ख़बर देश
Sahara: 10 करोड़ निवेशकों को पैसा वापस होगा, आज से रिफंड पोर्टल पर प्रक्रिया शुरू

Sahara: सहारा इंडिया की को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में निवेश करने वाले 10 करोड़ निवेशकों का लंबे समय से फंसा पैसा अब वापस मिलेगा। शुरुआत 4 करोड़ निवेशकों से हो रही है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली में सहारा रिफंड पोर्टल लॉन्च किया। अमित शाह ने कहा कि पोर्टल के जरिए आवेदन करने वाले निवेशकों के खाते में 45 दिन में पैसा आ जाएगा।
अभी 10,000 रुपए तक ही रिफंड मिलेगा
सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि फिलहाल 10,000 रुपए तक की ही राशि रिफंड की जा रही है। अगर किसी निवेशक ने इससे ज्यादा राशि निवेश की है, तो उसे अभी 10,000 रुपए ही वापस किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा राशि जारी करने का अनुरोध करेंगे, ताकि 10000 से अधिक राशि निवेश करने वालों का पूरा पैसा लौटाया जा सके।
फिलहाल 4 को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के निवेशक ही कर सकेंगे आवेदन
1.सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, लखनऊ
2.सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, भोपाल
3.हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, कोलकाता
4.स्टार्स मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, हैदराबाद
पहले चरण में किया जाएगा 5,000 करोड़ रुपए रिफंड
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पहले फेज में निवेशकों का 10,000 ही रिफंड किया जा रहा है। इसमें करीब 1.07 करोड़ निवेशकों का पूरा पैसा वापस हो जाएगा। शाह ने बताया कि पहले फेज में कुल 4 करोड़ निवेशकों के बीच 5,000 करोड़ की राशि बांटी जाएगी।
ऐसे करें रिफंड पोर्टल पर आवेदन
1. https://mocrefund.crcs.gov.in/Depositor/Login पोर्टल पर जाएं।
2.जमाकर्ता पंजीकरण पर क्लिक करें।
3. आधार नंबर के अंतिम चार अंक और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर डालें।
4. सेंड OTP पर क्लिक करें और प्राप्त OTP दर्ज करें।
5. जमाकर्ता पंजीकरण पूरा होने पर जमाकर्ता लॉगिन पर क्लिक करें।
6. फिर से आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी दर्ज करें।
7.नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़कर ‘मैं सहमत हूं’ पर क्लिक करें।
8.आपकी पूरी डिटेल्स प्रदर्शित होगी।
9.जमा प्रमाण पत्र की प्रति के साथ दावा अनुरोध फॉर्म भरें।
10.सोसाइटी का नाम, सदस्यता नंबर और कुल जमा राशि की जानकारी भरें।
11. सोसाइटी से पहले कोई लोन या पेमेंट मिला है, तो उसकी जानकारी भरें।
12.निवेश राशि 50,000 रुपए से ज्यादा है, तो पैन कार्ड की जानकारी भरें।
13.दावा सिर्फ एक बार किया जा सकेगा, इसलिए सभी डिपॉजिट की जानकारी भरें।
14.वैरिफिकेशन के बाद दावा फॉर्म डाउनलोड करें।
15.डाउनलोड दावा फॉर्म पर अपनी ताजा फोटो लगाएं और साइन करें।
16.दावा फॉर्म को पोर्टल पर अपलोड कर सम्मिट करें।
17.दावा सफलतापूर्वक सम्मिट करने पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज आएगा।
18.आपके दावे को संबंधित सहारा सोसाइटी 30 दिन में वैरिफाई करेगी।
19.इसके बाद 15 दिन सरकारी अधिकारी आपकी दावे की जांच कर उसे अप्रूव करेंगे।
20.दावा अप्रूव होने पर आपके आधार से जुड़े खाते में राशि जमा हो जाएगी।
ख़बर देश
UGC Rules 2026: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जनरल कैटेगरी से भेदभाव के आरोपों पर 19 मार्च को सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर गुरुवार को अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की पीठ ने कहा कि नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई, जिनमें आरोप लगाया गया है कि UGC के नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए थे, जिसके बाद देशभर में इनका विरोध शुरू हो गया।
केंद्र और UGC को नोटिस, नियमों का नया ड्राफ्ट लाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने नियमों का संशोधित और स्पष्ट ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को होगी।
क्या है UGC का नया कानून?
UGC के नए नियमों का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’। इनका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है।
नए नियमों के प्रमुख प्रावधान
- उच्च शिक्षण संस्थानों में विशेष शिकायत समितियों का गठन
- जातिगत भेदभाव की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था
- शिकायतों की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग टीमें
- संस्थानों की जवाबदेही तय करने के निर्देश
- सरकार का कहना है कि इन बदलावों से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
जनरल कैटेगरी के छात्रों का विरोध
जनरल कैटेगरी और सवर्ण जाति के छात्रों का आरोप है कि नए नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी और अस्पष्ट है। उनका कहना है कि इससे कॉलेज परिसरों में अराजकता पैदा हो सकती है और सवर्ण छात्रों को नियमों के तहत ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह पेश किया गया है। छात्रों का दावा है कि इससे उनके खिलाफ संस्थागत भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नियमों के अमल पर रोक लगाई है।
ख़बर देश
Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन: बारामती में चार्टर्ड प्लेन क्रैश, 5 की मौत

