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PM Modi Rajya Sabha: जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना खिलेगा, राज्यसभा में बोले मोदी

PM Modi Rajya Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर आज राज्यसभा में अपना संबोधन दिया। इस दौरान विपक्ष ने अडानी-मोदी भाई भाई के नारों के साथ संबोधन के बीच में जमकर हंगामा किया। लेकिन इसके बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने गांधी-नेहरु परिवार के इतिहास से लेकर कांग्रेस सरकार की नीतियों तक पर सवाल उठाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करके गांधी परिवार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। आइए जानते हैं प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में भाषण की 10 बड़ी बातें।
1.जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया, विपक्षी सांसद सदन में हंगामा करने लगे। इस पर पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि ‘सदन में जो भी बात होती है, उसे देश गंभीरता से सुनता है और गंभीरता से लेता है। लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोगों की वाणी न सिर्फ सदन को, बल्कि देश को निराश करने वाली है।’ उन्होंने कहा कि ‘इस प्रकार की प्रवृत्ति के सदस्यों को यही कहूंगा कि कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाब। जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल। जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा। कमल खिलाने में प्रत्यक्ष या परोक्ष आपका जो भी योगदान है, इसके लिए मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं।’
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2. 60 साल के शासन में देश को गड्ढे ही गड्ढे दिए
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कल अपने संबोधन में कहा था कि हमने 60 साल में देश को मजबूत बुनियाद दी। उन्होंने कहा था कि बुनियाद हमने बनाई, लेकिन उसका क्रेडिट मोदी ले रहा है। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 में आकर जब मैंने बारीकी से चीजों को देखने का प्रयास किया तो नजर आया कि कांग्रेस के परिवार ने 60 साल में गड्ढे ही गड्ढे कर दिए थे। उनका इरादा नेकी का होगा, लेकिन गड्ढे कर दिए थे।’ पीएम ने कहा कि उन्होंने ऐसी कार्यशैली और कल्चर बनाया कि एक भी चुनौती का परमानेंट सॉल्यूशन निकालने का न सोचा, न सूझा और न प्रयास किया। आज हम परमानेंट सॉल्यूशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’
3. नेहरु सरनेम रखने से इतना डर क्यों- प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘600 से ज्यादा योजनाएं गांधी-नेहरू के परिवार के नाम पर हैं। अगर अब किसी कार्यक्रम में नेहरू जी का नाम नहीं प्रयोग हुआ तो कुछ लोगों का खून गर्म हो जाता था, लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता कि उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम रखने से डरता क्यों है। क्या शर्मिंदगी है नेहरू सरनेम रखने में। इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको और आपके परिवार को मंजूर नहीं है और आप हमारा हिसाब मांगते हो।
4. एक प्रधानमंत्री ने 50 चुनी हुई सरकारों को गिराया
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘जो लोग आज विपक्ष में बैठे हैं। उन्होंने राज्यों के अधिकारों को घज्जियां उड़ा दीं। मैं कच्चा-चिट्ठा खोलना चाहता हूं। जरा इतिहास उठाकर देख लीजिए वो कौन पार्टी थी, वो लोग कौन सत्ता में बैठे थे, जिन्होंने जिन्होंने आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा बार दुरुपयोग किया। 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया। वो लोग कौन थे, जिन्होंने आर्टिकल 356 का दुरुपयोग किया? वे लोग कौन हैं, जिन्होंने यह किया और चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया। एक प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 356 का 50 पर प्रयोग किया, वह नाम है इंदिरा गांधी।’
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5.पहले जिनको फायदा मिलता था, उनका चिल्लाना स्वाभाविक
पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ‘हमने सीधे जनधन खाते में लाभार्थियों को पैसे भेजे। हम नया इको सिस्टम लाए। जिन लोगों को पुराने इको सिस्टम के फायदे मिलते थे, उनका चिल्लाना स्वाभाविक है। पहले परियोजनाएं लटकाने, भटकाने का कल्चर था। हमने टेक्नोलॉजी का प्लेटफॉर्म तैयार किया और इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट को गति देने का काम किया। योजनाएं बनाने में महीनों लगते थे, आज सप्ताहभर में योजनाएं आगे बढ़ा दी जाती हैं।
6.जनधन, आधार और मोबाइल…ये हैं त्रि शक्ति
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने त्रिशक्ति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल… ये वो त्रिशक्ति है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में 27 लाख करोड़ रुपये DBT के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के खातों में गए हैं। इससे 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रुपया…जो किसी इको-सिस्टम के हाथों में जा सकता था, वो बच गया। अब जिनको ये पैसा नहीं मिल पाया, उनका चिल्लाना स्वाभाविक है।
