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PM Modi Rajya Sabha: जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना खिलेगा, राज्यसभा में बोले मोदी

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Prime Minister Modi fiercely attacked the opposition in the Rajya Sabha

PM Modi Rajya Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर आज राज्यसभा में अपना संबोधन दिया। इस दौरान विपक्ष ने अडानी-मोदी भाई भाई के नारों के साथ संबोधन के बीच में जमकर हंगामा किया। लेकिन इसके बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने गांधी-नेहरु परिवार के इतिहास से लेकर कांग्रेस सरकार की नीतियों तक पर सवाल उठाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करके गांधी परिवार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। आइए जानते हैं प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में भाषण की 10 बड़ी बातें।

1.जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में जैसे ही अपना संबोधन शुरू किया, विपक्षी सांसद सदन में हंगामा करने लगे। इस पर पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि ‘सदन में जो भी बात होती है, उसे देश गंभीरता से सुनता है और गंभीरता से लेता है। लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोगों की वाणी न सिर्फ सदन को, बल्कि देश को निराश करने वाली है।’ उन्होंने कहा कि ‘इस प्रकार की प्रवृत्ति के सदस्यों को यही कहूंगा कि कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाब। जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल। जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा। कमल खिलाने में प्रत्यक्ष या परोक्ष आपका जो भी योगदान है, इसके लिए मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं।’

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2. 60 साल के शासन में देश को गड्ढे ही गड्ढे दिए 

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कल अपने संबोधन में कहा था कि हमने 60 साल में देश को मजबूत बुनियाद दी। उन्होंने कहा था कि बुनियाद हमने बनाई, लेकिन उसका क्रेडिट मोदी ले रहा है। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि  2014 में आकर जब मैंने बारीकी से चीजों को देखने का प्रयास किया तो नजर आया कि कांग्रेस के परिवार ने 60 साल में गड्ढे ही गड्ढे कर दिए थे। उनका इरादा नेकी का होगा, लेकिन गड्ढे कर दिए थे।’ पीएम ने कहा कि उन्होंने ऐसी कार्यशैली और कल्चर बनाया कि एक भी चुनौती का परमानेंट सॉल्यूशन निकालने का न सोचा, न सूझा और न प्रयास किया। आज हम परमानेंट सॉल्यूशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’

3. नेहरु सरनेम रखने से इतना डर क्यों- प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘600 से ज्यादा योजनाएं गांधी-नेहरू के परिवार के नाम पर हैं। अगर अब किसी कार्यक्रम में नेहरू जी का नाम नहीं प्रयोग हुआ तो कुछ लोगों का खून गर्म हो जाता था, लेकिन मुझे ये समझ नहीं आता कि उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम रखने से डरता क्यों है। क्या शर्मिंदगी है नेहरू सरनेम रखने में। इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको और आपके परिवार को मंजूर नहीं है और आप हमारा हिसाब मांगते हो।

4. एक प्रधानमंत्री ने 50 चुनी हुई सरकारों को गिराया

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘जो लोग आज विपक्ष में बैठे हैं। उन्होंने राज्यों के अधिकारों को घज्जियां उड़ा दीं। मैं कच्चा-चिट्ठा खोलना चाहता हूं। जरा इतिहास उठाकर देख लीजिए वो कौन पार्टी थी, वो लोग कौन सत्ता में बैठे थे, जिन्होंने जिन्होंने आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा बार दुरुपयोग किया। 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया। वो लोग कौन थे, जिन्होंने आर्टिकल 356 का दुरुपयोग किया? वे लोग कौन हैं, जिन्होंने यह किया और चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया। एक प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 356 का 50 पर प्रयोग किया, वह नाम है इंदिरा गांधी।’

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5.पहले जिनको फायदा मिलता था, उनका चिल्लाना स्वाभाविक

पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ‘हमने सीधे जनधन खाते में लाभार्थियों को पैसे भेजे। हम नया इको सिस्टम लाए। जिन लोगों को पुराने इको सिस्टम के फायदे मिलते थे, उनका चिल्लाना स्वाभाविक है। पहले परियोजनाएं लटकाने, भटकाने का कल्चर था। हमने टेक्नोलॉजी का प्लेटफॉर्म तैयार किया और इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट को गति देने का काम किया। योजनाएं बनाने में महीनों लगते थे, आज सप्ताहभर में योजनाएं आगे बढ़ा दी जाती हैं।

