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Lebanon: पेजर में धमाकों के बाद अब वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और सोलर पैनल में ब्लास्ट, 32 की मौत, हजारों घायल

Lebanon:लेबनान में मंगलवार को हिजबुल्ला सदस्यों के पेजर्स में हुए सीरियल ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि धमाकों में 2700 से अधिक लोग घायल भी हुए थे। बुधवार को एक बार फिर वॉकी-टॉकी, लैपटॉप, सोलर पैनल और फिंगर प्रिंट स्कैनर में धमाके हुए। जिसमें अब तक 20 लोगों की मौत और 450 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी एपी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक पेजर विस्फोट में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के दौरान ये धमाके किए गए।
जानकारी के मुताबिक बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में 15 से 20 विस्फोट हुए और दक्षिणी लेबनान में 15 से 20 विस्फोट हुए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि संचार उपकरण विस्फोट में 450 से अधिक घायल हो गए हैं। सिविल डिफेंस ने बताया कि वायरलेस डिवाइस में विस्फोट के बाद घरों और स्थानीय व्यवसायों के साथ-साथ वाहनों और मोटर वाहनों में भी आग लग गई थी।
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Middle East tension: ट्रंप की धमकी, आज रात ‘पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है’, ईरान का पलटवार- मिडिल ईस्ट से बाहर भी करेंगे हमला

Trump Iran warning: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।” ट्रम्प ने कहा कि वह ऐसा नहीं चाहते, लेकिन हालात उस दिशा में जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता में बदलाव हो चुका है और अब वहां ज्यादा समझदार व कम कट्टर सोच वाले लोग हैं। उन्होंने दावा किया कि दुनिया एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है और 47 सालों से जारी “ज्यादती, भ्रष्टाचार और मौत का सिलसिला” खत्म हो सकता है। ट्रम्प ने अंत में कहा, “ईश्वर ईरान के लोगों की रक्षा करे।”
ईरान की कड़ी चेतावनी
ट्रम्प के बयान के बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अब उनका जवाब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। गार्ड्स ने अपने बयान में कहा कि वे अमेरिकी और सहयोगी देशों के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं, जिससे उन्हें तेल और गैस संसाधनों से दूर किया जा सके।
‘संयम खत्म’, बाहर भी हो सकते हैं हमले
ईरान ने कहा कि अब तक उसने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को देखते हुए संयम बरता था, लेकिन अब वह खत्म हो चुका है। गार्ड्स ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कोई बड़ा कदम उठाया, तो इसका जवाब मिडिल ईस्ट के बाहर भी दिया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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Israel-Iran Tension: साउथ पार्स गैस फील्ड पर फिर मिसाइल हमला, ईरान ने दी ग्लोबल सप्लाई ठप करने की धमकी

Israel-Iran Tension: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इजराइल ने सोमवार को ईरान की साउथ पार्स गैस फील्ड पर दोबारा मिसाइल हमला किया। यह दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड मानी जाती है, जो ईरान और कतर के बीच फैली हुई है। इससे पहले 18 मार्च को भी इस गैस फील्ड को निशाना बनाया गया था। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें इस हमले की जानकारी नहीं थी और ऐसे हमले नहीं होने चाहिए। इधर सोमवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास भी धमाकों की आवाज सुनी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया।
ग्लोबल सप्लाई पर खतरे की चेतावनी
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले बढ़े तो वह वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अहम समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि किसी भी कार्रवाई का जवाब केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ-साथ बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते भी खतरे में आ सकते हैं।
ट्रम्प का अल्टीमेटम
यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खुला रखने का अल्टीमेटम दिया है और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोही रेड सी में जहाजों पर हमले की धमकी दे चुके हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
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Middle East tension: इटली ने अमेरिका को सैन्य अड्डा देने से किया इनकार, ईरान पर US एयरस्ट्राइक से बढ़ा तनाव

