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MP News: राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रदेश में चलेगा 45 दिन का विशेष अभियान, 18 जुलाई से होगा शुरू

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजस्व महा अभियान प्रथम चरण (जनवरी- मार्च 2024) की सफलता को देखते हुए राजस्व महाअभियान-2 चलाने के निर्देश दिए हैं। राज्य शासन द्वारा राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और राजस्व अभिलेख त्रुटियों को ठीक करने के लिए यह अभियान 18 जुलाई से 31 अगस्त तक चलेगा। अभियान के दौरान सभी संभाग आयुक्त और कलेक्टर अपने क्षेत्रों का निरंतर निरीक्षण करेंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले राजस्व अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
राजस्व महा अभियान का उद्देश्य राजस्व न्यायालय में समय सीमा पर लंबित प्रकरणों का निराकरण, नए राजस्व प्रकरणों को आरसीएमएस पर दर्ज कराना, नक्शे पर तरमीम, पीएम किसान योजना सभी पात्र किसानों को लाभ देना, समग्र का आधार ई-केवाईसी और खसरे की समग्र/ आधार से लिंकिंग एवं फार्मर रजिस्ट्री का क्रियान्वन है। डिजिटल क्रॉप सर्वेक्षण एक अगस्त से 15 सितम्बर तक होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राजस्व महाअभियान के संचालन संबंधित जानकारी ली। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय संजय कुमार शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टर्स बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।
पटवारी ई-डायरी बनायें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पटवारी डायरी डिजिटल की जाए। मेन्युअल डायरी प्रथा समाप्त की जाए। पीएम किसान सम्मान निधि के लाभ के लंबित प्रकरणों में ई-केवाईसी करें। अच्छा वातावरण निर्मित करें। गौ-शालाओं की क्षमता अनुसार गौ-वंश रखें, वे सड़कों पर न दिखें। राज्य सरकार द्वारा गौ-शालाओं को दिया जाने वाले अनुदान को दोगुना कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अवैध रेत उत्खनन पर कार्यवाही हो।
पटवारी रहें मुख्यालय पर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पटवारी मुख्यालय पर रहें, दक्षता के साथ कलेक्टर कार्यवाही करें। अभियान की हर दिन समीक्षा की जाए, साफ-सुथरा कार्य हो, अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। गलती होने पर माफ नहीं किया जाएगा। कमिश्नर अपना 45 दिन का दौरा कार्यक्रम बनाएं, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाशत नहीं की जाएगी। अभियान में नक्शा दुरुस्तीकरण का कार्य अच्छा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख सचिव को लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। स्वामित्व योजना का लाभ दिए जाना सुनिश्चित किया जाए, परंतु इस बात का ध्यान रखा जाए कि इसका दुरुपयोग न हो। नदियों में रेत का अवैध उत्खनन सख्ती से रोका जाए। बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार का पूरा प्रबंधन किया जाए।
राजस्व महाअभियान-1 में 30 लाख से अधिक प्रकरणों का हुआ था निराकरण
प्रदेश में 15 जनवरी से 31 मार्च तक चलाए गए राजस्व महाअभियान-01 में 30 लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस महाअभियान में सभी जिलों में अच्छा काम हुआ। महाअभियान में राजस्व प्रकरणों के निराकरण प्रतिशत के हिसाब से पांढुर्ना प्रथम, बुरहानपुर, द्वितीय, खण्डवा तृतीय स्थान पर है जबकि हरदा दसवें स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल, सिंगरौली, मुरैना, उमरिया द्वितीय चरण में अच्छा कार्य करें, कोई शिकायत नहीं आए। विवादित प्रकरणों पर ठोस कार्यवाही की जाए। समग्र का आधार से सत्यापन करना जरूरी है।
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भोजशाला विवाद: बसंत पंचमी पर पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई

Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का अधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन की ओर से दायर की गई है, जो इससे पहले अयोध्या राम जन्मभूमि और काशी ज्ञानवापी–श्रृंगारगौरी मामलों में भी याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर चुके हैं।
याचिका में तर्क दिया गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में केवल एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष पर्व है, जबकि जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में करीब 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय उस दिन अन्य मस्जिदों में नमाज अदा कर सकता है।
हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसे देखते हुए धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है और शहर में करीब 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी हवाला दिया गया है। इस आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
याचिका में 2013 और 2016 के उदाहरण भी पेश किए गए हैं, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना वहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के विपरीत है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
भोजशाला विवाद को करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (वर्तमान धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत के दौरान हुआ था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर लंबे समय से अधिकार की मांग करते आ रहे हैं।
धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होने जा रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदुओं को वाग्देवी (माता सरस्वती) की पूजा का पूरे दिन का एकाधिकार दिया जाए और उस दिन भोजशाला में नमाज की अनुमति न दी जाए।
इस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। यह अर्जी एडवोकेट विष्णुशंकर जैन की ओर से दाखिल की गई है, जो अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद व काशी ज्ञानवापी-श्रृंगारगौरी केस में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर चुके हैं।
बता दें कि हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन का आह्वान किया है। इसको लेकर धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च निकाल रही है। धार शहर में 8 हजार अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात कर दिए गए हैं।
तर्क- नमाज के लिए साल में 50 शुक्रवार, 25 मस्जिदें, पूजा के लिए साल में 1 दिन, 1 स्थल
अर्जी में कहा गया है कि बसंत पंचमी वर्ष में एक बार आती है और यह देवी सरस्वती की पूजा का विशेष दिन है। जुमे की नमाज के लिए पूरे वर्ष में लगभग 50 शुक्रवार उपलब्ध रहते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार शहर में 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए केवल एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। इसी आधार पर मांग की गई है कि बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के सदस्य अन्य मस्जिदों में नमाज़ अदा कर सकते हैं।
याचिका में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उन परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है।
अर्जी में 2013 और 2016 के उदाहरण भी दिए गए हैं। वर्ष 2013 में 15 फरवरी और 2016 में 12 फरवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी थी। याचिका के अनुसार, उन दोनों अवसरों पर एक साथ पूजा और नमाज़ होने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। इस वर्ष फिर से वही संयोग बन रहा है, जिससे विवाद की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय किए बिना यहां जुमे की नमाज़ की अनुमति देना प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की भावना के खिलाफ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला में सरस्वती पूजा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से पुरानी रही है और जुमे की नमाज़ की अनुमति इस परंपरा के विशेषाधिकार का उल्लंघन करती है।
700 साल पुराना विवाद : भोजशाला विवाद करीब 700 साल पुराना है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने धारा नगरी (अब धार) में वाग्देवी मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे भोजशाला कहा जाता है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल कमाल मौला मस्जिद है, जिसका निर्माण 13वीं–14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत काल में हुआ। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया था। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावों के आधार पर अधिकार की मांग करते रहे हैं।
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MP Cabinet: मकर संक्रांति से पहले शिक्षकों को तोहफा, एमपी कैबिनेट में बड़ा फैसला

Bhopal: मध्यप्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी सौगात दी है। मंगलवार को हुई मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक (LDT) और उच्च श्रेणी शिक्षक (UDT) को चौथा क्रमोन्नति वेतनमान देने का निर्णय लिया गया। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.22 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे, जिन्होंने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। लंबे समय से लंबित चौथे क्रमोन्नति वेतनमान की मांग को इस निर्णय के साथ पूरा कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, चौथा क्रमोन्नति वेतनमान लागू होने के बाद LDT शिक्षकों का औसत वेतन लगभग 1.15 लाख रुपये और UDT शिक्षकों का औसत वेतन 1.25 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।
1 जुलाई 2023 से लागू होगा नया वेतनमान
यह नया वेतनमान 1 जुलाई 2023 से प्रभावी माना जाएगा। जिन शिक्षकों की 35 साल की सेवा जुलाई 2023 से पहले पूरी हो चुकी है, उन्हें उसी तारीख से अब तक का पूरा एरियर मिलेगा। अनुमान है कि यह एरियर राशि 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक हो सकती है।
वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 2023 से 2026 के बीच 35 वर्ष पूरी करेगी, उन्हें सेवा पूर्ण होने की तिथि से एरियर का भुगतान किया जाएगा।
MP में लागू हुई स्पेस टेक नीति–2026
कैबिनेट बैठक में स्पेस टेक नीति–2026 को भी मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, केरल और ओडिशा के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है जहां यह नीति लागू हुई है। इस नीति के जरिए उपग्रह निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि, आपदा प्रबंधन व शहरी नियोजन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इससे ₹1000 करोड़ का निवेश और करीब 8 हजार रोजगार सृजित होंगे।
800 मेगावाट सोलर-स्टोरेज परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 800 मेगावाट क्षमता की तीन सोलर-सह-स्टोरेज परियोजनाओं को हरी झंडी दी। इनमें—
300 मेगावाट (4 घंटे स्टोरेज)
300 मेगावाट (6 घंटे स्टोरेज)
200 मेगावाट (24 घंटे सोलर-सह-स्टोरेज)
शामिल हैं।
ई-कैबिनेट की शुरुआत, टैबलेट लेकर पहुंचे मंत्री
यह बैठक मोहन सरकार की पहली ई-कैबिनेट रही। मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री फाइलों की जगह टैबलेट लेकर बैठक में शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य पेपरलेस सिस्टम को बढ़ावा देना, पारदर्शिता लाना और समय की बचत करना है।
‘संकल्प से समाधान’ अभियान 31 मार्च तक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के तहत 16 विभागों की 91 योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को घर-घर जाकर जोड़ा जाएगा। यह अभियान चार चरणों में संचालित होगा और 31 मार्च तक चलेगा।
अन्य अहम निर्णय
1.200 नए सांदीपनि विद्यालयों को मंजूरी, कुल लागत ₹2660 करोड़
2. वर्ष 2026 में आयोजित व्यापार मेलों के दौरान ऑटोमोबाइल पर 50% परिवहन टैक्स में छूट
3. SAF जवान के परिजनों को ₹90 लाख की अनुग्रह राशि देने का फैसला
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MP News: छतरपुर के नौगांव में मंदिर का निर्माणाधीन गेट गिरा, 1 की मौत, 3 मजदूर घायल

