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Durg News: पिकअप के सीक्रेट चेंबर से मिले ₹4 करोड़ कैश, 2 लोग हिरासत में

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक बोलेरो मैक्स पिकअप से ₹4 करोड़ नकद बरामद किए हैं। रकम वाहन के पिछले हिस्से में बनाए गए सीक्रेट चेंबर में छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने पिकअप में सवार दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल नकदी के मालिक, उसके स्रोत और रकम नागपुर ले जाने के उद्देश्य का पता नहीं चल पाया है।
मामला खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा का है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नकदी रायपुर के भनपुरी स्थित जीडी ट्रांसपोर्ट से लोड की गई थी और इसे नागपुर ले जाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि रकम किसी ट्रांसपोर्टर की हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
वाहन जांच के दौरान पकड़ी गई पिकअप
पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद खुर्सीपार पुलिस ने वाहन जांच शुरू की। इसी दौरान रायपुर से नागपुर जा रही सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप (CG 04 QU 5996) को रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस को उसके पिछले हिस्से में बदलाव नजर आया। यह हिस्सा इस तरह बंद किया गया था कि अंदर रखी वस्तुएं बाहर से दिखाई नहीं दे रही थीं।
बारीकी से जांच करने पर पुलिस को एक गुप्त चेंबर मिला। इसे खोलने पर अंदर नकदी रखी मिली। गिनती के बाद कुल ₹4 करोड़ बरामद होने की जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी रकम वाहन में छिपाकर ले जाने को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पिकअप में सवार दो लोग हिरासत में
पुलिस के अनुसार, वाहन में भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे सवार थे। डाभी पिकअप चला रहा था। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किसकी है, इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था और नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
आयकर विभाग को दी गई सूचना
मामले की जानकारी आयकर विभाग को भेजे जाने की बात कही गई है। अब नकदी के स्रोत, संभावित वित्तीय लेनदेन और रकम से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वाहन में सीक्रेट चेंबर कब और किसने बनवाया था। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नकदी कहां से आई थी और उसे किस उद्देश्य से नागपुर ले जाया जा रहा था। फिलहाल नकदी के मालिक और उसके स्रोत की पुष्टि नहीं हुई है।
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CG Weather Alert: चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

रायपुर: बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती तूफान का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश में 27 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 28 व 29 अक्टूबर को कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसे देखते हुए किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि सलाह में किसानों को पक चुकी फसलों की कटाई कुछ दिनों के लिए टालने, कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की सलाह दी गई है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमान में 27 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ने तथा 28 और 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में 28 अक्टूबर और उत्तर छत्तीसगढ़ में 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
मौसम प्रणाली की दिशा और तीव्रता में बदलाव के साथ बारिश का प्रभाव भी बदल सकता है। किसानों को अपने जिले के लिए जारी ताजा मौसम चेतावनी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
किसानों को धान की कटाई रोकने की सलाह
मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने धान, दलहन और तिलहन की उन फसलों की कटाई स्थगित रखने की सलाह दी है, जो पकने की अवस्था में हैं। जिन किसानों ने कटाई कर ली है, वे फसल को खुले खेतों में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें।
खेतों में बारिश का पानी जमा होने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए खेतों की मेड़, नालियों और जल निकासी के रास्तों की जांच कर लें। जहां जरूरत हो, वहां अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।
बारिश के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव न करें
कृषि सलाह के अनुसार, फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर बारिश के दौरान कीटनाशक अथवा कवकनाशक का छिड़काव करने से बचना चाहिए। मौसम साफ होने के बाद ही विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार करें।
रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसान भी मौसम की स्थिति देखकर ही खेत तैयार करने और बुवाई की योजना बनाएं। बारिश के कारण खेतों में नमी और जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
सब्जियों और फलदार पौधों को भी सुरक्षित रखें
तेज हवा और बारिश की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। करेला, लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा दें। केले के पौधों और कमजोर फलदार पेड़ों को जरूरत के मुताबिक सहारा दें, ताकि तेज हवा में उनके गिरने या टूटने का खतरा कम हो।
सब्जियों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखें। बारिश के दौरान फसलों पर दवाओं का छिड़काव करने से बचें और खेतों में पानी जमा होने की स्थिति पर लगातार नजर रखें।
पशुपालक भी बरतें सावधानी
चक्रवाती मौसम के दौरान पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें। उन्हें खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे बांधने से बचें। पशुओं के लिए सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करें।
मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय अमले को किया सतर्क
चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को किसानों की मदद के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम के कारण फसलों को नुकसान होने की स्थिति में किसानों तक जरूरी जानकारी और सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।
किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें। समय रहते सावधानी बरतने से फसलों, उद्यानिकी उत्पादन और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
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छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, ₹3100 प्रति क्विंटल मिलेगा भाव; 160 लाख टन खरीदने का लक्ष्य

