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राज्य सरकार ने स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी की, जाने जिला और राज्य स्तर पर कब तक हो सकेंगे ट्रांसफर

Chhattisgarh Transfer Policy Year 2022: राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण नीति वर्ष 2022 जारी कर दी है। इस आशय का आदेश शुक्रवार 12 अगस्त को मंत्रालय महानदी भवन स्थित सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। जारी स्थानांतरण नीति के अनुसार 16 अगस्त, 2022 से 10 सितंबर 2022 तक जिला स्तर के तृतीय श्रेणी तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के माननीय प्रभारी मंत्रीजी के अनुमोदन से कलेक्टर द्वारा किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त स्थानांतरण आदेश तदानुसार प्रसारित होंगे।
- कलेक्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण किये जाने वाला पद जिला संवर्ग का है तथा स्थानांतरण करने का अधिकार जिला स्तर पर है। स्थानांतरण प्रस्ताव, संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा विस्तृत परीक्षण उपरान्त तैयार किया जाकर कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री को प्रस्तुत किये जाएंगे और प्रभारी मंत्री के अनुमोदन उपरान्त जिले के कलेक्टर द्वारा आदेश प्रसारित किये जाएंगे।
- तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण के समय ध्यान रखा जाए कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताब है तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहें।
- नीति में स्पष्ट है कि जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी/कर्मचारी का आधिक्य है, ऐसे स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। ऐसे शासकीय सेवक जो एक ही स्थान पर दिनांक 15 अगस्त, 2021 अथवा उससे पूर्व से कार्यरत हों, केवल उन्ही के स्थानांतरण किए जाएंगे।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। जिला स्तर पर स्थानांतरण आदेशों का क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर तक सुनिश्चित किया जाएगा तथा स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि 15 दिन में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। स्थानांतरण संबंधी उपरोक्त निर्देशों का पालन कराना कलेक्टर का दायित्व होगा।
राज्य स्तर पर स्थानांतरण
- राज्य स्तर पर स्थानांतरण दिनांक 10 सितंबर 2022 से 30 सितंबर 2022 तक विभाग द्वारा स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस हेतु विभाग द्वारा स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी के स्थानांतरण विभाग के मंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे। राज्य स्तर पर स्थानांतरण प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 15-15 प्रतिशत तथा तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10-10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
- विभागीय मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करने हेतु स्थानांतरण प्रस्ताव सीधे विभागाध्यक्ष से मंत्री को प्रस्तुत नहीं किये जायेंगे। प्रस्ताव, नस्ती आवश्यक रूप से छत्तीसगढ़ कार्यपालक शासन के कार्य नियम तथा उन नियमों के अधीन जारी किये गये निर्देश तथा अनुदेश अर्थात् प्रशासकीय विभाग की सचिवालयीन प्रक्रिया अनुसार अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव (स्वतंत्र प्रभार) के माध्यम से ही माननीय विभागीय मंत्री को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किये जाएंगे और अनुमोदन उपरान्त आदेश तदनुसार विभाग द्वारा प्रसारित किये जाएंगे।
- विभागों का यह दायित्व होगा कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों के शासकीय सेवक का गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण करने के प्रस्ताव है, तो उसके एवजीदार का भी प्रस्ताव (जो गैर-अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्तियों का जो असंतुलन है, उसे संतुलित करने का विशेष ध्यान रखा जाए। आशय यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त है, शहरी क्षेत्रों में लगभग उसी के अनुरूप पद रिक्त रह सकें। ऐसी स्थिति निर्मित न हो कि शहरी क्षेत्रों में लगभग सभी पद भरें हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रिक्तियां बनी रहे।
- जिन पदों एवं स्थानों पर अधिकारी, कर्मचारी का आधिक्य है, से स्थानों से स्थानांतरण न्यूनता वाले स्थान हेतु हो। किसी भी परिस्थिति में न्यूनता वाले स्थान से आधिक्य वाले स्थान में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, ताकि संतुलन बना रहे एवं कमी वाले क्षेत्रों में पदों की पूर्ति हो सके। 26 अनुसूचित क्षेत्र के शासकीय सेवक का गैर अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण होने पर उसके स्थान पर एवजीदार के आने के उपरांत ही उसे कार्यमुक्त किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अनुसूचित क्षेत्र के रिक्त पद भरे जाएं। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर एवं सरगुजा संभाग में शासकीय योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए।
- दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना यथासंभव आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए। सामान्यतः स्थानांतरण द्वारा रिक्त होने वाले पद की पूर्ति उसी पद के समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाए। वरिष्ठ अधिकारी का स्थानांतरण कर उस पद का प्रभार कनिष्ठ अधिकारी अथवा अन्य विभाग के अधिकारी को न दिया जाए। जिन कर्मचारियों की नियुक्ति विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा स्थानीय निवासी होने के आधार पर जिला विशेष में किये गये हैं, उनका स्थानांतरण उस जिले के बाहर नहीं किया जायेगा। किन्तु अधिसूचित जिलों में परस्पर (आपसी) स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- विभागीय सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि स्थानांतरण आदेश पूर्व परीक्षण आधारित हो और उनका क्रियान्वयन 15 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा स्थानांतरण आदेश निरस्त नही किये जाएंगे स्थानांतरण पश्चात् नवीन पदस्थापना स्थान पर निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
स्कूल शिक्षा विभाग के लिए विशेष उपबंध
- नीति के मुताबिक ऐसे स्थानांतरण नहीं किए जायेंगे जिनके फलस्वरूप कोई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय हो जाए। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में किसी विषय को पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या शून्य हो जाये। ऐसे स्थानांतरण नहीं किये जाएंगे जिनके फलस्वरूप किसी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक या 20 से कम हो जाये।
- अनुसूचित क्षेत्रों से कोई भी स्थानांतरण एक्जीदार की पदस्थापना किए बिना नहीं किया जायेगा। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिन्दी माध्यम स्कूल एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण बिना प्रतिनियुक्ति समाप्त किये नहीं किये जायेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी अधिकारियों-कर्मचारियों के मामलों में उनके संवर्ग में कार्यरत् कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 5 प्रतिशत तक स्थानांतरण किये जा सकेंगे।
- ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी संवर्ग से ई संवर्ग में स्थानांतरण नहीं किये जायेंगे, अर्थात अपने-अपने संवर्ग में ही स्थानांतरण किये जा सकेंगे। ई-संवर्ग से टी संवर्ग एवं टी-संवर्ग से ई संवर्ग में किये स्थानांतरण शून्य माना जायेगा, अर्थात् उक्त स्थानांतरण प्रभावशील नहीं होंगे।
- सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं प्राचार्य संवर्ग के स्थानांतरण के संबंध में शाला विशेष में शैक्षणिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण किया जाएगा। शैक्षणिक व्यवस्था से यहां आशय शाला में कक्षावार विद्यार्थियों की संख्या, विषयवार शिक्षकों की स्वीकृत पदों की संख्या तथा उसके विषयवार कार्यरत शिक्षकों की संख्या से है। किसी भी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की शालाओं में स्थानांतरण को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।
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Chhattisgarh: भारतनेट के तहत छत्तीसगढ़ को ₹3,942 करोड़ की मंजूरी, 11,682 ग्राम पंचायतें होंगी कनेक्ट

Raipur: छत्तीसगढ़ को डिजिटल आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने संशोधित भारतनेट प्रोग्राम (Amended BharatNet Program – ABP) के तहत राज्य के लिए ₹3,942 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए प्रदेश की 11,682 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में तेज, सुरक्षित और निर्बाध डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल इंटरनेट सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखा बनेगी। रिंग टोपोलॉजी आधारित नेटवर्क संरचना से सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और नेटवर्क फेल होने की स्थिति में भी वैकल्पिक मार्ग से कनेक्टिविटी जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से ई-गवर्नेंस सेवाओं का दायरा बढ़ेगा, ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती मिलेगी और टेलीमेडिसिन के जरिए दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकेंगी। साथ ही, ग्रामीण युवाओं, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता, सेवा वितरण की गति और ग्रामीण विकास के मानकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। डिजिटल नेटवर्क को मजबूत कर छत्तीसगढ़ ‘विकसित भारत’ की अवधारणा में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में अग्रसर है।
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Raipur: ‘होली गिले-शिकवे भुलाने का पर्व’, रायपुर प्रेस क्लब के रंगोत्सव में झूमे सीएम विष्णु देव साय, बजाया नगाड़ा

