ख़बर छत्तीसगढ़
राज्य सरकार ने स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी की, जाने जिला और राज्य स्तर पर कब तक हो सकेंगे ट्रांसफर

Chhattisgarh Transfer Policy Year 2022: राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी कर दी है। इस आशय का आदेश शुक्रवार 12 अगस्त को मंत्रालय महानदी भवन स्थित सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। जारी स्थानांतरण नीति के अनुसार 16 अगस्त, 2022 से 10 सितंबर 2022 तक जिला स्तर के तृतीय श्रेणी तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के माननीय प्रभारी मंत्रीजी के अनुमोदन से कलेक्टर द्वारा किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त स्थानांतरण आदेश तदानुसार प्रसारित होंगे।
- कलेक्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण किये जाने वाला पद जिला संवर्ग का है तथा स्थानांतरण करने का अधिकार जिला स्तर पर है। स्थानांतरण प्रस्ताव, संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा विस्तृत परीक्षण उपरान्त तैयार किया जाकर कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री को प्रस्तुत किये जाएंगे और प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त जिले के कलेक्टर द्वारा आदेश प्रसारित किये जाएंगे।
- तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण के समय ध्यान रखा जाए कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताब है तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहें।
- नीति में स्पष्ट है कि जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी/कर्मचारी का आधिक्य है, ऐसे स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। ऐसे शासकीय सेवक जो एक ही स्थान पर दिनांक 15 अगस्त, 2021 अथवा उससे पूर्व से कार्यरत हों, केवल उन्ही के स्थानांतरण किए जाएंगे।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। जिला स्तर पर स्थानांतरण आदेशों का क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर तक सुनिश्चित किया जाएगा तथा स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि 15 दिन में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। स्थानांतरण संबंधी उपरोक्त निर्देशों का पालन कराना कलेक्टर का दायित्व होगा।
राज्य स्तर पर स्थानांतरण
- राज्य स्तर पर स्थानांतरण दिनांक 10 सितंबर 2022 से 30 सितंबर 2022 तक विभाग द्वारा स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस हेतु विभाग द्वारा स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी के स्थानांतरण विभाग के मंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे। राज्य स्तर पर स्थानांतरण प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 15-15 प्रतिशत तथा तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10-10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
- विभागीय मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करने हेतु स्थानांतरण प्रस्ताव सीधे विभागाध्यक्ष से मंत्री को प्रस्तुत नहीं किये जायेंगे। प्रस्ताव, नस्ती आवश्यक रूप से छत्तीसगढ़ कार्यपालक शासन के कार्य नियम तथा उन नियमों के अधीन जारी किये गये निर्देश तथा अनुदेश अर्थात् प्रशासकीय विभाग की सचिवालयीन प्रक्रिया अनुसार अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव (स्वतंत्र प्रभार) के माध्यम से ही माननीय विभागीय मंत्री को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किये जाएंगे और अनुमोदन उपरान्त आदेश तदनुसार विभाग द्वारा प्रसारित किये जाएंगे।
- विभागों का यह दायित्व होगा कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताव है, तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्तियों का जो असंतुलन है, उसे संतुलित करने का विशेष ध्यान रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहे।
- जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी, कर्मचारी का आधिक्य है, से स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। 26 अनुसूचित क्षेत्र के शासकीय सेवक का गैर अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण होने पर उसके स्थान पर एवजीदार के आने के उपरांत ही उसे कार्यमुक्त किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अनुसूचित क्षेत्र के रिक्त पद भरे जाएं। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर एवं सरगुजा संभाग में शासकीय योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। सामान्यतः स्थानांतरण द्वारा रिक्त होने वाले पद की पूर्ति उसी पद के समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाए। वरिष्ठ अधिकारी का स्थानांतरण कर उस पद का प्रभार कनिष्ठ अधिकारी अथवा अन्य विभाग के अधिकारी को न दिया जाए। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा स्थानीय निवासी होने के आधार पर जिला विशेष में किये गये हैं, उनका स्थानांतरण उस जिले के बाहर नहीं किया जायेगा। किन्तु अधिसूचित जिलों में परस्पर (आपसी) स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- विभागीय सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण आदेश पूर्व परीक्षण आधारित हो और उनका क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा स्थानांतरण आदेश निरस्त नही किये जाएंगे स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
स्कूल शिक्षा विभाग के लिए विशेष उपबंध
- नीति के मुताबिक ऐसे स्थानांतरण नहीं किए जायेंगे जिनके फलस्वरूप कोई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय हो जाए। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में किसी विषय को पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या शून्य हो जाये। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक या 20 से कम हो जाये।
- अनुसूचित क्षेत्रों से कोई भी स्थानांतरण एक्जीदार की पदस्थापना किए बिना नहीं किया जायेगा। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिन्दी माध्यम स्कूल एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण बिना प्रतिनियुक्ति समाप्त किये नहीं किये जायेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी अधिकारियों-कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 5 प्रतिशत तक स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी संवर्ग से ई संवर्ग में स्थानांतरण नहीं किये जायेंगे, अर्थात अपने-अपने संवर्ग में ही स्थानांतरण किये जा सकेंगे। ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी-संवर्ग से ई संवर्ग में किये स्थानांतरण शून्य माना जायेगा, अर्थात् उक्त स्थानांतरण प्रभावशील नहीं होंगे।
- सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं प्राचार्य संवर्ग के स्थानांतरण के संबंध में शाला विशेष में शैक्षणिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण किया जाएगा। शैक्षणिक व्यवस्था से यहां आशय शाला में कक्षावार विद्यार्थियों की संख्या, विषयवार शिक्षकों की स्वीकृत पदों की संख्या तथा उसके विषयवार कार्यरत शिक्षकों की संख्या से है। किसी भी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की शालाओं में स्थानांतरण को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।
ख़बर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026: लोक कलाकारों से आवेदन आमंत्रित, सालाना ₹24 हजार तक मिलेंगे

