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जशपुर में बनेगा अत्याधुनिक नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री साय ने 9.65 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

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Jashpur:मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली गांव में निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। लगभग 4.37 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस 250 सीटर अत्याधुनिक अध्ययन केंद्र को युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नालंदा परिसर जशपुर के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

24 घंटे अध्ययन सुविधा, 50 हजार पुस्तकों की लाइब्रेरी

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि नालंदा परिसर का प्लिंथ लेवल कार्य पूरा हो चुका है और शेष निर्माण तेजी से जारी है। परिसर में युवाओं को 24 घंटे अध्ययन की सुविधा मिलेगी। यहां डिजिटल लाइब्रेरी, हाई-स्पीड वाई-फाई, इंडोर एवं आउटडोर स्टडी जोन, ऑक्सी रीडिंग जोन और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित 50 हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा परिसर में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था, 50 से अधिक देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण, यूथ टावर, स्पोर्ट्स कोर्ट, कैफेटेरिया, एटीएम और हेल्थ जोन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। आधुनिक तकनीक के तहत आरएफआईडी आधारित प्रवेश प्रणाली, बायोमेट्रिक पहचान और स्मार्ट पुस्तक प्रबंधन प्रणाली भी स्थापित की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारपूर्ण शैक्षणिक केंद्र विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र को 9.65 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित कार्यक्रम में 9 करोड़ 65 लाख रुपये लागत के 9 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया। इनमें 6.74 करोड़ रुपये लागत के 4 कार्यों का भूमिपूजन तथा 2.90 करोड़ रुपये लागत के 5 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि लोगों के जीवन में सुविधाएं, अवसर और समृद्धि लेकर आते हैं। इन परियोजनाओं से सड़क, बिजली, स्वच्छता और ग्रामीण अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी।

6.74 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन

भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं-

  • फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (31.68 लाख रुपये)
  • पगुराबहार के बेहराटोली में पुलिया निर्माण (10 लाख रुपये)
  • चराईडांड़ से एनएच-43 तक 2 किमी पहुंच मार्ग (2.20 करोड़ रुपये)
  • घासीमुंडा से कोरवाटोली तक 3.10 किमी सड़क निर्माण (4.12 करोड़ रुपये)

इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

2.90 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण

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लोकार्पित कार्यों में विभिन्न ग्राम पंचायतों में आरसीसी पुलिया और सीसी सड़क निर्माण शामिल हैं। इनसे ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होगी।

कुडूकेला विद्युत उपकेंद्र से कई गांवों को राहत

मुख्यमंत्री ने 2.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 33/11 केवी, 3.15 एमवीए क्षमता वाले कुडूकेला विद्युत उपकेंद्र का भी लोकार्पण किया। इस उपकेंद्र से जामटोली, गड़बहार, टुकूपानी, बरटोली, पंडरा, सुखापोखर, जामचुवां, कुडूकेला, सरडीह, गिनाबहार, टोप्पो बागान, रेंगारघाट, सियावर चौक, चटकपुर, बेने, बासनटोली, कुहूमुड़ा, भेलवाटोली और नवापारा सहित अनेक गांवों को गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिलेगी।

इससे किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

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CM Vishnu Deo Sai: देर रात बैठक पर बोले- इमरजेंसी मीटिंग नहीं थी, UCC लागू होगा लेकिन अभी नहीं

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Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास में देर रात तक चली हाई-लेवल बैठक को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई इमरजेंसी बैठक नहीं थी, बल्कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और अभियानों की समीक्षा बैठक थी।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पर हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर “12 साल विश्वास के, 12 साल विकास के, 12 साल बेमिसाल” जैसे अभियानों के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी मंत्रियों और विधायकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बैठक में इन्हीं कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू होगा, लेकिन अभी नहीं

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में सरकार काम कर रही है और इसके लिए समिति का गठन भी किया जा चुका है।हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सत्र में UCC विधेयक लाए जाने की संभावना कम है।

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मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश में UCC लागू होगा, लेकिन मानसून सत्र में इतनी जल्दी इसे लाना संभव नहीं है। समिति अपना काम कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी।”

देर रात तक चली बैठक से बढ़ी थीं अटकलें

गुरुवार रात मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में राज्य सरकार के सभी मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक देर रात तक चली, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।

सूत्रों के अनुसार बैठक रात करीब दो बजे तक चली, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार और संगठन के स्तर पर कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा और रणनीति तय करना था।

UCC को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

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मुख्यमंत्री के बयान के बाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार पहले ही इस विषय पर अध्ययन और सुझावों के लिए समिति गठित कर चुकी है। अब समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि UCC को लेकर सरकार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहती है, ताकि व्यापक सहमति और कानूनी तैयारी के बाद ही इसे लागू किया जा सके।

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सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान: 23 जिलों में 31 योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाएगी साय सरकार

