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MP में हेलीकॉप्टर से पकड़े 97 कृष्णमृग, शुजालपुर में बोमा तकनीक से रेस्क्यू अभियान

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शुजालपुर: मध्यप्रदेश के शुजालपुर में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया है। शनिवार को हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया। 9 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञों समेत करीब 200 कर्मचारी जुटे हैं।

हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर पकड़े 97 कृष्णमृग

शुजालपुर के ग्राम हन्नूखेड़ी में वन विभाग ने शनिवार को अभियान शुरू किया। हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में ले जाकर बोमा पद्धति से तैयार सुरक्षित घेरे में पहुंचाया गया। पहले चरण में 97 कृष्णमृग पकड़े गए।
दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर अभियान रोक दिया गया। रेस्क्यू का अगला चरण रविवार सुबह शुरू करने की योजना बनाई गई।

दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ संभाल रहे जिम्मेदारी

अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशन’ टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं। इनके साथ वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं। भोपाल और अन्य जिलों से पहुंचे करीब 200 कर्मचारी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए कृष्णमृगों को पकड़ने की यह पहल लगातार दूसरे साल शुजालपुर से शुरू हुई है। पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।

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क्या है बोमा तकनीक?

बोमा तकनीक में वन्यजीवों को धीरे-धीरे एक खास तरीके से बनाए गए सुरक्षित घेरे की ओर ले जाया जाता है। घेरे की बनावट ऐसी होती है कि जानवरों को नियंत्रित तरीके से भीतर लाकर सुरक्षित पकड़ा जा सके। इस अभियान में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में बढ़ाया जाता है। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होती है, ताकि वन्यजीवों को चोट और अनावश्यक तनाव से बचाया जा सके।

प्रमुख सचिव समेत अधिकारियों ने परखी तैयारियां

अभियान शुरू होने से एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह, वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन ने हन्नूखेड़ी पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान संबंधित खेतों में सिंचाई और कृषि कार्य रोककर रखें। बच्चों को बोमा स्थल से दूर रखें और पालतू मवेशियों को बाड़े में बांधकर रखें। हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर मौके पर भीड़ नहीं लगाने की भी हिदायत दी गई है।

फसलों को नुकसान से राहत दिलाने की कोशिश

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कृष्णमृग और नीलगाय खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या से राहत दिलाने के लिए वन विभाग पहले भी जिले में अभियान चलाकर कृष्णमृगों और नीलगायों को दूसरे स्थानों पर पहुंचा चुका है। इस बार भी अभियान में स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली जाएगी। क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी होने के कारण ग्रामीण रेस्क्यू टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। उनके सहयोग से अभियान स्थल पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

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मध्यप्रदेश में पटवारियों की हड़ताल खत्म, 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम शुरू

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भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार शाम मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। बैठक में पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर सहमति बनने की बात कही गई।

कानूनी संरक्षण के मुद्दे पर बनी सहमति

पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्रियों से जुड़े मामलों में पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने के आदेश जारी किए जाएंगे। पटवारी संघ लंबे समय से इस योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े विवादों में संभावित कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रहा था। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने बताया कि बैठक में इस संबंध में आ रही अड़चनों का समाधान कर दिया गया है। साथ ही, 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर भी सहमति बनी है।

वेतन विसंगति पर आयोग के गठन के बाद विचार

बैठक में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। गुर्जर के मुताबिक, वेतन विसंगति के मामले में आयोग के गठन के बाद विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले पटवारी महासम्मेलन में आर्थिक मांगों को लेकर घोषणा करने का आश्वासन दिया है।

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50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य

मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्वामित्व योजना का काम पूरी निष्ठा से करने की बात कही है। सरकार इस योजना को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत करीब 50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य बताया गया है। बैठक में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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MP News: पटवारियों पर कार्रवाई तेज, 102 पर गिरी गाज, 27 बर्खास्त और 75 निलंबित; स्वामित्व योजना पर टकराव

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भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीनों के मालिकाना हक और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में हस्ताक्षर करने पर पटवारियों की आपत्ति के बीच प्रदेश में 102 पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 27 को बर्खास्त और 75 को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व कार्यों का बहिष्कार किया। इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में शासकीय कार्यों में लापरवाही के आरोप में 12 पटवारियों को आरोप-पत्र जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री तक पहुंचा विवाद, बैठक में नहीं निकला हल

पटवारियों के विरोध और उनके खिलाफ कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में प्रस्तावित बैठक भी उनकी व्यस्तता के कारण टल गई। पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाने पर निर्णय नहीं होता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ ने कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है।

