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UP Encounter: फिरोजाबाद में हुई 2 करोड़ की लूट का मास्टरमाइंड ढेर, पुलिस अभिरक्षा से हुआ था फरार

Firozabad: उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद के मक्खनपुर क्षेत्र में 30 सितंबर को हुई 2 करोड़ रुपए की सनसनीखेज लूट का मास्टरमाइंड नरेश रविवार रात 8 बजे मुठभेड़ में ढेर हो गया। नरेश को पुलिस ने चेकिंग के दौरान मक्खनपुर क्षेत्र में बाईपास स्थित होटल डीएमआर के पास मुठभेड़ में ढेर किया। बदमाश नरेश रविवार दोपहर को पुलिस हिरासत से उस समय फरार हो गया था, जब पुलिस उसे लूट की रकम बरामद करने ले जा रही थी।
रविवार दोपहर करीब एक बजे मक्खनपुर के गांव घुनपई के पास सर्विस रोड किनारे बदमाश नरेश ने शौच जाने की बात कही। पुलिसकर्मियों ने उसे खेड़ा गणेशपुर के पास गाड़ी से उतार दिया। उसके एक हाथ में हथकड़ी लगी हुई थी, लेकिन वह हाइवे के समीप झाड़ियों में जाने के बाद पांच मिनट तक वापस नहीं लौटा। जब पुलिसकर्मी देखने गए, तो नरेश गायब मिला। इसके बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई और तुरंत हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।
बदमाश नरेश को पकड़ने के लिए पुलिस सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। फरार आरोपी को पकड़ने के लिए पूरे जिले में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस को देर शाम आठ बजे उसके बाईपास पर डीएमआर होटल के पास होने का इनपुट पुलिस को मिला। पुलिस ने मौके पर जाकर घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जबावी फायरिंग में उसके सीने में गोली लगी और मौके पर ढेर हो गया।
फिरोजाबाद के मक्खनपुर क्षेत्र में हुई 2 करोड़ की लूट के आरोपी बदमाश नरेश गांव अरनी, खैर, अलीगढ़ का रहने वाला था। उसे पुलिस ने पांच अन्य बदमाशों के साथ शनिवार शाम गिरफ्तार किया था। इनके पास से पुलिस ने 1 करोड़ 5 हजार रुपए की नगदी बरामद की थी। शनिवार देर रात पुलिस नरेश को अलीगढ़ के खैर लेकर गई। वहां उससे 20 लाख रुपए और बरामद कराए थे। इसके बाद नरेश से पूछताछ में लूट की रकम में से कुछ अन्य की बरामदगी कराए जाने के संबंध में इनपुट मिला था। इसके लिए ही पुलिस रविवार दोपहर को करीब एक बजे मक्खनपुर के गांव घुनपई के समीप सर्विस रोड किनारे ले जा रही थी। जहां से वह शौच का बहाना बनाकर फरार हुआ था।
नरेश के फरार होने के बाद पुलिस की एक टीम ने अन्य पांचों लुटेरे तुषार, दुष्यंत, अक्षय, आशीष उर्फ आशू और मोनू उर्फ मिलाप की कड़ी निगरानी शुरू कर दी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में उनको रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उनकी न्यायिक हिरासत मंजूर होते ही पुलिस ने उनको जेल भेज दिया। कोर्ट में पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी छह के सापेक्ष पांच मुल्जिम इसलिए पेश किए हैं कि एक फरार हो गया है। एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि फरार अपराधी नरेश मुठभेड़ में मारा गया है। फरारी के बाद उस पर 50 हजार का इनाम डीआईजी स्तर से घोषित किया गया था, जो कि टीम को दिया जाएगा।
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Mathura: ‘अयोध्या की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि में बनेगा भव्य कृष्ण मंदिर: योगी आदित्यनाथ

Mathura: उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्री कृष्ण जन्मभूमि में दर्शन-पूजन के बाद बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ब्रज की रज-रज और कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियां बसती हैं। यदि कृष्ण कन्हैया की कृपा हुई तो अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनेगा। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रज की पवित्र भूमि भगवान कृष्ण और राधारानी की लीलाओं से भरी हुई है और यह क्षेत्र आस्था का बड़ा केंद्र है।
ब्रज विकास के लिए 300 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने ब्रज क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई। उन्होंने उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की आठवीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मथुरा से वृंदावन के बीच 11.80 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग को फोरलेन सड़क में बदलने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे से समन्वय कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज की जाए ताकि परियोजना जल्द शुरू हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में इसी मार्ग पर एलीवेटेड मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना है।
पर्यटन और धार्मिक परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग के विकास, छाता क्षेत्र के अजीजपुर गांव में वाटर म्यूजियम, 36 वनों के इको-रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट और यमुना जी के किनारे रिवर फ्रंट और जलमार्ग विकास जैसी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इन योजनाओं के तहत मथुरा से वृंदावन के बीच क्रूज और नौका संचालन शुरू करने की भी योजना है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने ब्रजवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व उत्साह, उमंग और सकारात्मकता का संदेश देता है।
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UP News: यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हमले का दूसरा आरोपी गुलफाम भी एनकाउंटर में मारा गया, 48 घंटे में दोनों भाई ढेर

