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MP News: मुख्यमंत्री की पहल पर हुई ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने सर्वदलीय बैठक, सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया

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MP News: On the initiative of the Chief Minister, an all-party meeting was held to give 27 percent reservation to OBC, the resolution was passed unanimously

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रदेश में सभी राजनीतिक दल अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सहमत हैं। विभिन्न पक्षों के अधिवक्ता इस विषय में न्यायालय के सामने अपने-अपने बिन्दु रख रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण विषय पर 22 सितम्बर से प्रतिदिन सुनवाई करेगा। इस विषय पर सभी दलों की सहमति हो, इस संबंध में गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर सर्वदलीय बैठक हुई।

बैठक में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया कि इस विषय में सभी दल एकजुट होकर एक फोरम पर आएंगे और विभिन्न पक्षों के अधिवक्तागण भी 10 सितम्बर तक एक साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद जारी अपने संदेश में यह बात कही।

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी राजनीतिक दल एक मत से राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए कटिबद्ध हैं। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को राज्य शासन और उसके विभिन्न घटकों द्वारा की गई चयन प्रक्रिया में विभिन्न न्यायिक आदेशों के फलस्वरूप नियुक्ति आदेश जारी किए जाने से वंचित शेष 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने सभी दल एकजुट होकर इसे क्रियान्वित करने के लिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के सभी फोरम पर मिलकर प्रयास करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार हरसंभव प्रयास किए हैं। जिन विभागों में गुंजाइश थी उन सभी विभागों में आरक्षण देने में सरकार पीछे नहीं रही। कई विभाग जिनमें स्टे नहीं था, जैसे लोक निर्माण विभाग आदि में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इस विषय में राज्य सरकार वरिष्ठतम अधिवक्ताओं की सलाह लेने और राज्य सरकार का पक्ष रखने में उनका सहयोग लेने के लिए वर्तमान में भी सहमत और तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका हक दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर हो रही जातिगत जनगणना से भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की पहल की राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सराहना की। सर्वदलीय बैठक में शामिल सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और सदस्यों ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक उमंग सिंघार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस अरूण यादव, प्रदेश अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी रमाकांत पिप्प्ल, प्रदेश अध्यक्ष समाजवाद पार्टी मनोज यादव, प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं विधायक तलेश्वर सिंह मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष आम आदमी पार्टी एवं महापौर नगर पालिक निगम सिंगरौली रानी अग्रवाल, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के जे.पी दुबे, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल तथा अधिवक्ता वरूण ठाकुर उपस्थित थे।

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बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग रामकृष्ण कुसमारिया, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा हेमंत खंडेलवाल, सतना सांसद गणेश सिंह तथा विधायक प्रदीप शामिल हुए। बैठक में एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की। मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव विधि एन.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सर्वदलीय बैठक को स्वागत योग्य पहल बताया। समाजवाटी पार्टी के मनोज यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका अधिकार मिलना चाहिए। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडलवाल तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जे.पी. दुबे ने भी अपने विचार रखे।

अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने संबंधी जानकारी

दिनांक 8 मार्च 2019 को म.प्र. शासन द्वारा अध्यादेश जारी कर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। दिनांक 14 अगस्त 2019 को विधानसभा में विधेयक पारित कर इसे कानून के रूप में लागू किया गया।

वर्तमान में 19 मार्च 2019 को दायर WP 5901/ 2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) सहित 40 से अधिक प्रकरण उच्चतर न्यायालयों में प्रचलन में हैं, जिनमें मूलतः अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश/अधिनियम में 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है, परंतु अधिनियम की वैधानिकता पर न्यायालय द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। अतः उपरोक्त अधिनियम आज की स्थिति में वैधानिक है एवं इसकी वैधानिकता पर वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में याचिका क्रमांक Writ Petition (s) (Civil) No(s). 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ होना नियत है।