7. पिछली सरकारों ने नॉर्थ-ईस्ट को किया अनदेखा
प्रधानमंत्री ने नॉर्थ ईस्ट का जिक्र करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथां लेते हुए कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट के गांवों में बिजली नहीं थी। इनके वोट बैंक नहीं थे इसलिए इनकी सरकार ने यहां बिजली पहुंचाने पर ध्यान नहीं दिया। हमने कहा कि हम मक्खन नहीं, पत्थर पर लकीर खींचेंगे। हमने 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचाई। खुशी है कि दूरदराज के गांवों को आजादी के इतने सालों बाद आशा की किरण दिखाई दी।’ मोदी ने आगे कहा, ‘पहले की सरकारों में कुछ घंटे बिजली आती थी। पहले गांव में एक खंबा गाड़ देते थे तो हर साल उसकी एनिवर्सिरी मनाते थे। हम आज 22 घंटे बिजली देने में सफल हुए हैं। हमने लोगों को उनके भाग्य पर नहीं छोड़ा।
8. कांग्रेस ने की छोटे किसानों की उपेक्षा- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसानों का जिक्र करते हुए कहा, ‘किसानों के लिए पहले क्या नीति थी? ऊपर के कुछ वर्ग को संभाल लेना और उन्हीं से अपनी राजनीति चलाना ही लक्ष्य था। छोटे किसान उपेक्षित थे, उनकी आवाज कोई नहीं सुनता था। हमारी सरकार ने छोटे किसानों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्हें बैंकिंग से जोड़ा और आज साल में तीन बार किसान सम्मान निधि उनके खातों में जमा होती है। हमने मिलेट ईयर के लिए यूएन को लिखा। ये छोटे किसान उगाते हैं। जैसे श्रीफल का महत्व होता है, वैसे ही मिलेट को श्री अन्न का दर्जा मिले। इससे छोटे किसानों को मजबूती मिलेगी।
9. विपक्ष ने वैज्ञानिकों को किया बदनाम
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोनाकाल में वैक्सीन को लेकर हुई राजनीति पर भी विपक्ष को जमकर निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ‘वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों को नीचा दिखाने के लिए कितने प्रयास हुए। आर्टिकल लिखे गए, टीवी में बोला गया। ये हमारे वैज्ञानिकों को बदनाम करने का मौका नहीं छोड़ते। इन्हें देश की चिंता नहीं है, अपनी राजनीति की चिंता है। हमें खुशी है कि आज 100 करोड़ से ज्यादा मोबाइल मेरे देश के हाथ में है। कभी इम्पोर्ट करते थे, गर्व है आज एक्सपोर्ट कर रहे हैं।’
10.’एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है’
प्रधानमंत्री मोदी के तकरीबन डेढ़ घंटे के संबोधन के दौरान विपक्ष लगातार नारेबाजी और हंगामा करता रहा। जिस पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि देश की जनता की रोजी रोटी के लिए हमने काम किया। 140 करोड़ लोगों के लिए हमारी सरकार काम कर ही है। देश देख रहा है कि एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है। अरे नारे बोलने के लिए भी लोग बदलने पड़ रहे हैं। मैं घंटेभर से जवाब दे रहा हूं, रुका नहीं रहा। देश के लिए जीता हूं, देश के लिए कुछ करने के लिए निकला हूं। इसलिए राजनीतिक खेल खेलने वालों के अंदर अंदर हौसला नहीं है। वे बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।
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AI content पर सख्ती: X, YouTube, Facebook को AI पोस्ट पर लेबल लगाना होगा; डीपफेक 3 घंटे में हटाने का आदेश

AI content: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक को अब अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने वाले AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बने कंटेंट पर साफ-साफ लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही डीपफेक वीडियो और फोटो को शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत IT रूल्स 2021 में बदलाव किया गया है। बदले हुए नियम 20 फरवरी से लागू होंगे। सरकार ने इन नियमों का ड्राफ्ट 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया था।
नए नियमों का मकसद डीपफेक और AI से बने कंटेंट को पहचानने, लेबल करने और ट्रेस करने की व्यवस्था को मजबूत करना है। अब AI से तैयार किसी भी कंटेंट पर यह स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि यह असली नहीं, बल्कि AI-जनरेटेड है। सरकार का मानना है कि इससे मिसइनफॉर्मेशन, फेक न्यूज और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी।
सभी AI ऑडियो-वीडियो पर लेबल अनिवार्य
नए नियम 3(3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ यानी AI कंटेंट बनाने या अपलोड करने की सुविधा देता है, उसे हर ऐसे कंटेंट पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना होगा। साथ ही परमानेंट यूनिक मेटाडेटा या आइडेंटिफायर एम्बेड करना भी जरूरी होगा।
लेबल विजुअल कंटेंट में कम से कम 10% एरिया कवर करेगा, जबकि ऑडियो कंटेंट में पहले 10% हिस्से में इसे सुनाना अनिवार्य होगा। इस मेटाडेटा को बदला, छिपाया या डिलीट नहीं किया जा सकेगा। प्लेटफॉर्म्स को ऐसे टेक्निकल सिस्टम अपनाने होंगे, जिससे अपलोड के वक्त ही AI कंटेंट की पहचान हो सके।