Ghaziabad Encounter: गाजियाबाद में यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 48 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा एनकाउंटर हुआ। मुख्य आरोपी जीशान के बाद मंगलवार रात उसका बड़ा भाई गुलफाम भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। थाना इंदिरापुरम क्षेत्र में पुलिस को गुलफाम और उसके साथी की लोकेशन मिली थी।
एडिशनल DCP क्राइम पीयूष सिंह के मुताबिक, वसुंधरा बिजलीघर के पास घेराबंदी की गई। देर रात एक बाइक आती दिखी, जिस पर दो लोग सवार थे। रोकने का इशारा करने पर उन्होंने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की। स्वाट टीम ने पीछा किया। एलिवेटेड रोड के नीचे मिट्टी के टीले पर बाइक फिसल गई और दोनों बदमाश गिर पड़े। पुलिस के पहुंचते ही उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली गुलफाम को लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। गुलफाम की पहचान अमरोहा निवासी के रूप में हुई है, जो गाजियाबाद में किराए पर रह रहा था।इससे पहले रविवार को मुख्य आरोपी जीशान भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है।
6 पॉइंट में पूरा एनकाउंटर
- गुलफाम की लोकेशन पर इंदिरापुरम में घेराबंदी
- बाइक से भागने की कोशिश, एलिवेटेड रोड के नीचे फिसली बाइक
- बदमाशों की फायरिंग में 2 पुलिसकर्मी घायल।
- ACP समेत अन्य अधिकारियों की जैकेट पर लगी गोलियां
- जवाबी फायरिंग में गुलफाम को गोली, अस्पताल में मौत
- 48 घंटे में दोनों सगे भाई पुलिस मुठभेड़ में ढेर
क्या है पूरा मामला?
27 मार्च को इस्लाम धर्म छोड़ चुके यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर दिनदहाड़े उनके ऑफिस में हमला हुआ था। बिना नंबर प्लेट की बाइक से आए नकाबपोश हमलावरों ने उन पर 14 चाकू से वार किए और गला रेतने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल सलीम को दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। पीड़ित के बेटे की शिकायत पर AIMIM से जुड़े एक नेता समेत 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यूपी में आतंक की कोई जगह नहीं है।
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UP News: प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट का बड़ा आदेश, बच्चों के यौन शोषण के आरोप में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

Prayagraj: प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को बड़ा आदेश देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर जारी किया। अदालत ने इससे पहले 13 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट में पेश किए गए बच्चे
मामले में शिकायतकर्ता और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो बच्चों को पेश कर गंभीर आरोप लगाए थे। बच्चों के बयान कैमरे के सामने कोर्ट में दर्ज किए गए। अदालत के आदेश के बाद पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने को कहा गया है।
शिकायतकर्ता का बयान
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा कि अदालत में आने के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किए गए। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पैदल यात्रा का ऐलान
आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस मामले को लेकर पैदल यात्रा शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे वाराणसी के विद्यामठ तक जाएंगे और जनसमर्थन जुटाएंगे। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने की अपील की और कहा कि वे न्याय के लिए लोगों के बीच जाएंगे। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पुलिस जांच और न्यायालय की सुनवाई के बाद तय होगी।
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UP News: यूपी में 1.70 लाख शिक्षा मित्रों को बड़ा तोहफा, मानदेय 10 से बढ़कर 18 हजार, अनुदेशकों को 17 हजार मिलेंगे

