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Ayodhya: 84 सेकंड के शुभ मुहूर्त में होगी श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, जानिए पूरा कार्यक्रम

Ayodhya: अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी) को को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आध्यात्मिक रंग में डूबी अयोध्या पूरी तरह से राम रस में सराबोर हो चुकी है। पूरे मंदिर परिसर को किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है। सोमवार 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अलग-अलग क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियां, साधु-संत और विभिन्न देशों के राजनयिक भी अयोध्या पहुंचेंगे। इनमें से कई लोग अयोध्या पहुंच भी चुके हैं। अब सभी की नजरें सोमवार (22 जनवरी) को आने वाली उस ऐतिहासिक घड़ी पर टिकी हुई हैं, जब रामलला के अचल विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा अभिजीत मुहुर्त में संपन्न होगी।
प्राण प्रतिष्ठा का पूरा कार्यक्रम इस तरह रहेगा
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रातःकाल 10 बजे से ‘मंगल ध्वनि’ का भव्य वादन होगा। 50 से अधिक मनोरम वाद्ययंत्र, विभिन्न राज्यों से, लगभग 2 घंटे तक इस शुभ घटना का साक्षी बनेंगे। अयोध्या के यतीन्द्र मिश्र इस भव्य मंगल वादन के परिकल्पनाकार और संयोजक हैं, जिसमें केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली ने सहयोग किया है। यह भव्य संगीत कार्यक्रम हर भारतीय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर का प्रतीक है, जो प्रभु श्री राम के सम्मान में विविध परंपराओं को एकजुट करता है।
मेहमानों को 10:30 बजे तक परिसर में करना होगा प्रवेश
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों को 10:30 बजे तक रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश करना होगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने बताया कि उसके द्वारा जारी किए गए पास के जरिए ही प्रवेश संभव है। केवल निमंत्रण पत्र से मेहमानों को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। पास पर बने क्यूआर कोड के मिलान के बाद ही परिसर के प्रवेश मिलेगा। ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर पास(प्रवेशिका) का एक प्रारूप भी साझा किया है।

दोपहर 12:20 बजे से शुरू होगी प्राण प्रतिष्ठा की विधि
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की विधि 22 जनवरी को दोपहर 12:20 बजे शुरू होगी। प्राण प्रतिष्ठा की मुख्य पूजा अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी। शुभ मुहूर्त दिन के 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड तक का रहेगा। यानि प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त केवल 84 सेकंड का है। पूजा-विधि के जजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों श्रीरामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यह अनुष्ठान काशी के प्रख्यात वैदिक आचार्य गणेश्वर द्रविड़ और आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित के निर्देशन में 121 वैदिक आचार्य संपन्न कराएंगे। इस दौरान 150 से अधिक परंपराओं के संत-धर्माचार्य और 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तटवासी, द्वीपवासी, जनजातीय परंपराओं की भी उपस्थिति होगी।
दोपहर 1 बजे संपन्न हो जाएगा प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम
प्राण प्रतिष्ठा का पूरा कार्यक्रम दोपहर एक बजे तक पूरा हो जाएगा। सभी पूजा-विधि समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत अपना संदेश देंगे। वहीं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास आशीर्वाद देंगे।
अयोध्या समेत देश-दुनिया में राम ज्योति प्रज्ज्वलित कर मनेगा दीपोत्सव
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पूरे हो जाने के बाद शाम को ‘राम ज्योति’ प्रज्ज्वलित कर राम भक्त देश-दुनिया में दीपोत्सव मनाएंगे। शाम को अयोध्या 10 लाख दीपों से जगमगाएगी। इसके साथ ही मकानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और पौराणिक स्थलों पर ‘राम ज्योति’ प्रज्ज्वलित की जाएगी। अयोध्या सरयू नदी के तटों की मिट्टी से बने दीपों से रोशन होगी। रामलला, कनक भवन, हनुमानगढ़ी, गुप्तारघाट, सरयू तट, लता मंगेशकर चौक, मणिराम दास छावनी समेत 100 मंदिरों, प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
प्राण प्रतिष्ठा और संबंधित आयोजनों का विवरण:
1. आयोजन तिथि और स्थल: भगवान श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार, 22 जनवरी, 2024 को आ रहा है।
2. शास्त्रीय पद्धति और समारोह-पूर्व परंपराएं: सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए, प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अभिजीत मुहूर्त में संपन्न किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व शुभ संस्कारों का प्रारंभ 16 जनवरी 2024 से शुरू होकर 21 जनवरी, 2024 तक चलेगा।
द्वादश अधिवास
-16 जनवरी: प्रायश्चित्त और कर्मकूटि पूजन
-17 जनवरी: मूर्ति का परिसर प्रवेश
-18 जनवरी (सायं): तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
-19 जनवरी (प्रातः): औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
-19 जनवरी (सायं): धान्याधिवास
-20 जनवरी (प्रातः): शर्कराधिवास, फलाधिवास
-20 जनवरी (सायं): पुष्पाधिवास
-21 जनवरी (प्रातः): मध्याधिवास
-21 जनवरी (सायं): शय्याधिवास
3. अधिवास प्रक्रिया एवं आचार्य: सामान्यत: प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सात अधिवास होते हैं और न्यूनतम तीन अधिवास अभ्यास में होते हैं। समारोह के अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाओं का समन्वय, समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले 121 आचार्य होंगे। श्री गणेशवर शास्त्री द्रविड़ सभी प्रक्रियाओं की निगरानी, समन्वय और दिशा-निर्देशन करेंगे, तथा काशी के श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित मुख्य आचार्य होंगे।
4. विशिष्ट अतिथिगण: प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी।
5. विविध प्रतिष्ठान: भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दर्शन हेतु पधारेंगे।
6. ऐतिहासिक आदिवासी प्रतिभाग: भारत के इतिहास में प्रथम बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है। यह अपने आप में अद्वितीय होगा।
7. समाहित परंपराएं: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही, घिसापंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, शंकरदेव (असम), माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद्र ठाकुर परंपरा, ओडिशा के महिमा समाज, अकाली, निरंकारी, नामधारी (पंजाब), राधास्वामी और स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव इत्यादि कई सम्मानित परंपराएँ इसमें भाग लेंगी।
8. दर्शन और उत्सव: गर्भ-गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्ण होने के बाद, सभी साक्षी महानुभावों को दर्शन कराया जाएगा। श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए हर जगह उत्साह का भाव है। इसे अयोध्या समेत पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाने का संकल्प किया गया है। समारोह के पूर्व विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय थे मां जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या लाए गए। रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं।
https://khabritaau.com/ramnami-150-years-ago-their-ancestors-had-told-the-date-of-construction-of-the-temple-the-name-of-ram-is-their-life/
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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन, 75 की उम्र में ली आखिरी सांस