6.जनधन, आधार और मोबाइल…ये हैं त्रि शक्ति

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने त्रिशक्ति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल… ये वो त्रिशक्ति है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में 27 लाख करोड़ रुपये DBT के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के खातों में गए हैं। इससे 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक रुपया…जो किसी इको-सिस्टम के हाथों में जा सकता था, वो बच गया। अब जिनको ये पैसा नहीं मिल पाया, उनका चिल्लाना स्वाभाविक है।

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7. पिछली सरकारों ने नॉर्थ-ईस्ट को किया अनदेखा

प्रधानमंत्री ने नॉर्थ ईस्ट का जिक्र करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथां लेते हुए कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट के गांवों में बिजली नहीं थी। इनके वोट बैंक नहीं थे इसलिए इनकी सरकार ने यहां बिजली पहुंचाने पर ध्यान नहीं दिया। हमने कहा कि हम मक्खन नहीं, पत्थर पर लकीर खींचेंगे। हमने 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचाई। खुशी है कि दूरदराज के गांवों को आजादी के इतने सालों बाद आशा की किरण दिखाई दी।’ मोदी ने आगे कहा, ‘पहले की सरकारों में कुछ घंटे बिजली आती थी। पहले गांव में एक खंबा गाड़ देते थे तो हर साल उसकी एनिवर्सिरी मनाते थे। हम आज 22 घंटे बिजली देने में सफल हुए हैं। हमने लोगों को उनके भाग्य पर नहीं छोड़ा।

8. कांग्रेस ने की छोटे किसानों की उपेक्षा- प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसानों का जिक्र करते हुए कहा, ‘किसानों के लिए पहले क्या नीति थी? ऊपर के कुछ वर्ग को संभाल लेना और उन्हीं से अपनी राजनीति चलाना ही लक्ष्य था। छोटे किसान उपेक्षित थे, उनकी आवाज कोई नहीं सुनता था। हमारी सरकार ने छोटे किसानों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्हें बैंकिंग से जोड़ा और आज साल में तीन बार किसान सम्मान निधि उनके खातों में जमा होती है। हमने मिलेट ईयर के लिए यूएन को लिखा। ये छोटे किसान उगाते हैं। जैसे श्रीफल का महत्व होता है, वैसे ही मिलेट को श्री अन्न का दर्जा मिले। इससे छोटे किसानों को मजबूती मिलेगी।

9. विपक्ष ने वैज्ञानिकों को किया बदनाम 

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प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोनाकाल में वैक्सीन को लेकर हुई राजनीति पर भी विपक्ष को जमकर निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ‘वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों को नीचा दिखाने के लिए कितने प्रयास हुए। आर्टिकल लिखे गए, टीवी में बोला गया। ये हमारे वैज्ञानिकों को बदनाम करने का मौका नहीं छोड़ते। इन्हें देश की चिंता नहीं है, अपनी राजनीति की चिंता है। हमें खुशी है कि आज 100 करोड़ से ज्यादा मोबाइल मेरे देश के हाथ में है। कभी इम्पोर्ट करते थे, गर्व है आज एक्सपोर्ट कर रहे हैं।’

10.’एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है’

प्रधानमंत्री मोदी के तकरीबन डेढ़ घंटे के संबोधन के दौरान विपक्ष लगातार नारेबाजी और हंगामा करता रहा। जिस पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि देश की जनता की रोजी रोटी के लिए हमने काम किया। 140 करोड़ लोगों के लिए हमारी सरकार काम कर ही है। देश देख रहा है कि एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है। अरे नारे बोलने के लिए भी लोग बदलने पड़ रहे हैं। मैं घंटेभर से जवाब दे रहा हूं, रुका नहीं रहा।  देश के लिए जीता हूं, देश के लिए कुछ करने के लिए निकला हूं। इसलिए राजनीतिक खेल खेलने वालों के अंदर अंदर हौसला नहीं है। वे बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।

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Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन: बारामती में चार्टर्ड प्लेन क्रैश, 5 की मौत

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Ajit Pawar Death: Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar passes away; chartered plane crashes in Baramati, 5 killed

