नई रणनीतियों का प्रशिक्षण देने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष कोर्स शुरू किया है। इसका उद्देश्य जवानों को गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।

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फोर्स ने 2027 के अंत तक सभी जवानों को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, प्रत्येक बटालियन में शौर्य कमांडो टीम विकसित करने की योजना भी है।

कपूर ने बताया कि ITBP अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान दे रही है।

31 अक्टूबर को रिटायर होंगे ITBP DG

शत्रुजीत सिंह कपूर 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। रिटायरमेंट से पहले दिए गए उनके इस बयान में अरुणाचल प्रदेश में जारी सीमा तनाव और ITBP की तैयारियों पर विशेष जोर रहा।

ITBP भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। फोर्स का आधुनिकीकरण, ड्रोन क्षमता का विस्तार और जवानों के लिए विशेष प्रशिक्षण सीमा पर बदलती परिस्थितियों से निपटने की व्यापक तैयारी का हिस्सा हैं।

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WhatsApp New Rule: 1 जनवरी 2027 से बदल सकता है WhatsApp चलाने का तरीका, फोन में SIM रखना होगा जरूरी

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नई दिल्ली: WhatsApp और Telegram इस्तेमाल करने वालों के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव हो सकता है। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग ऐप्स पर सिम-बाइंडिंग लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और भारतीय मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

सरकार ने ऐप कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। इसके बाद 1 जनवरी 2027 से नए नियम लागू होने की संभावना है। हालांकि, यूजर्स को होने वाले वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि संबंधित ऐप इन्हें किस तरह लागू करते हैं।

क्या है SIM Binding Rule?

सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप को उस सक्रिय सिम कार्ड से लगातार जुड़ा रहना होगा, जिसका मोबाइल नंबर अकाउंट की पहचान या सेवा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने Jio नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, तो नए नियम के तहत उस नंबर का सक्रिय सिम संबंधित फोन में मौजूद रखना जरूरी होगा। केवल एक बार OTP डालकर अकाउंट चालू कर लेना पर्याप्त नहीं होगा, यदि ऐप को बाद में भी सिम की मौजूदगी सत्यापित करनी है।

दूरसंचार विभाग के अनुसार, कुछ मैसेजिंग ऐप्स में सिम निकालने या दूसरे डिवाइस में स्थानांतरित करने के बाद भी अकाउंट चलता रहता है। इस सुविधा का इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। सिम-बाइंडिंग के जरिए मोबाइल नंबर, सिम और ऐप के बीच संबंध बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

नए नियम का असर खासकर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिम किसी दूसरे फोन में रखते हैं और WhatsApp किसी अन्य डिवाइस पर चलाते हैं।

फोन में सिम रखने वाले यूजर्स: अगर रजिस्टर्ड नंबर का सक्रिय सिम उसी फोन में है, जहां ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है, तो सामान्य तौर पर उन्हें कम बदलाव महसूस हो सकता है।

अलग फोन पर WhatsApp चलाने वाले यूजर्स: अगर सिम एक फोन में और WhatsApp दूसरे फोन में है, तो ऐप के नियम लागू होने के बाद परेशानी हो सकती है।

बिना सिम वाले डिवाइस: केवल Wi-Fi से जुड़े ऐसे फोन या डिवाइस पर ऐप चलाने में दिक्कत आ सकती है, जिनमें रजिस्टर्ड नंबर का सिम मौजूद नहीं है।

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दूसरे डिवाइस से जुड़े अकाउंट: WhatsApp के लिंक्ड डिवाइस और अन्य माध्यमों पर नियम किस तरह लागू होंगे, यह संबंधित ऐप के अंतिम तकनीकी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

यह नियम केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है। दूरसंचार विभाग के निर्देशों में Telegram, Signal और अन्य ऐप-आधारित संचार सेवाओं को भी शामिल किया गया है।

क्या WhatsApp Web हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा?

इस मामले में पहले छह घंटे में अनिवार्य लॉगआउट की शर्त रखी गई थी। हालांकि, बाद में सरकार ने इस व्यवस्था को बदल दिया। अब WhatsApp Web और संबंधित वेब सेशन के लिए जोखिम-आधारित लॉगआउट व्यवस्था अपनाई गई है। इसका मतलब है कि संदिग्ध गतिविधि या संभावित धोखाधड़ी की स्थिति में सेशन को लॉगआउट किया जा सकता है। सरकार ने इसके लिए हर छह घंटे की कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं की है।

सरकार क्यों लागू कर रही है सिम-बाइंडिंग?

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दूरसंचार विभाग का कहना है कि साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, पहचान की नकल और निवेश से जुड़े फ्रॉड करते हैं। कुछ मामलों में सिम हटाने के बाद भी मैसेजिंग अकाउंट सक्रिय रहने से अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

सिम-बाइंडिंग का उद्देश्य अकाउंट और संबंधित सक्रिय सिम के बीच संबंध बनाए रखना है, ताकि मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग को रोकने और संदिग्ध गतिविधियों की जांच में मदद मिल सके।

यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए?

फिलहाल यूजर्स को घबराने या अपना WhatsApp अकाउंट हटाने की जरूरत नहीं है। इन बातों का ध्यान रखें:

  • अपने WhatsApp अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर का सिम सक्रिय रखें।
  • यदि आप WhatsApp किसी दूसरे फोन पर चलाते हैं, तो ऐप के आधिकारिक अपडेट और निर्देशों पर नजर रखें।
  • WhatsApp Web और लिंक्ड डिवाइस से जुड़े नए नियमों की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से लें।
  • किसी अनजान व्यक्ति को OTP या अकाउंट सत्यापन कोड न बताएं।
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Netanyahu Modi Call: नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया इस्राइल आने का न्योता, स्मित मच्छार के साथ जलाएंगे मशाल

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नई दिल्ली: इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को भी मिला न्योता, जिन्होंने विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की और उन्हें इस्राइल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। नेतन्याहू ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पोस्ट हिंदी में लिखी।

नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ-साथ भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को भी समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। कैप्टन मच्छार ने फ्लाईदुबई की एक उड़ान में संकट के दौरान 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

नेतन्याहू ने पीएम मोदी को क्या निमंत्रण दिया?

नेतन्याहू ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि वे उन्हें इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इस समारोह में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।

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नेतन्याहू ने पायलट के साहस की सराहना करते हुए उन्हें भारत, इस्राइल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करना इस्राइल के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

नेतन्याहू की पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निमंत्रण के लिए उनका धन्यवाद किया। बातचीत के दौरान मोदी ने भारत और इस्राइल के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देश जमीन और हवा, दोनों जगह आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और दोस्ती की भी सराहना की।

कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?

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कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के भारतीय पायलट हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में कॉकपिट के भीतर सह-पायलट के हमले की घटना हुई थी। हमले में कैप्टन मच्छार घायल हो गए थे। गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मदद के लिए अलर्ट करने और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

विमान में कुल 174 लोग सवार थे और बाद में इसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया।इस घटना के बाद पूरी दुनिया में कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना हुई। नेतन्याहू का उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करना इसी साहस के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-इस्राइल संबंधों के लिहाज से भी अहम बातचीत

नेतन्याहू और मोदी के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन स्मित मच्छार को आमंत्रित करने की घोषणा ने इस बातचीत को खास बना दिया है।

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