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दिनांक 19 मार्च 2019 को दायर याचिका WP 5901/2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) में अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश के आधार पर 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण महावि‌द्यालय में प्रवेश के दौरान न देने के निर्देश दिये। (चिकित्सा शिक्षा विभाग) WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ प्रकाशित विज्ञापनों (यथा MPPSC, PEB, TET आदि) पर रोक लगाई गई। उपरोक्त प्रकरणों में समय-समय पर पारित अंतरिम आदेश के कारण प्रावधानित 27 प्रतिशत अन्य पिछडा वर्ग आरक्षण का क्रियान्वयन प्रायोगिक रूप से संभव नहीं हो पाया है।

शासन द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं को WP 5901/2019 के साथ सम्मिलित कराया गया। उपरोक्त याचिकाओं में पारित अंतरिम आदेशों के म‌द्देनजर महाधिवक्ता के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रभावी प्रतिरक्षण की कार्यवाही सुनिश्चित की गई।

दिनांक 29 सितंबर 2022 को सामान्य प्रशासन विभाग ‌द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को परीक्षा परिणाम दो भागों में, 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परिणाम घोषित करने के निर्देश जारी किये गए।

दिनांक 27 जनवरी 2024 को सामान्य प्रशासन विभाग‌द्वारा मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड को परीक्षा परिणाम दो भागों में, 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परिणाम घोषित करने के निर्देश जारी किये गए।

50 प्रतिशत की उपरोक्त सीमा के संबंध में विद्यमान असाधारण परिस्थितियों (Extra ordinary circumstances) का विवरण/विश्लेषण का आधार अधिनियम में स्पष्ट नहीं है। अधिनियम के प्रभावी प्रतिरक्षण का सशक्त प्रयास मध्यप्रदेश शासन ‌द्वारा महाधिवक्ता के माध्यम से किया जा रहा है।

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दिनांक 02 सितंबर 2021 को मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया गया। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के उद्देश्य अनुसार – पिछड़े वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक प्रस्थिति, इस वर्ग के पिछड़ेपन के कारणों के अध्ययन हेतु शासन आदेश दिनांक 06/10/2023 द्वारा दो सदस्यों की नियुक्ति की गई। अन्य असाधारण परिस्थितियों का चिन्हांकन भी उद्देश्यों में शामिल है।

दिनांक 05 मई 2022 को मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा म.प्र. शासन को प्रथम प्रतिवेदन एवं दिनांक 12 मई 2022 को ‌द्वितीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

सुरेश महाजन बनाम म.प्र. शासन WP 278/2022 केस में दिनांक 18 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थानीय निर्वाचन (ग्रामीण एवं नगरीय निकाय), अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण (35 प्रतिशत तक) के साथ चुनाव करवाने हेतु अनुमति प्रदान की गई। अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनैतिक प्रतिनिधित्व के लिए यह अभूतपूर्व कदम था।

विभिन्न राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण और कुल आरक्षण की सापेक्ष स्थिति के दृष्टिगत भी राज्य सरकार अपना पक्ष रख रही है।

उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में विचाराधीन समस्त याचिकाएँ उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली, स्थानांतरित की गयी। वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में याचिका क्रमांक Writ Petition(s) (Civil) No(s). – 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ होना नियत है।

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दिनांक 23 जुलाई 2025 को पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के नए अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति की गई है।

मध्यप्रदेश पिछडा वर्ग कल्याण आयोग ने शासन स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनैतिक आंकड़ों को एकत्रित करने के साथ साथ उनके पिछड़ेपन के कारणों का सर्वेक्षण तथा वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्ववि‌द्यालय (महू) एवं म.प्र. जन अभियान परिषद (योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) को कार्य सौंपा है। साथ ही उपलब्ध आंकड़ों के सामाजिक-वैज्ञानिक अनुसन्धान एवं सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु विशेषज्ञ संस्थाओं की सेवायें भी ली जा रही हैं।

मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा उपरोक्त बिन्दुओं पर अनुभवजन्य एवं विश्लेषणात्मक प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया प्रचलन में है। प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत शासन ‌द्वारा आगामी कार्यवाही की जाएगी।

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MP News: मध्यप्रदेश में SIR के बाद 34.25 लाख नाम हटे, अब 5.39 करोड़ मतदाता, गोविंदपुरा में सबसे ज्यादा असर

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MP SIR Update: मध्यप्रदेश में  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की चार महीने चली प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। प्रदेश में कुल 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। SIR शुरू होने से पहले प्रदेश में कुल मतदाता संख्या 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ड्राफ्ट प्रकाशन में यह घटकर 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 रह गई। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान 10 लाख 85 हजार 413 नए नाम जोड़े गए, जबकि 2 लाख 36 हजार 331 नाम और हटाए गए। इस तरह शुद्ध रूप से 8 लाख 49 हजार 82 मतदाता बढ़े और अब प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 हो गई है। यह ड्राफ्ट के मुकाबले 1.60 प्रतिशत की वृद्धि है।

गोविंदपुरा में सबसे ज्यादा नाम कटे

राजधानी Bhopal के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां 97 हजार से अधिक नाम काटे गए। यह क्षेत्र मंत्री Krishna Gaur का विधानसभा क्षेत्र है। इसके उलट भोपाल का हुजूर विधानसभा क्षेत्र अब मतदाता संख्या के मामले में गोविंदपुरा से आगे निकल गया है।

इंदौर-5 सबसे बड़ा, कोतमा सबसे छोटा

Indore की इंदौर-5 विधानसभा प्रदेश में सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला क्षेत्र बन गया है। यहां 3 लाख 52 हजार 849 मतदाता दर्ज किए गए हैं। वहीं मंत्री Dilip Jaiswal का कोतमा विधानसभा क्षेत्र सबसे कम मतदाताओं वाला क्षेत्र है, जहां 1 लाख 39 हजार 559 वोटर हैं।

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नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया जारी

मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सुधार की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।  नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना होगा। सुधार या स्थानांतरण के लिए संबंधित फॉर्म जमा करें। ऑनलाइन आवेदन के लिए वोटर पोर्टल https://voters.eci.gov.in पर भी आवेदन कर सकते हैं।

SIR क्या है?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है। मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के नाम हटाए जाते हैं। डुप्लीकेट नामों को हटाया जाता है, नाम और पते की त्रुटियों को सुधारा जाता है और BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं। 1951 से 2004 तक SIR हो चुका है, लेकिन पिछले 21 वर्षों से व्यापक पुनरीक्षण नहीं हुआ था। इस दौरान माइग्रेशन, डुप्लीकेट नाम और अन्य विसंगतियों को दूर करना आवश्यक हो गया था।

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MP Weather: MP में मौसम फिर पलटा: फरवरी में तीसरी बार बारिश, दिन का पारा गिरा; 23-24 को फिर बरसात के आसार

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MP Weather: मध्य प्रदेश में फरवरी का महीना मौसम के लिहाज से असामान्य साबित हो रहा है। महीने की शुरुआत में ही दो बार ओले, आंधी और बारिश का दौर पड़ चुका है। इससे रबी फसलों को काफी नुकसान हुआ था और सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से प्रदेश एक बार फिर भीग गया। 19 फरवरी को भी सिस्टम का असर बना रहा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 23 और 24 फरवरी को चौथी बार बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अगले सप्ताह फिर मौसम करवट ले सकता है।

दिन में ठंडक, रात में राहत

बारिश और सर्द हवाओं के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को कई शहरों में ठंडी हवा चली, जिससे लोगों को फिर से गर्म कपड़े निकालने पड़े। हालांकि, रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी गई। प्रदेश के पांच बड़े शहर-  भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर  में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। खजुराहो और कल्याणपुर में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा, जबकि अन्य शहरों में तापमान इससे ज्यादा रहा।

अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम

21 फरवरी: बारिश का कोई अलर्ट नहीं, दिन में धूप खिलने की संभावना।

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22 फरवरी: मौसम साफ रहेगा, फिलहाल कहीं भी बारिश की चेतावनी नहीं।

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MP Budget 2026-27: ₹4.38 लाख करोड़ का GYANII बजट, किसानों- महिलाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

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Bhopal: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने 18 फरवरी को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹4,38,317 करोड़ का बजट पेश किया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में इसे राज्य का पहला रोलिंग बजट बताया और कहा कि यह विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप है। सरकार ने स्पष्ट किया कि लगातार तीसरी बार कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी सामाजिक योजना को बंद नहीं किया जा रहा, बल्कि उनमें पर्याप्त निवेश किया जा रहा है।

बजट की आधार थीम: GYANII मॉडल

प्रधानमंत्री के ‘GYAN’ मंत्र को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने इसमें एक अतिरिक्त ‘I’ जोड़कर इसे GYANII मॉडल नाम दिया है।

G-गरीब
Y- युवा
A-अन्नदाता,
N-नारी शक्ति
I-इंफ्रास्ट्रक्चर
I- इंडस्ट्री

इन प्राथमिकताओं के लिए बजट का बड़ा हिस्सा केंद्रित किया गया है।

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महिलाओं और पोषण पर बड़ा प्रावधान

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना: ₹23,882 करोड़

  • महिला एवं बाल विकास विभाग: ₹32,730 करोड़
  • ‘यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना’ के तहत कक्षा 8वीं तक टेट्रा पैक दूध
  • स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के साथ दूध उपलब्ध कराने के लिए 5 वर्षों में ₹6,600 करोड़

किसान कल्याण वर्ष: कृषि पर रिकॉर्ड प्रबंधन

सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष बताते हुए विभिन्न योजनाओं के तहत ₹1,15,013 करोड़ के प्रावधान का प्रबंधन किया है। इसके अलावा 1 लाख किसानों को सोलर पंप देने की योजना भी बजट में शामिल है।

  • किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग: ₹31,758 करोड़
  • पशुपालन एवं डेयरी: ₹2,365 करोड़
  • सहकारिता विभाग: ₹1,679 करोड़
  • उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण: ₹772 करोड़
  • मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास: ₹413 करोड़
  • खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण: ₹1,863 करोड़

इंफ्रास्ट्रक्चर और धार्मिक आयोजन

  • जर्जर पुल-पुलियाओं की मरम्मत: ₹900 करोड़
  • सड़कों के उन्नयन और मरम्मत के लिए अलग से प्रावधान
  • वीबी-जी-राम-जी मद में ₹28,000 करोड़
  • सिंहस्थ 2028 के लिए ₹3,060 करोड़

शिक्षा, युवा और प्रशासन

  • 15 हजार शिक्षकों की भर्ती का ऐलान
  • स्कूल शिक्षा विभाग: ₹36,730 करोड़
  • उच्च शिक्षा विभाग: ₹4,247 करोड़
  • खेल एवं युवा कल्याण: ₹715 करोड़

प्रशासनिक मजबूती के लिए

  • गृह विभाग: ₹13,411 करोड़
  • राजस्व विभाग: ₹13,876 करोड़
  • विधि एवं विधायी कार्य: ₹3,829 करोड़
  • सामान्य प्रशासन: ₹1,172 करोड़
  • जेल विभाग: ₹895 करोड़
  • संसदीय कार्य विभाग: ₹153 करोड़

पर्यावरण और विशेष प्रावधान

  • पर्यावरण विभाग: ₹31 करोड़ (वन्य प्राणी संरक्षण सहित)
  • भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास: ₹175 करोड़

क्या है नया और महत्वपूर्ण?