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Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशभर में सुशासन को मजबूत करने और प्रत्येक पात्र परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान शुरू करने जा रही है। यह राज्यव्यापी अभियान 23 जिलों में संचालित होगा, जिसके तहत 31 प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (Saturation) किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार किसी भी सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे। अभियान के जरिए योजनाओं की पहुंच, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को नई मजबूती देने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री बोले- हर परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें। उन्होंने कहा कि शासन की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ इसी सोच का विस्तार है।

‘नियद नेल्लानार’ की सफलता से प्रेरित पहल

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बस्तर में संचालित ‘नियद नेल्लानार’ योजना की सफलता के बाद सरकार ने इसी मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में यह मॉडल बस्तर संभाग में सफल रहा, बाद में इसका विस्तार 10 जिलों तक किया गया। अब ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान के जरिए रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में इसे लागू किया जाएगा।

31 योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

अभियान के तहत सामाजिक सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कृषि से जुड़ी 31 योजनाओं को शामिल किया गया है।

प्रमुख योजनाएं:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
  • मनरेगा जॉब कार्ड
  • जल जीवन मिशन
  • आयुष्मान भारत योजना
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
  • किसान क्रेडिट कार्ड
  • राशन कार्ड
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
  • महतारी वंदन योजना
  • जन-धन योजना
  • वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
  • जननी सुरक्षा योजना
  • मिशन इंद्रधनुष
  • श्रम कार्ड
  • वनाधिकार पट्टा
  • आधार कार्ड एवं अन्य प्रमाण-पत्र सेवाएं

CHiPS बनाएगा रियल टाइम डिजिटल डैशबोर्ड

अभियान की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) एक एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करेगी। यह डैशबोर्ड राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति, लाभार्थियों की संख्या, शेष पात्र हितग्राहियों और संतृप्तिकरण की स्थिति को रियल टाइम में प्रदर्शित करेगा।

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तीन चरणों में चलेगा अभियान

पहला चरण: सर्वे और डेटा मैपिंग

ग्रामवार सर्वेक्षण कर पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी और योजनावार बेसलाइन तैयार होगी।

दूसरा चरण: विशेष शिविर

गांव, क्लस्टर और विकासखंड स्तर पर शिविर लगाकर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

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तीसरा चरण: निगरानी और मूल्यांकन

नियमित समीक्षा के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन की होगी अहम भूमिका

अभियान के सफल संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर होगी। जिला कलेक्टर इसकी निगरानी करेंगे, जबकि संभागायुक्त त्रैमासिक समीक्षा करेंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का मूल्यांकन करेगी।

अलग बजट नहीं, अभिसरण मॉडल पर होगा काम

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ के लिए अलग बजट की आवश्यकता नहीं होगी। विभिन्न विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों से अभियान संचालित करेंगे। इसके अलावा CSR और DMF फंड का भी उपयोग किया जाएगा।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित सुशासन की व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जब हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा, तभी वास्तविक अर्थों में ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का सपना पूरा होगा।

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Chhattisgarh: गरियाबंद को 603 करोड़ की विकास सौगात, CM साय ने 76 परियोजनाओं का लोकार्पण-भूमिपूजन किया

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Gariyaband: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को गरियाबंद जिले को 603.46 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 86.75 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुए 46 कार्यों का लोकार्पण किया, जबकि 516.70 करोड़ रुपए के 30 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से जिले में सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, विद्युत और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। किसानों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और गरीब परिवारों के कल्याण के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

बिजली बिलों में राहत का जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। इस योजना के माध्यम से करीब 757 करोड़ रुपए के बकाया बिजली बिलों में छूट प्रदान की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर लोगों के बिजली खर्च को कम किया जा रहा है।

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किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि सहकारी समितियों के नए केंद्र खोले जा रहे हैं ताकि किसानों को ऋण, खाद और बीज जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने किसानों से नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का करें उपयोग

साय ने कहा कि सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई है, जिसका नागरिकों को अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।

सुपेबेड़ा की पेयजल समस्या के समाधान का दावा

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मुख्यमंत्री ने बताया कि सुपेबेड़ा क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तेल नदी पर 7 करोड़ रुपए की लागत से एनीकट निर्माण को मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

शाला प्रवेश उत्सव में भागीदारी की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और 27 जून तक शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की।

आवास, महतारी वंदन और धान खरीदी का भी जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 26 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 18,165 करोड़ रुपए से अधिक राशि महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। साय ने कहा कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और कृषक उन्नति योजना के माध्यम से अंतर की राशि का भुगतान भी किया जा रहा है।

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आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरियाबंद आदिवासी बहुल जिला है, जहां कमार और भुंजिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के जरिए इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और आजीविका के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आज शुरू हुए विकास कार्य जिले के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देंगे। कार्यक्रम में खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

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Koriya Murder Case: रेत विवाद में भाजपा नेता को जिंदा जलाया, कोरिया में पूर्व जनपद अध्यक्ष की हत्या, एक और युवक की इलाज के दौरान मौत