Chhatarpur: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव में धौर्रा मंदिर का निर्माणाधीन गेट गिर गया। जिसके मलबे में दबकर एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसा शुक्रवार शाम निर्माण कार्य के दौरान हुआ। मृतक मजदूर छतरपुर के गंज के करारा गांव का रहने वाला है। बता दें कि धौर्रा हनुमान मंदिर मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश केबॉर्डर पर स्थिति है। आसपास के इलाके के लोग दर्शन करने आते हैं।
घटना की जानकारी लगते ही छतरपुर सीएमएचओ आरके गुप्ता और सिविल सर्जन शरद चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों के इलाज की जानकारी ली और उनके इलाज के निर्देश दिए। कलेक्टर के आदेश पर मृतक के परिजन को तत्काल 20 हजार रुपए और घायलों के परिवार को 5000 रुपए की सहायता दी गई है।
निर्माण कार्य की जांच करेगी तकनीकी टीम
धौर्रा मंदिर के निर्माणाधीन गेट की निर्माण सामग्री की जांच के लिए एक तकनीकी टीम गठित जा रही है। नौगांव एसडीएम जीएस पटेल ने कहा- हादसा लेंटर की कमी या निर्माण सामग्री की खराब क्वालिटी के कारण हुआ, यह तकनीकी टीम की जांच के बाद स्पष्ट होगा। टीआई बाल्मिक चौबे ने बताया कि मंदिर के गेट का निर्माण चल रहा था। इसी दौरान हादसा हो गया। एक मजदूर की मौत हो गई है। 3 अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष अनूप तिवारी बोले- नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे कामों की समय-समय पर जांच की जाती है। हादसे की जांच के निर्देश दिए हैं। जो भी अधिकारी-कर्मचारी या ठेकेदार लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उस पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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MP Weather: मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, शीतलहर ने बढ़ाई गलन, कई जिलों में स्कूलों के टाइम बदले

Bhopal: मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और शीत लहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में शीतलहर के चलते जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में स्कूलों की समय-सारिणी में बदलाव किया गया है। वहीं कुछ जगह अवकाश की घोषणा भी की गई है। राजधानी भोपाल में बढ़ती ठंड और कोहरे को देखते हुए नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के सभी स्कूल अब सुबह 9:30 बजे के बाद ही संचालित होंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी पड़ रही कड़ाके की ठंड
शीतलहर के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ग्वालियर जिले में कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 5 और 6 जनवरी को अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर डीईओ ने यह आदेश जारी किया है। यह आदेश एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध सभी शासकीय एवं अशासकीय, मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। श्योपुर जिले में भी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। जिले में नर्सरी से कक्षा आठवीं तक की कक्षाएं सुबह 9:30 बजे से पहले नहीं लगेंगी।
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MP News: विदिशा में छेड़छाड़ का विरोध करने पर युवक की हत्या, चाकुओं से गोदकर ली जान

Vidisha: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में शनिवार, 3 जनवरी रात एक युवती के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर 22 साल के शुभम चौबे की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। पूरी घटना CCTV में कैद हो गई, जिसमें कुछ लोग युवक के साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं। वारदात के बाद इलाके में दहशत है। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी का है।
पुलिस ने जानकारी दी है कि शुभम चौबे करैया खेड़ा रोड का रहने वाला था। उसने आरोपी चुन्नी और उसके साथियों को युवती से छेड़छाड़ करने से रोका था। शनिवार रात चुन्नी अपने साथियों संग बाइक से इंद्रप्रस्थ कॉलोनी पहुंचा। उसने शुभम को बाहर बुलाया और फिर इस घटना को अंजाम दिया। पहले बहस, फिर मारपीट और उसके बाद उन लोगों ने शुभम पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए।
आरोपियों के हमले में युवक शुभम लहूलुहान हो गया और सड़क पर तड़पता रहा। वारदात के बाद आरोपी उसे इसी हालत में छोड़ मौके से फरार हो गए। इसके बाद स्थानीय लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने शुभम को मृत घोषित कर दिया। घटना के सामने आए CCTV फुटेज में देखने मिल रहा है कि किस तरह बाइक पर सवार होकर कई लोग आए और उन्होंने शुभम संग मारपीट शुरू कर दी।
पुलिस फिलहाल घटना की जांच में जुटी है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। विदिशा के ASP डॉ. प्रशांत ने कहा है कि हत्या चाकू से की गई है। सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। घटनास्थल की बारीकी से जांच की जा रही है। सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है।
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