मुंबई/गोवा: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट आया था। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर को सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। अस्पताल के मुताबिक मामले में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।
3 नेशनल अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित
नाना पाटेकर ने करीब चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। उन्होंने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से फिल्मी करियर शुरू किया था। 1989 की ‘परिंदा’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद ‘क्रांतिवीर’ के लिए बेस्ट एक्टर और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उनके नाम तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड रहे। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
‘वेलकम’ के उदय शेट्टी ने कॉमेडी में भी छोड़ी छाप
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ गंभीर और दमदार किरदारों तक सीमित नहीं रही। 2007 की फिल्म ‘वेलकम’ में उन्होंने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। बाद में वे ‘वेलकम बैक’ में भी इसी किरदार में नजर आए। मराठी सिनेमा में भी उन्होंने ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में यादगार अभिनय किया।
‘प्रहार’ के लिए ली थी सेना की ट्रेनिंग
नाना पाटेकर का भारतीय सेना से भी खास जुड़ाव रहा। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के लिए उन्होंने करीब तीन साल तक सैन्य प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद वे टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े और उन्हें मानद कैप्टन का पद मिला। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी उनके सेना से जुड़े होने की रिपोर्टें सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की अनुमति के बाद उन्होंने सेना के साथ अग्रिम क्षेत्रों में समय बिताया था।
पीएम मोदी ने जताया दुख
नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया। उन्होंने नाना को ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया, जिनकी अपनी अलग पहचान और अभिनय में गहराई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके निभाए किरदार कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे और हिंदी व मराठी सिनेमा में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनका करीब पांच दशक लंबा अभिनय सफर और दमदार संवाद अदायगी उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे अलग कलाकारों में शामिल करती है।

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुरानी पेंशन के लिए भर्ती प्रक्रिया की तारीख मानी जाएगी आधार

