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दरबार साहिब के प्रवेश द्वारों की बढ़ेगी खूबसूरती, चारों प्रवेश द्वारों पर चढ़ेगी 40 किलो सोने की परत

अमृतसर: सिखों के सबसे बड़े धर्मस्थल श्री दरबार साहिब के चारों प्रवेश द्वारों को अब 40 किलो सोने की पतरों से सजाया जाएगा। इसके पहले चरण के तहत घंटा घर साइड के प्रवेश द्वार की दर्शनी ड्योढ़ी के गुंबदों पर पतरे चढ़ाने का काम शुरू भी कर दिया गया है। पतरे लगाने की कार सेवा का जिम्मा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बाबा कश्मीर सिंह भूरीवाले को सौंपा है।
2019 में बैसाखी तक पूरा होगा काम
– बाबा भूरी वाले के प्रवक्ता राम सिंह के मुताबिक मुख्य द्वारों के चारों गुंबदों के अलावा 4 छोटे गुंबद, 50 छोटी गुंबदियां और 2 पालकी हैं। सभी पर सोना लगाने का काम अगले साल की बैसाखी तक पूरा हो जाएगा।
– श्री दरबार साहिब के 4 प्रवेश द्वार हैं। घंटा घर वाली साइड के प्रवेश द्वार के गुंबदों की कार सेवा मुकम्मल होने के बाद दूसरे प्रवेश द्वार भी सोने से सजाए जाएंगे।
संगत के दान से ही होती है सोना चढ़ाने की कार सेवा
कार सेवा करवाने वालों की ओर से संगत के चढ़ावे के लिए गोलक लगाई जाती है। इसमें संगत अपनी श्रद्धा के मुताबिक पैसे व साेना चढ़ाती है। यहां से ही सारा प्रबंध किया जाता है। गुरुघर के लिए किसी व्यक्ति विशेष से सहायता नहीं मांगी जाती।
4 महीने की तैयारी के बाद हुई पतरें बनाने की शुरुआत
– बाबा भूरीवाले को सेवा नवंबर 2017 में मिली। इसके बाद उन्होंने सोने से पतरे बनाने की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि गुंबदों पर सोना लगाने से पहले उसकी तैयारी के बेस बनाया जाता है। तांबे के बेस पर माहिर कारीगरों की ओर से पारे की मदद से सोना चढ़ाया जाता है।
– दर्शनी ड्योढ़ी के गुंबद पर सोना लगाने की तैयारी के लिए तांबे का बेस बनाया गया। करीब चार महीने की तैयारी के बाद सोना चढ़ाने की शुरुआत 10 फरवरी को दरबार साहिब के अरदासिये कुलविंदर सिंह की ओर से अरदास के बाद की गई। सेवा के पहले दिन गुंबद के 10 माेजबान (पतरे) लगाए गए थे। अब मेन गेट के गुंबदों की सेवा पूरा होने को है।
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Earthquake: म्यांमार भूकंप में मृतकों की संख्या 2 हजार के पार, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा

Myanmar Earthquake: म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या अब 2000 पार कर गई है। जुंटा सरकार ने सोमवार (31 मार्च, 2025) को भूकंप प्रभावितों के नए आंकड़े जारी किए हैं। भीषण भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,056 हो गई है और 3,900 से ज्यादा लोग घायल हैं। बचाव दल ढह चुकी इमारतों के मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम जारी रखे हुए हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सोमवार को होटल के मलबे से एक महिला को जिंदा बाहर निकाला गया है। ये महिला भूकंप के तीन दिन बाद एक उम्मीद की किरण के रूप में नजर आई है, क्योंकि बचावकर्मी ज्यादा से ज्यादा जीवित लोगों को खोजने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। सत्तारूढ़ जुंटा ने एक बयान में कहा कि शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में जानमाल की हानि और क्षति के प्रति संवेदना प्रकट करने के लिए 6 अप्रैल तक राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।
भूकंप ने म्यांमार में तो भारी तबाही मचाई ही है, साथ ही पड़ोसी थाईलैंड में भी भारी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बैंकॉक में आपातकालीन दल ने सोमवार को एक निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत के ढह जाने के बाद मलबे के नीचे दबे 76 लोगों की तलाश फिर से शुरू कर दी है। लगभग तीन दिन बाद यह आशंका बढ़ रही थी कि बचाव दल को और अधिक शव मिलेंगे, जिससे थाईलैंड में मरने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है। रविवार तक थाईलैंड में मरने वालों की संख्या 18 थी।
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Earthquake: म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही, अब तक 1644 की मौत, थाइलैंड में 10 की मौत, कई लापता