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (66) का बुधवार सुबह एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया। यह दुर्घटना सुबह 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुई, जब मुंबई से आ रहा उनका चार्टर्ड विमान रनवे से पहले ही क्रैश हो गया और उसमें आग लग गई। हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के अलावा उनके एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में चार चुनावी रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे। वे सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुए थे।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि पायलट ने पहले लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे साफ नजर नहीं आने पर विमान को दोबारा ऊपर ले जाया गया। इसके बाद रनवे-11 पर दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया गया, इसी दौरान विमान रनवे से पहले गिर गया। हादसे से पहले कोई इमरजेंसी या ‘मेडे’ कॉल नहीं दी गई। अजित पवार का अंतिम संस्कार 29 जनवरी 2026 को होगा।
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बारामती पहुंच गए। राज्य सरकार ने आज स्कूलों में छुट्टी और 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती में किया जाएगा। उनके चाचा शरद पवार, पत्नी सुनेत्रा पवार, दोनों बेटे और बहन सुप्रिया सुले भी बारामती पहुंच चुकी हैं।
इधर, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। एक टीम दिल्ली में विमान की ऑपरेटर कंपनी VSR वेंचर्स के दफ्तर पहुंची है, जबकि दूसरी टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है। कंपनी ने दावा किया है कि विमान में कोई तकनीकी खामी नहीं थी और पायलट को 16 हजार घंटे का उड़ान अनुभव था।
अजित पवार की पार्टी एनसीपी, भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार का हिस्सा है। पार्टी के पास कुल 41 विधायक हैं। पवार स्वयं उपमुख्यमंत्री थे, जबकि पार्टी के 7 कैबिनेट और 1 राज्य मंत्री सरकार में शामिल हैं।
ख़बर देश
UGC New Rules Protest: UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज, दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा

UGC New Rules n India: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण समाज का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शन कारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग की गई।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों- लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई।
रायबरेली में अनोखा विरोध
रायबरेली में विरोध के दौरान भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना आक्रोश जाहिर किया। यह विरोध सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
मशहूर कवि कुमार विश्वास का तंज
UGC के नियमों को लेकर कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा- “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।” उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
शिक्षा मंत्री का बयान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी को भी नए नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
UGC के नए नियमों के खिलाफ वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में नियमों पर रोक लगाने, सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और इक्विटी हेल्पलाइन सुविधाएं देने की मांग की गई है।
ख़बर देश
Padma Awards 2026: धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, शिबु सोरेन-अलका याज्ञनिक को पद्म भूषण, रोहित शर्मा समेत 113 को पद्मश्री

Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इस साल कुल 131 हस्तियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा जाएगा। इनमें 5 लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान देने का ऐलान किया गया है।
5 हस्तियों को पद्म विभूषण
सरकार ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र समेत पांच प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है।
पद्म भूषण पाने वालों में शिबु सोरेन और अलका याज्ञनिक
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबु सोरेन और मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक सहित कुल 13 हस्तियों को इस वर्ष पद्म भूषण के लिए चुना गया है।
रोहित शर्मा, हरमनप्रीत कौर समेत 113 को पद्मश्री
खेल, कला, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 113 हस्तियों को पद्मश्री देने का फैसला किया गया है। इस सूची में प्रमुख नामों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती को भी पद्मश्री
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हिरानार गांव की सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। बुधरी ताती ने महज 15 वर्ष की उम्र में समाज सेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने बस्तर अंचल में महिलाओं को जागरूक और शिक्षित करने के साथ-साथ वृद्धा आश्रम और अनाथ आश्रम भी संचालित किए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने बस्तर संभाग के करीब 545 गांवों की पदयात्रा की। समाज सेवा के प्रति समर्पण के चलते उन्होंने विवाह नहीं किया। अब तक वे 22 पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं, जिनमें 3 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं।
मध्यप्रदेश से भी कई हस्तियां सम्मानित
मध्यप्रदेश से भोपाल के प्रख्यात लेखक कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार, मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। भगवानदास रैकवार बुंदेली युद्ध कला के प्रमुख संरक्षक माने जाते हैं। उन्होंने दशकों तक युवाओं को पारंपरिक मार्शल आर्ट सिखाकर इस कला को विलुप्त होने से बचाया है।
तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं पद्म पुरस्कार
पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल, उद्योग और सिविल सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिए जाते हैं।
ख़बर देश
Tamilnadu: तमिल भाषा शहीद दिवस पर स्टालिन का बड़ा बयान, बोले- तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी जगह नहीं, थोपने का करेंगे विरोध

TamilNadu Hindi controversy: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को तमिल भाषा शहीद दिवस के अवसर पर राज्य के भाषा आंदोलन से जुड़े शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी कोई जगह नहीं होगी और राज्य हिंदी थोपने की किसी भी कोशिश का लगातार विरोध करता रहेगा। सीएम स्टालिन ने कहा कि तमिल भाषा के प्रति प्रेम कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब-जब हम पर हिंदी थोपी गई, उतनी ही मजबूती से उसका विरोध किया गया।” उन्होंने तमिल भाषा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को नमन करते हुए कहा कि भाषा के नाम पर अब और किसी की जान नहीं जानी चाहिए।
X पर वीडियो शेयर कर भाषा आंदोलन को किया याद
तमिल भाषा शहीद दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक क्षण दिखाए गए हैं।
स्टालिन ने डीएमके के संस्थापक नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई समुदायों की पहचान और अधिकारों की रक्षा की।
हिंदी को लेकर केंद्र और राज्य में लंबे समय से टकराव
तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार के बीच हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन लगातार केंद्र की तीन भाषा नीति (Three Language Policy) का विरोध करते रहे हैं। पिछले साल मार्च में स्टालिन सरकार ने राज्य बजट 2025-26 के प्रतीक चिह्न से रुपये का सिंबल ‘₹’ हटाकर उसकी जगह तमिल अक्षर ‘ரூ’ शामिल किया था। इस कदम को हिंदी और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। स्टालिन का कहना है कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) से राज्य को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिला है।
हिंदी पर प्रतिबंध को लेकर भी हो चुकी है तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार अक्टूबर में विधानसभा में राज्य में हिंदी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही थी, हालांकि यह बिल पेश नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि सरकार हिंदी के होर्डिंग्स, साइनबोर्ड, फिल्मों और गानों पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर चुकी है। इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ इमरजेंसी बैठक भी बुलाई गई थी, जिसके बाद हिंदी बैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
ख़बर मध्यप्रदेश23 hours agoMP Weather: प्रदेश में दो सिस्टम एक्टिव, 30+ जिलों में बारिश-ओले, ग्वालियर में ढाई इंच पानी, फसलों को नुकसान
Uncategorized14 hours agoAgra Encounter: राज चौहान हत्याकांड का मुख्य आरोपी मारा गया, दो गिरफ्तार
ख़बर देश9 hours agoUGC Rules 2026: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जनरल कैटेगरी से भेदभाव के आरोपों पर 19 मार्च को सुनवाई













