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Chhattisgarh: मुंबई में टेक्सटाइल और स्टील उद्योग के दिग्गजों से मिलेंगे सीएम साय, बॉम्बे एग्ज़िबिशन सेंटर में दो दिवसीय कार्यक्रमों में रहेंगे विशिष्ट अतिथि

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 23 और 24 अप्रैल को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित वस्त्र एवं इस्पात उद्योग के दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजनों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री साय इन अवसरों पर राज्य की नई औद्योगिक नीति, निवेश की संभावनाएं और अधोसंरचना विकास के विजन को देशभर के उद्योगपतियों एवं नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। ये आयोजन मुंबई के गोरेगांव स्थित बॉम्बे एग्ज़िबिशन सेंटर में होंगे।
पहला दिन: टेक्सटाइल सेक्टर के निवेशकों से संवाद- 23 अप्रैल
मुख्यमंत्री साय 23 अप्रैल को CMAI Fab Show में भाग लेंगे, जिसे क्लोथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) द्वारा आयोजित किया गया है। यह शो देश के वस्त्र उद्योग से जुड़े दिग्गजों का प्रमुख प्लेटफॉर्म है, जहां उत्पादन, निर्यात और ब्रांडिंग से जुड़े प्रतिष्ठित प्रतिनिधि शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री इस मंच से छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में वस्त्र उद्योग के लिए उपलब्ध विशेष सुविधाओं, प्रोत्साहनों और निवेश के अवसरों की जानकारी साझा करेंगे। इस दौरान कुछ प्रमुख कंपनियों के साथ निवेश समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर की भी संभावना है।
दूसरा दिन: प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में होगा छत्तीसगढ़ का प्रस्तुतीकरण- 24 अप्रैल
मुख्यमंत्री साय 24 अप्रैल को इंडिया स्टील 2025 के उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत इस्पात उद्योग के लिए विकसित अधोसंरचना, नवाचार, और दीर्घकालिक योजनाओं पर प्रकाश डालेंगे। इसी दिन छत्तीसगढ़ राउंड टेबल मीटिंग का आयोजन भी होगा, जिसमें मुख्यमंत्री संभावित निवेशकों के साथ सीधी बातचीत करेंगे। इस बैठक में औद्योगिक क्लस्टर्स, लॉजिस्टिक सपोर्ट, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम, और अनुकूल श्रमिक नीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राज्य पवेलियन में झलकेगा नया छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ स्टेट पवेलियन का भी भ्रमण करेंगे, जहां राज्य की औद्योगिक अधोसंरचना, नीतिगत प्रोत्साहन, और निवेश के बहुआयामी अवसरों की जानकारी मिलेगी। यह पवेलियन निवेशकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बॉम्बे एग्ज़िबिशन सेंटर में होगा मीडिया से संवाद
मुख्यमंत्री साय 23 और 24 अप्रैल को दोपहर 1 बजे बॉम्बे एग्ज़िबिशन सेंटर में मीडिया से संवाद करेंगे। वे इस दौरे के प्रमुख उद्देश्यों, राज्य की नई औद्योगिक नीति की विशेषताओं और निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा करेंगे।
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Chhattisgarh: नवा रायपुर में दूसरे SEZ को मंजूरी, 1300 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब हाई-टेक उद्योगों के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। नवा रायपुर में दूसरे विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंजूरी मिलने के साथ ही राज्य में पहला सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र स्थापित होने जा रहा है।
Polymatech Electronics Limited को नवा रायपुर में 10.13 हेक्टेयर क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंजीनियरिंग आधारित SEZ स्थापित करने की स्वीकृति मिली है। यहां सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
यह परियोजना इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसके जरिए छत्तीसगढ़ तकनीक आधारित और उच्च मूल्य वाले उद्योगों की नई दुनिया में कदम रखेगा। इससे राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी और नवा रायपुर आधुनिक विनिर्माण एवं टेक्नोलॉजी निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
1300 से ज्यादा रोजगार के अवसर
सरकार के अनुसार इस परियोजना से अगले पांच वर्षों में 1300 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इससे राज्य के युवाओं को हाई-टेक इंडस्ट्री में काम करने का मौका मिलेगा और तकनीकी कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में बन रहे निवेश-अनुकूल माहौल का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी व्यवस्था और उद्योग हितैषी नीतियों के जरिए भविष्य के उद्योगों के लिए मजबूत वातावरण तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा, “सेमीकंडक्टर तकनीक भविष्य की जरूरत है। नवा रायपुर में पहला सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र केवल उद्योग की शुरुआत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के तकनीकी भविष्य की मजबूत नींव है।”
राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी पहचान
भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की LEADS 2025 रैंकिंग में छत्तीसगढ़ को स्थलरुद्ध राज्यों की श्रेणी में “हाई परफॉर्मर” माना गया है। यह राज्य की मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, औद्योगिक संपर्क और निर्यात क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नवा रायपुर का यह नया SEZ छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
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New Delhi: लाल किला मैदान में गूंजा जनजातीय गौरव, CM साय बोले- दुनिया को प्रकृति संग विकास सिखा सकता है आदिवासी समाज