UP Shiksha Mitra Salary Hike: पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की Government of Uttar Pradesh ने बड़ा दांव खेला है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में 1.70 लाख से ज्यादा शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया। अब शिक्षा मित्रों को हर महीने 18 हजार रुपए और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मिलेंगे। अभी तक शिक्षा मित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए मिलते थे। यानी एक साथ 8 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है।
सीएम ने कहा कि महंगाई को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में शिक्षा मित्रों को सिर्फ 3 हजार रुपए मिलते थे। 2017 में हमारी सरकार ने इसे 10 हजार किया था, अब इसे 18 हजार किया जा रहा है।
9 साल बाद बढ़ा मानदेय, ट्रांसफर की भी सुविधा
करीब 9 साल बाद शिक्षा मित्रों की सैलरी बढ़ाई गई है। सरकार ने शिक्षा मित्रों के ट्रांसफर की व्यवस्था भी लागू करने की घोषणा की है। इसके अलावा उन्हें और उनके परिवार को 5 लाख रुपए तक की कैशलेस इलाज सुविधा भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग में 75 हजार नौकरियों की घोषणा भी की है।
2017 में रद्द हुआ था समायोजन
यूपी में 2001 से शिक्षा मित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी। 2013-14 में सपा सरकार ने उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया था। इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने समायोजन रद्द कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी समायोजन रद्द करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद 1.78 लाख सहायक अध्यापक फिर से शिक्षा मित्र बना दिए गए। 50 हजार रुपए वेतन पाने वाले शिक्षकों का मानदेय घटकर 3500 रुपए रह गया था।
आंदोलन के बाद बढ़ा था मानदेय
समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेशभर के शिक्षा मित्रों ने लखनऊ में गोमती तट पर बड़ा आंदोलन किया। इसके बाद सरकार ने मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने की घोषणा की थी। सरकार ने 68,500 और फिर 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षा मित्रों को आयु सीमा में छूट और 25 बोनस अंक देने का फैसला किया। इन दोनों भर्तियों में करीब 13 हजार से ज्यादा शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बने।अब एक बार फिर मानदेय बढ़ने से चुनावी साल में लाखों परिवारों को राहत मिली है।
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UP News: शंकराचार्य विवाद पर विधानसभा में गरजे योगी, बोले- हर कोई नहीं लिख सकता शंकराचार्य, कानून सबके लिए बराबर

Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर जवाब देते हुए कहा- कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, मैं भी नहीं। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच व्यवस्था तोड़ने की कोशिश गैर-जिम्मेदाराना थी। सपा पर भी सीधा सवाल- अगर वे शंकराचार्य थे तो वाराणसी में लाठीचार्ज क्यों?
‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर शुक्रवार को विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और न ही आचार्य बनकर कहीं भी माहौल बिगाड़ सकता है। उन्होंने कहा, भारत में कानून का शासन है और कानून सबके लिए बराबर है- मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम नागरिक के लिए है। योगी ने कहा कि अगर सपा के लोग उन्हें पूजना चाहते हैं तो पूजें, लेकिन व्यवस्था और मर्यादा का पालन सबको करना होगा।
‘माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे मुद्दा बनाया गया’
सीएम ने कहा कि माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री का बोर्ड लगाकर पूरे प्रदेश में घूम सकता है? नहीं। एक व्यवस्था है, एक सिस्टम है और उसी के तहत सबको चलना होगा। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में करीब साढ़े 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में हर किसी के लिए एक समान व्यवस्था लागू थी। जिस रास्ते से श्रद्धालु जा रहे थे, उसे ब्लॉक कर देना किसी जिम्मेदार व्यक्ति का आचरण नहीं हो सकता।
सपा पर पलटवार: ‘लाठीचार्ज क्यों करवाया था?’
योगी ने सदन में सपा से सवाल किया कि अगर वे शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों करवाया गया? एफआईआर क्यों दर्ज की गई? कैसी नैतिकता की बात की जा रही है? उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र है। आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार पीठों की स्थापना की- उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका। हर पीठ की अपनी परंपरा और वैदिक मान्यता है, जिसे नियमों के तहत ही स्वीकार किया जाता है।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए संगम जा रहे थे। पुलिस ने पालकी रोकते हुए पैदल जाने को कहा। शिष्यों ने इसका विरोध किया और आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। आरोप है कि एक साधु को चौकी में पीटा भी गया। इससे नाराज शंकराचार्य ने शिष्यों को छोड़े बिना आगे न बढ़ने की बात कही। बाद में पालकी को संगम से करीब एक किमी दूर खींचकर ले जाया गया, जहां उसका एक हिस्सा भी टूट गया। वे स्नान नहीं कर सके और 28 जनवरी तक शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे, फिर वाराणसी लौट गए।शंकराचार्य ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने संतों के साथ मारपीट की और यह सब सरकार के इशारे पर हुआ, क्योंकि उन्होंने पहले भगदड़ मामले में सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
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