Raipur: राजधानी में आयोजित रायपुर प्रेस क्लब के होली मिलन समारोह “रंगोत्सव” और “महामूर्ख सम्मेलन 2026” में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सद्भाव, अपनत्व और गिले-शिकवे भुलाकर संबंधों को मजबूत करने का पर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब में पर्वों को मिल-जुलकर मनाने की गौरवशाली परंपरा रही है। वर्षों से होली मिलन और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने प्रेस क्लब परिवार का आभार जताते हुए कामना की कि यह उत्सव सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और उत्साह लेकर आए।
समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत अनोखे अंदाज में किया गया। प्रेस क्लब के सदस्यों ने उन्हें मिर्ची की माला पहनाई और त्रिशूलनुमा पिचकारी भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने होली विशेषांक ‘सेंसलेस टाइम्स’ का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में उत्साह का चरम उस समय देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ने स्वयं नगाड़ा बजाकर माहौल में रंग घोल दिया। नगाड़े की थाप पर पत्रकारों और अतिथियों ने तालियां बजाकर उत्साह व्यक्त किया।
ढोल-नगाड़ों और फाग गीतों की धुन पर मुख्यमंत्री भी पत्रकार साथियों के साथ उत्सव में शामिल हुए। पूरे आयोजन में संगीत, संस्कृति और भाईचारे का सुंदर संगम नजर आया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, सलाहकार आर कृष्णा दास, सांसद संतोष पांडेय, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू और प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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Naxal Surrender: 15 माओवादियों ने किया सरेंडर, ‘नक्सल-मुक्त बस्तर’ की ओर बड़ा कदम, सीएम विष्णु देव साय बोले- सुशासन पर बढ़ा भरोसा

Naxal Surrender Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सरकार को बड़ी सफलता मिली है। महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय 15 सशस्त्र माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इसे ‘नक्सल-मुक्त बस्तर’ के सपने की दिशा में अहम पड़ाव बताया और कहा कि सुशासन, सुरक्षा और विकास की नीति पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावी पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और विकास कार्यों के विस्तार का सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं, जिन पर कुल 73 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सभी ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। सरकार का मानना है कि यह कदम इस बात का संकेत है कि भटके हुए युवा लोकतंत्र और विकास की राह पर लौटना चाहते हैं।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के मार्गदर्शन में देशभर में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में निर्णायक कार्रवाई हो रही है। राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय बनाकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ आधारभूत अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का तेजी से विस्तार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार का अटल संकल्प भयमुक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। उन्होंने मुख्यधारा में लौटे युवाओं का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और भरोसा दिलाया कि पुनर्वास नीति के तहत उन्हें हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
बस्तर संभाग में लगातार हो रही कार्रवाइयों और सरेंडर की बढ़ती संख्या को सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की दिशा में सकारात्मक संकेत मान रही है। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा और विकास की दोहरी रणनीति से नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
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Chhattisgarh: किसानों के खातों में 10,324 करोड़ ट्रांसफर, CM विष्णु देव साय ने होली से पहले दी बड़ी सौगात

Bilaspur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर जिले के रहंगी (बिल्हा विकासखंड) से वर्चुअल माध्यम से प्रदेशभर के किसानों से संवाद करते हुए 25.28 लाख किसानों के खातों में 10,324 करोड़ रुपए से अधिक की राशि टांसफर की। यह राशि कृषक उन्नति योजना के तहत दी गई। बिलासपुर जिले के 1,25,352 किसानों को 494.38 करोड़ रुपए मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली से पहले किसानों को यह सौगात देकर सरकार ने उनके सम्मान और समृद्धि के संकल्प को दोहराया है।
263 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
- कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 15.99 करोड़ के 7 कार्यों का लोकार्पण
- 247.18 करोड़ के 82 कार्यों का शिलान्यास
- कुल 263.17 करोड़ रुपए के 89 विकास कार्यों से जिले को नई रफ्तार मिलने की बात कही।
किसानों के लिए क्या-क्या घोषणाएं?