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Koriya Murder Case: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत कारोबार को लेकर चल रहे विवाद ने खूनी रूप ले लिया। सोनहत थाना क्षेत्र में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह की कथित तौर पर जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि रेत कारोबार से जुड़े लोगों ने उनकी फॉर्च्यूनर कार को हाईवा वाहनों से घेरकर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। इस सनसनीखेज वारदात में गंभीर रूप से घायल एक अन्य युवक विरेंद्र सिंह की भी इलाज के दौरान मौत हो गई है। इसके साथ ही मामले में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।

कार में जिंदा जल गए भाजपा नेता

जानकारी के अनुसार, घटना देर रात सोनहत क्षेत्र के नौगई गांव में हुई। पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपनी फॉर्च्यूनर कार में सवार थे। आरोप है कि हमलावरों ने कार के आगे और पीछे हाईवा वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया। इसके बाद कार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। आग लगने से भरत सिंह कार के भीतर ही फंस गए और मौके पर उनकी मौत हो गई।

बाहर निकले तो फरसे और डंडों से हमला

कार में भरत सिंह के साथ उनके भाई नागेंद्र सिंह, मयंक सिंह और रायपुर निवासी विरेंद्र सिंह भी मौजूद थे। तीनों किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। हमले में विरेंद्र सिंह के गले पर फरसे से वार किया गया, जबकि अन्य लोगों की बेरहमी से पिटाई की गई।

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इलाज के दौरान विरेंद्र सिंह ने तोड़ा दम

गंभीर रूप से घायल विरेंद्र सिंह को अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सरगुजा रेंज के आईजी ने विरेंद्र सिंह की मौत की पुष्टि की है। विरेंद्र रायपुर में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे।

तीन अन्य घायल, रायपुर रेफर

हमले में मयंक सिंह के चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। नागेंद्र सिंह के हाथ और चेहरे पर चोटें हैं तथा वे झुलस भी गए हैं। वहीं योगेंद्र सिंह का हाथ टूट गया है और उन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं। तीनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है।

रेत घाट के ठेके को लेकर चल रहा था विवाद

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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नौगई रेत घाट का ठेका नागेंद्र सिंह के बेटे ने लिया था। रेत खनन और परिवहन को लेकर उनका भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी के परिवार से लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि इसी विवाद के चलते देर रात दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा और मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया।

पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Electricity Tariff: छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में संशोधन, 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार

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Electricity Tariff: छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में संशोधन, 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार

Raipur: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में संशोधन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने औसतन 6.23 प्रतिशत यानी करीब 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि को मंजूरी दी है। हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि विभिन्न राहत योजनाओं और सब्सिडी के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका असर बेहद सीमित रहेगा।

सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के चलते प्रदेश के लाखों परिवारों को बिजली दर वृद्धि से राहत मिलेगी।

41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर असर बेहद कम

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को हर महीने 30 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है। इन्हें 200 यूनिट तक बिजली खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। सरकार के मुताबिक इन दोनों योजनाओं के कारण करीब 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर अधिकतम 3.65 प्रतिशत तक ही रहेगा।

किसानों पर नहीं बढ़ेगा बिजली खर्च

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राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसका अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। इसके साथ ही कृषि पंपों पर लगने वाला स्थायी प्रभार भी पहले की तरह यथावत रखा गया है। इससे किसानों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ जीरो

पीएम सूर्यघर योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 66 हजार उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में 89 हजार घरों में सोलर प्लांट लगाने का काम जारी है। राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों में 5 लाख घरों तक इस योजना का विस्तार करने का लक्ष्य रखा है।

बिजली बिल समाधान योजना से 749 करोड़ की राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत और सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। शेष राशि को 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी गई है। अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू और 33 हजार कृषि उपभोक्ता इस योजना से जुड़ चुके हैं। करीब 1328 करोड़ रुपए के बकाया बिलों का निपटारा किया गया है, जिसमें उपभोक्ताओं को 749 करोड़ रुपए की राहत मिली है।

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उद्योगों और छात्रावासों को भी राहत

राज्य सरकार ने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए स्टील उद्योगों को मिलने वाली 25 प्रतिशत लोड फैक्टर छूट को जारी रखा है। वहीं बस्तर और सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर बिजली खर्च में राहत दी गई है।

कम बिजली खर्च करने पर मिलेगी छूट

10 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय यानी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं पीक आवर्स में बिजली खपत पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इससे उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने हजारों करोड़ का निवेश

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राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक चालू होने की संभावना है।  इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट के नए बिजली संयंत्र की योजना पर भी काम चल रहा है। राज्यभर में नए ग्रिड, उपकेंद्र और वितरण नेटवर्क विस्तार की परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और ऊर्जा अधोसंरचना विस्तार की जरूरतों के बाजूद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है।

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