50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी

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मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर 3,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज लोगों के अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। अब इन संपत्तियों के मालिकाना हक को रजिस्ट्री के जरिए औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी काम में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन में योजना का काम पूरा कराने और प्रदर्शन दिखाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में काम नहीं हुआ तो कलेक्टरों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। योजना की तय समय-सीमा में केवल नौ दिन शेष होने की बात भी कही गई है।

मुख्य सचिव की सख्ती

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों को निर्देश दिए कि पटवारियों और तहसीलदारों से काम कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पहले पटवारियों को समझाकर काम कराया जाए। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन योजना का काम पूरा होना चाहिए। बर्णवाल ने कहा कि तीन सप्ताह बीत जाने के बावजूद योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि और राजस्व से जुड़े काम संबंधित कर्मचारियों से ही कराए जाने चाहिए।

उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि जो अधिकारी सात दिन में काम नहीं करा पाएंगे, उन्हें भोपाल बुलाकर जवाब मांगा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि काम में लापरवाही पर कलेक्टरों के साथ उन तहसीलदारों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो पटवारियों से काम नहीं करा पा रहे हैं।

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‘पटवारी कलेक्टर के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे’

मुख्य सचिव ने प्रदर्शन के दौरान कलेक्टरों के खिलाफ नारेबाजी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार पटवारियों की मांगों पर बातचीत कर चुकी है। इसके लिए पांच मंत्रियों की समिति के साथ चर्चा कराई गई और उनकी मांगों के अनुरूप सर्कुलर भी जारी किया गया। इसके बावजूद काम नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।

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मध्य प्रदेश में पटवारियों पर कार्रवाई का विरोध, 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व काम से दूरी

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भोपाल: मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के काम को लेकर पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। देवास के बाद गुना समेत कई जिलों में पटवारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई हुई है। गुना में चार पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है।
कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों से अलग रहने का फैसला किया है। संघ ने कहा है कि दंडात्मक कार्रवाई वापस होने तक विरोध जारी रहेगा।

देवास से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत देवास में स्वामित्व योजना के तहत ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ से जुड़े काम को लेकर हुई। देवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त की गई है। प्रशासन की ओर से उनके काम में लापरवाही और योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं होने को कार्रवाई का आधार बताया गया है।

पटवारी संघ का कहना है कि योजना के तहत पटवारियों को ‘निष्पादक’ की भूमिका दिए जाने से कानूनी और व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। संघ का दावा है कि इन समस्याओं से शासन को पहले ही अवगत कराया जा चुका है।

गुना में 4 पटवारी सस्पेंड, 52 को नोटिस

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गुना कलेक्टर किशोर कान्याल के मुताबिक, चार पटवारियों को निलंबित किया गया है। वहीं शासकीय कार्य नहीं करने के मामले में जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। पटवारी संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अन्य जिलों में भी कार्रवाई हुई है। रिपोर्टों में देवास और आगर मालवा के पटवारियों पर सेवा समाप्ति तथा रायसेन और मंडला में भी कार्रवाई का उल्लेख है। अलग-अलग जिलों में कार्रवाई की प्रकृति और संख्या संबंधित प्रशासनिक आदेशों के अनुसार अलग है।

7 अक्टूबर से ऑनलाइन काम से दूरी

पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र बघेल के मुताबिक, संघ ने प्रशासन को ज्ञापन देकर सेवा समाप्ति, निलंबन और अन्य दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। संघ के प्रदेशव्यापी निर्णय के तहत पटवारी 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों से अलग रहने के साथ शासकीय ऑनलाइन समूहों से भी बाहर रहने की बात कह रहे हैं। संघ का कहना है कि कार्रवाई वापस होने तक यह विरोध जारी रहेगा।

कार्रवाई बढ़ी तो बिना सूचना काम छोड़ने की चेतावनी

पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश के किसी अन्य जिले में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई तो पूरा पटवारी संवर्ग बिना पूर्व सूचना के राजस्व कार्यों से अलग हो सकता है। इस विवाद का असर स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति पंजीयन और अन्य राजस्व सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में योजना के तहत पंजीयन प्रक्रिया पहले से प्रभावित हुई है।

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MP News: दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से निकालेंगे सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा, महाकाल से अयोध्या तक 930 किमी पैदल चलेंगे

