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राज्य सरकार ने स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी की, जाने जिला और राज्य स्तर पर कब तक हो सकेंगे ट्रांसफर

Chhattisgarh Transfer Policy Year 2022: राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी कर दी है। इस आशय का आदेश शुक्रवार 12 अगस्त को मंत्रालय महानदी भवन स्थित सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। जारी स्थानांतरण नीति के अनुसार 16 अगस्त, 2022 से 10 सितंबर 2022 तक जिला स्तर के तृतीय श्रेणी तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के माननीय प्रभारी मंत्रीजी के अनुमोदन से कलेक्टर द्वारा किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त स्थानांतरण आदेश तदानुसार प्रसारित होंगे।
- कलेक्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण किये जाने वाला पद जिला संवर्ग का है तथा स्थानांतरण करने का अधिकार जिला स्तर पर है। स्थानांतरण प्रस्ताव, संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा विस्तृत परीक्षण उपरान्त तैयार किया जाकर कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री को प्रस्तुत किये जाएंगे और प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त जिले के कलेक्टर द्वारा आदेश प्रसारित किये जाएंगे।
- तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण के समय ध्यान रखा जाए कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताब है तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहें।
- नीति में स्पष्ट है कि जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी/कर्मचारी का आधिक्य है, ऐसे स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। ऐसे शासकीय सेवक जो एक ही स्थान पर दिनांक 15 अगस्त, 2021 अथवा उससे पूर्व से कार्यरत हों, केवल उन्ही के स्थानांतरण किए जाएंगे।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। जिला स्तर पर स्थानांतरण आदेशों का क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर तक सुनिश्चित किया जाएगा तथा स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि 15 दिन में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। स्थानांतरण संबंधी उपरोक्त निर्देशों का पालन कराना कलेक्टर का दायित्व होगा।
राज्य स्तर पर स्थानांतरण
- राज्य स्तर पर स्थानांतरण दिनांक 10 सितंबर 2022 से 30 सितंबर 2022 तक विभाग द्वारा स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस हेतु विभाग द्वारा स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी के स्थानांतरण विभाग के मंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे। राज्य स्तर पर स्थानांतरण प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 15-15 प्रतिशत तथा तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10-10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
- विभागीय मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करने हेतु स्थानांतरण प्रस्ताव सीधे विभागाध्यक्ष से मंत्री को प्रस्तुत नहीं किये जायेंगे। प्रस्ताव, नस्ती आवश्यक रूप से छत्तीसगढ़ कार्यपालक शासन के कार्य नियम तथा उन नियमों के अधीन जारी किये गये निर्देश तथा अनुदेश अर्थात् प्रशासकीय विभाग की सचिवालयीन प्रक्रिया अनुसार अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव (स्वतंत्र प्रभार) के माध्यम से ही माननीय विभागीय मंत्री को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किये जाएंगे और अनुमोदन उपरान्त आदेश तदनुसार विभाग द्वारा प्रसारित किये जाएंगे।
- विभागों का यह दायित्व होगा कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताव है, तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्तियों का जो असंतुलन है, उसे संतुलित करने का विशेष ध्यान रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहे।
- जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी, कर्मचारी का आधिक्य है, से स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। 26 अनुसूचित क्षेत्र के शासकीय सेवक का गैर अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण होने पर उसके स्थान पर एवजीदार के आने के उपरांत ही उसे कार्यमुक्त किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अनुसूचित क्षेत्र के रिक्त पद भरे जाएं। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर एवं सरगुजा संभाग में शासकीय योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। सामान्यतः स्थानांतरण द्वारा रिक्त होने वाले पद की पूर्ति उसी पद के समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाए। वरिष्ठ अधिकारी का स्थानांतरण कर उस पद का प्रभार कनिष्ठ अधिकारी अथवा अन्य विभाग के अधिकारी को न दिया जाए। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा स्थानीय निवासी होने के आधार पर जिला विशेष में किये गये हैं, उनका स्थानांतरण उस जिले के बाहर नहीं किया जायेगा। किन्तु अधिसूचित जिलों में परस्पर (आपसी) स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- विभागीय सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण आदेश पूर्व परीक्षण आधारित हो और उनका क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा स्थानांतरण आदेश निरस्त नही किये जाएंगे स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
स्कूल शिक्षा विभाग के लिए विशेष उपबंध
- नीति के मुताबिक ऐसे स्थानांतरण नहीं किए जायेंगे जिनके फलस्वरूप कोई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय हो जाए। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में किसी विषय को पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या शून्य हो जाये। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक या 20 से कम हो जाये।
- अनुसूचित क्षेत्रों से कोई भी स्थानांतरण एक्जीदार की पदस्थापना किए बिना नहीं किया जायेगा। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिन्दी माध्यम स्कूल एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण बिना प्रतिनियुक्ति समाप्त किये नहीं किये जायेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी अधिकारियों-कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 5 प्रतिशत तक स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी संवर्ग से ई संवर्ग में स्थानांतरण नहीं किये जायेंगे, अर्थात अपने-अपने संवर्ग में ही स्थानांतरण किये जा सकेंगे। ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी-संवर्ग से ई संवर्ग में किये स्थानांतरण शून्य माना जायेगा, अर्थात् उक्त स्थानांतरण प्रभावशील नहीं होंगे।
- सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं प्राचार्य संवर्ग के स्थानांतरण के संबंध में शाला विशेष में शैक्षणिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण किया जाएगा। शैक्षणिक व्यवस्था से यहां आशय शाला में कक्षावार विद्यार्थियों की संख्या, विषयवार शिक्षकों की स्वीकृत पदों की संख्या तथा उसके विषयवार कार्यरत शिक्षकों की संख्या से है। किसी भी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की शालाओं में स्थानांतरण को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।
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Raipur: बिजली बिल योजना के नाम पर साइबर ठगी से सावधान, पॉवर कंपनी की उपभोक्ताओं से अपील