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय की इस योजना के जरिए चयनित लोक कलाकारों को हर साल 12 हजार से 24 हजार रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं का संरक्षण, कलाकारों का सम्मान और कला दलों के विकास को बढ़ावा देना है।
इन क्षेत्रों के कलाकार कर सकेंगे आवेदन
योजना के तहत लोक नृत्य, लोक संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, पारंपरिक व्यंजन (पाक कला) और छत्तीसगढ़ी सौंदर्य कला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक से भेजना होगा। आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट और संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।
31 अगस्त तक भेज सकते हैं आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए कलाकार का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन के साथ आय प्रमाण-पत्र, बैंक खाते का विवरण, IFSC कोड और पैन कार्ड की प्रति संलग्न करनी होगी। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण समिति करेगी और उसका निर्णय अंतिम होगा।
आर्थिक सहयोग के साथ मिलेगी पहचान
सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से लोक कलाकारों को आर्थिक सहायता के साथ अपनी कला को व्यापक मंच मिलेगा। साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
ख़बर छत्तीसगढ़
CG Cabinet: कैबिनेट के 7 बड़े फैसले, ₹500 करोड़ के AI मिशन, BEML प्लांट और डिजिटल गवर्नेंस को मंजूरी

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के डिजिटल, औद्योगिक और आधारभूत विकास से जुड़े सात महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने 500 करोड़ रुपए के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन, BEML के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, लोक निर्माण विभाग में डिजिटल प्रबंधन प्रणाली और ग्रामीण सड़क योजना में बदलाव समेत कई प्रस्तावों पर मुहर लगाई।
500 करोड़ का AI मिशन मंजूर
कैबिनेट ने पांच वर्षों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य AI मिशन को मंजूरी दी। इस पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मिशन के तहत राज्य में 100 AI डेटा लैब, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी।इसके अलावा 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कामकाज को आसान बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित होंगी।
राज्य में लगेगा BEML का पहला प्लांट
कैबिनेट ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी। राज्य में पहली बार हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र स्थापित होगा। सरकार का दावा है कि इससे बड़े निवेश आएंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
PWD में लागू होगी डिजिटल प्रणाली
लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के लिए वर्क्स एंड अकाउंट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। इससे ई-टेंडर, बिल भुगतान, गुणवत्ता निगरानी और निर्माण कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी।
ग्रामीण सड़क योजना में बड़े बदलाव
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। अब ग्रामीण गलियों में सीसी सड़क और नाली निर्माण आसान होगा। सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य कराने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
ADB देगा 15 करोड़ का अनुदान
कैबिनेट ने ‘अंजोर LIGHT’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 15 करोड़ रुपए का पूर्ण अनुदान लेने को मंजूरी दी। यह परियोजना पूरी तरह ग्रांट आधारित होगी, जिससे राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
राज्य योजनाओं के लिए नया S-SNA मॉडल
सरकार ने राज्य योजनाओं के लिए स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (S-SNA) मॉडल लागू करने का फैसला किया है। इससे योजनाओं की राशि एक केंद्रीकृत खाते से सीधे हितग्राहियों और वेंडरों को जारी होगी। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
CSPGCL जारी करेगी 200 करोड़ के बॉन्ड
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) और बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी है। इससे बिजली क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
ख़बर छत्तीसगढ़
Chhattisgarh: प्रदेश में 1460 गौधाम बनेंगे, निराश्रित मवेशियों के संरक्षण के लिए सरकार की बड़ी योजना