रायपुर: छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग जिले के बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में खरीदी की तारीख का ऐलान किया। सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है।
राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। पिछले सीजन में धान खरीदी का लक्ष्य करीब 140 लाख मीट्रिक टन बताया गया था। इस बार लक्ष्य में 20 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की गई है।
15 नवंबर से 31 जनवरी तक होगी खरीदी
सरकार के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, प्रदेश के धान उपार्जन केंद्रों पर 15 नवंबर से खरीदी शुरू होगी। यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन और टोकन लेना होगा।
खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा, धान की गुणवत्ता और उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।
एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेंगे किसान
राज्य में निर्धारित सीमा के अनुसार पंजीकृत किसान प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेंगे। धान का घोषित खरीद भाव 3,100 रुपये प्रति क्विंटल है।
किसानों को सलाह है कि वे अपने पंजीकृत रकबे और पात्रता की जानकारी संबंधित सहकारी समिति या उपार्जन केंद्र से पहले ही प्राप्त कर लें, ताकि खरीदी के समय किसी तरह की परेशानी न हो।
धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन जरूरी
इस खरीदी सीजन में किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य बताया गया है। किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका पंजीयन और संबंधित भूमि का विवरण सही हो। पंजीयन या भूमि संबंधी जानकारी में कोई गड़बड़ी होने पर समय रहते संबंधित समिति या विभाग से संपर्क करना उचित होगा।
टोकन मिलने पर ही तय दिन बेच सकेंगे धान
धान खरीदी केंद्रों पर टोकन व्यवस्था के जरिए किसानों को निर्धारित तारीख पर उपज बेचने की सुविधा मिलेगी। किसानों को केंद्र पर जाने से पहले अपने टोकन और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जांच लेनी चाहिए।
टोकन जारी करने की समय-सीमा और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी संबंधित समिति या विभाग के आधिकारिक निर्देशों से प्राप्त की जा सकती है।
बायोमेट्रिक सत्यापन और 17 प्रतिशत नमी की सीमा
खरीदी केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा धान की गुणवत्ता की जांच भी होगी।
धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। निर्धारित मानक से ज्यादा नमी होने पर धान स्वीकार करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए किसान उपज को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही खरीदी केंद्र पर ले जाएं।
इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले साल के करीब 140 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य की तुलना में यह 20 लाख मीट्रिक टन अधिक है। धान खरीदी की तैयारियों के बीच किसानों की नजर अब उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, टोकन जारी होने और पंजीयन संबंधी निर्देशों पर रहेगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खरीदी से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए अपने नजदीकी सहकारी समिति और संबंधित विभाग के आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करें।
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Bastar Dussehra: राष्ट्रपति मुर्मु ने की बस्तर दशहरा की सराहना, मांझियों का मानदेय ₹5,000 और चालकी का ₹3,500 हुआ

जगदलपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होकर इसकी अनूठी जनजातीय परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता की सराहना की। उन्होंने मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की है।
बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का प्रतीक: राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर आयोजित इस समारोह में उन्होंने बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक है। इस उत्सव की खासियत यह है कि विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों के लोग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों में अलग-अलग समुदाय अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, यह व्यवस्था आपसी सहयोग और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक निरंतरता का उल्लेखनीय उदाहरण है।
मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उदाहरण
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के दौरान आयोजित होने वाले मुरिया दरबार को लोकतांत्रिक व्यवस्था की जमीनी अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, जरूरतों और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं।
सामूहिक संवाद से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। राज्यपाल रमेन डेका ने भी कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार समाज को साथ लेकर चलने तथा संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का संदेश देते हैं।
उन्होंने पारंपरिक मांझियों, मुखियाओं, पुजारियों, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन के योगदान की सराहना की।
जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को मिले अवसर
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय युवा हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि उचित प्रशिक्षण और मंच मिलने पर यहां के खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास को गति दे सकते हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
दंडकारण्य से जुड़ी है बस्तर की सांस्कृतिक विरासत
राष्ट्रपति ने बस्तर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस क्षेत्र का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास और माता शबरी से जुड़े प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति संरक्षण परंपरा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़, पेड़-पौधे और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और अधिकाधिक पौधरोपण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखना आवश्यक है।
माओवाद से मुक्त बस्तर में विकास की नई राह: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति से बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास की सुंदर अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस बदलाव को गति दे रहे हैं और क्षेत्र की कला-संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार दूरस्थ इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन के तहत दूरस्थ बसाहटों को सड़क से जोड़ने का काम जारी है।
उन्होंने परिवहन सुविधाओं के विस्तार, रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे तथा वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने के प्रयासों की भी जानकारी दी।
स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हुआ है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
मांझियों और चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी
बस्तर दशहरा समारोह में पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की जानकारी भी दी गई। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, राज्य सरकार ने मांझियों और चालकी के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है।
मांझी: ₹2,000 से बढ़ाकर ₹5,000 प्रतिमाह।
चालकी: ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,500 प्रतिमाह।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी तथा देवी मावली की डोली विदाई जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मां दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।
समारोह में राज्यपाल रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, विभिन्न मंत्री, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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Raipur: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं को दिए सफलता के मंत्र; ₹200 का स्मारक सिक्का जारी

रायपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर गुरुवार को रायपुर पहुंचीं। इस दौरान वे इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं को सफलता के मंत्र दिए और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश को लेकर भी स्थिति सामने आई। विधायक मोतीलाल साहू को VIP गेट से प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद वे दूसरे गेट से पैदल कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहीं, विधायक संपत अग्रवाल को भी कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले रोक दिया गया। इसके बाद वे वापस लौट गए।
राष्ट्रपति ने जारी किया ₹200 का स्मारक सिक्का
रायपुर पहुंचने से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकभवन में ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया। सिक्के पर एक ओर अशोक स्तंभ और दूसरी ओर शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की तस्वीर अंकित है।
जानकारी के अनुसार, इस सिक्के का वजन 35 ग्राम है और इसे चार धातुओं से मिलाकर तैयार किया गया है। सिक्के को ऑनलाइन बुक करने की सुविधा भी बताई गई है।
युवाओं को सफलता के लिए किया प्रेरित
इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने, मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। दौरे के दौरान ‘सेवा सम्मान पर्व’ भी आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति शामिल हुईं। राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
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Chhattisgarh: सिरपुर को मिली वैश्विक पहचान, UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर के भविष्य में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा हासिल करने की संभावनाओं को नई दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण तथा पर्यटन विकास पर जोर दे रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है सिरपुर
प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध सिरपुर पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा। यह नगर राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं के अवशेष मिलते हैं, जो प्राचीन भारत में धार्मिक सहअस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय की परंपरा को दर्शाते हैं।
सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी। उनके यात्रा विवरणों में यहां बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपरा का उल्लेख मिलता है।
लक्ष्मण मंदिर और बौद्ध विहार हैं प्रमुख आकर्षण
सिरपुर का सातवीं शताब्दी का लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय ईंट स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर की नक्काशी, अलंकरण और निर्माण शैली इसे विशेष पहचान देते हैं। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, इसका निर्माण रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था।
यहां स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर, सुरंग टीला, राम मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक विहार भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं। पुरातात्विक उत्खननों में मंदिरों, बौद्ध विहारों, मूर्तियों, सिक्कों और दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के अवशेष मिले हैं। ये खोजें सिरपुर की प्राचीन धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर प्रकाश डालती हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है नई गति
सिरपुर को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बढ़ने की उम्मीद है। इससे इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शोधकर्ताओं और देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बढ़ सकता है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय परिवहन, होटल, होमस्टे, हस्तशिल्प और अन्य रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अभी विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना बाकी
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का दर्जा पाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यह अंतिम मान्यता नहीं है। इसके बाद संबंधित स्थल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया से गुजरना होता है।
सिरपुर की प्राचीन स्थापत्य कला, बौद्ध विरासत और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के ऐतिहासिक सहअस्तित्व को देखते हुए इसका अस्थायी सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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