नए IT नियमों में ये 3 बड़े बदलाव
लेबल हटाना या छिपाना नामुमकिन: सोशल मीडिया कंपनियां AI लेबल या मेटाडेटा को हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं दे सकेंगी।
गैरकानूनी और भ्रामक कंटेंट पर रोक: कंपनियों को ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स इस्तेमाल करने होंगे, जो AI से बने गैरकानूनी, अश्लील या धोखाधड़ी वाले कंटेंट को रोक सकें।
हर 3 महीने में यूजर्स को चेतावनी: प्लेटफॉर्म्स को हर 3 महीने में कम से कम एक बार यूजर्स को वॉर्निंग देना अनिवार्य होगा कि AI का गलत इस्तेमाल करने पर जुर्माना या सजा हो सकती है।
यूजर्स और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
इन नियमों से यूजर्स फेक और असली कंटेंट के बीच आसानी से फर्क कर पाएंगे और मिसइनफॉर्मेशन में कमी आएगी। हालांकि, क्रिएटर्स को AI कंटेंट पर लेबलिंग जैसे अतिरिक्त स्टेप्स अपनाने होंगे। वहीं इंडस्ट्री के लिए मेटाडेटा और वेरिफिकेशन सिस्टम में निवेश करना एक चुनौती हो सकता है, जिससे ऑपरेशनल लागत बढ़ेगी।
मंत्रालय ने क्या कहा?
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ये कदम ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने की दिशा में उठाया गया है। इससे जनरेटिव AI से पैदा होने वाली मिसइनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और चुनावी हेरफेर जैसी जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी और इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा।
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Lok Sabha Speaker: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष के 118 सांसदों ने दिया नोटिस; 9 मार्च को हो सकती है चर्चा

Lok Sabha Speaker: विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंप दिया। इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और उसके नतीजे तक ओम बिरला लोकसभा की कार्यवाही नहीं चलाएंगे। प्रस्ताव गिरने के बाद ही वे स्पीकर की कुर्सी संभालेंगे।
एजेंसी के अनुसार, विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में 9 मार्च को चर्चा हो सकती है। मौजूदा बजट सत्र का यह चरण 13 फरवरी को खत्म हो रहा है, जबकि इसके बाद 8 मार्च से संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी। इससे पहले बजट सत्र के 10वें दिन संसद की कार्यवाही हंगामे के चलते दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 2 बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हो सकी, जिसमें शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की।
इसी दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर भी विवाद गहराता गया। पेंगुइन पब्लिशिंग हाउस ने सफाई जारी करते हुए कहा कि यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और न ही इसकी कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी आधिकारिक तौर पर सामने आई है। कंपनी के मुताबिक पब्लिशिंग के सभी अधिकार उनके पास हैं और उनकी ओर से किताब का कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया।
पेंगुइन की यह सफाई उस वक्त आई है, जब किताब की अनअथॉराइज्ड कॉपियों के लीक और ऑनलाइन सर्कुलेशन का दावा किया गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज की है। दरअसल, राहुल गांधी लोकसभा में पूर्व आर्मी चीफ की किताब लेकर पहुंचे थे। विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि राहुल गांधी को सदन में इस मुद्दे पर बोलने दिया जाए, जिसे लेकर लगातार हंगामा हो रहा है।
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RSS: संघ कहेगा तो तुरंत पद छोड़ दूंगा; 75 साल की उम्र कोई नियम नहीं- मोहन भागवत

RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि संघ का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है। यदि संगठन उन्हें पद छोड़ने को कहेगा, तो वे बिना किसी सवाल के तुरंत जिम्मेदारी छोड़ देंगे। उन्होंने यह बयान मुंबई में आयोजित RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान दिया।
भागवत ने 75 साल की उम्र के बाद पद छोड़ने की चर्चा पर कहा कि यह संघ की परंपरा जरूर है, लेकिन कोई लिखित या बाध्यकारी नियम नहीं। उन्होंने यह भी साफ किया कि RSS में नेतृत्व जाति के आधार पर नहीं तय होता। सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो व्यक्ति हिंदू समाज और संगठन के लिए निष्ठा से काम करता है, वही इस जिम्मेदारी के योग्य होता है।
कार्यक्रम के दौरान भागवत ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कहा कि इसे सभी वर्गों को विश्वास में लेकर बनाया जाना चाहिए, ताकि समाज में मतभेद न बढ़ें। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उन्होंने उम्मीद जताई कि यह भारत के हितों को ध्यान में रखकर किया गया होगा और देश को इससे नुकसान नहीं होगा।
घुसपैठ के मुद्दे पर RSS प्रमुख ने कहा कि सरकार को इस दिशा में अभी और काम करना है। पहचान कर निष्कासन की प्रक्रिया जरूरी है, जो पहले ठीक से नहीं हो पा रही थी, लेकिन अब धीरे-धीरे शुरू हुई है।