- धान बेचने वाले किसानों को अंतर की राशि
- शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा
- किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार
- भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी सहायता
- खाद पर सब्सिडी और सिंचाई विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में धान की सर्वाधिक कीमत दी जा रही है और इस बार बारदाने की कोई समस्या नहीं आई।
PM ने इन योजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों को 6000 रुपए सम्मान निधि दी जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहली कैबिनेट में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के संकल्प के अनुरूप है।
सामाजिक घोषणाएं
- सतनामी समाज के सामुदायिक भवन हेतु 50 लाख रुपए
- पत्थरखान में आदिवासी समाज के भवन हेतु 50 लाख रुपए
- चकरभाटा PHC का CHC में उन्नयन
- मंगला स्कूल का हाई स्कूल में उन्नयन
- रहंगी खेल मैदान में बाउंड्रीवॉल और स्टेज निर्माण
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Chhattisgarh: किसानों को धान खरीदी की अंतर की राशि होली से पहले मिलेगी, जी राम जी योजना’ में मिलेगा 125 दिन का रोजगार- मुख्यमंत्री साय

Raipur: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सुशासन, विकास और सुरक्षा के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर कड़े प्रहार किए गए हैं और कई आरोपी जेल में हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। भारतीय वन संरक्षण, देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है।
नक्सलवाद पर निर्णायक लड़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और 31 मार्च तक इसके समूल उन्मूलन की उम्मीद है। बस्तर में अब स्कूल, अस्पताल और विकास कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। पुनर्वास नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
किसानों और ग्रामीण विकास पर फोकस
- 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी ₹3100 प्रति क्विंटल
- अंतर की राशि होली से पहले किसानों को मिलेगी
- ‘जी राम जी योजना’ में 125 दिन का रोजगार (मनरेगा से अधिक)
- सिंचाई परियोजनाओं के लिए 10,700 करोड़ रुपए स्वीकृत
आवास और अधोसंरचना
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 10 महीनों में 5 लाख से अधिक आवास पूर्ण
- रेल सेक्टर में 51 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाएं प्रगति पर
- अमृत स्टेशन योजना के तहत 32 रेलवे स्टेशपनों का आधुनिकीकरण
- 500 नए मोबाइल टावर स्वीकृत
ऊर्जा और डिजिटल गवर्नेंस
- हाफ बिजली बिल से आगे बढ़कर मुफ्त बिजली की दिशा में प्रयास
- प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 27 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से रोशन
- ई-ऑफिस प्रणाली लागू, फाइलों का डिजिटल निपटारा
- सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन
स्वास्थ्य और शिक्षा
- 5 नए मेडिकल कॉलेज (मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, कुनकुरी)
- एम्स रायपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत
- आयुष्मान भारत योजना के तहत 4551 करोड़ रुपए का भुगतान
- ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की युक्तियुक्त पदस्थापना
सांस्कृतिक और पर्यटन पहल
- बस्तर पंडुम में 54 हजार कलाकारों का पंजीयन
- नया रायपुर ट्राइबल म्यूजियम में बढ़ी पर्यटक संख्या
- रामलला दर्शन योजना से 42 हजार लोग लाभान्वित






