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने निराश्रित और घुमंतू मवेशियों के संरक्षण के लिए राज्यभर में 1,460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। ‘गौधाम योजना’ के तहत यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गौ-संरक्षण को बढ़ावा देना है।
छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर उन्हें गौधाम के रूप में विकसित किया जाएगा। अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 88 गौधामों का पंजीयन पूरा हो गया है।
42 गौधामों में 5 हजार से ज्यादा मवेशियों को आश्रय
वर्तमान में प्रदेश के 42 गौधाम संचालित हैं, जहां करीब 5,109 निराश्रित पशुओं की देखभाल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को तेजी से बढ़ाकर सभी जिलों में व्यवस्थित गौधाम विकसित करना है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के पास बनेंगे गौधाम
पशुधन विकास विभाग के अनुसार, पहले चरण में उन गौठानों को प्राथमिकता दी गई है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के पास स्थित हैं और जहां आवश्यक आधारभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।
गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को संचालन में प्राथमिकता देने का फैसला भी लिया गया है। साथ ही शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया गया है।
पारदर्शी होगी चयन प्रक्रिया
गौधाम की स्थापना के लिए जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर की अनुशंसा के बाद पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया जाएगा। इसके बाद भौतिक सत्यापन और आयोग की समीक्षा के बाद अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दी जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
सरकार का मानना है कि गोधन ग्रामीण संस्कृति और कृषि अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। गौधाम योजना से बेसहारा पशुओं के संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, जैविक खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ख़बर छत्तीसगढ़
Chhattisgarh: धमतरी में काशी जैसी गूंजेगी महानदी गंगा आरती, रुद्रेश्वर धाम के विकास पर 20 करोड़ खर्च होंगे

धमतरी: महानदी के रुद्री घाट पर सावन के पहले सोमवार से काशी की तर्ज पर भव्य महानदी गंगा आरती की शुरुआत हो गई है। 108 दीपों, शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज के बीच पहली बार आयोजित इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अब सावन के प्रत्येक सोमवार को यह आरती नियमित रूप से आयोजित की जाएगी।
इसी के साथ प्रदेश सरकार ने धमतरी के प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपए की विकास योजना पर काम शुरू करने का फैसला किया है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग इस परियोजना के तहत रुद्रेश्वर धाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा।
तीन चरणों में होगा रुद्रेश्वर धाम का विकास
मास्टर प्लान के अनुसार परियोजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी। मंदिर की पारंपरिक स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य प्रवेश द्वार, शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद एवं स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी। परिसर में एआई आधारित हेल्थ कियोस्क, उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य में मरीन ड्राइव की तर्ज पर तट विकसित करने की भी योजना है।
पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा जोर
परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी। कार्यक्रम में विधायक ओंकार साहू, महापौर जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक रंजना साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद रहे। माना जा रहा है कि इस पहल से धमतरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापार व रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
ख़बर छत्तीसगढ़
राष्ट्रपति भवन पहुंची बस्तर की जनजातीय संस्कृति: मांझी-चालकी और ‘बस्तर पंडुम’ विजेताओं ने की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात

नई दिल्ली: बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मान मिला है। नारायणपुर जिले के मांझी-चालकी और ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता के विजेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर की लोककला, जनजातीय परंपराओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से राष्ट्रपति को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में ‘बस्तर पंडुम’ के विजेता, मांझी-चालकी प्रतिनिधि और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे। मुलाकात के दौरान बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
27 जुलाई को नारायणपुर से रवाना हुआ था दल
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को हुई थी। नारायणपुर नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने प्रतिनिधिमंडल को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया था। इसके बाद 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
जनजातीय कला और स्वशासन व्यवस्था की दी जानकारी
प्रतिनिधिमंडल में ‘बस्तर पंडुम’ की जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा ने पारंपरिक आभूषणों और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई और करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों की जानकारी राष्ट्रपति को दी।
बस्तर की संस्कृति को मिला राष्ट्रीय मंच
इस मुलाकात को नारायणपुर और पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय मंचों पर जनजातीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रस्तुति से इनके संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी।
अर्थ जगत23 hours agoRBI Repo Rate 2026: RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, जानें EMI और लोन पर क्या होगा असर?
ख़बर छत्तीसगढ़22 hours agoChhattisgarh: प्रदेश में 1460 गौधाम बनेंगे, निराश्रित मवेशियों के संरक्षण के लिए सरकार की बड़ी योजना
ख़बर छत्तीसगढ़22 hours agoCG Cabinet: कैबिनेट के 7 बड़े फैसले, ₹500 करोड़ के AI मिशन, BEML प्लांट और डिजिटल गवर्नेंस को मंजूरी
ख़बर छत्तीसगढ़22 hours agoमुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026: लोक कलाकारों से आवेदन आमंत्रित, सालाना ₹24 हजार तक मिलेंगे
ख़बर देश21 hours agoPM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा घिरी: संसदीय समिति ने जुकरबर्ग से 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा
ख़बर देश17 hours agoPM मोदी का पोस्ट हटाने पर जुकरबर्ग ने मांगी माफी, डीपफेक, CSAM और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियां स्वीकार कीं
ख़बर देश34 minutes agoTarun Tejpal: बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को रेप केस में दोषी ठहराया, आज होगी सजा
ख़बर उत्तरप्रदेश13 minutes agoUP News: अतीक अहमद के बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत, बड़े भाई अली से मिलने झांसी जा रहा था

