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (66) का बुधवार सुबह एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया। यह दुर्घटना सुबह 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुई, जब मुंबई से आ रहा उनका चार्टर्ड विमान रनवे से पहले ही क्रैश हो गया और उसमें आग लग गई। हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के अलावा उनके एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में चार चुनावी रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे। वे सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुए थे।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि पायलट ने पहले लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे साफ नजर नहीं आने पर विमान को दोबारा ऊपर ले जाया गया। इसके बाद रनवे-11 पर दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया गया, इसी दौरान विमान रनवे से पहले गिर गया। हादसे से पहले कोई इमरजेंसी या ‘मेडे’ कॉल नहीं दी गई। अजित पवार का अंतिम संस्कार 29 जनवरी 2026 को होगा।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बारामती पहुंच गए। राज्य सरकार ने आज स्कूलों में छुट्टी और 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती में किया जाएगा। उनके चाचा शरद पवार, पत्नी सुनेत्रा पवार, दोनों बेटे और बहन सुप्रिया सुले भी बारामती पहुंच चुकी हैं।

इधर, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। एक टीम दिल्ली में विमान की ऑपरेटर कंपनी VSR वेंचर्स के दफ्तर पहुंची है, जबकि दूसरी टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है। कंपनी ने दावा किया है कि विमान में कोई तकनीकी खामी नहीं थी और पायलट को 16 हजार घंटे का उड़ान अनुभव था।

अजित पवार की पार्टी एनसीपी, भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार का हिस्सा है। पार्टी के पास कुल 41 विधायक हैं। पवार स्वयं उपमुख्यमंत्री थे, जबकि पार्टी के 7 कैबिनेट और 1 राज्य मंत्री सरकार में शामिल हैं।

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UGC New Rules Protest: UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज, दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा

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UGC New Rules Protest: Protests against the new UGC rules intensify across the country, security beefed up in Delhi

UGC New Rules n India: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण समाज का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शन कारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग की गई।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों- लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई।

रायबरेली में अनोखा विरोध

रायबरेली में विरोध के दौरान भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना आक्रोश जाहिर किया। यह विरोध सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

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उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

मशहूर कवि कुमार विश्वास का तंज

UGC के नियमों को लेकर कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा- “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।” उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

शिक्षा मंत्री का बयान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी को भी नए नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

UGC के नए नियमों के खिलाफ वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में नियमों पर रोक लगाने, सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और इक्विटी हेल्पलाइन सुविधाएं देने की मांग की गई है।

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Padma Awards 2026: धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, शिबु सोरेन-अलका याज्ञनिक को पद्म भूषण, रोहित शर्मा समेत 113 को पद्मश्री

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Padma Awards 2026: 131 personalities announced for Padma Awards

Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इस साल कुल 131 हस्तियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा जाएगा। इनमें 5 लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान देने का ऐलान किया गया है।

5 हस्तियों को पद्म विभूषण

सरकार ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र समेत पांच प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है।

पद्म भूषण पाने वालों में शिबु सोरेन और अलका याज्ञनिक

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबु सोरेन और मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक सहित कुल 13 हस्तियों को इस वर्ष पद्म भूषण के लिए चुना गया है।

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रोहित शर्मा, हरमनप्रीत कौर समेत 113 को पद्मश्री

खेल, कला, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 113 हस्तियों को पद्मश्री देने का फैसला किया गया है। इस सूची में प्रमुख नामों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती को भी पद्मश्री

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हिरानार गांव की सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। बुधरी ताती ने महज 15 वर्ष की उम्र में समाज सेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने बस्तर अंचल में महिलाओं को जागरूक और शिक्षित करने के साथ-साथ वृद्धा आश्रम और अनाथ आश्रम भी संचालित किए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने बस्तर संभाग के करीब 545 गांवों की पदयात्रा की। समाज सेवा के प्रति समर्पण के चलते उन्होंने विवाह नहीं किया। अब तक वे 22 पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं, जिनमें 3 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं।

