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KVS: छत्तीसगढ़ को मिले चार नए केंद्रीय विद्यालय, देशभर में 85 नए केंद्रीय विद्यालय खोले जाएंगे

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KVS: Chhattisgarh gets four new Kendriya Vidyalayas, 85 new Kendriya Vidyalayas will be opened across the country

Raipur: देशभर में 85 नए केंद्रीय विद्यालय और 28 नवोदय विद्यालय खुलेंगे। इसमें से छत्तीसगढ़ के चार नए केंद्रीय विद्यालय मिले हैं। प्रदेश के लिए नए स्वीकृत केन्द्रीय विद्यालय मुंगेली, सूरजपुर, बेमेतरा और जांजगीर-चांपा जिले के हसौद में प्रारंभ होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में चार नए केन्द्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी पर प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में नए केंद्रीय विद्यालय के प्रारंभ होने से राज्य के विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा है कि केंद्रीय विद्यालय अभिनव शिक्षण पद्धति और नवीनतम अधोसंरचना को लेकर लोकप्रिय है। छत्तीसगढ़ में इन विद्यालयों के प्रारंभ होने से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज आर्थिक मामलों के मंत्रिमण्डल समिति द्वारा देशभर में 85 नए केंद्रीीय विद्यालय (KV) खोलने की मंजूरी दी गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर ,झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल,उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, तमिल नाडु, राजस्थान, उत्तराखंड, ओडिशा , महाराष्ट्र समेत दिल्ली में बनाए जाएंगे। इन सभी राज्यों के कई जिलों में नए KV बनाए जाने को लेकर लिस्ट शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी की गई है।

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Chhattisgarh: दक्षिण बस्तर में माओवाद की कमर टूटी: 1.61 करोड़ के इनामी 51 कैडरों ने किया सरेंडर

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Chhattisgarh: Maoism's back broken in South Bastar: 51 cadres carrying rewards of Rs 1.61 crore surrender

Jagdalpur: छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर अंचल में शांति और विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। बीजापुर और सुकमा जिलों में कुल 51 इनामी माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के तहत बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

सुकमा में ऑटोमैटिक हथियारों के साथ सरेंडर

सुकमा जिले में शनिवार को 7 पुरुष और 14 महिला माओवादी सरेंडर करने पहुंचे। इन पर कुल 76 लाख रुपए का इनाम था। आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने एके-47, इंसास राइफल, BGL लॉन्चर समेत बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री पुलिस को सौंप दी। सरेंडर करने वालों में DVCM सदस्य सोढ़ी महेश, पोडियम राजू और कारम ममता भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सुकमा एसपी किरण चव्हाण के मुताबिक ये कैडर दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) और इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय थे।

बीजापुर में 30 सक्रिय कैडरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

वहीं, बीजापुर जिले में साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 20 महिला और 10 पुरुष माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर कुल 85 लाख रुपए का इनाम घोषित था। माओवादियों ने कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक पुलिस को सौंपे।

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कई हिंसक घटनाओं में थे शामिल

सरेंडर करने वाले माओवादी सुरक्षा बलों पर हमलों, ग्रामीण इलाकों में हिंसक वारदात, सड़क और निर्माण कार्यों में बाधा, हथियार-विस्फोटक परिवहन, संगठन विस्तार और प्रशिक्षण गतिविधियों जैसी गंभीर नक्सली घटनाओं में संलिप्त रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय: विकास और विश्वास ही स्थायी समाधान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हथियार छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताना इस बात का प्रमाण है कि सुशासन, सुरक्षा और समावेशी विकास ही किसी भी क्षेत्र के स्थायी भविष्य की नींव होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से भटके युवाओं को मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिला है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देगी।

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बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पूना मारगेम अभियान से माओवादी संगठन की जड़ें कमजोर हो रही हैं और शेष कैडरों से हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

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BastarPandum: राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर पंडुम की प्रदर्शनी देखी, ढोकरा से लेकर जनजातीय व्यंजनों तक लिया जायजा

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Bastar Pandum: President Murmu visited the Bastar Pandum exhibition, taking stock of everything from Dhokra to tribal cuisine

Bastar Pandum: बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और बस्तर की पहचान को दर्शाती भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने आयोजन स्थल पर लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और वहां मौजूद कारीगरों व स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत कर प्रदर्शित कलाओं और उत्पादों के बारे में जानकारी ली।

प्रदर्शनी में ढोकरा हस्तशिल्प, टेराकोटा, लकड़ी की नक्काशी, सीसल और बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय आभूषण, पारंपरिक वेशभूषा, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला और स्थानीय व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। राष्ट्रपति ने इन कलाओं को आदिवासी विरासत को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया।

