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सेंट्रल स्कूल की छात्रा की गला रेत कर हत्या, संदिग्ध युवक के साथ बाइक पर जाती दिखी थी छात्रा

डोंगरगढ़:(Central school student murdered)राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित केंद्रीय विद्यालय की कक्षा 9वीं की छात्रा का शव डंगबोरा बांध की पहाड़ियों में मिला है।छात्रा 2 दिन पहले स्कूल की छुट्टी के बाद लापता हो गई थी। पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें छात्रा एक संदिग्ध युवक के साथ जाती दिखाई दे रही है। पुलिस 3 संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत रीवागहन के आश्रित ग्राम कौतुलवाही की 14 साल की छात्रा कक्षा 9वीं में पढ़ती थी।परिजन उसे रोज स्कूल छोड़ने जाते थे और लौटते समय छात्रा बस से गांव लौटती थी। 19 जुलाई को भी छात्रा को परिजन स्कूल छोड़कर आए, लेकिन स्कूल की छुट्टी के बाद भी जब 3 बजे तक छात्रा घर नहीं लौटी, तो परिजन उसे तलाशने निकले। जब छात्रा नहीं मिली तो परिजनों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में छात्रा के स्कूल की छुट्टी के बाद एक संदिग्ध युवक के साथ बाइक पर जाने की जानकारी मिली। गुरुवार को पुलिस ने 10 से अधिक सीसीटीवी के फुटेज खंगाले। एक फुटेज में छात्रा बाइक में एक युवक के साथ जाती दिखी। फुटेज में बाइक का नंबर स्पष्ट नहीं दिख रहा है। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा कि संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों को गिरफ्तारी के लिए एएसपी के नेतृत्व में टीम बनाई गई है। आरोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
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Republic Day 2026: बस्तर के 47 गांवों में पहली बार फहरेगा तिरंगा, 26 जनवरी को मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

Jagdalpur: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक चले नक्सल हिंसा के अंधकार के बाद अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह अवसर बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का साक्षी होगा।
बीते दो वर्षों में केंद्र एवं राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की सतत कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर संभाग में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे उन गांवों में सुरक्षा और प्रशासन की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित हुई है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर के 53 गांवों में बीते वर्ष 76वां गणतंत्र दिवस समारोह धूम-धाम से मनाया गया था, अब इस कड़ी में 47 और नये ऐसे गांव जुड़ गए हैं जहां इस साल पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।
बीजापुर जिले के जिन गांवों में पहली बार गणतंत्र पर्व मनाया जाएगा, उनमें पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, कस्तुरीपाड, ताड़पाला हिल्स, उलूर, चिल्लामरका, काड़पर्ती, पिल्लूर, डोडीमरका, संगमेटा, तोडका, कुप्पागुड़ा, गौतपल्ली, पल्लेवाया एवं बेलनार गांव शामिल है। इसी तरह नारायणपुर जिले के गांव एडजूम, इदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितराम, तोके, जटलूर, धोबे, डोडीमार्का, पदमेटा, लंका, परीयादी, काकुर, बालेबेडा, कोडेनार, कोडनार, अदिंगपार, मांदोडा, जटवार तथा वाडापेंदा गांव तथा सुकमा जिले के गांव गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल, तुमालभट्टी, माहेता, पेददाबोडकेल, उरसांगल, गुंडराजगुंडेम तथा पालीगुड़ा में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।
यह परिवर्तन उन दूरस्थ अंचलों में ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है, जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण सामान्य जनजीवन और लोकतांत्रिक गतिविधियां बाधित थीं। बस्तर क्षेत्र में 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन कैंपों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि विकास कार्यों का मार्ग भी प्रशस्त किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं अब धीरे-धीरे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की निरंतर मौजूदगी से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ हुई है। जिन क्षेत्रों में पहले राष्ट्रीय पर्व मनाने पर प्रतिबंध था, वहां आज ग्रामीण स्वयं उत्साह के साथ तिरंगा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव बस्तर को माओवाद के भय से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सुरक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार का ध्यान अब क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। स्कूलों और आंगनबाड़ियों का संचालन, बैंकों की स्थापना, मोबाइल टावरों की स्थापना, सड़कों का निर्माण तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगरगुंडा में बैंकिंग सुविधा फिर से शुरू हुई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण विकास अवरुद्ध था, वहीं आज सुशासन की सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवाद के भय से मुक्त कर विकास और विश्वास के नए युग की ओर ले जा रही है। गणतंत्र दिवस 2026 पर बस्तर के उक्त 47 गांवों में पहली बार फहरने वाला तिरंगा न केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव होगा, बल्कि यह शांति, लोकतंत्र और विकास के विजय का सशक्त संदेश भी देगा।
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Raipur: जन जागरूकता से ही घटेंगी सड़क दुर्घटनाएं: CM विष्णुदेव साय, हेलमेट पहनकर खुद स्कूटी चलाकर दिया सड़क सुरक्षा का संदेश

