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Ayodhya: 84 सेकंड के शुभ मुहूर्त में होगी श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, जानिए पूरा कार्यक्रम

Ayodhya: अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी) को को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आध्यात्मिक रंग में डूबी अयोध्या पूरी तरह से राम रस में सराबोर हो चुकी है। पूरे मंदिर परिसर को किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है। सोमवार 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अलग-अलग क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियां, साधु-संत और विभिन्न देशों के राजनयिक भी अयोध्या पहुंचेंगे। इनमें से कई लोग अयोध्या पहुंच भी चुके हैं। अब सभी की नजरें सोमवार (22 जनवरी) को आने वाली उस ऐतिहासिक घड़ी पर टिकी हुई हैं, जब रामलला के अचल विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा अभिजीत मुहुर्त में संपन्न होगी।
प्राण प्रतिष्ठा का पूरा कार्यक्रम इस तरह रहेगा
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रातःकाल 10 बजे से ‘मंगल ध्वनि’ का भव्य वादन होगा। 50 से अधिक मनोरम वाद्ययंत्र, विभिन्न राज्यों से, लगभग 2 घंटे तक इस शुभ घटना का साक्षी बनेंगे। अयोध्या के यतीन्द्र मिश्र इस भव्य मंगल वादन के परिकल्पनाकार और संयोजक हैं, जिसमें केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली ने सहयोग किया है। यह भव्य संगीत कार्यक्रम हर भारतीय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर का प्रतीक है, जो प्रभु श्री राम के सम्मान में विविध परंपराओं को एकजुट करता है।
मेहमानों को 10:30 बजे तक परिसर में करना होगा प्रवेश
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों को 10:30 बजे तक रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश करना होगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने बताया कि उसके द्वारा जारी किए गए पास के जरिए ही प्रवेश संभव है। केवल निमंत्रण पत्र से मेहमानों को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। पास पर बने क्यूआर कोड के मिलान के बाद ही परिसर के प्रवेश मिलेगा। ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर पास(प्रवेशिका) का एक प्रारूप भी साझा किया है।

दोपहर 12:20 बजे से शुरू होगी प्राण प्रतिष्ठा की विधि
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की विधि 22 जनवरी को दोपहर 12:20 बजे शुरू होगी। प्राण प्रतिष्ठा की मुख्य पूजा अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी। शुभ मुहूर्त दिन के 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड तक का रहेगा। यानि प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त केवल 84 सेकंड का है। पूजा-विधि के जजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों श्रीरामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यह अनुष्ठान काशी के प्रख्यात वैदिक आचार्य गणेश्वर द्रविड़ और आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित के निर्देशन में 121 वैदिक आचार्य संपन्न कराएंगे। इस दौरान 150 से अधिक परंपराओं के संत-धर्माचार्य और 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तटवासी, द्वीपवासी, जनजातीय परंपराओं की भी उपस्थिति होगी।
दोपहर 1 बजे संपन्न हो जाएगा प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम
प्राण प्रतिष्ठा का पूरा कार्यक्रम दोपहर एक बजे तक पूरा हो जाएगा। सभी पूजा-विधि समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत अपना संदेश देंगे। वहीं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास आशीर्वाद देंगे।
अयोध्या समेत देश-दुनिया में राम ज्योति प्रज्ज्वलित कर मनेगा दीपोत्सव
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पूरे हो जाने के बाद शाम को ‘राम ज्योति’ प्रज्ज्वलित कर राम भक्त देश-दुनिया में दीपोत्सव मनाएंगे। शाम को अयोध्या 10 लाख दीपों से जगमगाएगी। इसके साथ ही मकानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और पौराणिक स्थलों पर ‘राम ज्योति’ प्रज्ज्वलित की जाएगी। अयोध्या सरयू नदी के तटों की मिट्टी से बने दीपों से रोशन होगी। रामलला, कनक भवन, हनुमानगढ़ी, गुप्तारघाट, सरयू तट, लता मंगेशकर चौक, मणिराम दास छावनी समेत 100 मंदिरों, प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
प्राण प्रतिष्ठा और संबंधित आयोजनों का विवरण:
1. आयोजन तिथि और स्थल: भगवान श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार, 22 जनवरी, 2024 को आ रहा है।
2. शास्त्रीय पद्धति और समारोह-पूर्व परंपराएं: सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए, प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अभिजीत मुहूर्त में संपन्न किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व शुभ संस्कारों का प्रारंभ 16 जनवरी 2024 से शुरू होकर 21 जनवरी, 2024 तक चलेगा।
द्वादश अधिवास
-16 जनवरी: प्रायश्चित्त और कर्मकूटि पूजन
-17 जनवरी: मूर्ति का परिसर प्रवेश
-18 जनवरी (सायं): तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
-19 जनवरी (प्रातः): औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
-19 जनवरी (सायं): धान्याधिवास
-20 जनवरी (प्रातः): शर्कराधिवास, फलाधिवास
-20 जनवरी (सायं): पुष्पाधिवास
-21 जनवरी (प्रातः): मध्याधिवास
-21 जनवरी (सायं): शय्याधिवास
3. अधिवास प्रक्रिया एवं आचार्य: सामान्यत: प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सात अधिवास होते हैं और न्यूनतम तीन अधिवास अभ्यास में होते हैं। समारोह के अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाओं का समन्वय, समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले 121 आचार्य होंगे। श्री गणेशवर शास्त्री द्रविड़ सभी प्रक्रियाओं की निगरानी, समन्वय और दिशा-निर्देशन करेंगे, तथा काशी के श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित मुख्य आचार्य होंगे।
4. विशिष्ट अतिथिगण: प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी।
5. विविध प्रतिष्ठान: भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दर्शन हेतु पधारेंगे।
6. ऐतिहासिक आदिवासी प्रतिभाग: भारत के इतिहास में प्रथम बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है। यह अपने आप में अद्वितीय होगा।
7. समाहित परंपराएं: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही, घिसापंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, शंकरदेव (असम), माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद्र ठाकुर परंपरा, ओडिशा के महिमा समाज, अकाली, निरंकारी, नामधारी (पंजाब), राधास्वामी और स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव इत्यादि कई सम्मानित परंपराएँ इसमें भाग लेंगी।
8. दर्शन और उत्सव: गर्भ-गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्ण होने के बाद, सभी साक्षी महानुभावों को दर्शन कराया जाएगा। श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए हर जगह उत्साह का भाव है। इसे अयोध्या समेत पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाने का संकल्प किया गया है। समारोह के पूर्व विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय थे मां जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या लाए गए। रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं।
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Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का निधन: बारामती में चार्टर्ड प्लेन क्रैश, 5 की मौत