Raipur: छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं को साइबर ठगों से सतर्क रहने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर भेजे जा रहे किसी भी अनजान व्हाट्सएप, ई-मेल या एसएमएस लिंक पर क्लिक न करें। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी योजना या सेवा के लिए कोई APK फाइल या संदिग्ध वेब लिंक कभी नहीं भेजे जाते, इसलिए ऐसे संदेशों से बचना जरूरी है।
सिर्फ आधिकारिक ऐप से करें भुगतान
पॉवर कंपनी के एमडी भीम सिंह के अनुसार उपभोक्ता अपना बिजली बिल या पंजीयन शुल्क केवल Mor Bijli App, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर या नजदीकी कार्यालय में ही जमा करें। साथ ही उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि मैदानी कर्मचारियों को नकद भुगतान न करें। कंपनी ने यह भी बताया कि “मोर बिजली” मोबाइल एप सिर्फ Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें।
इसी ID से आते हैं आधिकारिक संदेश
पॉवर कंपनी के अनुसार बिजली बिल या अन्य जानकारी से जुड़े सभी आधिकारिक संदेश “CSPDCL-S” सेंडर ID से ही भेजे जाते हैं। यदि किसी अन्य नंबर या लिंक से संदेश प्राप्त होता है तो उस पर भरोसा न करें।
जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर
कंपनी ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना या बिजली सेवाओं से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं या नजदीकी बिजली कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
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Chhattisgarh: मुख्यमंत्री साय ने गौधाम योजना का किया शुभारंभ, सभी गौधाम अब ‘सुरभि गौधाम’ कहलाएंगे

Bilaspur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को प्रदेश में गौधाम योजना की शुरुआत करते हुए गोधन संरक्षण की दिशा में नई पहल की। मुख्यमंत्री ने लाखासार गांव में बने गौधाम का शुभारंभ किया और गोमाता की पूजा-अर्चना कर परिसर का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने गौधाम में आश्रय प्राप्त बेसहारा और आवारा पशुओं की देखभाल, चारा-पानी तथा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने चारागाह क्षेत्र का भी जायजा लिया।
25 एकड़ में विकसित हुआ गौधाम
लाखासार में करीब 25 एकड़ क्षेत्र में गौधाम विकसित किया गया है, जिसमें से लगभग 19 एकड़ भूमि पर हरे चारे की खेती की जा रही है। इस गौधाम का संचालन कामधेनु गौशाला समिति द्वारा किया जा रहा है।
सभी गौधाम अब ‘सुरभि गौधाम’ कहलाएंगे
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय देना, गोधन संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
गौधामों में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन और गोबर से उपयोगी वस्तुएं बनाने जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
गांव के विकास के लिए कई घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने लाखासार ग्राम के विकास के लिए कई घोषणाएं कीं, जिनमें महतारी सदन का निर्माण, मिनी स्टेडियम निर्माण तथा 500 मीटर लंबाई के गौरव पथ के निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही लाखासार गौधाम में प्रशिक्षण भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत करने तथा एक काऊ कैचर और एक पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की, जिससे क्षेत्र में गौसंरक्षण और स्थानीय विकास कार्यों को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा गौधाम में प्रशिक्षण भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत करने के साथ काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार की पहल की सराहना की
कार्यक्रम में तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में तेजी से विकास हो रहा है और तखतपुर क्षेत्र को भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, कमिश्नर बिलासपुर सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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CG Assistant Professor Vacancy: छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में 700 पदों पर भर्ती, सहायक प्राध्यापक के 625 पद