Earthquake: म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। अकेले म्यांमार में भूकंप में 1644 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि अभी तक 2300 से अधिक घायलों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए ले जाया गया है। वहीं सैंकड़ों लोग भूकंप के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इनके मलबे में दबे होने की आशंका है। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने आशंका जताई है कि म्यांमार में भूकंप से मरने वालों का आंकड़ा 10 हजार पार जा सकता है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत सामग्री भेजी है। वायुसेना का विमान सी-130 जे करीब 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंच गया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए जानकारी दी है। कि ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) सी-130जे विमान में सवार होकर म्यांमार को राहत सामग्री भेजी गई। राहत पैकेज में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सीरिंज, दस्ताने और पट्टियां जैसी आवश्यक चीजें शामिल हैं। शुक्रवार कौ आए भूकंप के झटके बांग्लादेश, चीन और भारत तक महसूस किए गए। हालांकि इन देशों से नुकसान की कोई ख़बर नहीं है।
थाइलैंड में अब तक 10 की मौत, कई लापता
म्यांमार के पड़ोसी देश थाइलैंड में भी करीब 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जहां एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत भूकंप के झटकों से ढह गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया, लोग घबराकर चीखने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बैंकॉक प्रशासन के अनुसार, इस दुर्घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 16 घायल हैं और 101 लोग लापता हैं। भारी तबाही के चलते पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है।
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Earthquake: म्यांमार और थाइलैंड में 7.7 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, आसपास के देशों में भी महसूस हुए झटके

Earthquake: म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को भूकंप के जोरदार झटकों से भारी तबाही हुई है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई। भूकंप का केंद्र म्यांमार का Sagaing रहा। यूएसजीएस के मुताबिक, म्यांमार में 12 बजकर 50 मिनट पर भूकंप का पहला झटका महसूस किया गया। उसका केंद्र सागाइंग (Sagaing) से नॉर्थ वेस्ट में 16 किलोमीटर दूर था। इसके 12 मिनट बाद भूकंप का दूसरा झटका महसूस हुआ, जिसकी तीव्रता 6.4 मापी गई। इसका केंद्र थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में था। बांग्लादेश में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। यहां रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.3 रही। चीन, ताइवान और भारत में भी कुछ हिस्सो में भूकंप के झटके महूसस किए गए।
म्यांमार में हुई भारी तबाही
भूकंप के झटकों की वजह से म्यांमार के मांडले में इरावडी नदी पर बना एवा ब्रिज (Ava Bridge) ढह गया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भूकंप के चलते म्यांमार की राजधानी नेपीदा में मंदिर और घर टूट गए। म्यांमार में ऐतिहासिक शाही महल मांडले पैलेस के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। म्यांमार में भूकंप के भयानक झटकों के कारण मंडाले मस्जिद ढह गई है। इस हादसे में 20 लोगों की मौत की हो गई है। वहीं, म्यांमार के टाउंगो में भी 5 लोगों की जान चली गई है।
बैंकाक में निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत गिरी, कई लोग दबे
बैंकॉक में भूकंप से भारी तबाही हुई है। यहां एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। थाईलैंड की स्थानीय मीडिया के मुताबिक, बैंकॉक में जो बिल्डिंग गिरी थी, उसमें कई लोग दब गए हैं। बताया जा रहा है कि यहां काम कर रहे 400 से ज्यादा मजदूरों में से 80 लापता हैं। भूकंप की वजह से बैंकॉक पूरी तरह से लॉकडाउन है। मेट्रो सेवाएं रोक दी गई हैं। शेयर बाजार में ट्रेडिंग भी थम गई है। एयरपोर्ट और सबवे बंद कर दिए गए हैं।
बांग्लादेश में आया 7.3 तीव्रता का भूकंप
भूकंप के तीव्र झटके बांग्लादेश में भी महसूस किए गए हैं। यहां रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.3 रही। ढाका और चटगांव सहित बांग्लादेश के कई शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, फिलहाल इससे अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
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Russia-Ukraine: काला सागर में रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर, सऊदी अरब में बनी सहमति, ट्रंप बोले- हो गई डील