  • पहला रोलिंग बजट मॉडल, जिससे दीर्घकालिक परियोजनाओं की निरंतर फंडिंग सुनिश्चित होगी।
  • 2047 तक समृद्ध मध्य प्रदेश का लक्ष्य।
  • सामाजिक योजनाओं में कटौती नहीं, बल्कि विस्तार की नीति।
  • कृषि, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे को समान प्राथमिकता।
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MP Weather: मध्य प्रदेश में बारिश-आंधी का अलर्ट, 15 जिलों के लिये तेज बरसात, गरज-चमक और बिजली गिरने के आसार

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MP Weather: मध्य प्रदेश में मौसम विभाग ने नए सिस्टम के कारण 15 जिलों के लिये बारिश-आंधी अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। सबसे ज़्यादा असर 18 फरवरी को रहने की संभावना है। इसके बाद सिस्टम कमजोर होगा, लेकिन 19 फरवरी को हल्की बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

कहां रहेगा मौसम सक्रिय?

मौसम विभाग ने 15 जिलों में अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 18 फरवरी को बारिश के साथ तेज हवा, गरज-चमक और बिजली गिरने का ख़तरा है।

  1. ग्वालियर
  2. श्योपुर
  3. मुरैना
  4. भिंड
  5. दतिया
  6. शिवपुरी
  7. गुना
  8. अशोकनगर
  9. राजगढ़
  10. आगर-मालवा
  11. नीमच
  12. मंदसौर
  13. निवाड़ी
  14. टीकमगढ़
  15. छतरपुर

फरवरी में तीसरी बार बारिश

फरवरी की शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार बारिश, ओले और आंधी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिन्होंने फसलों को नुकसान पहुँचाया था। उसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे पूरा कराया। अब 18 फरवरी से यह सिस्टम तीसरी बार प्रदेश पर सक्रिय होगा और भारी बरसात की संभावना से मौसम प्रभावित रहेगा।

अगले 2 दिनों का मौसम

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17 फरवरी:

कई जिलों में बादल छाए रहने की संभावना, लेकिन बारिश कम।
भोपाल और इंदौर में दिन भर गर्मी का असर रहेगा।

18 फरवरी:

मौसम का असर बढ़ेगा। 15 जिलों में बारिश-आंधी तथा गरज-चमक का अलर्ट।

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MP News: 16 फरवरी से विधानसभा का बजट सत्र: 18 को बजट पेश, 3478 सवालों से घिरेगी सरकार

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MP Budget Session 2026: विधानसभा का बजट सत्र सोमवार, 16 फरवरी से शुरू होगा। सत्र की शुरुआत राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण से होगी। पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा। यह सत्र 6 मार्च तक चलेगा और कुल 12 बैठकें निर्धारित की गई हैं।

18 फरवरी को आएगा बजट

18 फरवरी को सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेगी। इसी सत्र में तीसरा अनुपूरक बजट भी सदन में रखा जाएगा। बजट के दौरान सरकार की आर्थिक प्राथमिकताएं, चुनावी वादों की प्रगति और राजस्व-व्यय संतुलन पर खास नजर रहेगी। विपक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि बेरोजगारी, कृषि भुगतान, लाड़ली बहना योजना, कर्ज और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।

3478 सवालों की बौछार

बजट सत्र के लिए विधायकों ने कुल 3478 प्रश्न लगाए हैं। इनमें 1750 तारांकित प्रश्न, 1728 अतारांकित प्रश्न, इसके अलावा 236 ध्यानाकर्षण सूचनाएं दी गई हैं। विधानसभा नियमों के मुताबिक प्रतिदिन केवल दो ध्यानाकर्षण पर ही चर्चा संभव है। यानी पूरे सत्र में अधिकतम 24 मामलों पर ही चर्चा हो सकेगी।

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10 स्थगन प्रस्ताव भी नोटिस में

विधायकों ने अति आवश्यक महत्व के 10 मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव की सूचना दी है। किन प्रस्तावों को चर्चा के लिए मंजूरी मिलेगी, इसका फैसला कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में किया जाएगा।

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