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में शिक्षण और सहायक सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कुल 700 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की है। इस भर्ती के तहत 625 सहायक प्राध्यापक, 50 ग्रंथपाल और 25 क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
CGPSC को भेजा गया प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए 24 फरवरी 2026 को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा चुका है। विभाग ने राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार पदों का विस्तृत ब्रेक-अप भी तैयार कर लिया है। आयोग प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा, जिसके बाद योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
इन विषयों में होगी भर्ती
राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में कई प्रमुख विषयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पदों, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल के 25-25 पदों, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15, वाणिज्य के 75, विधि के 10 पदों पर भर्ती के साथ ही क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद तथा ग्रंथपाल के 50 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।
कॉलेजों में मजबूत होगी शिक्षण व्यवस्था
सरकार का कहना है कि इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को बेहतर उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थायी भर्ती होने तक कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था पहले से लागू है। अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएचडी डिग्रीधारी हैं और NET तथा SET जैसी पात्रता परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके हैं।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती पर सख्त कार्रवाई, CM विष्णु देव साय के निर्देश, जिलों में सर्वे के आदेश

Raipur: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में अवैध रूप से हो रही अफीम की खेती के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों के संवेदनशील और संभावित क्षेत्रों में व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए कहा गया है।
दुर्ग में अफीम की खेती का भंडाफोड़
दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया। आरोपियों के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही अवैध कब्जे को हटाने के लिए जेसीबी से कार्रवाई भी की गई।
बलरामपुर में 2 करोड़ की अफीम जब्त
इसी तरह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र के तुर्रीपानी (खजुरी) गांव में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ जमीन पर उगाई जा रही अवैध अफीम की खेती का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जब्त किए गए। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जीरो टॉलरेंस नीति पर सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। अफीम की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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Raipur: छत्तीसगढ़ बिजली बिल समाधान योजना 2026, 28 लाख उपभोक्ताओं को 757 करोड़ राहत, CM साय ने लॉन्च की योजना

Raipur: विष्णु देव साय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना के तहत लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं से इसका लाभ लेने की अपील की। सरकार के मुताबिक इस योजना से प्रदेश के 28 लाख 42 हजार बिजली उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का उद्देश्य आर्थिक कारणों से बकाया बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले उपभोक्ताओं को राहत देना है।
सरचार्ज में 100% और मूल बकाया में 75% तक छूट
सरकार ने योजना के तहत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए अधिभार (सरचार्ज) में 100 प्रतिशत छूट और मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट देने का प्रावधान किया है। इस योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के समय बकाया राशि का कम से कम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा, जबकि शेष राशि किस्तों में जमा की जा सकेगी। यह योजना 30 जून 2026 तक लागू रहेगी।
तीन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को तीन श्रेणियों में शामिल किया गया है-
- 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता
- सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता
- सक्रिय अशासकीय घरेलू और कृषि उपभोक्ता
- इन सभी वर्गों को योजना के तहत बकाया बिजली बिल भुगतान में राहत दी जाएगी।
योजना के हितग्राहियों को भी मिली सब्सिडी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने PMhar Muft Bijli Yojana के अंतर्गत 2931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपये की सब्सिडी का अंतरण भी किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 36 हजार लोग सूर्यघर योजना से जुड़ चुके हैं, जिससे घरों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है।
बिजली अब जीवन की मूलभूत जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आज लोगों की मूलभूत जरूरत बन चुकी है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिल नहीं भर पाते, जिससे सरचार्ज बढ़ जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए समाधान योजना शुरू की गई है। उन्होंने नागरिकों से बिजली बचाने और अनावश्यक उपयोग से बचने की भी अपील की। साथ ही ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए कि शिविर लगाकर अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ा जाए।
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