New Delhi: देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान का भव्य संगम देखने को मिला। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। उनके साथ मंत्री केदार कश्यप, और रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा लाल किला मैदान जनजातीय संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब आदिवासी समाज का जीवन दर्शन मानवता को प्रकृति-सम्मत और टिकाऊ विकास का रास्ता दिखा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा और छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति और भाषाओं के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के जरिए जनजातीय प्रतिभा और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माहौल को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया। मांदर और ढोल की गूंज के बीच लाल किला मैदान भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बन गया।
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Chhattisgarh: नवा रायपुर को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने की तैयारी, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विकास परियोजनाओं का लिया जायजा

Nava Raipur: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने शुक्रवार को नवा रायपुर में चल रहे बड़े विकास कार्यों का निरीक्षण कर विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे l
निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री ने रेलवे ओवरब्रिज, प्रवासी पक्षियों के लिए विकसित किए जा रहे नेस्टिंग आइलैंड, सेक्टर-10 की सड़कों, वर्किंग वुमन हॉस्टल, पीपल गार्डन शहरी वन (पीपल कुंज), सीबीडी आईटी बिल्डिंग, कम्पोजिट आयोग भवन, एनटीपीसी कार्यालय एवं ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फेयर ग्राउंड स्टेशन और श्रमिक कैंप जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का जायजा लिया।
वित्त मंत्री ने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए अधोसंरचना परियोजनाओं का गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा होना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और जनसुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से नवा रायपुर में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, खेल अधोसंरचना मजबूत होगी और डिजिटल व प्रशासनिक सेवाओं को भी नई मजबूती मिलेगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं शहर को ग्रीन और स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान दिलाएंगी।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, सरकार ने कहा- अफवाहों से बचें, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कमी की खबरों को अफवाह बताते हुए लोगों से पैनिक खरीदारी नहीं करने की अपील की है। राज्य में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सभी जिलों में नियमित सप्लाई जारी है। खाद्य विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 3 करोड़ 94 लाख 7 हजार 700 लीटर पेट्रोल और 8 करोड़ 8 लाख 83 हजार लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है। राज्यभर में 2516 पेट्रोल पंपों के जरिए आम उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति की जा रही है।
सरकार ने बताया कि रबी फसल की कटाई और खरीफ सीजन की तैयारी के कारण डीजल की मांग बढ़ी है। इसे देखते हुए ऑयल कंपनियों के लखौली और मंदिर हसौद (रायपुर) तथा गोपालपुर (कोरबा) स्थित डिपो से जिलों को लगातार ईंधन सप्लाई की जा रही है। 22 मई 2026 को ही प्रदेश को 21 लाख 83 हजार लीटर पेट्रोल और 1 करोड़ 29 लाख 75 हजार लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। इसके साथ प्रतिदिन नियमित आपूर्ति भी जारी है।
ईंधन उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा के लिए खाद्य सचिव ने 20 मई को ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इसमें निर्देश दिए गए कि जिन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक कम हो रहा हो, वहां तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। राज्य शासन ने 22 मई 2026 से सभी पेट्रोल और डीजल पंपों पर ड्रम और जरीकेन में ईंधन देने पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि किसानों और कलेक्टर द्वारा चिन्हित अत्यावश्यक सेवाओं को इससे छूट दी गई है।
सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रम में आकर अतिरिक्त खरीदी और संग्रहण न करें। जरूरत के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
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Chhattisgarh: रुद्री में बनेगा भव्य रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर, 20 करोड़ से बदलेगी तस्वीर

Dhamtari: धमतरी जिले के रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर को अब नई पहचान मिलने जा रही है। लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से यहां भव्य रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जो धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम बनेगा।
भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है। खास बात यह है कि मंदिर की मूल संरचना और आध्यात्मिक गरिमा को बिना किसी नुकसान के संरक्षित रखा जाएगा।
कॉरिडोर के डिजाइन में पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाएगा। परिसर में शिखर, त्रिशूल, ओम् प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, नंदी प्रतिमा और दीप स्तंभ जैसे पारंपरिक तत्व शामिल होंगे। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग और पत्थर आधारित फिनिश मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक स्वरूप देंगे।
परियोजना के तहत श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए चौड़े पैदल मार्ग, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप और सुव्यवस्थित प्रवेश-निकास द्वार विकसित किए जाएंगे। साथ ही डिजिटल सूचना स्क्रीन, प्रसाद और स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, विश्राम क्षेत्र, शिशु आहार कक्ष, स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए परिसर में एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क भी लगाए जाएंगे। वहीं वृद्धजनों और दिव्यांगों के लिए बाधारहित रैम्प आधारित आवागमन की व्यवस्था की जाएगी।
घाट क्षेत्र का भी विशेष विकास होगा। यहां सुरक्षित सीढ़ियां, रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, ओपन स्टेज, रिवर फ्रंट कॉटेज और भविष्य की मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएं इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बनाएंगी।
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, हरित क्षेत्र विकास और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि यह परियोजना धमतरी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
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