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जन जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यातायात नियमों के पालन से ही अनमोल मानव जीवन को बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने खुद हेलमेट पहनकर स्कूटी चलाकर आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने बाइक चालकों के दल के साथ यात्रा कर यह स्पष्ट किया कि नियमों का पालन केवल दूसरों को समझाने तक सीमित नहीं, बल्कि खुद अपनाने से ही बदलाव आएगा।
कार्यक्रम के दौरान सीएम साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत प्रदेश के 12 नए मार्गों पर 12 नवीन बसों का शुभारंभ किया। साथ ही राजधानी रायपुर के पंडरी क्षेत्र में आधुनिक लाइसेंस सेंटर कार्यालय भवन का भूमिपूजन भी किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं कई परिवारों की खुशियां छीन लेती हैं। किसी मां की गोद सूनी हो जाती है, बच्चे अनाथ हो जाते हैं और परिवार जीवनभर का दर्द झेलते हैं। इसलिए दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रायपुर पुलिस द्वारा शुरू की गई पुलिस मितान योजना सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अभिनव पहल है। वर्तमान में 4500 पुलिस मितान गांव-गांव में सक्रिय हैं, जिन्हें हेलमेट और फर्स्ट एड किट भी उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने में यह योजना अहम साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने वाहन चालकों से अपील की कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें और निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाएं। अक्सर दुर्घटनाओं में सिर में गंभीर चोट लगने से जान जाती है, इसलिए हेलमेट जीवन रक्षक साबित होता है।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इसे जन आंदोलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में तत्काल सहायता करने वाले राहगीरों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और घायलों के लिए डेढ़ लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि हेलमेट को सख्ती से अनिवार्य करने से दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ के तेज विकास के साथ यातायात दबाव भी बढ़ा है, ऐसे में सुरक्षा नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
समारोह में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस मितान, चिकित्सक, यातायात पुलिस कर्मी, वाहन चालक, भारत स्काउट गाइड, एनसीसी-एनएसएस कैडेट्स, यूनिसेफ और एनएचएआई के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग व साइंस मॉडल की सराहना की।
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Raipur: चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ बनेगा फिल्म और कल्चर का नया हब, 150 करोड़ की परियोजना का CM विष्णु देव साय ने किया भूमिपूजन