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (66) का बुधवार सुबह एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया। यह दुर्घटना सुबह 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुई, जब मुंबई से आ रहा उनका चार्टर्ड विमान रनवे से पहले ही क्रैश हो गया और उसमें आग लग गई। हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के अलावा उनके एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में चार चुनावी रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे। वे सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुए थे।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि पायलट ने पहले लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे साफ नजर नहीं आने पर विमान को दोबारा ऊपर ले जाया गया। इसके बाद रनवे-11 पर दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया गया, इसी दौरान विमान रनवे से पहले गिर गया। हादसे से पहले कोई इमरजेंसी या ‘मेडे’ कॉल नहीं दी गई। अजित पवार का अंतिम संस्कार 29 जनवरी 2026 को होगा।
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बारामती पहुंच गए। राज्य सरकार ने आज स्कूलों में छुट्टी और 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती में किया जाएगा। उनके चाचा शरद पवार, पत्नी सुनेत्रा पवार, दोनों बेटे और बहन सुप्रिया सुले भी बारामती पहुंच चुकी हैं।
इधर, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। एक टीम दिल्ली में विमान की ऑपरेटर कंपनी VSR वेंचर्स के दफ्तर पहुंची है, जबकि दूसरी टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है। कंपनी ने दावा किया है कि विमान में कोई तकनीकी खामी नहीं थी और पायलट को 16 हजार घंटे का उड़ान अनुभव था।
अजित पवार की पार्टी एनसीपी, भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार का हिस्सा है। पार्टी के पास कुल 41 विधायक हैं। पवार स्वयं उपमुख्यमंत्री थे, जबकि पार्टी के 7 कैबिनेट और 1 राज्य मंत्री सरकार में शामिल हैं।
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UGC New Rules Protest: UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज, दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा

UGC New Rules n India: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण समाज का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शन कारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग की गई।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों- लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई।
रायबरेली में अनोखा विरोध
रायबरेली में विरोध के दौरान भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना आक्रोश जाहिर किया। यह विरोध सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
मशहूर कवि कुमार विश्वास का तंज
UGC के नियमों को लेकर कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा- “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।” उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
शिक्षा मंत्री का बयान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी को भी नए नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
UGC के नए नियमों के खिलाफ वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में नियमों पर रोक लगाने, सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और इक्विटी हेल्पलाइन सुविधाएं देने की मांग की गई है।
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Padma Awards 2026: धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, शिबु सोरेन-अलका याज्ञनिक को पद्म भूषण, रोहित शर्मा समेत 113 को पद्मश्री

Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। इस साल कुल 131 हस्तियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा जाएगा। इनमें 5 लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान देने का ऐलान किया गया है।
5 हस्तियों को पद्म विभूषण
सरकार ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र समेत पांच प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है।
पद्म भूषण पाने वालों में शिबु सोरेन और अलका याज्ञनिक
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबु सोरेन और मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक सहित कुल 13 हस्तियों को इस वर्ष पद्म भूषण के लिए चुना गया है।
रोहित शर्मा, हरमनप्रीत कौर समेत 113 को पद्मश्री
खेल, कला, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 113 हस्तियों को पद्मश्री देने का फैसला किया गया है। इस सूची में प्रमुख नामों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, पूर्व क्रिकेटर प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती को भी पद्मश्री
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हिरानार गांव की सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। बुधरी ताती ने महज 15 वर्ष की उम्र में समाज सेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने बस्तर अंचल में महिलाओं को जागरूक और शिक्षित करने के साथ-साथ वृद्धा आश्रम और अनाथ आश्रम भी संचालित किए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने बस्तर संभाग के करीब 545 गांवों की पदयात्रा की। समाज सेवा के प्रति समर्पण के चलते उन्होंने विवाह नहीं किया। अब तक वे 22 पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं, जिनमें 3 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं।
मध्यप्रदेश से भी कई हस्तियां सम्मानित
मध्यप्रदेश से भोपाल के प्रख्यात लेखक कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार, मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। भगवानदास रैकवार बुंदेली युद्ध कला के प्रमुख संरक्षक माने जाते हैं। उन्होंने दशकों तक युवाओं को पारंपरिक मार्शल आर्ट सिखाकर इस कला को विलुप्त होने से बचाया है।
तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं पद्म पुरस्कार
पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल, उद्योग और सिविल सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिए जाते हैं।
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Tamilnadu: तमिल भाषा शहीद दिवस पर स्टालिन का बड़ा बयान, बोले- तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी जगह नहीं, थोपने का करेंगे विरोध

TamilNadu Hindi controversy: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को तमिल भाषा शहीद दिवस के अवसर पर राज्य के भाषा आंदोलन से जुड़े शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कभी कोई जगह नहीं होगी और राज्य हिंदी थोपने की किसी भी कोशिश का लगातार विरोध करता रहेगा। सीएम स्टालिन ने कहा कि तमिल भाषा के प्रति प्रेम कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब-जब हम पर हिंदी थोपी गई, उतनी ही मजबूती से उसका विरोध किया गया।” उन्होंने तमिल भाषा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को नमन करते हुए कहा कि भाषा के नाम पर अब और किसी की जान नहीं जानी चाहिए।
X पर वीडियो शेयर कर भाषा आंदोलन को किया याद
तमिल भाषा शहीद दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक क्षण दिखाए गए हैं।
स्टालिन ने डीएमके के संस्थापक नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई समुदायों की पहचान और अधिकारों की रक्षा की।
हिंदी को लेकर केंद्र और राज्य में लंबे समय से टकराव
तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार के बीच हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन लगातार केंद्र की तीन भाषा नीति (Three Language Policy) का विरोध करते रहे हैं। पिछले साल मार्च में स्टालिन सरकार ने राज्य बजट 2025-26 के प्रतीक चिह्न से रुपये का सिंबल ‘₹’ हटाकर उसकी जगह तमिल अक्षर ‘ரூ’ शामिल किया था। इस कदम को हिंदी और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। स्टालिन का कहना है कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) से राज्य को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिला है।
हिंदी पर प्रतिबंध को लेकर भी हो चुकी है तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार अक्टूबर में विधानसभा में राज्य में हिंदी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही थी, हालांकि यह बिल पेश नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि सरकार हिंदी के होर्डिंग्स, साइनबोर्ड, फिल्मों और गानों पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर चुकी है। इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ इमरजेंसी बैठक भी बुलाई गई थी, जिसके बाद हिंदी बैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
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Weather: उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, हिमालय में सीजन की पहली बर्फबारी

Weather Update: उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने से मौसम पूरी तरह बदल गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में देर रात से बारिश हो रही है। कई इलाकों में तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और ठंड बढ़ गई है। हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। इससे करीब साढ़े तीन महीने से चला आ रहा ड्राई स्पेल खत्म हो गया है।
जम्मू-कश्मीर के मैदानी और पहाड़ी जिलों में भी लगातार बर्फबारी हो रही है। श्रीनगर एयरपोर्ट पर करीब 4 इंच तक बर्फ जम गई, जिसके चलते शुक्रवार के लिए सभी फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं। श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे को भी बंद कर दिया गया है। नवयुग टनल के पास ट्रैफिक रोक दिया गया है, जबकि मुगल रोड और सिंथन रोड भी बंद हैं। कटरा में भारी बर्फबारी के चलते वैष्णो देवी यात्रा रोक दी गई है। वहीं, एहतियातन राजौरी, पुंछ और कठुआ जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
26 जनवरी को दूसरा स्ट्रॉन्ग सिस्टम
मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को दूसरा और ज्यादा मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है। इसके असर से उत्तर भारत के करीब 9 राज्यों में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस क्या है
वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं और बादलों का सिस्टम होता है। इसके सक्रिय होने पर पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इससे तापमान गिरता है और पाला व कोल्डवेव जैसे हालात बनते हैं।
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