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चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराज, सिंधिया और 22 बागी पूर्व विधायकों को कहा शुक्रिया
भोपाल: मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार रात 9 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। राज्यपाल लालजी टंडन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया, ‘जिन 22 पूर्व विधायकों ने अपनी पार्टी की सदस्यता त्याग कर BJP की सदस्यता ग्रहण की है, मैं उन साथियों के प्रति आभार प्रकट करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं उन्हें आश्वस्त करता हूँ कि उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा और उनके विश्वास को कभी टूटने नहीं दूंगा।’
शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि ‘वह सिंधिया के साथ मिलकर एमपी के विकास के लिए काम करते रहेंगे।’ इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले ही कांग्रेस के साथ बगावत में अपना साथ देने वाले सभी 22 पूर्व विधायकों को उपचुनाव में बीजेपी का टिकट दिलाने का वादा कर चुके हैं। बता दें कि सिंधिया समर्थक 22 विधायकों की बगावत से ही मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। फ्लोर टेस्ट से पहले ही कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा।
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MP News: 5-डे वीक की मांग पर मध्य प्रदेश में बैंककर्मियों की हड़ताल, 40 हजार कर्मचारी रहेंगे बाहर, 7 हजार से ज्यादा ब्रांच बंद

Bhopal: पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर बैंककर्मियों की हड़ताल रहेगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी और अधिकारी कामकाज से दूर रहेंगे। इसका असर 7 हजार से अधिक बैंक शाखाओं पर पड़ेगा और करोड़ों रुपये के दैनिक लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं।
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बैंकों पर ताले लटके नजर आ सकते हैं। हड़ताल के चलते चेक क्लियरेंस, कैश ट्रांजैक्शन और अन्य बैंकिंग सेवाएं बाधित रहेंगी। इसके अलावा कई जगहों पर एटीएम में नकदी की कमी की स्थिति भी बन सकती है।
इन बैंकों में कामकाज रहेगा ठप
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, हड़ताल में सरकारी क्षेत्र की 12 प्रमुख बैंकें शामिल होंगी। इनमें
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ निजी क्षेत्र की बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हो सकता है।
सिर्फ एक मांग, लेकिन लंबे समय से लंबित
बैंककर्मियों की प्रमुख मांग है कि बैंकिंग सेक्टर में भी पूरी तरह 5-डे वीक सिस्टम लागू किया जाए और मौजूदा व्यवस्था के तहत केवल दूसरे व चौथे शनिवार की जगह सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस मध्य प्रदेश के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि देशभर में करीब 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी इस हड़ताल में शामिल होंगे, जिनमें एमपी के लगभग 40 हजार कर्मचारी हैं।
2015 से चल रही है मांग
शर्मा के अनुसार, वर्ष 2015 में 10वें द्विपक्षीय समझौते/7वें जॉइंट नोट के दौरान इस मांग पर सहमति बनी थी। उस समय दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया और बाकी शनिवारों को पूरा कार्य दिवस बनाया गया था। साथ ही भविष्य में सभी शनिवारों को अवकाश देने पर विचार का आश्वासन भी दिया गया था।
2023 में बनी सहमति, फिर भी मंजूरी नहीं
साल 2023 में हुई बातचीत में यह सहमति बनी कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य समय बढ़ाकर शेष शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से मंजूरी लंबित है। सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं आने के कारण बैंक यूनियनों ने एक बार फिर हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
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Ujjain: तराना हिंसा के तीन दिन बाद हालात सामान्य, 25 उपद्रवी गिरफ्तार, रासुका के तहत सख्त कार्रवाई