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की भर्ती प्रक्रिया 15 मई 2003 से पहले शुरू हो गई थी, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उसकी नियुक्ति इस तारीख के बाद हुई, तो सिर्फ नियुक्ति की तारीख के आधार पर उसे पुरानी पेंशन से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने सेवानिवृत्त ड्राइंग टीचर शकुंतला देवी की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना चुनने का विकल्प दिया है।
अप्रैल 2003 में शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया
शकुंतला देवी के मामले में शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2003 में बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने 21 से 26 अप्रैल 2003 के बीच काउंसलिंग में हिस्सा लिया था। हालांकि, परिणाम जारी करने में हुई देरी के कारण उनकी नियुक्ति सितंबर 2003 में हुई। बाद में 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नई पेंशन व्यवस्था के तहत रखा गया। उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने पाया कि भर्ती और काउंसलिंग की प्रक्रिया कटऑफ तारीख से पहले पूरी हो चुकी थी और नियुक्ति में देरी याचिकाकर्ता की वजह से नहीं हुई थी।
9 जुलाई 2026 के आदेश का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वित्त विभाग का 9 जुलाई 2026 का कार्यालय ज्ञापन भी अदालत के सामने रखा गया। इसमें उन कर्मचारियों के लिए एकमुश्त विकल्प का प्रावधान किया गया है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित या शुरू हो चुकी थी, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई।
31 अक्टूबर तक OPS चुनने का मौका
हाईकोर्ट ने शकुंतला देवी को 31 अक्टूबर 2026 तक CCS (Pension) Rules, 1972 के तहत पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने की अनुमति दी है। अदालत के निर्देश के मुताबिक विकल्प और आवश्यक राशि/समायोजन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार उनकी पात्रता पर विचार करेगी। पात्र पाए जाने पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
फैसले का आधार क्या है?
इस मामले में अदालत ने नियुक्ति की तारीख के बजाय भर्ती प्रक्रिया कब शुरू हुई थी और देरी किस कारण हुई, इसे महत्वपूर्ण माना। यानी यदि कर्मचारी ने कटऑफ तारीख से पहले भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था और बाद की देरी प्रशासनिक कारणों से हुई, तो केवल बाद की नियुक्ति तारीख को आधार बनाकर OPS से वंचित करना उचित नहीं माना गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने SIR के 14 फैसलों पर EC से मांगा जवाब, कहा- कानून तोड़ा गया तो फैसले रद्द हो सकते हैं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े फैसलों को लेकर दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पहले संबंधित पक्षों का जवाब सुना जाना जरूरी है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दूसरे दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
14 फैसलों पर उठे सवाल
याचिका के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच SIR से जुड़े कम से कम 14 मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं। आरोप है कि इसके बावजूद इन मामलों में फैसले चुनाव आयोग के नाम से लिए गए। हालांकि, यह फिलहाल याचिकाकर्ताओं का आरोप है। चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में अपना जवाब अदालत के सामने दिया जाना बाकी है।
कोर्ट ने कहा- कानून तोड़ा गया तो फैसले रद्द हो सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी फैसले को रद्द नहीं किया है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि जांच के बाद यह पाया जाता है कि SIR से जुड़े निर्णय कानूनी प्रक्रिया या संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत लिए गए थे, तो उन पर उचित न्यायिक कार्रवाई की जा सकती है। याचिकाओं में SIR से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों को वापस लेने के साथ-साथ मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।
इन लोगों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिका में SIR प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच और स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिनमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर कथित मतभेदों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग जैसे बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय के फैसले CEC अकेले नहीं ले सकते।
CEC की नियुक्ति और हटाने का संवैधानिक प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग में निहित है। इसी अनुच्छेद में CEC को पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज के समान प्रक्रिया और आधार का प्रावधान है।
इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित करने की मांग पर अंतरिम राहत नहीं दी। अंतिम रूप से इस मामले में CEC की भूमिका और SIR से जुड़े फैसलों की वैधता पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
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Budgam Encounter: लश्कर का टॉप कमांडर हाशिम मूसा ढेर, यूसमर्ग में सेना-पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन

Budgam News: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक शीर्ष आतंकी को मार गिराया है। मुठभेड़ यूसमर्ग के ऊपरी इलाके कोराग में मंगलवार देर रात शुरू हुई। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। तलाशी के दौरान संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद फायरिंग शुरू हो गई।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक मारे गए आतंकी की पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई है। कुछ रिपोर्टों में उसका नाम सुलेमान शाह उर्फ मूसा भी बताया गया है। सेना ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन कोराग’ नाम दिया है।
तलाशी के दौरान शव और हथियार बरामद
सेना के मुताबिक बुधवार सुबह इलाके में चल रही तलाशी के दौरान आतंकी का शव बरामद किया गया। उसके पास से हथियार और अन्य युद्धक सामग्री भी बरामद होने की जानकारी दी गई है। ऑपरेशन अभी जारी है और सुरक्षाबल आसपास के इलाके में अन्य आतंकियों की तलाश कर रहे हैं।
5 सितंबर के एनकाउंटर में बच निकला था मूसा
रिपोर्टों के मुताबिक हाशिम मूसा इससे पहले 5 सितंबर को यूसमर्ग के पहाड़ी इलाके में हुई एक मुठभेड़ के दौरान बच निकला था। उस ऑपरेशन में उसका सहयोगी यासिर मारा गया था। इसके बाद सुरक्षाबल मूसा की तलाश कर रहे थे।
LeT के चार आतंकियों के ग्रुप का आखिरी सदस्य
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार मूसा एक ऐसे LeT समूह से जुड़ा था, जिसके सदस्यों पर जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक इस समूह में जुनैद अहमद भट, यासिर, सुलेमान शाह और हाशिम मूसा शामिल थे। जुनैद दिसंबर 2024 में मारा गया था। सुलेमान शाह और यासिर भी अलग-अलग अभियानों में मारे जा चुके हैं। मूसा की मौत के साथ इस समूह के सभी चार सदस्यों के मारे जाने की जानकारी सुरक्षा सूत्रों ने दी है।
कई हमलों से जुड़े होने का दावा
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इस समूह पर पुंछ के डेरा की गली में सेना के जवानों पर घात लगाकर हमला करने और वायुसेना के काफिले पर हमले समेत कई घटनाओं में शामिल होने का आरोप था। रिपोर्ट के मुताबिक यासिर और मूसा पर 2024 में गुलमर्ग के पास बुटापथरी हमले में शामिल होने का भी संदेह था। इस हमले में दो सैनिक और दो नागरिक पोर्टर मारे गए थे।
बडगाम में सर्च ऑपरेशन जारी
सेना ने बताया कि ऑपरेशन कोराग के तहत इलाके में तलाशी अभियान जारी है। सुरक्षाबल यह सुनिश्चित करने के लिए आसपास के जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में सर्च कर रहे हैं कि कोई अन्य आतंकी वहां छिपा न हो।
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अर्नब के असर से बस्तर में बाढ़: इंद्रावती 12.39 मीटर पर पहुंची, 53 साल का रिकॉर्ड टूटा

Weather Update: छत्तीसगढ़ के बस्तर में भारी बारिश के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर 12.39 मीटर पहुंच गया है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक यह 1973 के रिकॉर्ड स्तर 12.18 मीटर से 21 सेंटीमीटर अधिक है। जलस्तर बढ़ने से जगदलपुर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सोमवार को 833 लोगों को सुरक्षित निकाला। जिले में प्रभावित लोगों के लिए 65 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 8,894 लोग रह रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के हालिया बुलेटिन में उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे लगे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने डिप्रेशन के प्रभाव का उल्लेख किया गया था।
बस्तर में राहत-बचाव अभियान जारी
इंद्रावती के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद जगदलपुर के निचले इलाकों में पानी भर गया। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। सोमवार को 833 लोगों को रेस्क्यू किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिले में बनाए गए 65 राहत शिविरों में हजारों लोग रह रहे हैं। प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
राजस्थान में बारिश के साथ ओले
राजस्थान में भी मौसम ने करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जयपुर, बीकानेर और चूरू समेत कई इलाकों में बारिश हुई। कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने की भी खबर है। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 20°C से नीचे पहुंच गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान में 3 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।
यूपी में सितंबर में जनवरी जैसी धुंध
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मंगलवार सुबह घनी धुंध देखने को मिली। अमेठी, रामपुर और बदायूं में दृश्यता कम रही। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कुछ जगहों पर करीब 25 मीटर दूर तक देखना मुश्किल रहा। वहीं, उत्तर प्रदेश से मानसून की वापसी का दौर शुरू हो गया है। पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों से मानसून के लौटने के बाद प्रदेश में भारी बारिश की गतिविधि में कमी आई है। IMD ने 29 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की है।
दिल्ली में 25 साल की दूसरी सबसे ठंडी सितंबर रात
दिल्ली में बारिश और मौसम में बदलाव के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई। रविवार को सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 21°C रहा। यह सितंबर में पिछले 25 वर्षों में दूसरा सबसे कम न्यूनतम तापमान है। इससे कम तापमान 2008 में 20.8°C दर्ज हुआ था।
मौसम में बदलाव के बीच दिल्ली-एनसीआर में सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ी है। IMD के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने और रातें सामान्य से कुछ ठंडी रहने की संभावना है।
उत्तराखंड में बारिश का दौर कमजोर
उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद अब राहत के संकेत हैं। 29 सितंबर को IMD ने उत्तराखंड के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
हिमाचल में तापमान में बड़ी गिरावट
हिमाचल प्रदेश में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है।
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