ढोकरा कला के स्टॉल पर राष्ट्रपति विशेष रूप से रुकीं। कारीगरों ने उन्हें लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक के बारे में बताया, जिसके जरिए पूरी तरह हाथ से धातु की आकृतियां तैयार की जाती हैं। इन कृतियों में प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई देती है। इसके अलावा मिट्टी से बनी टेराकोटा आकृतियों ने लोक आस्था और पारंपरिक विश्वासों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

लकड़ी की नक्काशी में सागौन, साल और बीजा लकड़ी से तैयार मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं बांस और गढ़े हुए लोहे से बनी उपयोगी व सजावटी वस्तुओं को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया। जनजातीय आभूषणों के स्टॉल में चांदी, मोती, शंख और विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए आभूषण प्रदर्शित किए गए, जो आदिवासी समाज की पहचान और सामाजिक परंपराओं से जुड़े हैं।

जनजातीय वेशभूषा स्टॉल में दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा जनजातियों की पारंपरिक पोशाकें युवक-युवतियों ने पहनकर प्रस्तुत कीं। वहीं तुम्बा कला के तहत सूखी लौकी से बने पारंपरिक वाद्य यंत्र और सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहीं।

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जनजातीय चित्रकला के माध्यम से बस्तर के जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को रंगों और प्रतीकों के जरिए उकेरा गया। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, तीखुर सहित पारंपरिक भोजन और लांदा-सल्फी जैसे पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।

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Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 7 फरवरी को करेंगी ‘बस्तर पंडुम-2026’ का शुभारंभ, राज्यपाल- CM समेत मंत्री, सांसद रहेंगे मौजूद

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Bastar Pandum 2026: President Draupadi Murmu will inaugurate 'Bastar Pandum-2026' on February 7; Governor, CM, ministers and MPs will be present

Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 7 फरवरी 2026 को आदिवासी संस्कृति के महोत्सव ‘बस्तर पंडुम-2026’ का शुभारंभ करेंगी। तीन दिवसीय यह संभाग स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन 9 फरवरी तक चलेगा। बस्तर पंडुम जनजातीय जीवनशैली, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और प्रदर्शित करने का बड़ा मंच है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय एवं लोक संस्कृति महोत्सव का शुभारंभ समारोह 7 फरवरी को सुबह 11 बजे जगदलपुर में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका करेंगे।

मुख्यमंत्री–उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रीमंडल रहेगा मौजूद

शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

12 विधाओं में दिखेगी बस्तर की सांस्कृतिक विरासत

बस्तर अंचल में पंडुम परंपरागत रूप से पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष इसे और अधिक भव्य स्वरूप दिया गया है। आयोजन में जनजातीय समाज की 12 सांस्कृतिक विधाओं की प्रस्तुति होगी। युवा कलाकारों के माध्यम से जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प और जनजातीय चित्रकला का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और बस्तर की वन औषधियों की जानकारी भी दी जाएगी।

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राष्ट्रीय पहचान की ओर बस्तर की संस्कृति

बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को बढ़ावा देने वाला उत्सव है। इस महोत्सव के जरिए बस्तर अंचल की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में सांसद भोजराज नाग और महेश कश्यप, विधायक किरण सिंहदेव, लता उसेण्डी, विक्रम उसेण्डी, नीलकंठ टेकाम, आशाराम नेताम, चैतराम अटामी, विनायक गोयल, सावित्री मनोज मंडावी, लखेश्वर बघेल, विक्रम मंडावी, महापौर संजय पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल होंगे।

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Chhattisgarh: बिलासपुर एयरपोर्ट को ऑल वेदर ऑपरेशन की मंजूरी, छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई रफ्तार: CM साय

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Chhattisgarh: Bilaspur Airport gets approval for all-weather operations, Chhattisgarh's development will gain new momentum: CM Sai

Bilaspur Airport: भारत सरकार के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने बिलासपुर एयरपोर्ट को बड़ी सौगात दी है। एयरपोर्ट को 3C-VFR श्रेणी से अपग्रेड कर 3C ऑल वेदर ऑपरेशन (IFR) की मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस स्वीकृति के बाद अब बिलासपुर एयरपोर्ट पर हर मौसम में विमान संचालन संभव हो सकेगा। इससे क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक हवाई सेवाएं मिलेंगी।

व्यापार, उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

सीएम साय ने कहा कि ऑल वेदर ऑपरेशन की सुविधा मिलने से बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री का जताया आभार

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मुख्यमंत्री ने इस अहम निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू के प्रति प्रदेश की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में आधुनिक बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है।

राष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर मजबूत होगी छत्तीसगढ़ की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि बिलासपुर एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई दिशा देगी और प्रदेश को राष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

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आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ: बस्तर पण्डुम 2026 में 54 हजार से ज्यादा पंजीयन, दंतेवाड़ा सबसे आगे

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Mahakumbh of tribal culture: Over 54,000 registrations for Bastar Pandum 2026, Dantewada leads

Bastar Pandum 2026: बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है। जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।

इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुंच गया है। बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार

बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन ।

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65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन

इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

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