Ujjain: तराना में बजरंग दल के नगर मंत्री सोहिल ठाकुर पर हमले के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा पर काबू पाने में पुलिस-प्रशासन को करीब तीन दिन का समय लग गया। शनिवार को स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन ने शहर में शांति बहाल होने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक 25 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसा फैलाने और माहौल बिगाड़ने में शामिल आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
72 घंटे तक बेकाबू रहे हालात, आगजनी और पथराव
22 जनवरी, गुरुवार रात से तराना में हालात बिगड़ने लगे थे। उपद्रवियों ने शहर में जमकर तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की। इस दौरान 12 बसें, 10 से अधिक कारें, कई बाइकें क्षतिग्रस्त कर दी गईं। इसके अलावा एक दुकान, एक बस और एक आरामशीन टाल को आग के हवाले कर दिया गया। कई घरों पर पथराव हुआ। करीब 72 घंटे बाद शनिवार को स्थिति पूरी तरह शांत हुई।
CCTV फुटेज से पहचान, रातभर चला सर्च ऑपरेशन
पुलिस ने हालात काबू में आने के बाद रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया। CCTV फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बलराम जोशी मार्ग पर घरों में की गई तोड़फोड़ और पथराव को लेकर एक और एफआईआर दर्ज की गई है। स्थानीय निवासी शक्तिबाला जोशी की शिकायत पर छह से अधिक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि अन्य चिन्हित आरोपियों की तलाश जारी है।
लाखों का नुकसान, व्यापार प्रभावित
हिंसा की घटनाओं से तराना के रहवासी दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि दो गुटों की आपसी रंजिश में पूरा नगर हिंसा की चपेट में आ गया। बसों और कारों में हुई तोड़फोड़ से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। तीन दिन बाद बाजार तो खुले, लेकिन सामान्य रौनक नहीं लौट पाई। शाम को हिंदुवादी संगठनों ने थाने पहुंचकर कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठाए।
शांति और सौहार्द की अपील
घटना के बाद शहर काजी ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। विधायक महेश परमार ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमन-चैन और भाईचारे की अपील की। पूर्व भाजपा विधायक ताराचंद गोयल ने प्रशासन पर भरोसा जताया। वहीं, तिलभांडेश्वर मंदिर के महंत मोहन भारती महाराज (जूना अखाड़ा) ने तराना की पुरानी परंपरा—शांति, सामंजस्य और सद्भाव—को याद दिलाते हुए संयम बरतने का संदेश दिया।
एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा, ‘बाजार खुल चुके हैं। CCTV फुटेज के आधार पर 25 उपद्रवी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं और माहौल खराब करने में उनकी भूमिका सामने आई है। रासुका के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।’
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Dhar: भोजशाला में बसंत पंचमी पर साथ-साथ पूजा और नमाज, 8 हजार जवानों की तैनाती

Dhar: मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा और जुमे की नमाज साथ-साथ कराई गई। सुबह 6 बजे सूर्योदय के साथ हिंदू समाज ने सरस्वती पूजन शुरू किया, जो सूर्यास्त तक चला। वहीं, दोपहर 1 से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर में ही मुस्लिम समाज ने जुमे की नमाज अदा की। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। भोजशाला परिसर को 6 सेक्टर, जबकि पूरे शहर को 7 जोन में बांटा गया था।
स्थानीय पुलिस के साथ सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के 8 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए ड्रोन और एआई तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।
नमाज को लेकर दो अलग-अलग दावे
नमाज को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज ने शांतिपूर्वक नमाज अदा की। वहीं, गुलमोहर कॉलोनी के रहवासियों का आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर रोशनी पाटीदार और डीएसपी आनंद तिवारी ने उन्हें और उनके साथियों को 16 घंटे तक कमाल मौला मस्जिद में रोके रखा, लेकिन उनसे नमाज नहीं पढ़वाई गई। उनका दावा है कि पीछे की ओर कुछ लोगों से नमाज पढ़वाकर वीडियो बनाया गया।
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भोजशाला विवाद: बसंत पंचमी पर पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई

Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का अधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन की ओर से दायर की गई है, जो इससे पहले अयोध्या राम जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी–श्रृंगारगौरी मामलों में भी याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर चुके हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में केवल एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष पर्व है, जबकि जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में करीब 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय उस दिन अन्य मस्जिदों में नमाज अदा कर सकता है।
हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसे देखते हुए धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और शहर में करीब 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी हवाला दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
याचिका में 2013 और 2016 के उदाहरण भी पेश किए गए हैं, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना वहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के विपरीत है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
भोजशाला विवाद को करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (वर्तमान धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के दौरान हुआ था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर लंबे समय से अधिकार की मांग करते आ रहे हैं।
धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का एकाधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। यह अर्जी एडवोकेट विष्णुशंकर जैन की ओर से दाखिल की गई है, जो अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद व काशी ज्ञानवापी-श्रृंगारगौरी केस में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर चुके हैं।
बता दें कि हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसको लेकर धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च निकाल रही है। धार शहर में 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात कर दिए गए हैं।
तर्क- नमाज के लिए साल में 50 शुक्रवार, 25 मस्जिदें, पूजा के लिए साल में 1 दिन, 1 स्थल
अर्जी में कहा गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष दिन है। जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष में लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। इसी आधार पर मांग की गई है कि बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के सदस्य अन्य मस्जिदों में नमाज़ अदा कर सकते हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
अर्जी में 2013 और 2016 के उदाहरण भी दिए गए हैं। वर्ष 2013 में 15 फरवरी और 2016 में 12 फरवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी थी। याचिका के अनुसार, उन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना यहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के खिलाफ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
700 साल पुराना विवाद : भोजशाला विवाद करीब 700 साल पुराना है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (अब धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत काल में हुआ। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर अधिकार की मांग करते रहे हैं।
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MP Cabinet: मकर संक्रांति से पहले शिक्षकों को तोहफा, एमपी कैबिनेट में बड़ा फैसला

Bhopal: मध्यप्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी सौगात दी है। मंगलवार को हुई मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक (LDT) और उच्च श्रेणी शिक्षक (UDT) को चौथा क्रमोन्नति वेतनमान देने का निर्णय लिया गया। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.22 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे, जिन्होंने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। लंबे समय से लंबित चौथे क्रमोन्नति वेतनमान की मांग को इस निर्णय के साथ पूरा कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, चौथा क्रमोन्नति वेतनमान लागू होने के बाद LDT शिक्षकों का औसत वेतन लगभग 1.15 लाख रुपये और UDT शिक्षकों का औसत वेतन 1.25 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।
1 जुलाई 2023 से लागू होगा नया वेतनमान
यह नया वेतनमान 1 जुलाई 2023 से प्रभावी माना जाएगा। जिन शिक्षकों की 35 साल की सेवा जुलाई 2023 से पहले पूरी हो चुकी है, उन्हें उसी तारीख से अब तक का पूरा एरियर मिलेगा। अनुमान है कि यह एरियर राशि 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक हो सकती है।
वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 2023 से 2026 के बीच 35 वर्ष पूरी करेगी, उन्हें सेवा पूर्ण होने की तिथि से एरियर का भुगतान किया जाएगा।
MP में लागू हुई स्पेस टेक नीति–2026
कैबिनेट बैठक में स्पेस टेक नीति–2026 को भी मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, केरल और ओडिशा के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है जहां यह नीति लागू हुई है। इस नीति के जरिए उपग्रह निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि, आपदा प्रबंधन व शहरी नियोजन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इससे ₹1000 करोड़ का निवेश और करीब 8 हजार रोजगार सृजित होंगे।
800 मेगावाट सोलर-स्टोरेज परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 800 मेगावाट क्षमता की तीन सोलर-सह-स्टोरेज परियोजनाओं को हरी झंडी दी। इनमें—
300 मेगावाट (4 घंटे स्टोरेज)
300 मेगावाट (6 घंटे स्टोरेज)
200 मेगावाट (24 घंटे सोलर-सह-स्टोरेज)
शामिल हैं।
ई-कैबिनेट की शुरुआत, टैबलेट लेकर पहुंचे मंत्री
यह बैठक मोहन सरकार की पहली ई-कैबिनेट रही। मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री फाइलों की जगह टैबलेट लेकर बैठक में शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य पेपरलेस सिस्टम को बढ़ावा देना, पारदर्शिता लाना और समय की बचत करना है।
‘संकल्प से समाधान’ अभियान 31 मार्च तक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के तहत 16 विभागों की 91 योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को घर-घर जाकर जोड़ा जाएगा। यह अभियान चार चरणों में संचालित होगा और 31 मार्च तक चलेगा।
अन्य अहम निर्णय
1.200 नए सांदीपनि विद्यालयों को मंजूरी, कुल लागत ₹2660 करोड़
2. वर्ष 2026 में आयोजित व्यापार मेलों के दौरान ऑटोमोबाइल पर 50% परिवहन टैक्स में छूट
3. SAF जवान के परिजनों को ₹90 लाख की अनुग्रह राशि देने का फैसला





