Raipur: छत्तीसगढ़ के फिल्म और कला जगत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का विधिवत भूमिपूजन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था, फिल्म उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर अलग पहचान दिलाएगी। यहां स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं फिल्म निर्माण से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली यह परियोजना लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी। फिल्म सिटी में गांव-शहर के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल, स्कूल-कॉलेज, मंदिर, स्टूडियो, प्रोडक्शन ऑफिस, स्कल्प्चर गार्डन और शॉपिंग स्ट्रीट विकसित किए जाएंगे। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स और एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी होंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल बनेगा, जहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिल्म फेस्टिवल और एग्जीबिशन आयोजित किए जा सकेंगे।
भूमिपूजन के अवसर पर मुख्यमंत्री को फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर से जुड़े चार निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए। इनमें गदर फिल्म के निर्माता अनिल शर्मा, इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स और हॉलीवुड कंटेंट से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इससे राज्य में PPP मॉडल के तहत निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की मजबूत नींव है। अगले दो वर्षों में परियोजना को पूर्ण कर राज्य को समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट फॉर टूरिज्म” योजना के तहत इन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। फिल्म सिटी के लिए 95.79 करोड़ और ट्राइबल कन्वेंशन सेंटर के लिए 52.03 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। भविष्य में लगभग 300 करोड़ रुपये के निजी निवेश की भी संभावना जताई जा रही है।
इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से छत्तीसगढ़ में फिल्म शूटिंग, वेब सीरीज, फिल्म फेस्टिवल और अवॉर्ड शो को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार, फिल्म टूरिज्म और सामान्य पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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Raipur: रायपुर को मिला पहला पुलिस कमिश्नर, IPS संजीव शुक्ला ने संभाला पद, 24 अफसरों के तबादले

Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के साथ ही पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव किया गया है। बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया है। इससे पहले वे आईजी, बिलासपुर रेंज के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसी प्रशासनिक आदेश के तहत श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को एसपी रायपुर ग्रामीण बनाया गया है। वहीं अमित तुकाराम कांबले (IPS-2009) को कांकेर से स्थानांतरित कर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, रायपुर नगरीय नियुक्त किया गया है।
रायपुर के एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह को जशपुर भेजा गया है, जबकि जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, रामगोपाल गर्ग (IPS-2007) को दुर्ग रेंज से स्थानांतरित कर आईजी, बिलासपुर रेंज बनाया गया है। अभिषेक शांडिल्य (IPS-2007) को राजनांदगांव रेंज से हटाकर आईजी, दुर्ग रेंज की कमान दी गई है। पुलिस मुख्यालय रायपुर में कानून व्यवस्था संभाल रहे बालाजी राव सोमावर (IPS-2007) को आईजी, राजनांदगांव रेंज नियुक्त किया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेश में कुल 24 अन्य पुलिस अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं।
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Balodabazar accident: सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर संचालन और मेंटेनेंस पर रोक, CM साय के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

Balodabazar accident:बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में हुए भीषण औद्योगिक हादसे के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर रियल इस्पात एंड एनर्जी प्रा. लि. के किल्न क्रमांक-01 को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। कारखाना अधिनियम के तहत किल्न के संचालन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी कार्यों पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन की शुरुआती जांच में फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन की पुष्टि हुई है। यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कंपनी सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम पूरे कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करती।
850 से 900 डिग्री तापमान में कराया गया काम
कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा के अनुसार 22 जनवरी की सुबह करीब 9.40 बजे किल्न-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के दूसरे तल पर काम के दौरान अचानक विस्फोट हुआ। इस दौरान लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश श्रमिकों पर गिर गई। हादसे में 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
बिना शटडाउन कराया गया खतरनाक काम
संयुक्त जांच टीम के निरीक्षण में सामने आया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने एसओपी का पालन नहीं किया। किल्न को शटडाउन किए बिना काम कराया गया। हाइड्रोलिक स्लाइड गेट बंद नहीं किया गया। वर्क परमिट जारी नहीं हुआ। साथ ही नियमित मेंटेनेंस नहीं किया गया। मजदूरों को सुरक्षा प्रशिक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, हेलमेट, सेफ्टी शूज जैसे उपकरण भी नहीं दिए गए।
इमिनेंट डेंजर की स्थिति, इसलिए सील
जांच में किल्न-01 को इमिनेंट डेंजर जोन में पाया गया। इसके चलते कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न के संचालन और सभी मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
मजदूरों का वेतन नहीं रोका जाएगा
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान फैक्ट्री में कार्यरत सभी श्रमिकों को समय पर पूरा वेतन और भत्ते देना अनिवार्य होगा।
प्रशासन का सख्त संदेश
सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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