RSS की कार्यशैली पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य प्रचार नहीं, बल्कि समाज में संस्कार विकसित करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार दिखावे और फिर अहंकार को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए—सही समय पर और सीमित मात्रा में।
भाषा को लेकर उन्होंने साफ कहा कि संघ की कार्यप्रणाली में अंग्रेजी कभी मुख्य भाषा नहीं बनेगी। जहां जरूरत होती है वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मातृभाषा को प्राथमिकता देना जरूरी है। वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने के सवाल पर भागवत ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो इससे सम्मान की गरिमा और बढ़ेगी।
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सूरजकुंड मेले में बड़ा हादसा: झूला गिरने से पुलिस इंस्पेक्टर की मौत, 13 घायल; शाम को डिजाइनर गेट भी गिरा

Surajkund Fair: हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। मेले में लगा एक झूला अचानक गिर पड़ा। इस हादसे में पुलिस इंस्पेक्टर की मौके पर मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए। घायलों को निजी अस्पतालों और बादशाह खान सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे की सूचना मिलते ही DC आयुष सिन्हा मौके पर पहुंचे और पूरे मेला परिसर को खाली करा दिया गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झूला ऊपर से तेजी से नीचे गिरते हुए दिख रहा है। हादसे के बाद मेले में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
DC आयुष सिन्हा ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” हादसे में पलवल के चांदहट थाने के SHO जगदीश प्रसाद की भी झूले की चपेट में आने से मौत हो गई।
शाम को डिजाइनर गेट भी गिरा, एक घायल
इसी दिन शाम को मेले के गेट नंबर-2 के पास बना डिजाइनर गेट अचानक गिर पड़ा। बताया जा रहा है कि गेट पहले से ही झुका हुआ था। गेट गिरने से एक व्यक्ति घायल हो गया, हालांकि उसकी हालत गंभीर नहीं है। घटना के बाद मेला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर गेट का मलबा हटवाया।
39वां सूरजकुंड मेला 15 फरवरी तक
39वां अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला 31 जनवरी को शुरू हुआ था। इसका उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया था। मेला 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें भारत के 30 राज्यों के करीब 1150 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 46 देशों के कलाकार भी मेले में पहुंचे हैं।
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US ट्रेड ऑफिस का नया इंडिया मैप वायरल: PoK और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया, इसी बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement- ITA) का फ्रेमवर्क घोषित किया। इस घोषणा के साथ अमेरिकी ट्रेड ऑफिस (USTR) ने भारत का आधिकारिक मैप शेयर किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस मैप में पूरा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और चीन के कब्जे वाला अक्साई चिन भी शामिल है, को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया है।
अब तक अमेरिका और अधिकांश पश्चिमी देशों के सरकारी नक्शों में PoK और अक्साई चिन जैसे विवादित क्षेत्रों को अलग रंग या डॉटेड लाइनों से दर्शाया जाता रहा है। अमेरिका के पुराने मैप्स में भी PoK को भारत से अलग दिखाया गया था। लेकिन इस बार ट्रम्प प्रशासन के कार्यकाल में जारी किए गए इस मैप को भारत की सीमाओं को पूरी तरह मान्यता देने वाला माना जा रहा है- चाहे यह जानबूझकर किया गया हो या अनजाने में।
भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इस नक्शे को उसी रुख की अंतरराष्ट्रीय पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
अब समझिए भारत-अमेरिका ट्रेड डील का फ्रेमवर्क
भारत और अमेरिका ने इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट (ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका का औसत टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाएगा। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स हटाया गया। दोनों देशों ने जल्द फ्रेमवर्क लागू करने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। संयुक्त बयान के मुताबिक, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 से शुरू हुई भारत-अमेरिका BTA वार्ता को आगे बढ़ाएगा।
सरकार का दावा
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के मुताबिक, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (करीब 27.18 लाख करोड़ रुपए) के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोलेगा। इससे MSME, किसान और मछुआरे सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (45.30 लाख करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदेगा।
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