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भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करेंगे। यात्रा की शुरुआत उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से होगी और करीब 930 किलोमीटर का सफर तय कर अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य है। यात्रा करीब 70 दिन चलेगी और दिग्विजय सिंह रोज लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।
खास बात यह है कि दिग्विजय सिंह ने 2017 में अपनी नर्मदा परिक्रमा भी विजयादशमी के दिन शुरू की थी। इस बार भी उन्होंने यात्रा की शुरुआत के लिए विजयादशमी का दिन चुना है।

चिंतामन गणेश मंदिर के दर्शन के बाद महाकाल जाएंगे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिग्विजय सिंह 19 अक्टूबर की रात उज्जैन पहुंचेंगे। अगले दिन सुबह सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर जाएंगे। इसके बाद बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग बनाए जाएंगे और फिर महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करेंगे।
इसके बाद करीब दोपहर 2 बजे यात्रा शुरू होने की योजना है। उज्जैन जिले में यात्रा करीब पांच दिन रहेगी। इसका पहला पड़ाव कानीपुरा होगा। इसके बाद सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए यात्रा शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी।
आयोजकों के मुताबिक, अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

रोज 15 किमी चलने की तैयारी

यात्रा में दिग्विजय सिंह करीब 930 किमी पैदल चलेंगे। इसे 70 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा की तैयारी के लिए वह इन दिनों रोज करीब 8 किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में करीब 3 हजार लोगों के शामिल होने की तैयारी है। इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताया गया है। यात्रा का ध्येय वाक्य “यतो धर्मस्ततो जयः” रखा गया है।

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दिग्विजय बोले- 80 की उम्र में खुद को 50 का महसूस करता हूं

यात्रा को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर वह 80 वर्ष की उम्र में खुद को 50 साल का महसूस करते हैं, तो किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यात्रा के उद्देश्य को लेकर जारी वीडियो में सनातन धर्म की परिभाषा, राम मंदिर के चंदे-चढ़ावे और RSS, VHP तथा भाजपा की भूमिका से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने अयोध्या पहुंचने के बाद इन मुद्दों को लेकर याचिका दायर करने की बात भी कही है।

‘हिंदू’ शब्द को लेकर भी दिया बयान

दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह ‘हिंदू धर्म’ की जगह ‘सनातन धर्म’ की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि ‘हिंदू’ फारसी शब्द है और वेद, उपनिषद तथा पुराणों में इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है। उन्होंने RSS और VHP पर सनातन धर्म की अवधारणा को बदलने का आरोप भी लगाया।

राम मंदिर चंदे को लेकर लगाए आरोप

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दिग्विजय सिंह ने राम शिलाओं के लिए जुटाए गए चंदे और राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि का इस्तेमाल भाजपा और RSS के लिए किया जा रहा है। उन्होंने VHP और RSS से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए और कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर वह अपनी यात्रा के दौरान लोगों के बीच जाएंगे।

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MP News: कूनो में चीतों की नई पीढ़ी का विस्तार, KJP21 ने 5 शावकों को दिया जन्म, भारत में संख्या 60 हुई

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श्योपुर: मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट चीता के तहत सोमवार को एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई। भारत में जन्मी 32 महीने की मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इनके जन्म के साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में ही जन्मे हैं। इसकी जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साझा की।

भारत में जन्मी तीसरी मादा जिसने यहीं शावक दिए

KJP21 भारत में जन्मी और भारत में ही शावकों को जन्म देने वाली तीसरी मादा चीता है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी कूनो में शावकों को जन्म दे चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में चीतों की अगली पीढ़ी के उभरने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

पहली बार भारत में बोत्सवाना की वंशावली

इन पांच शावकों के पिता बोत्सवाना मूल के नर चीता हैं। ऐसे में इनके जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना की चीता वंशावली की शुरुआत हुई है। सरकार के मुताबिक, इससे देश में बढ़ रही चीता आबादी में एक नई आनुवंशिक वंशावली जुड़ने की उम्मीद है।

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भारत में ही तैयार हो रही चीतों की अगली पीढ़ी

प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी देशों से भारत लाए गए चीतों से अब देश में ही नई पीढ़ी तैयार हो रही है। KJP21 के पांच शावकों का जन्म इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है। भारत में चीतों की संख्या 60 तक पहुंचना उस पुनर्स्थापना अभियान में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके तहत देश में चीतों की आबादी फिर से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वन अमले और विशेषज्ञों की निगरानी में शावक

शावकों के जन्म के बाद प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले और प्रबंधन टीम को बधाई दी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भी परियोजना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। कूनो में लगातार हो रहे सफल प्रजनन से भारत में चीतों की स्थायी और स्वावलंबी आबादी विकसित करने की उम्मीदों को बल मिला है।

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