Middle East tension: यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच बढ़ते तनाव के बीच इटली ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। इटली ने अमेरिका को अपने सिसिली द्वीप पर स्थित सिगोनेला सैन्य अड्डा के इस्तेमाल की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी बॉम्बर विमान इस बेस पर उतरकर मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना चाहते थे, लेकिन इटली को इस योजना की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। न ही अमेरिका ने औपचारिक रूप से अनुमति मांगी और न ही सैन्य स्तर पर समन्वय किया। इस वजह से इटली ने तुरंत इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे पहले स्पेन भी इसी तरह का कदम उठा चुका है। स्पेन ने ईरान से जुड़े संभावित सैन्य अभियान के बीच अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।
इसी बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि वे ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं होने देना चाहते। लावरोव ने कहा कि क्षेत्र में “रेजीम चेंज” की चर्चा के पीछे असली मकसद तेल और गैस संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाना है।
वहीं अमेरिका ने ईरान में सैन्य कार्रवाई भी तेज कर दी है। अमेरिका ने इस्फहान में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार रात किए गए इस हमले में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ। हमले के बाद डिपो में मौजूद हथियारों में कई विस्फोट हुए, जिससे इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो भी शेयर किया है।
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Asim munir iran statement: पाक सेना प्रमुख का बयान, ‘ईरान पसंद है तो वहीं चले जाएं’, शिया समुदाय में नाराजगी

Asim munir iran statement: पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रावलपिंडी में इफ्तार कार्यक्रम के दौरान मुनीर द्वारा ईरान को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अब मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की बदलती विदेश नीति से भी जुड़ गया है। आसिम मुनीर ने गुरुवार को शिया धर्मगुरुओं से कहा कि जो लोग ईरान से इतना प्यार करते हैं, वे वहां चले जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान पहले ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखता था, लेकिन अब वह तेजी से Saudi Arabia और उसके सहयोगियों के करीब जाता दिख रहा है। मुनीर का बयान इसी बदलते कूटनीतिक रुख का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने आधिकारिक तौर पर कहा कि आसिम मुनीर ने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और सांप्रदायिक तनाव से बचने की अपील की थी। लेकिन जमीनी स्तर पर शिया समुदाय इस दावे से सहमत नहीं है।
पाकिस्तान में 15% शिया आबादी
पाकिस्तान में ईरान के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी रहती है। कुल आबादी का करीब 15% (लगभग 3.77 करोड़) शिया मुसलमान हैं। समुदाय का कहना है कि इस तरह के बयान उनकी पहचान और देशभक्ति दोनों पर सवाल उठाते हैं। यह विवाद उस समय सामने आया है, जब अली खामनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन हुए थे।
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Iran War News: ईरान जंग पर ट्रम्प का दावा, ‘लगभग सब तबाह’, IEA 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारेगा

Israel Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ चल रही जंग “बेहतरीन तरीके से” आगे बढ़ रही है और यह जल्द खत्म हो सकती है। अमेरिकी मीडिया को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान को उम्मीद से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और कई अहम सैन्य व रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमलों के बाद वहां निशाना बनाने के लिए अब लगभग कुछ भी नहीं बचा है।
इजराइल बोला- जंग की कोई तय समय सीमा नहीं
इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई की कोई तय समयसीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते। काट्ज के मुताबिक यह ऑपरेशन जरूरत पड़ने तक जारी रहेगा और इसका समय पहले से तय नहीं किया गया है।
IEA बाजार में उतारेगा 40 करोड़ बैरल तेल
वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका के बीच International Energy Agency ने घोषणा की है कि उसके 32 सदस्य देश अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करेंगे। यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा तेल रिलीज माना जा रहा है। IEA के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने कहा कि यह कदम युद्ध के कारण तेल बाजार में आई आपूर्ति बाधा को दूर करने के लिए उठाया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित
एजेंसी के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद Strait of Hormuz से तेल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। युद्ध से पहले के मुकाबले इस रूट से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात अब 10% से भी कम रह गया है। IEA ने कहा कि आपातकालीन भंडार से तेल सदस्य देशों की जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
पहले भी कई बार जारी किया गया रणनीतिक तेल
1974 में स्थापित IEA के इतिहास में यह छठी बार है जब सदस्य देश मिलकर रणनीतिक भंडार से तेल जारी कर रहे हैं। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के हरिकेन कैटरीना, 2011 के लीबिया संकट और 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था।IEA के 32 सदस्य देशों में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं। भारत 2017 से इसका एसोसिएट सदस्य है।





