Russia-Ukraine War: अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई वर्चुअल मीटिंग के बाद व्हाइट हाउस ने जानकारी दी है कि पुतिन और जेलेंस्की अब काला सागर में युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री रुस्तम उमरोव ने मंगलवार (25 मार्च 2025) को बताया कि रूस-यूक्रेन एक-दूसरे के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला बंद करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर यह जानकारी दी।
ब्लैक-सी में युद्धविराम पर सहमति
सऊदी अरब में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने जानकारी दी है कि पुतिन और जेलेंस्की अब ब्लैक सी में युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए हैं। यह समझौता डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच वर्चुअल मीटिंग के बाद हुआ, जिसमें दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जंग समाप्त करने पर चर्चा की थी। इस समझौते से पहले सऊदी अरब में रूस-अमेरिका में कई दौर की बातचीत हुई।
रूस की मदद करेगा अमेरिका
अमेरिका ने मंगलवार को ऐलान किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत काला सागर में सीजफायर लागू होगा और यूक्रेन के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोके जाएंगे। व्हाइट हाउस ने जो बयान जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि अमेरिका अब रूस को वैश्विक कृषि और उर्वरक निर्यात को सुगम बनाने में मदद करेगा, जिसमें समुद्री बीमा की लागतों को कम करने में मदद और बंदरगाहों और पेमेंट सिस्टम तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
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NASA: धरती पर लौटीं सुनीता विलियम्स, फ्लोरिडा के तट पर हुआ स्प्लैशडाउन

NASA: भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। इनके साथ क्रू-9 के दो अन्य एस्ट्रोनॉट अमेरिका के निक हेग और रूस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी हैं। बीते साल जून महीने में महज़ आठ दिनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर गए ये दोनों एस्ट्रोनॉट नौ महीनों बाद धरती पर लौट पाए हैं। दरअसल बोइंग का जो स्टारलाइनर यान उन्हें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से वापस धरती पर लाने वाला था वो खराब हो गया था, इसलिए उन्हें इतना लंबा इंतजार करना पड़ा। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को आखिरकार एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए सुरक्षित रूप से भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर उतारा गया।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से धरती पर लौटने में लगे 17 घंटे
सुनीता विलियम्स समेत चारों एस्ट्रोनॉट मंगलवार (18 मार्च) को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से रवाना हुए थे। 18 मार्च को सुबह 08:35 बजे स्पेसक्राफ्ट का हैच क्लोज हुआ, यानी दरवाजा बंद हुआ। 18 मार्च को ही सुबह 10:35 बजे स्पेसक्राफ्ट ISS से अलग हुआ। 19 मार्च की रात 02:41 बजे डीऑर्बिट बर्न शुरू हुआ। यानी, कक्षा से उल्टी दिशा में स्पेसक्राफ्ट का इंजन फायर किया गया। इससे स्पेसक्राफ्ट की पृथ्वी के वातावरण में एंट्री हुई और 19 मार्च की सुबह 3:27 बज फ्लोरिडा तट के पास समंदर में स्प्लैशडाउन हुआ।
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