मध्यप्रदेश से भी कई हस्तियां सम्मानित

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मध्यप्रदेश से भोपाल के प्रख्यात लेखक कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार, मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। भगवानदास रैकवार बुंदेली युद्ध कला के प्रमुख संरक्षक माने जाते हैं। उन्होंने दशकों तक युवाओं को पारंपरिक मार्शल आर्ट सिखाकर इस कला को विलुप्त होने से बचाया है।

तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं पद्म पुरस्कार

पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल, उद्योग और सिविल सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिए जाते हैं।

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Tamilnadu: तमिल भाषा शहीद दिवस पर स्टालिन का बड़ा बयान, बोले- तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी जगह नहीं, थोपने का करेंगे विरोध

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Tamil Nadu: Stalin makes a major statement on Tamil Language Martyrs' Day, saying – there will never be a place for Hindi in Tamil Nadu, will oppose its imposition

TamilNadu Hindi controversy: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को तमिल भाषा शहीद दिवस के अवसर पर राज्य के भाषा आंदोलन से जुड़े शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी कोई जगह नहीं होगी और राज्य हिंदी थोपने की किसी भी कोशिश का लगातार विरोध करता रहेगा। सीएम स्टालिन ने कहा कि तमिल भाषा के प्रति प्रेम कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब-जब हम पर हिंदी थोपी गई, उतनी ही मजबूती से उसका विरोध किया गया।” उन्होंने तमिल भाषा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को नमन करते हुए कहा कि भाषा के नाम पर अब और किसी की जान नहीं जानी चाहिए।

X पर वीडियो शेयर कर भाषा आंदोलन को किया याद

तमिल भाषा शहीद दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक क्षण दिखाए गए हैं।

स्टालिन ने डीएमके के संस्थापक नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई समुदायों की पहचान और अधिकारों की रक्षा की।

हिंदी को लेकर केंद्र और राज्य में लंबे समय से टकराव

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तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार के बीच हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन लगातार केंद्र की तीन भाषा नीति (Three Language Policy) का विरोध करते रहे हैं। पिछले साल मार्च में स्टालिन सरकार ने राज्य बजट 2025-26 के प्रतीक चिह्न से रुपये का सिंबल ‘₹’ हटाकर उसकी जगह तमिल अक्षर ‘ரூ’ शामिल किया था। इस कदम को हिंदी और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। स्टालिन का कहना है कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) से राज्य को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिला है।

हिंदी पर प्रतिबंध को लेकर भी हो चुकी है तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार अक्टूबर में विधानसभा में राज्य में हिंदी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही थी, हालांकि यह बिल पेश नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि सरकार हिंदी के होर्डिंग्स, साइनबोर्ड, फिल्मों और गानों पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर चुकी है। इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ इमरजेंसी बैठक भी बुलाई गई थी, जिसके बाद हिंदी बैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।

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Weather: उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, हिमालय में सीजन की पहली बर्फबारी

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Weather: Rain in many states of North India, first snowfall of the season in the Himalayas

Weather Update: उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने से मौसम पूरी तरह बदल गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में देर रात से बारिश हो रही है। कई इलाकों में तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और ठंड बढ़ गई है। हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। इससे करीब साढ़े तीन महीने से चला आ रहा ड्राई स्पेल खत्म हो गया है।

जम्मू-कश्मीर के मैदानी और पहाड़ी जिलों में भी लगातार बर्फबारी हो रही है। श्रीनगर एयरपोर्ट पर करीब 4 इंच तक बर्फ जम गई, जिसके चलते शुक्रवार के लिए सभी फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं। श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे को भी बंद कर दिया गया है। नवयुग टनल के पास ट्रैफिक रोक दिया गया है, जबकि मुगल रोड और सिंथन रोड भी बंद हैं। कटरा में भारी बर्फबारी के चलते वैष्णो देवी यात्रा रोक दी गई है। वहीं, एहतियातन राजौरी, पुंछ और कठुआ जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

26 जनवरी को दूसरा स्ट्रॉन्ग सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को दूसरा और ज्यादा मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है। इसके असर से उत्तर भारत के करीब 9 राज्यों में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

वेस्टर्न डिस्टरबेंस क्या है

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वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं और बादलों का सिस्टम होता है। इसके सक्रिय होने पर पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इससे तापमान गिरता है और पाला व कोल्डवेव जैसे हालात बनते हैं।

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